अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
29 अक्टू॰ 2021
Home
/
Maithili Song Lyrics
/
Vidyapati Geet
/
उचित बसए मोर मनमथ चोर - विद्यापति Uchit basay mor manamath chor
उचित बसए मोर मनमथ चोर - विद्यापति Uchit basay mor manamath chor
उचित बसए मोर मनमथ चोर,
चेरिआ बुढ़िआ करए अगोर।
बारह बरख अवधि कए गेल,
चारि बरख तन्हि गेलाँ भेल।
बास चाहैत होअ पथिकहु लाज,
सासु ननन्द नहि अछए समाज।
सात पाँच घर तन्हि सजि देल,
पिआ देसाँतर आँतर भेल।
पड़ेओस वास जोएनसत भेल,
थाने थाने अवयव सबे गेल।
नुकाबिअ तिमिरक सान्धि,
पड़उसिनि देअए फड़की बान्धि।
मोरा मन हे खनहि खन भाग,
गमन गोपब कत मनमथ जाग।
रचनाकार : विद्यापति
शेयर करू
नव पोस्ट
⏳
पुरान पोस्ट
⏳
https://mithiladharohar.blogspot.com/2021/11/maa-puran-devi-mandir.html
https://mithiladharohar.blogspot.com/2021/10/singer-kumkum-mishra.html
❤ अहाँक इहो पसंद आयत:
⏳
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !