बुधवार, 24 जुलाई 2024

मिथिला पंचांग यज्ञोपवीत संस्कार मुहूर्त 2025, Mithila Panchang 2025 Upanayana Dates

उपनयन संस्कार मुहूर्त 2025 Mithila Panchang

फरवरी 2025, शुभ उपनयन मुहूर्त - 3, 7

मार्च 2025, शुभ उपनयन मुहूर्त - 2, 9 (क्ष०, वै०), 10

अप्रैल 2025, शुभ उपनयन मुहूर्त - 7, 8 (छ०)

मई 2025, शुभ उपनयन मुहूर्त - 2, 7, 8, 29

जून 2025, शुभ उपनयन मुहूर्त - 5, 6 

शनिवार, 20 जुलाई 2024

मधुश्रावणी पूजा विधि | Madhushravani Puja Vidhi

मधुश्रावणी पूजा मधुश्रावणी पूजा सैं पहिने लड़का बाला ओहिठाम लड़की बला कऽ ओतय सं नोत जाइत अछि। नोत में पांच टा रांगल सुपारी आ पीरा कागज़ पर लाल कलम सं लिखल लड़का कऽ पिता कऽ नाम सं पता जाइत अछि। मधुश्रावणी पूजा कऽ ओरिआओन जाहि कन्या के नव विवाह भेल छनि ओ सावन कऽ चौठ कऽ संध्या काल भिन्न प्रकारक फूल आ पात तोरि रखैत छैथ जाहि घर में पूजा होयत तकरा बढियां सैं साफ़ कय निचा देल चित्र कऽ अनुसार अरिपन पडत।

पूजा क सामग्री, गौरी बनेवाक लेल :-
साँझ खन भगवती ,महादेव ,ब्राह्मण ,हनुमान और गौरी कय गीत गावि, दुईब, कांच हल्दी, धनिया (कनी) मिला कऽ गौर बनत, जकरा ढउरल सरवा पर एकटा सिक्का पर गौरी राखि पान कऽ पात सं झापि, पान कऽ पात कऽ ऊपर सिंदूरक गद्दी राखि ललका कपडा स झापि भगवति लग राखि देवेइ।

पाँच टा मैना पात आ पाँच टा केरा पात सासुर दिस सं आ पाच टा मैना पात आ पाँच टा केरा पात नैहर दिस सं रहत जाहि में सबटा पर पाँच पाँच टा बिसहारा सिन्दूर सं ,काजर सं पिठार सं आ श्री खंड चानन सं लिखल जायत।

कुसुमावती, पिङ्गला, चनाई एवं लीली कऽ पूजा कऽ लेल चारि गोट करा कऽ पात कऽ पुड़ा बनायल जायत।
नैवेद्य कऽ लेल – अरवा चावल, चूड़ा, चीनी, आम, कटहल, केला, अंकुरी चनाई कऽ हेतु एकटा डाली मे अरबा चावल, पैसा और एकटा छाछी मे दही रहत।

बिन्नी के मोटरी मे :- 
धनी, धान, दुब, हरिद, सुपारी, बड़ी इलाइची, लौंग, छोटकी इलाइची (11 टा क) आ पैसा सब के एक टा ललका कपडा मे बाँधी के पोटरी बनायल जायत। पुरहर, पातिल आ ओहि के निचा में धान राखल जायत।

गाय कऽ दूध, पान सुपारी, गौरी कऽ लेल फूल, नीम कऽ पात, नेबू, कुश, पाँच टा मईटक बिसहारा नैहर सं आ पाँच टा सासुर सं।

मधुश्रावणी पूजा आरम्भ (पंचमी दिन क पूजा)
भगवती, ब्राह्मण, कुलदेवता कऽ गीत गायाल जायत नव कनिया नहा धो सासुर सं आयल कपड़ा चुरी पहिर श्रृंगार कय भगवती आ कुल देवताक प्रणाम कऽ पूजा स्थान पर आइ बैसथीन।

पाटिल पुरहर आ कलश बाला जगह पर बालु ध कऽ जल सं सींच, ओतय पर किछु धान राखी तीनू के यथास्थान राखि, कलश के जल सं भरि ऊपर सं आमक पल्लव रखवाक छै, तकरा बाद पाटिल में दीप लेश देवक छै।
सब दिन पूजै बाला गौरी उत्तर फूल पर, सासुर सं आयल गौरी बीच में आ नहीअर बला गौरी दक्षिण फूल पर राखि कनिया गौरी पूजा करथिन।

कलश कऽ पूजा :-
अक्षत लय -“नमः शांति कलश इहागच्छ यह तिष्ट “
जल लय – “इतनी पाद्यादिनी नमः शान्तिकालशया नमः

उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं नमः शांति कलशया नमः “

ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् शांति कलशाय नमः “

अक्षत लय -“इदमक्षतम् शान्तिकलशाय नमः 

धुप नैवेद्य लय – एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि शान्तिकलशाय नमः “

जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः शान्तिकालशयाय नमः “
“नमः शान्तिकुम्भ महाभाग सर्व काम फल प्रदः”
फूल लय -” पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः शांतिकलशयाय नमः “
सूर्य कऽ पूजा :-
अक्षत लय -“नमः सूर्य इहागच्छ यह तिष्ट “
जल लय – “इतनी पाद्यादिनी नमः सूर्याय नमः “
उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं नमः सूर्याय नमः “

ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् सूर्याय नमः “

अक्षत लाया -“इदमक्षतम सूर्याय नमः “

धुप नैवेद्य लय – एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि सूर्याय नमः “

जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः सूर्याय नमः “
“नमः सूर्याय महाभाग सर्व काम फल प्रदः”

फूल लय -” पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः सूर्याय नमः “

चन्द्रमा कऽ पूजा :-
अक्षत लय -“नमः चन्द्र इहागच्छ यह तिष्ट”

जल लय – “इतनी पाद्यादिनी नमः चन्द्राय नमः “

उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं नमःचन्द्राय नमः “

ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् चन्द्राय नमः"

अक्षत लाया -“इदमक्षतम चन्द्राय नमः “

धुप नैवेद्य लय – एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि चन्द्राय नमः “

जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः चद्राय नमः “
“नमः चन्द्राय महाभाग सर्व काम फल प्रदः”

फूल लय - ''पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः चन्द्राय नमः “

नवग्रह कऽ पूजा :-
अक्षत लय -“नमः नवग्रहा:इहागच्छ यह तिष्ट “

जल लय – “इतनी पाद्यादिनी नमः नवग्रहेभ्यो नमः“

उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं नवग्रहेभ्यो नमः “

ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् नवग्रहेभ्यो नमः “


अक्षत लय -“इदमक्षतम नवग्रहेभ्यो नमः “


धुप नैवेद्य लय – एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि नवग्रहेभ्यो नमः “


जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः नवग्रहेभ्यो नमः “

“नमः नवग्रहेभ्यो महाभाग सर्व काम फल प्रदः”


फूल लय - "पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः नवग्रहेभ्यो नमः “


विषहरा कऽ पूजा :-

अक्षत लय -“नमःनाग-दांपत्य इहागच्छ यह तिष्ट “


जल लय – “इतनी पाद्यादिनी नमः नागदंपतिभ्याम् नमः “

उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं नागदंपतिभ्याम् नमः “


ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् नागदंपतिभ्याम् नमः “


अक्षत लय -“इदमक्षतम नागदंपतिभ्याम् नमः “


धुप नैवेद्य लय - एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि नागदंपतिभ्याम् नमः “


जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः नागदंपतिभ्याम् नमः “

“नमः नागदंपतिभ्याम् महाभाग सर्व काम फल प्रदः”


फूल लय -” पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः नागदंपतिभ्याम् नमः “


बैरसी कऽ पूजा

अक्षत लय -“नमःशतानुजसाहित बैरस्ये नमः “


जल लय – “इतनी पाद्यादिनी नमः शतनुजसाहित बैरस्ये नमः “


उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं शतानुजसाहित बैर स्ये नमः “


ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् शतानुजसाहिर बैर स्ये नमः “


अक्षत लय -“इदमक्षतम शतानुजसाहित बैर स्ये नमः “

धुप नैवेद्य लय – एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि शतानुजसाहित बैर स्ये नमः “


जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः शतानुजसाहित बैर स्ये नमः “

“नमः शतानुजसाहित बैर स्ये महाभाग सर्व काम फल प्रदः”


फूल लय -” पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः शतानुजसाहित बैर स्ये नमः “


चनाइ कऽ पूजा :-

अक्षत लय -“नमःचनाइ नाग इहागच्छ इह तिष्ठ “


जल लय – “इतनी पाद्यादिनी नमः चनाइ नागाय नमः “


उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं च नाइ नागाय नमः “


ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् चनाइ नागाय नमः “

अक्षत लय -“इदमक्षतम चनाइ नागाय नमः “


धुप नैवेद्य लय – एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि चनाइ नागाय नमः “


जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः चनाइ नागाय नमः “

“नमः चनाइ नागाय महाभाग सर्व काम फल प्रदः”


फूल लय -” पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः चनाइ नागाय नमः “


कुसुमावती कऽ पूजा :-

अक्षत लय -“नमःकुसुमावती इहागच्छ इह तिष्ठ “


जल लय – “इतनी पाद्यादिनी नमः कुसुमावती नमः “

उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं कुसुमावती नमः “


ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् कुसुमावती नमः


अक्षत लाया -“इदमक्षतम कुसुमावती नमः


धुप नैवेद्य लय – एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि कुसुमावती नमः “


जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः कुसुमावती नमः “

“नमः कुसुमावती महाभाग सर्व काम फल प्रदः”


फूल लय -” पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः कुसुमावती नमः “


पिंगलाक कऽ पूजा :-

अक्षत लय -“नमः पिंगले इहागच्छ इह तिष्ठ “

जल लय – “एतानी पाद्यादिनी नमः पिंगले नमः “

उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं पिंगले नमः “


ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् पिंगले नमः “


अक्षत लय -“इदमक्षतम पिंगले नमः “


धुप नैवेद्य लय – एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि पिंगले नमः “


जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः पिंगले नमः “

“नमः पिंगले महाभाग सर्व काम फल प्रदः”


फूल लय - ''पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः पिंगले नमः “


लीली कऽ पूजा :-

अक्षत लय -“नमः लीली नागे इहागच्छ इह तिष्ठ

जल लय – “एतानी पाद्यादिनी नमः लीली नागाये  नमः “


उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं लीली नागाये नमः “


ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् लीली नागाये नमः “

अक्षत लाया -“इदमक्षतम लीली नागाये नमः “


धुप नैवेद्य लय – एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि लीली नागाये नमः “


जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः लीली नागाये नमः “

“नमः लीली नागाये महाभाग सर्व काम फल प्रदः”


फूल लय -” पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः लीली नागाये नमः “


साठिक पूजा :-

अक्षत लय -“नमः षष्ठी देवी  इहागच्छ इह तिष्ठ “


जल लय – “एतानी पाद्यादिनी नमः षष्टदेव्यै  नमः “


उजरा चन्दन लय – इदमनुलेपनम् श्वेत चन्दनं षष्टदेव्यै नमः “


ललका चन्दन “इदं रक्तानुलेपनम् षष्टदेव्यै नमः “


अक्षत लय -“इदमक्षतम षष्टदेव्यै नमः “


धुप नैवेद्य लय – एतानि गंध,पुष्प ,धुप दीप ताम्बूल यथा भाग नानाविध नैवेद्यानि षष्टदेव्यै नमः “


जल लय – “इदमाचमनीयम् नमः षष्टदेव्यै नमः “

“नमः षष्टदेव्यै महाभाग सर्व काम फल प्रदः”


फूल लय -” पुष्पम ग्रहण सुबह यच्छ पुज्याधार नमोस्तुते ” ऐश पुष्पांजलिः नमः षष्टदेव्यै नमः “


तत्पश्च्यत् कनियाँ बिन्नी कऽ मोटरी अपना खोईंछा में राखि पांच बिन्नी तीन बेर सुनती ।









बुधवार, 17 जुलाई 2024

Madhushravani Puja Date 2024 - मैथिल नवविवाहिता के पाबैन मधुश्रावणी पूजा कहिया सं छी 2024 मे

मधुश्रावणी पूजा व्रत 2023 आरम्भ 29 जुलाई 2024, समाप्त मधुश्रावणी व्रत 7 अगस्त 2024 (मैथिली पंचांग अनुसार)

मिथिला धरोहर : मिथिलाक नवविवाहिता केर आस्था के पाबैन मधुश्रावणी (Madhusarwani Puja 2024 )  दिन सँ 29 जुलाई 2024 मिथिला मे शुरू होयत। सदि सँ अखंड सौभाग्य आ पति के दीर्धायु हेबाक कामना करैत मिथिला के नवविवाहिता श्रावण कृष्ण पंचमी सँ श्रावन शुक्ल तृतीया धरि पूर्ण आस्थाक संग मधुश्रावणी व्रत करै छथि। एक पखवारा धरि चलय वला अहि पाबैन के ओना तऽ सब वर्गक लोग मानैत अछि, मुदा मिथिला के मैथिल बाहम्ण मे अहि पाबैन के खास महत्व छैक। 
नव विवाहिता के विवाहक पहिल सावन मे अहि पाबैन के मनेबाक परंपरा अछि। श्रावण् कृष्ण चौथ तिथि सँ मधुश्रावणी पूजय वाली नवविवाहिता जिनका पवनैतिन कहल जाइत अछि, अगिला दिन के पूजाक लेल सखि - सहेलीक संग फुल लोढ़ी के लाबैत छथि, अहि दौरान नव विवाहिता द्वारा गाबल जाय वाली श्रृंगार आ भक्ति रस के गीत सँ गांमक बगिया, मंदिर, स्कूल महैक उठैत अछि। अहि गीतक माध्यम सँ भगवान शंकर के खुश करबाक प्रयास कैल जाइत अछि। 
नागपंचमी के दिन कोहबर घर यानी जाहि घर मे विवाहक विधी भेल रहैत छैक, ओहि घर के गाय के गोबर सँ निप कऽ ओहिपर सेनुर पिठार सँ नागिन आ विषहरी के चित्र बना कऽ ओहिपर माटीक बनल नाग देवता के स्थापित कैल जाइत अछि। नवका वस्त्र आ गहना सँ  सुसज्जित नव विवाहिता पूजा करबाक लेल बैठय छथि। महिला पुरोहित लौकिक मंत्र द्वारा  सावधि पूजा कराबय छथि। पूजाक उपरांत पवनैतिन अपन हाथ मे लाल कपड़ा मे बान्हल धानक पोटरी जेकरा
बिन्नी कहैत छैक, ओकरा  लऽके कथा सुनय छथि। प्रथम दिनक कथा मे नाग पंचमी के महत्व के बताओल जाइत अछि।कथाक उपरांत महिला पुरोहित बिन्नी नामक एकटा विशेष पद के पाठ करय छथि। अहि दौरान नव विवाहिता ठाड़ भऽ के नाग देवता पर फुल चढ़ाबय छथि। नाग पंचमी के पांच् टा अहिबाति के तेल-सेनुर आ खोईचा दऽ हुनका बगैर नूनक भोजन कराओल जाइत अछि।
लोगक कहब छैक जे सृष्टि आरंभक समये सँ मिथिला मे अहि पाबैन के मनायल जाइत छैक। मिथिला केर नव विवहिता लेल अहि पाबैन के खास महत्व छैक। 15 दिनक पूजा के अवधी मे नव विवाहिता के दु दिन नागपंचमी ( Nag Panchami ) के कथा सुनाओल जाइत अछि, शेष 13 दिन सावित्री, सत्यवान, शंकर पार्वती, राम सीता, कृष्ण राधा आदि देवता केर कथा सुनाओल जाइत अछि। अहि देवता केर कथा सुनेबाक भाव इश्वर पूजाक संगेह गृहस्थ जीवन मे आबय बला बाधा सँ से मुक्ति के सीख देबाक होइत छैक।ताकि नव विवाहिता अपन दांपत्य जीवनक सुखी पूर्वक निर्वहन कऽ सकय।











रविवार, 7 जुलाई 2024

मधुश्रावणी 2024 शुभकामना फोटो - Madhushravani 2023 Wishes And Quotes in Maithili


आजु ई पाबनि बालम सँग पूजब,
नहि एला बालम हमार हे,
सासू निदर्दी दर्दो ने जानल,
नहि देलनि भार पठाय हे...
मधुश्रावणी पर्व बधाई फोटो

Madhushravani Wishes And Quotes With Images in Maithili | Madhushravani Status Photo

📥 Download

आयल हे सखि सर्व सोहाओन 
साओन केर महिनमा 
ठाँओं कयलहुँ अरिपन देलहुँ 
साओन केर महिनमा

मधुश्रावणी पाबैन के हार्दिक शुभकामना

फूल लोढ़ऽ चलू फुलवरिया,
सीता के सँग सहेलिया,
कियौ आगा चलल, कियौ पाछा चलल,
बीच में जनक दुलरिया, सीता के सँग सहेलिया,
मधुश्रावणी पाबैन के शुभकामना


लालहि वन हम जायब, फूल लोढ़ब हे,
माइ हे सिन्दुर भरल सोहाग,
बलम सँग गौरी पूजब हे….
Happy Madhushravani Puja Image


कुसुमतोरय कुसुमावति कुसुमे लत्ते फत्त
हमर वियहुआ रहिते कुसुम उपर चरबितहु छत्र।
मधुश्रावणी पूजाक शुभकामना

सोमवार, 10 जून 2024

मिथिला पंचांग 2024-25 PDF Download - Maithili Panchang PDF 2024-2025

Download Maithili Panchang 2024-2025

मिथिला पंचांग 2024-25 मैथिली में PDF डाउनलोड लिंक एहि लेख के निचला भाग में देल गेल अछि। लिंक पर क्लिक क मिथिला पंचांग 2024 - 2025 के PDF डाउनलोड क सकैत छी।


PDF Name: Mithila Panchang 2024-25
PDF Size: 13 MB
Download Link: गूगल ड्राइव
Total Page: 35


नोट : डाउनलोड लिंक पर क्लिक केलाक बाद पुनः वैह ब्राऊजर सलैक्ट करि, जाहि ब्राऊजर में मिथिला धरोहर साइट खोलने हैब, पञ्चांग फ़ाइल आसानी सँ डाऊनलोड भ जायत।

रविवार, 19 मई 2024

मिथिला पंचांग 2024-25, Maithili Panchang 2024-2025

Maithili Panchang 2024-2025


मधुश्रावणी आरम्भ - 29 जुलाई 2024

मधुश्रावणी - 7 अगस्त 2024
रक्षाबंधन - 19 अगस्त 2024 

कुशोत्पाटन - 2 सितंबर 2024
तीज आ चौठचंद्र - 6 सितंबर 2024
इंद्र पूजा - 15 सितंबर 2024 
विश्वकर्मा पूजा  - 17 सितंबर 2024
अनंत पूजा - 17 सितंबर 2024
पितृपक्ष आरम्भ - 18 सितंबर 2024
जिउतिया, जितिया - 24 सितंबर 2024

पितृपक्ष समाप्त - 2 अक्टूबर 2024 
कलश स्थापन - 3 अक्टूबर 2024
निशा पूजा - 10 अक्टूबर 2024
विजयादशमी - 12 अक्टूबर 2024
कोजागरा - 16 अक्टूबर 2024
सिमरिया कल्पवास - 17 अक्टूबर सं 16 नवंबर 2024 धरि
दीपावली - 31 अक्टूबर 2024

भातृद्वितीया - 3 नवंबर 2024
छठ संध्याकालीन अर्घ्य - 7 नवंबर 2024 
प्रात:कालीन अर्घ्य - 8 नवंबर 2024
देवोत्थान एकादशी - 12 नवंबर 2024

मकर संक्रांति - 14 जनवरी 2025

सरस्वती पूजा - 3 फरवरी 2025
महाशिवरात्रि - 26 फरवरी 2025

होलिका दहन - 13 मार्च 2025
होली (फगुआ) - 15 मार्च 2025
रामनवमी - 6 अप्रैल 2025
जुड़-शीतल - 15 अप्रैल 2025
वटसावित्री पूजा - 26 मई 2025

गुरुवार, 9 मई 2024

बरसाइत पूजा 2024 - Barsait Puja Date 2024, Vat Savitri Vrat 2024


मिथिला धरोहर : वट वृक्ष के पूजन और सावित्री-सत्यवान ( Vat Savitri, Barsait ) के कथाक स्मरण करवा के विधानक कारणे इ व्रत वट सावित्री के नाम सँ प्रसिद्ध अछि।  मिथिलांचल मे एही व्रत के बरसाइत के रूप मे सेहो मनैल जाइत अछि। सावित्री भारतीय संस्कृति मे ऐतिहासिक चरित्र मानल जाइत अछि। सावित्री के अर्थ वेद माता गायत्री और सरस्वती सेहो होइत अछि। सावित्री के जन्म विशिष्ट परिस्थिति मे भेल छलनी। कहल जाइत अछि जे भद्र देश के राजा अश्वपति के कुनो संतान नै छल। राजा संतान के प्राप्ति के लेल मंत्रोच्चारण के संग प्रतिदिन एक लाख आहुति देलथि। अठारह वर्षों धरि इ क्रम जलैत रहल। एकर बाद सावित्रीदेवी प्रकट भऽ के वर देलथि जे 'राजन अहाँके एकटा तेजस्वी कन्या पैदा होयत'।

इहो पढ़ब :-
सावित्रीदेवी के कृपा सँ जन्म लेबा के कारण सँ कन्या के नाम सावित्री राखक गेलैन। कन्या नमहर भऽ के बहुते रूपवान छलीह। योग्य वर नै भेटवा के वजह सँ सावित्री के पिता दुःखी छलैथ। राजा कन्या के स्वयं वर तकवा लेल भेजलैथ। सावित्री तपोवन मे भटकै लगलि। ओतय साल्व देश के राजा द्युमत्सेन रहैत छलैथ। कियाकि हुनक राज्य कियो छीन लेने छल। हुनक पुत्र सत्यवान के देखि के सावित्री पति के रूप मे हुनक वरण केलथि 
कहल जाइत अछि जे साल्व देश पूर्वी राजस्थान या अलवर अंचल के आस-पास छला। सत्यवान अल्पायु के छलैथ। ओ वेद ज्ञाता छलैथ। नारद मुनि सावित्री सँ भेट कऽ सत्यवान सँ विवाह नै करवा के सलाह देने छलैथ। मुदा सावित्री सत्यवान सँ बियाह कऽ लेली। पति के मृत्यु के तिथि मे जेखन किछे दिन शेष रही गेल तखन सावित्री घोर तपस्या केने छलि, जाहि के फल हुनका बाद मे भेटक छल।

इहो पढ़ब :-


मिथिलांचल मे अहि पाबनि में बड़क गाछमे जल चढाओल जाइत अछि त नवका बाँसक बियैन आ तारक पंखा सँ वड़ के गाछके होंकल जाइत अछि। व्रतालु स्त्रीगण एहि दिन प्रात: काल नित्यकर्म क' सासुर सँ आनल कपडा पहीर सखी सहेली संगे मंगलगीत गबैत वरक गाछके पूजैत छथि । व्रती महिला निष्ठापुर्वक गौरी आ विषहरके पूजा क' अन्त्यमे सत्यसावित्री आ सत्यवानक कथा सुनैत छथि। पूजा समाप्त भेला के बाद घर पर फूलल बूट (चना) सेहो बाँटल जाइत अछि। सावित्री आ सत्यवानक जीवनगाथासं ई व्रत जूडल हएबाक कारणे अहिवातक लेल महत्वपूर्ण मानल गेल अछि ।

गुरुवार, 2 मई 2024

नाग नागिन आ विद्वान ब्राह्मण : बरसाइत पावनिक कथा - Vat Savitri Katha in Maithili

“गौरी गणपति ध्यान करि ,सिर वर पत्रक पाग |
कथा सुनय जे प्रेम सँ, बाढय भाग सोहाग ||”
मिथिलाक कोनो गाम मे एकटा विद्वान ब्राह्मण छलाह । हुनक परिवार मे पत्नी ,आ सात टा बालक छलन्हि ।ब्राह्मण अपन विद्वता आ पुरोहितिक बलेँ सुख पूर्वक जीवन ब्यतीत करैत छलाह । एक दिन ब्राह्मणी भानस करबा काल भात रान्हि माँर पसेवाक वर्त्तन केर अभाव मे चुल्हिक पाछू मे एकटा बिहरि मे माँर पसा देलनि । ओहि बिहरि मे एकटा नाग नागिन केर बास छल जकर सात गोट अंडा तप्पत माँरक प्रभाव सँ नष्ट भए गेलैक । ओ नागिन कुपित भय प्रतिज्ञा कएलि जे जहिना ई ब्राह्मणी हमर सात गोट भावी संतान केँ मारि देल अछि तहिना हम आ नाग मिलि एकरो सातो टा बेटा केँ शुभ दिन ताकि ताकि केँ डसि केँ मारि देब । ई निश्चय कए नाग नागिन ब्राह्मणक घरक आबास त्यागि गामक बाहर एक गोट वरक गाछक जड़िक बीहरि मे चल गेल । 
ब्राह्मणक प्रथम पुत्र जखन विवाहक बाद दुरागमन कए कनियाँ सहित गाम वापस अबैत छलाह तँ ओहि गाछक तर अबिते ब्राह्मणकुमार केँ नाग डसि लेलक आ ओ ठामहि प्राण त्यागि देल । एबं प्रकारेँ एहने दुर्घटना ब्राह्मणक पांचो और बेटाक संग विवाहक उपरान्ते घटित भेल । आब ब्राह्मण केँ मात्र एकटा कुमार पुत्र बचि गेलन्हि । ब्राह्मण सोचल जे हमर छओ पुत्रक मृत्यु विवाहक उपरान्ते भेल अछि तदर्थ एहि पुत्रक विवाहे नहि कराएब । ब्राह्मणक छोट पुत्रक विवाह लेल अनेक घटक आ कन्यागत अएलाह मुदा ब्राह्मण देवता अपन प्रतिज्ञा पर अटल रहलाह । एम्हर आबि ब्राह्मण केँ दरीद्राक अभिशाप सेहो ब्याप्त भय गेल । घर मे साँझक सांझ उपास होमय लागल । ब्राह्मण अपने रोगी आ अकर्मण्य भए गेलाह । तदर्थ शिक्षा आ पुरिहिती कर्म सँ आय समाप्त भय गेल । ब्राह्मण कुमार पिताक पग चिन्ह पर चलबाक अथक प्रयास कएल मुदा ओ एहि कार्य मे जमि नहि सकलाह । एहना स्थिति मे ब्राह्मण पुत्र कतहु जाए अर्थ कमाय माए बापक पोषण करबाक दृढ निश्चय कऽ गाम सँ कोनो नगरक हेतु प्रस्थान कएल ।

इहो पढ़ब :-

नगरक यात्रा क्रम मे ओ एक गामक बाटेँ चल; जाइत छलाह कि ओहि गामक एक झुण्ड कुमारि कन्या कोनो आन गामक प्रसिद्द मंदिर मे पूजा करबाक निमित्त हिनक पाछू पाछू चलय लागलि । ब्राह्मण कुमार अपन जूता केँ हाथ मे नेने छलाह आ अत्यंत तीख रौद रहितहुँ अपन छाता केँ मोड़ि कांख तर दबने छलाह । हुनक एहन उटपटांग कार्य देखि कुमारि कन्याक झुण्ड सँ एकटा कन्या हँसइत अपन संगी सहेली सँ कहलि जे देखैत जाह हे ,दाय सभ आगू आगू जाइत एहि ब्राह्मण कुमारक तमाशा । तीख रौद रहितहुँ ई मुर्ख छाता केँ कांख मे दबने अछि आ जूत्ता केँ पैर मे नहि पहिरि हाथ मे टँगने अछि । सखीक ब्यंग्य सूनि ओहि मे सँ एकटा सुदर्शना आ बुधियारि बाजलि - जे नहि है, ई ब्राह्मण कुमार परम चतुर अछि । एखन बाट साफ़ आ काँट कुश रहित अछि तदर्थ ई अपन जूताक ब्यबहार नहि कए ओकर घसाएब आ टूटब सँ रक्षा कए रहल अछि आ छाता एहि लेल कांख तर दबने अछि जे एहि रौद में चड़ै- चुनमुनी आदिक कोनो शंका नहि जे वस्त्रादि वा देह पर बीट कऽ अपवित्र कए देत । कनेक काल बाद एकटा नाला आएल तँ ब्राह्मणपुत्र चट जूता पहिर नाला मे प्रवेश कए गेलाह से देखि पूर्वक सखी फेर हँसि कहल जे तोँ एकरा बुधियार कहलह ? मुदा ई तँ जूता केँ पैन में पहिर नष्ट करबाक पर तुलल अछि । ताहि पर दोसर सखी बाजलि नहि है ,बहिना ! एहू कार्य में एकर बुधियारिये अछि जूता शरीरक रक्षा हेतु अछि। कहीँ जलक नीचाँ केर कंकर पाथर आदि पैर में गरए नहि तेँ ई जूता पहिरलेल अछि।

इहो पढ़ब :-

किछु कालक उपरान्त ब्राह्मण कुमार एकटा वृक्षक छाया मे सुस्तेबाक हेतु बैसलाह तँ छाया मेअपन छाता तानि लेल से हुनक उनटा ब्यापार देखि प्रथम कुमारी फेर हँसि देलक तँ ओकर सुदर्शना सखी कहलि जे देखह सखी ,एहि गाछक शाखा पर अनेक चिड़ै चुनमुन्नी सभ बैसल अछि जे अचानक बीट कऽ वस्त्र आ देह ने घिनाए दिअए तदर्थ ई छाता तनने छथि । ब्राह्मण कुमार एहि सुदर्शना आ परम चतुरा कन्याक सभ बात सुनैत छलाह आ हिनक बुद्धि आ रूप सँ मोहित भए हिनका सँ विवाह करबाक निश्चय कऽ हिनक पिता सँ अपन परिचय दैत कन्या सँ विवाह करबाक प्रस्ताव राखल । कन्याक पिता प्रस्ताव सहर्ष स्वीकार कए अपन कन्याक विवाह हिनका सँ कराए देल।
विवाहक पाँचमे दिन कन्या केँ वरक संग बहुत रास धन आ जैतुक संग विदा कए देल । ब्राह्मण कुमारक गाम ओहि ठाम सँ तीन दिनक रास्ता छल आ ओही दिन वत सावित्री पर्व सेहो छल तदर्थ ओ कन्या अपन माए सँ कहि बरिसाइत पूजाक सभ सामिग्री सेहो लय लेलनि जे बाटहि मे कोनो गाछ तर बैसि पावनि कए लेब । संयोग एहन जे ओ लोकनि अबैत अबैत ओही वृक्षक निकट पावनि करबालय रुकलीह जतय नाग नागिन केर निवास छल । नाग नागिन ब्राह्मण कुमार आ हुनक पत्नी केँ देखि प्रसन्न भय उठल जे जे हमरा सभक प्रतिज्ञाक पूर्ति अनायासे भऽ गेल । एम्हर ब्राह्मण कुमारक नवौढा पत्नी ओहि गाछ तर पूजा कर्बाक निमित्त सामिग्री सभ पसारए लगलीह तँ चट दय नाग अत्यंत लघु रूप धारण कए पूजाक सामिग्री मे सँ खिरोधिनी मे प्रवेश कए गेल जे अवसर अएने कुमार केँ डसि लेब । नागक ई कार्य कुमारक पत्नी देखि रहल छलीह । शीघ्रता सँ ओ खिरोधिनी जे जे माँटिक लोटा आकारक पात्र होइत अछि तकरा एकटा सरवा सँ झाँपि अपन जांघ तर मे दावि पूजा करए लगलीह । एहि प्रकारेँ नागक प्राण संकट मे देखि नागिन भयातुर भए ब्राह्मणी सँ हाथ जोड़ि कातर स्वर मे अपन वर माँगल । नागिन केर आतुरता निरखि ओ कन्या बाजलि – “जे तोँ हमर मर दे आ अपन वर ले।” तखन ओ नागिन ब्राह्मणक मुइल छओ भाय केँजीवित कए देलक । तखन ओ कन्या सेहो नाग केँ छोड़ि देल आ सातो भाय एक संगे घर विदा भेलाह । ब्राह्मण कुमार सातो भाए घर पहुँचलाह आ हुनक माए सभ केँ परिछि हुलसि केँ घर आनल ।

एहि कथाक समाप्ति पर पूजा लग बैसलि सभ स्त्री अपन अपन माथ पर सँ जे वरक पात नेने छलीह तकरा उतारि ओहि केँ खोंटि खोंटि मर दे कहि आगू मे आ वर ले कहि पाछू मे फेकय लगलीह । पूजाक विसर्जन भेला पर अइहव ,कुमारि भोजन कराओल गेल ।

शुक्रवार, 5 अप्रैल 2024

Jur Sital 2024 : मिथिलाक परंपरागत पावैन जूड़ शीतल, कोन कारण सँ मनायल जाइत अछि इ पर्व आ की छैक एकर महत्व!

 Jur Sital Kab Hai 2024 Me, Jur Sital Festival Date
जुड़ शीतल 2024 तिथि - 14 अप्रैल 2024, रविवार

भारतीय पावैन - तिहार के वैज्ञानिक चिंतन के प्रत्यक्ष करै बला मिथिलाक लोकपर्व जूड़ शीतल 14 अप्रैल, (2024) रवि दिन ( सतुआइन 13 अप्रैल ) के मनायल जा रहल अछि। पावैन मनेनिहार परिवारक चूल्हा के आय लॉकडाउन रहैत अछि। पूरा मिथिलांचल के यैह हाल देखबाक लेल भेटत अछि। अहि पर्व के शुरुआत बड़- बुजुर्ग द्वारा अपन परिजन के माथ पर आय भोरे शीतल जल द ओकरा जुड़ेला सँ होइत अछि। गरमी बढ़ै के संगे - संग बेसी सँ बेसी जल सेवन दिस ध्यान खींचय बला  परंपराक संग कादो-माटि (कीचड़ -मिट्टी) खेलल जाइत अछि। लोग एक-दोसरक देह पर कादो-माटि लगाबैत अछि। ग्रीष्म-ऋतु में माटिक के लेप सँ कारगर रौद'क कारण बढ़य बला त्वचा रोग सँ बचाब लगेबाक संकेत भेटय अछि।

इहो पढ़ब :-

जूड़शीतल के दिन मिथिला मे चूल्हा नै जरायल जाइत अछि। त्योहार के एक दिन पूर्व यानी सतुआनी के राइत बनल बड़ी-भात के प्रसाद अपन ईश के भोग लगा लोग ग्रहण करैत छथि। संगेह बड़ी-भात कनि बेसी बनायल जाइत अछि, जहिसे अगिला दिन इ भोजन के लेल पर्याप्त होय। यैह कारण छैक जे एकरा बसिया पबिन सेहो कहल जाइत अछि। चूल्हा पर दही, समार, बसिया बड़ी आ भात चढेबाक परंपरा अछि।

इहो पढ़ब :-

● संघर्ष के मिसाल छथि मिथिला चित्रकला के कलाकार पद्मश्री दुलारी देवी


जलसंचित करबाक भेटय अछि संकेत : पावैन सं एक दिन पहिले राइत मे प्राय: सब बरतन मे पाइन भैर लेल जाइत अछि। इ गरमी मे पाइनीक किल्लत के देखाबैत जल संचित रखबाक दिस संकेत दइत अछि। दोसर दिस बाढ़िक बाद मिथिला क्षेत्र मे सर्वाधिक तबाही अगलगी सं होइत अछि। अहिसे बचाबाक लेल पाइन भैर के राखय आ दिन मे चूल्हा नै जरेला सं सेहो लोग जोइर के देखैय अछि। 

बाट पर छिटल जाइत पाइन : बहिन सब बाट पर पाइन पटा भाइक आगमन के बाट शीतल करैत छथिन। इ अहि मौसम मे गरदा (धूल) सं बचबाक माध्यम बनैत अछि। बहुते ठाम आइयो जूड़ शीतल सं प्रारंभ  बाट पर पाइन छिटबाक क्रम पूरा महीना धरि चलैत अछि। 

गाछ-वृक्ष मे पाइन देबाक परंपरा : जूड़ शीतल मे छोट गाछ सं ल के बड़का वृक्ष धरि मे पाइन देनाय, अहर्निश प्राण-वायु (ऑक्सीजन) प्रदान करय बला तुलसी के गाछ पर पनिसल्ला देबाक चलन अछि। इ बदलैत मौसम मे वनस्पति संरक्षण के दिस सेहो ध्यान खींचैत अछि। 

शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2024

होली गीत लिरिक्स मैथिली - Maithili Holi Geet Lyrics


● होली कुंजभवनमे खेलतु हैं लिरिक्स

होली कुंजभवनमे खेलतु हैं नन्दलाल
लाले श्याम लाल भेली राधा
लाले सकल बृजबाल,
होली कुंजभवनमे खेलतु हैं नन्दलाल

लाले रंग सब गोपियन रंगाय गेल
लाल भेला भूपाल, 
होली कुंजभवनमे खेलतु हैं नन्दलाल

अबीर गुलाल रंग पिचकारी
सब लेलनि कर सम्हारि, 
होली कुंजभवनमे खेलतु हैं नन्दलाल

मारतु हैं ताकि-ताकि छतियन पर
चोली भेल गुलजार, 
होली कुंजभवनमे खेलतु हैं नन्दलाल

हारि गेली राधा रस दंगलमे
हँसि खेलतु नन्दलाल, 
होली कुंजभवनमे खेलतु हैं नन्दलाल

सब सखियन बिच राधा सोहागिन
मानहु बाल मराल, 
होली कुंजभवनमे खेलतु हैं नन्दलाल

मधुर रस पिक गण मोहय
सुनत उठय उर ज्वार,
होली कुंजभवनमे खेलतु हैं नन्दलाल

राधा कृष्ण युगल जोड़ी छवि
ऋतु वसन्त विशाल,
होली कुंजभवनमे खेलतु हैं नन्दलाल

नीरस श्याम चरण के चाहत
छोड़ाउ सब जंजाल, 
होली कुंजभवनमे खेलतु हैं नन्दलाल




● होरी मे लाज ने करू गोरी लिरिक्स

होरी मे लाज ने करू गोरी, होरी मे...
हम ब्रजकेँ रसिया तो गोरी
करे मिलान इहो जोरी, 
होरी मे, होरी लाज ने करू गोरी

जे हमरा सौं होरी नहि खेलय
खेलब रंग बरजोरी, 
होरी मे, होरी मे लाज ने करू गोरी

सूरदास जी कहथि कृष्ण सँ
छुटलनि राधा गोरी, 
होरी मे, होरी मे लाज ने करू गोरी


 ● होरी केकरा संग खेलब माधव लिरिक्स 

होरी केकरा संग खेलब माधव हमरो विदेश
अपनो ने आबथि, लिखि ने पठाबथि
लिखियो ने भेजथि उदेश, 
होरी केकरा संग
होरी केकरा संग खेलब, माधव हमरो विदेश

केये संग रंग मचाउ हे सखि
आब तऽ होरी बीति गेल, होरी केये संग
होरी केये संग खेलब, माधव हमरो विदेश
बृन्दावनमे कुंजगलिन मे
केये मोर करत उदेस, होरी केये संग
होरी केये संग खेलब, माधब हमरो विदेश
राधा करत उदेश, होरी केये संग
होरी केये संग खेलब, माधव हमरो विदेश



 प्रीतम श्याम बिनु दुख कतेक दिन लिरिक्स

प्रीतम श्याम बिनु दुख कतेक दिन करब
कथी बिनु सुन भेल वन के हरिनियां
कथ बिनु झामरि देह
प्रीतम श्याम बिनु दुख कतेक दिन करब

खढ़ बिनु सुन भेल बनकेँ हरिनियाँ
पहु बिनु झामरि देह
प्रीतम श्याम बिनु दुख कतेक दिन करब

खाट तुराइ सेहो भेल सपना
भुइयां लोटे नामी-नामी केश
प्रीतम श्याम बिनु दुख कतेक दिन करब

तेल फुलेल सेहो भेल सपना
भस्म भुइयां लोटत इहो केश
प्रीतम श्याम बिनु दुख कतेक दिन करब

सूरदास प्रभु तोहरे दरस के
ईहो फागुन दिन चारि
प्रीतम श्याम बिनु दुख कतेक दिन करब



 अहाँ संग नहि खेलब होरी

अहाँ संग नहि खेलब होरी, अहाँ संग
फागुन मे हम फगुआ खेलायब
चैत खेलब बरजोरी, तुम्हरे संग..

बैसाखहिमे सखि गरमी लगतु हैं
जेठक गर्म मचे होरी, तुम्हरे संग...

आषाढ़ में सखि रिमझिम वर्षा
साओन सर्व मचे होरी, तुम्हरे संग...

भादवमे सखि निशि अन्धी रतिया
आसिन आस पूरल होली, तुम्हरे संग...

कार्तिक कनत नहि आएल सखि हे
अगहन धान मचे होरी, तुम्हरे संग...

पूसक जाड़ हाड़ मोर कांपे
माघक सर्द मचे होरी, तुम्हरे संग...


● परदेसिया के नारि सदा दुखिया लिरिक्स

परदेसिया के नारि सदा दुखिया, परदेशिया

चारि महीना के गरमी लगतु हैं
कहियो ने सुतलौं डोला के बेनिया, परदेशिया
परदेसिया के नारि सदा दुखिया

चरि महीना बुन्द पड़तु हैं
कहियो ने सुतलौं छेबा के बंगला, परदेशिया
परदेसिया के नारि सदा दुखिया

चारि महीना जाड़ लगतु हैं
कहियो ने सुतलौं भरा के सिरका
परदेसिया के नारि सदा दुखिया, परदेशिया



 होरी रंग महलमे खेलत लिरिक्स

होरी रंग महलमे खेलत अवध नरेश
अतर गुलाल अबीरक झोरी,
लखन सहित जगदीश
आनन्द अति छाय हृदयमे, खेलत अवध नरेश
झालि मृदंग पखावज बाजे
डफली बांसुरी झमकार, होरी रंग महल मे....
गान करत सब सखियन मिलि
ध्यान रहित भेला नरेश
वीणा धुनि कए नारद थकित भयो
ऋषि मुनि सभ धायो, तुरत इन्द्रादि देव सभ आयो
खेलय चाहत फनीश, मही मानो डोलत



● परदेशिया के धोतिया रंगा दे गोरिया लिरिक्स

परदेशिया के धोतिया रंगा दे गोरिया
जब परदेशिया नगर बिच आयल
सिकिया से अंगना बहारे गोरिया, परदेशिया

जब परदेशिया दरबज्जा बिच आयल
दूध से अंगना निपाबे गोरिया, परदेशिया

जब परदेशिया अंगना बिच आयल
दूध से चरण पखारे गोरिया, परदेशिया

जब परदेशिया असौरा बिच आयल
जल्दी से पुरिया छनाबे गोरिया, परदेशिया

जब परदेशिया घर बिच आयल
पलंगा पर तकिया लगाबे गोरिया, परदेशिया



● श्याम रंग दुलहा दुलहिन गोरी लिरिक्स

श्याम रंग दुलहा, दुलहिन गोरी
युग-युग बनल रहय जोड़ी, 
युग-युग बनल रहय युगल जोड़ी

रामजी के माथे शोभय मुकुटबा
सियाजी के शोभय पटोर जोड़ी, 
युग-युग बनल रहय युगल जोड़ी

सियाजी के माँग मके शोभय सिन्दुरबा
रामजी के भाल तिलक रोरी, 
युग-युग बनल रहय युगल जोड़ी
श्याम रंगे दुल्हा दुलहिन गोरी



● ब्रजमंडल रास रचाबे रसिया लिरिक्स

ब्रजमंडल रास रचाबे रसिया
ओहि रे ब्रजमंडल मोर बहुत छै
कुहकय मोरफटत छतिया, 
ब्रजमंडल रास रचाबे रसिया

ओहि रे ब्रजमंडल पपीहा बहुत छै
पिहुकत पपीहा फटत छतिया,
ब्रजमंडल रास रचाबे रसिया

ओहि रे ब्रजमंडल गौआ बहुत छै
दुहत दूध मटुक मटुकिया, 
ब्रजमंडल रास रचाबे रसिया

ओहि रे ब्रजमंडल नारि बहुत छै
खेलत होरी ब्रज रसिया
ब्रजमंडल रास रचाबे रसिया



● आब चलहुँ कुँवर हो खेलन होरी लिरिक्स

आब चलहुँ कुँवर हो खेलन होरी
जहाँ राधे श्याम बनल जोड़ी
अपने - अपने घर सँ निकसी
मोतियन माँ भरे गोरी, 
आब चलहुँ कुँवर हो खेलन होरी

श्याम के हाथ रंग-पिचकारी
राधा के हाथ अबीर झोरी, 
आब चलहुँ कुँवर हो खेलन होरी

सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस के
रंग खेलहुँ बलजोरी, 
आब चलहुँ कुँवर हो खेलन होरी



● यमुना तट श्याम खेलै होरी लिरिक्स

यमुना तट, यमुना तट श्याम खेलै होरी, 
यमुना तट,

सब सखियन मिलि जमुना नहइहौं
सबहक चीर भये चोरी, यमुना तट...

सब सखियन मिलि गोर लगतु छथि
चीर दिऔ हमर जोड़ी, यमुना तट...

श्याम के हाथ रंग - पिचकारी
बोड़ि देलनि हमर चुनरी, 
यमुना तट, यमुना तट श्याम खेलै होरी, 
यमुना तट



● रंग घोरू ने प्रिय मिथिला के गोरी लिरिक्स

रंग घोरू ने प्रिय मिथिला के गोरी
मिथिला के कुल-रीति एहन थिक
खेलत फागु सबै जोड़ी, 
रंग घोरू ने प्रिय मिथिला के गोरी

किनका हाथ कनक पिचकारी
किनका हाथ अबिर झोरी, 
रंग घोरू ने प्रिय मिथिला के गोरी

रामजी के हाथ कनक पिचकारी
सखियन हाथ अबिर झोरी, 
रंग घोरू ने प्रिय मिथिला के गोरी

खेलत फागु रंग - रस मातल
मिलत गले एक-एक टोली, 
रंग घोरू ने प्रिय मिथिला के गोरी



● माघक जाड़ निरायल लिरिक्स

माघक जाड़ निरायल, रंग होरी ओ ब्रज होरी हो
मोरो पिया चोलिया सियाबय, लाल रंग होरी
कय रग चोलिया सियाबय, रंग होरी ब्रज होरी हो
कय रंग फुदना लगाबय, लाल रंग होरी
आठे रंग चोलिया सियाबय, रंग होरी ब्रज होरी हो
नओ रंग फुदना लगाबय, लाल रंग होरी
सेहो चोलिया पहिरथु सुन्नरि, लाल रंग होरी
पहिरि चलू लट झारि, लाल रंग होरी



● बहुरिया खोलू ने केबरिया लिरिक्स

बहुरिया खोलू ने केबरिया, 
अहाँ संग खेलब अबीर
किनका के हाथ कनक पिचकारी, 
किनका के हाथ अबीर

रामक हाथ कनक पिचकारी, 
सियाजीक हाथ अबीर
किनका के पहिरन पियर पिताम्बर, 
किनका के पहिरन चीर

रामजी के पहिरन पियर पिताम्बर, 
सियाजी के पहिरन चीर
बहुरिया खोलू ने केबरिया, 
अहाँ संग खेलब अबीर



● बाबाजी के बगियामे कुसुम फूल लिरिक्स

बाबाजी के बगियामे कुसुम फूल, 
फूल फुलय कचनार
लाल रंग होरी ओ ब्रजहोरी हो
फूल लोढ़य गेली सुन्नरि, रंग होरी जो ब्रजहोरी
बेसरि लटकल डारि
कानय लगली खीजय लगली सुन्नरि, रंग होरी ओ ब्रजहोरी
के देत बेसरि उतारि
घोड़बा चढ़ल ननदोसी आबय, रंग होरी ओ ब्रजहोरी
हम देब बेसरि उतारि
जौं तोरा बेसरि उतारि देब, रंग होरी ओ ब्रजहोरी
हमरो के कीये देब दान हो
तोहरो के देब हाथ मुनरी, रंग होरी ओ ब्रजहोरी
आओर देब गृमहार
डाहब जाड़ब हाथ मुनरी, रंग होरी ओ ब्रजहोरी
समुद्र भसायब गृमहार
लेबहुमे लेबहु ओहो दुनू यौवना
जाहि सँ खेलब सारी राति, रंग होरी ओ ब्रजहोरी



● माघ मास सिरपंचमी लिरिक्स

माघ मास सिरपंचमी, रंग होरी ओ ब्रज होरी हो
भोर सँ मचय घामार लाल रंग होरी ओ ब्रज होरी हो
ककरा सँ लिखनी लिखाय ककरा पठायब
केये जायत हुनि पास, खबरि हम पायब
कयथे सँ लिखनी लिखायब, हजमा पठायब
देओर जायत हुनि पास, खबरि हम पायब