मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

कहे सुनु सखी मोर छीपल हैत हितचोर - स्नेहलता कृष्ण भजन गीत

नारी रूप में कृष्ण वचन

कहे सुनु सखी मोर छीपल हैत हितचोर । 
सुनु हमरो निहोर पनिघटबा पर ।। 
सब चीर-चोली लाउ सब जल धसि जाउ 
हरि के छल से बजाउ पनि ।।
देखि ककरो ने साथ लग औता यदुनाथ
हम धय लेब हाथ पनि ।। 
सखि हँसत भभाय थिक असल उपाय
देखब जाय न पराय पनि ।। 
सब सुनि तदवीर सखि देल चोली-चीर 
धसि गेल सब नीर पनि ।। 
चीर-चोली के समेटि लेल अंग मे लपेटि 
कहथि करैत रहु भेट पनि ।। 
हरि देल पिहकार गेला कदम के डार 
गोपी धुनथि कपार पनि ।।
पूछे यशोदा के लाल कह अपन हवाल 
हमरा बूझल गमार पनि ।।
गोपी कहथि कर जोड़ि सुनु हमर निहोर
नहि लेल किछु तोर पनि ।। 
सुनु लाला बुधियार दिअऽ सड़िया हमार
गुण मानब तोहार पनि ।।
कहे कुमर कन्हाइ सुनु गोपी समुदाइ
इहे हमर कमाइ पनि ।।
सब गोपी हरजाइ कहियो खेबा न चुकाइ
आइ एके बेर पार पनिघटवा पर।।
सुनु कुमर कन्हाइ खेबा केहन चुकाइ
कोन तोहरो कमाइ पनि ।।
बाजी बात न सम्हारि करी उल्टे अराड़ि
हम करी घटवारि पनि ।।
गेली गोपी खिसिआय कहब यशोदा के जाय
करब तोहरो उपाय पनि ।।
सुनु गोपी हमर बात साड़ी भेटत परात
तावत भीजु सारीरात पनि ।।
आउ जलसँ बहार मांगु हथबा पसार
करु सेवा के करार पनि ।। 
गोपी जनि कदराउ छोडु लाज न लजाउ 
तखन साड़ी लेने जाउ पनि ।। 
गोपी करथि विचार छौड़ा परम छिनार 
आइ कयलक उघार पनि ।। 
सभ गोपी हिया हारि भेली जल से बहार 
कान्हा देल हहार पनि ।। 
गोपी सकल लजाय गेली लाजे कठुआय 
एको चलल न उपाय पनि० ।।
जब देखल यदुवीर गोपी परम अधीर 
छोड़ि देल चोली चीर पनि ।।
सब प्रमुदित भेल अपन चीर चीन्हि लेल 
लीला गायब कपिलदेव पनि ।। 
कहे हरि घर जाउ गोपी सब दिन आउ
खेबा एहिना चुकाउ पनिघटवा पर ।।

जयबइ आजु सामर गोरिया हे यमुना के तीर - स्नेहलता कृष्ण भजन गीत लिरिक्स

जयबइ आजु सामर गोरिया हे यमुना के तीर ।। 
नन्द के लाला मुरलीवाला नाम जकर यदुवीर ।। 
छल से बजायब लग मे बैसायब करब अपन तदवीर ।।
फाड़ि मांग, टीका पहिरायब एक चीर ।।
सब गोपी मिलि रास मचायब होयता श्याम अधीर ।।
गगरी भरि-भरि चलि-चलि देबनि तनिक न तकबनि फीर ।। 
कपिलदेव होशियारी राखब बुड़बक जाति अहीर ।।
सुनु आगू के बयान लीला सरस महान 
हरि परम सुजान परिघटबा पर 
पुनि गेली यमुना तीर गोपी भेली अधीर 
आजु नहि यदुवीर पनिघटबा पर।।1।। 
देखि गोपी समुदाय हरि रहल नुकाय 
एक सोचल उपाय पनिघटबा पर।।2।।
भेष नारि के बनाय मिलि गेल यदुराय 
नहि पड़ल बुझाय पनिघटबा पर ।।3।।

करि सोलहो सिंगार, गोपी चलल हजार लिरिक्स - श्रीकृष्ण पनिघट लीला

स्नेहलता कृष्ण भजन गीत - श्रीकृष्ण पनिघट लीला

करि सोलहो सिंगार, गोपी चलल हजार 
लेल गगरी सम्हारि, पनिघटवा पर।। 

नन्दलाला के बजा लेब, अपना लग कऽ बैसा लेब 
तब करब सजाय, पनिघटबा पर।।1।। 

कोइ कहे इठलाय, लेब लग मे बैठाय 
देव सड़िया पेन्हाय, पनिघटबा पर।।2।। 

हुनका छल से बुलायब, आइ औरत बनायब 
करब असली उपाय, पनिघटबा पर।।3।। 

कृष्ण राधा के बनायब, हाथ मुरली धरायब 
मोर मुकुट सजायब, पनिघटबा पर।।4।। 

हरि जयता सिठिआय, जैतेन्ह महिरम बुझाय 
हम सब थपड़ी बजायब, पनिघटबा पर ।।5।। 

मिलि गोपी समुदाय, लेल गगरी उठाय 
सब सोझे चली जाय, पनिघटबा पर।।6।। 

लीला गाबे कपिलेश, मजा पनिघट के लेब
देखब हरि के फरेब, पनिघटबा पर।।7।।

कनिया जखने देलियै घोघ तर सँ हुलकी लिरिक्स - Kaniya Deliyai Ghogh Tar Sa Hulki Lyrics

ए कनिया जखने देलियै
घोघ तऽर सँ हुलकी
अहाँ बाजू ने बाजू
देखि गेलौं हम बुलकी।

इजोरिया नीक लगैये
मेघ सन घोघ ने तानू
उघारू बदन चानकें
कने तऽ हमरो मानू
अहाँकेर नैन मारलक तानि कों ढमे सुलफी। अहाँ...

लचकिते डाँरक गतिसँ
जुलुम कऽ दैये पायल
कतेक उत्साही मनकें
तुरत कऽ दैये घायल
अहाँकेर चालि देखिकऽ मोन मारैये दुलकी। अहाँ...

अहाँ छी धवन चाननी
कतऽ हम कारी कारी
अहाँ तऽ मृगनैनी छी
आ‘ हम कनडेरिये ताकी
जनैछी हम अरूआयल ओल अहाँ की कुलफी। अहाँ...

गीतकार : चन्द्रमणि झा

शनिवार, 13 दिसंबर 2025

चन्द्र बदन मृग लोचन भवानी के पूजब हे लिरिक्स - स्नेहलता भगवती गीत

Chandra Badan Mrig Lochan Bhawani Ke Pujab He Lyrics

चन्द्र बदन मृग लोचन भवानी के पूजब हे-2 
भवानी के पूजब भवानी के पूजब भवानी के हे-2 
चन्द्र बदन मृग लोचन भवानी के पूजब हे-2 
मैया के द्वारे ओरहूल पिपर... भवानी के पूजब हे-2
चन्द्र बदन मृग लोचन भवानी के पूजब हे-2 

मलिया के द्वारे लाली लाली फूलवा 
तहि पर भौड़ा मरराये भवानी के पूजब हे-2 
चन्द्र बदन मृग लोचन भवानी के पूजब हे-2 

मलिया के बाग में ओरहूल पिपर भवानी के पूजब हे-2 
मलिया के बाग में लाली लाली फूलवा
तहि पर सुग्गा मरराये भवानी के पूजब हे-2

मईया के द्वारे सिंगहबा गरजे
सेहो देखि जिया घबराये भवानी के पूजब हे-2 
चन्द्र बदन मृग लोचन भवानी के पूजब हे-2 

अंचरा पसारी मैया तोसे वर मांगब 
शेरा नुका ल भवानी के पूजब हे-2 
चन्द्र बदन मृग लोचन भवानी के पूजब हे-2 
स्नेहलता लतरायब भवानी के पूजब हे-2


मैथिली सोहर गीत लिरिक्स - राम जन्म सोहर गीत लिरिक्स - Maithili Ram Janm Sohar Geet Lyrics

मैथिली सोहर गीत लिखा हुआ
राम जन्म सोहर गीत लिरिक्स:-
• कानल शिशु नवजात, श्रवण सुनि, जुड़ भेल हे










सीता जन्म सोहर गीत लिरिक्स:-





सीता महिमा:-


शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025

मैथिली विवाह गीत लिरिक्स - स्नेहलता स्नेह - Snehlata Maithili Vivah Geet

      घीढारि     

     सोहाग मथझप्पी     

     नहछू गीत     

     मधुपर्क गीत     

       घनबट्टी       

      कमला पूजन      

      मटकोर       



      जयमाला      


     मण्डप परिक्रमा       

     कन्यादान        







      परछावन      


     गाली गीत       


खीर स गर्भ रहल जननी के अपने अहां जनै छी,
श्रृंगीक बदला दशरथ के कोना क बाप कहे छी। 
हमरा बजैतो लाज लगैये यौ दुलरूआ कोना बाजु

       ओठंगर       



      बिलोकु (छवि दर्शन)     

     कमर खोलाई एवं नव वस्त्र धारण     

      श्रीराम की शोभा      

       नूतन वसन        

      कन्या निरीक्षण       


नूतन वसन पिताम्बर, कटि कस पावन हे लिरिक्स

नूतन वसन गीत

नूतन वसन पिताम्बर, कटि कस पावन हे। 
पीत जनेऊ सुमंगल परम सुहावन हे।। 

अलिगन कहि मृदु वचन करथि परतारन हे। 
जकिकरू लाल मनावन उठिकरू धारन हे।। 

विहँसि कहल एक नारी ललन करू लाजन हे। 
छाडू कुलक निज रीति तखन करू चायन हे।। 

लखि पुरहित असमंजस देल अनुशासन हे। 
उठि उठि पहिरल वस्त्र हरष हिय लालन हे।। 

स्नेहलता हँसि कहथिन कयल विचारन हे। 
अहाँ मानल विप्रक बात अवश किछु कारण हे।।


बुधवार, 10 दिसंबर 2025

स्नेहलता स्नेह के मैथिली शिव भजन नचारी लिरिक्स - Snehlata Maithili Nachari Geet

मैथिली शिव पार्वती गीत लिरिक्स


























स्नेहलता स्नेह - एक संक्षिप्त जीवनी - Snehlata Maithili Geetkar

जन्म: 1909, डरौड़ी गाँव, समस्तीपुर (बिहार)
मूल नाम: कपिलदेव ठाकुर
भनिता / उपनाम: स्नेहलता, लतिका सनेह, सनेहिया, स्नेह

स्नेहलता जी बिहार–मिथिला की भक्ति परंपरा के वह दीप्तिमान नाम हैं जिन्होंने अपने जीवन का हर क्षण भगवान राम–सीता की भक्ति, लोकगीतों, विनय पदावली, शिव वंदना और लोक-मंगल अनुष्ठानों को समर्पित किया। गाँव की मिट्टी में पले-बढ़े कपिलदेव ठाकुर ने बचपन से ही भक्ति-संगीत को अपना नैष्ठिक मार्ग बनाया।

"भूमंडल के अमर गोद में 
मुसकाहट सुन्दर मिथिला के । 
ममता भरल सरस रजकण मे 
मचलाहट सुन्दर मिथिला के''

सन 1936, सीतामढ़ी के अखिल भारतीय संकीर्तन सम्मेलन में, जब उन्होंने अपना विनय-गीत और विवाह-गीत प्रस्तुत किया तो पूरा मंच तालियों से गूँज उठा।
उसी मंच पर अयोध्या के महान संत श्री वेदान्ती जी महाराज ने उनकी अद्भुत भक्ति–भावना से अभिभूत होकर उन्हें नया नाम दिया - “स्नेहलता”। इस नाम के पीछे वह कोमलता, प्रेम और भक्ति थी जो उनके गीतों की हर पंक्ति में झलकती थी।

स्नेहलता जी के गीत :—

राम-सीता विवाह,

जनकपुर वंदना,

भक्ति-गीत,

गोसाउनी गीत,



कोहबर और विवाह-परम्परा

—इन सबके कारण बिहार-नेपाल की कीर्तन मंडलियों में अत्यंत लोकप्रिय हुए।


उनकी रचना “दुवार के छेकाई नेग पहिले चुकइयौ हे दुलरुआ भैया” सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि कोहबर की लोक-संस्कृति का आधार बन गई। यह गीत आज भी शादी की रस्मों में राम–सीता विवाह की स्मृति जगाता है।

उसी दौर में शारदा सिन्हा संगीत की दुनिया में प्रवेश कर रही थीं। महिला कलाकार कम थीं, अच्छे गीतकार और भी कम। स्नेहलता जी का हृदय अत्यंत सरल था। उन्होंने अपनी कीर्तन-पोथी से दस गीत शारदा जी को दिए, यह विश्वास दिलाते हुए कि वे दरौड़ी और स्नेहलता को याद रखेंगी। इन दसों गीतों ने आगे चलकर शारदा जी को अत्यंत प्रसिद्धि दिलाई—परंतु दुखद रूप से स्नेहलता जी का नाम कभी सामने नहीं आया।

स्नेहलता लिखित व 'बाबा' (स्व सूर्यदेव ठाकुर) द्वारा मंच से गाया उनका अंतिम गीत

तोहे राखूँ पियरववा, कबने विधि से ।। तोहे रा ।। हिया बिच राखूँ ता अँखिया तरसे,

अँखियों में राखूँ तो हिया तरस ।। तोहे राखूँ पियरवा ।।

इस उपेक्षा ने परिवार को गहरी पीड़ा दी। सन 1993 में, जीवन के अंतिम वर्षों में, भक्ति में लीन स्नेहलता जी इस संसार से विदा हुए। उनके पुत्र श्रीकांत ठाकुर ने उनके सारे मूल दस्तावेज - गीत, भास, पदावली - एक बक्से में बंद कर दिए, भगवान राम को समर्पित करते हुए।