अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
24 अक्टू॰ 2026
Kojagara
मैथिली कोजगरा गीत लिरिक्स लिखल
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Kojagara
पारम्परिक कोजगरा गीत
बौआ के छियनि कोजगरा हे
पूर्णिमा के राति
कथी के जूत्ता कथी के छत्ता
कोने खराम चढ़ि चलता हे
पूर्णिमा के राति
सोने के जुत्ता रूपे के छत्ता
झनुकी खराम चढ़ि चलता हे
पूर्णिमा के राति
कथि के थारी, कथी के कौड़ी
किनका संग खेलता पचीसी हे
पूर्णिमा के राति
सोने के थारी, चानी के कौड़ी
भौजी संग खेलता पचीसी हे
पूर्णिमा के राति
18 अक्टू॰ 2026
Maithili Lokgeet
Choolha Phukal Nahi Jaaye He, Baru Rahitau Naihar Me
चूल्हा फुकल नहीं जाए हे
बरु रहितौ नैहर में
चूल्हा फुकल नहीं जाए हे
बरु रहितौ नैहर में...
सूइत ऊईठ बारहैन सं अंगना बाहरै छी
नन्दी मुंहझौंसी के सेहो समहारै छी
बोली सहल नही जाए रे
बरु रहितौ नैहर में...
ऊखैर समाठ हमरा छुबिलो ने जाई यै
ठेकी पर पैर दैत तरबा लहरै यै
रोटी बेलल नही जाय हे
बरु रहितौ नैहर में...।
14 अक्टू॰ 2026
Durga Bhajan
चढिते आसिनमें गाम, आइब जैहें हमर दुर्गा मैया
चढिते आसिनमें गाम, आइब जैहें हमर दुर्गा मैया
बाट जोहय छौ सन्तान, संगमें मिथिला नगरिया
बाट जोहय छौ सन्तान, संगमें मिथिला नगरिया
चढिते आसिनमें गाम,
चढिते आसिनमें गाम आइब जैहें हमर दुर्गा मैया
चढिते आसिनमें गाम आइब जैहें हमर दुर्गा मैया
बाट जोहय छौ सन्तान, संगमें मिथिला नगरिया
अबिहं मा संगे सातो रे बहिनिया
अबिहं मा संगे सातो रे बहिनिया
सभहक पूजब हम रैच रैच चरनिया
सभहक पूजब हम रैच रैच चरनिया
दै छियौ मा हम हकार
आइब जईहें हमर दुर्गा मैया
चढिते आसिनमें गाम आइब जैहें हमर दुर्गा मैया
बाट जोहय छौ सन्तान, संगमें मिथिला नगरिया
करिहें नै देरी एको दिन माता
करिहें नै देरी एको दिन माता
पुत्रक असह भेलौ दरस के बिपाशा
पूइर जेतै पूरा एक साल
आइब जईहें हमर दुर्गा मैया
चढिते आसिनमें गाम आइब जैहें हमर दुर्गा मैया
बाट जोहय छौ सन्तान, संगमें मिथिला नगरिया
स्वर: विकाश झा आ संगम झा
गीत: मनोज झा ढंगा
संगीत: कुमार संजय
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15 अग॰ 2026
Chaurchan Geet
भादो मास तिथि चतुर्थीक
भादो मास तिथि चतुर्थीक
निप्पल अंगना दलान
गे बहिना औथिन चौठी चान
गे बहिना औथिन चौठी चान
मटकुरी में दही पौरल
अनलौं फूल आ पान
साजल डाला फल मिठाई सं
और सजल पकवान
गे बहिना औथिन चौठी चान
गे बहिना औथिन चौठी चान
आस लगौने पवनैतिन सब
बीतल जाइया सांझ
धीया पुता किलोल करैया
उगियौ हे भगवान
गे बहिना औथिन चौठी चान
गे बहिना औथिन चौठी चान
दरभंगिया गुनगान गवैया
सुखमय दिय बरदान
विक्की करे हुनके सं विनती
करथिन पुरा अरमान
गे बहिना औथिन चौठी चान
गे बहिना औथिन चौठी चान
भादो मास तिथि चतुर्थीक
भादो मास तिथि चतुर्थीक
निप्पल अंगना दलान
गे बहिना औथिन चौठी चान
गे बहिना औथिन चौठी चान
गायक: दिलीप दरभंगिया
गीतकार: विक्की झा
Chaurchan Puja
मिथिला धरोहर : भादव मासक शुक्ल पक्षक चतुर्थी (चौठ) तिथिमे साँझखन चौठचन्द्र कऽ पूजा होइत अछि जकरा लोक चौरचन पाबनि कहै छथि। एहि बेरा इ पावनि 14 सितंबर 2026 के परत। एहि समय चन्द्रमा कनी काल रहि कऽ डूबि जै छथि। एहि दुर्लभताकऽ कारणेँ लोकमे प्रचलित अछि जे कोनो व्यक्ति के बहुत दिनपर देखबापर कहै छथि जे अहाँ तँ 'अलखख चान' (अलक्ष्य चान) भऽ गेलहुँ। पुराणमे प्रसिद्ध अछि जे चन्द्रमा कऽ एहि दिन कलंक लागल छलनि। तेँ एहि समयमे हुनख दर्शनकेँ दोषापूर्ण मानल जैत अछि। मान्यता अछि जे एहि समयक चन्द्रमाकऽ दर्शन करबापर फूसिकऽ कलंक लगैत अछि। एहि दोषक निवारण करबाक लेल "सिंह: प्रसेन" वला मन्त्रक पाठ कैल जैत अछि।
चौरचन पूजा 2026 मे 14 सितंबर, 2026 के अछि।
Chaurchan Puja 2026 Date: September मिथिला पंचांग अनुसार
ई मिथिला सँ भिन्न प्रान्तक व्यवहार थिक। मिथिलामे भादवकऽ इजोरियाकऽ चौठमे मिथ्या कलंक नञि लागय ताहि हेतु रोहिणी सहित चतुर्थी चन्द्रक पूजा होइत अछ।
एहि पावनि सँ जुरल एकटा कथा अछि जे एक बेर गणेश भगवान केर देखि चन्द्रमा हँसि देलैथ, एहिपर ओं चन्द्रमा के सराप देलैथ जे अहाँ कऽ देखबा सँ लोक कलंकी होयत। तखन चन्द्रमा भादव शुक्ल चतुर्थी मे गणेशक पूजा केलनि। ओं प्रसन्न भऽ कहलथिन:- अहाँ निष्पाप छी, जे व्यक्ति भादव शुक्ल चतुर्थीकेँ अहाँक पूजा कऽ 'सिंह प्रसेन...' मन्त्रसँ अहाँक दर्शन करत तकरा मिथ्या कलंक नञि लगतै ओकर सभ मनोरथ पूर्ण होयत।
चौठचन्द्र केर पूजा:- ई चतुर्थी सूर्यास्तक बाद अढ़ाइ घण्टा धरिक, लेल जाइछ। जँ तिथि दू दिन एहि समय म पड़य तँ अगिला दिन व्रत ओ पूजा हो। भरि दिन व्रत कऽ साँझखन अंगना मे पिठार सँ अरिपन देल जाइछ। गोलाकार चन्द्र मण्डलपर केराक भालरि (पात) दऽ ओहिपर पकमान, मधुर, पूड़ी, ठकुआ, पिड़ुकिया, मालपूआ पायस आदि राखी। मुकुट सहित चन्द्रमाक मुँहक अरिपनपर केराकऽ भालरि दऽ रोहिणी सहित चतुर्थी चन्द्रक पूजा उज्जर फूल सँ पच्छिम मुहेँ करी। परिवारक सदस्यकऽ संख्यामे पकमान युक्त डाली आ दहीक छाँछी कऽ अरिपनपर राखी। केराक घौर, दीप युक्त कुड़वार (माटिक कलश), लावन आदिकऽ अरिपनपर राखी। एक-एक डाली, दही, केराक घौर उठाऽ 'सिंह: प्रसेन....' मंत्रक संग 'दधिशंखतुषाराभम्...' मन्त्र पढ़ि समर्पित करी। प्रत्येक व्यक्ति एक-एक फल हाथमे लऽ ओहि मन्त्र सँ चन्द्रमाकऽ दर्शन कऽ प्रणाम करी। दक्षिणा उत्सर्ग कऽ प्रसाद ग्रहण करी। चन्द्रमण्डलपर राखल प्रसाद कऽ उपस्थित पुरुषवर्ग ओकर चारू भर गोलाकार पंक्तिबद्ध कऽ पातपर फराक-फराक भोजन कऽ ओही ठाम खैद खूनि गाड़ि दी एकरा मड़र भाङब कहल जाईत अछि। चन्द्रमाक आराधना सँ बहुतो व्यक्ति कऽ कामना पूर्ण भेलनि अछि। मिथिलाकऽ विशेष पर्व चौरचन अपना मे एहि ठामक संस्कृति केर अनेक बिन्दु कऽ समेटने अछि।
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13 अग॰ 2026
Chaurchan Geet
चौरचन पूजा गीत
भादव शुक्ल चतुर्थी
उगिलैथ चौठी चान यो
चौरचन के भगवान यो ना
भादव शुक्ल चतुर्थी
उगिलैथ चौठी चान यो
चौरचन के भगवान यो ना
भादव शुक्ल चतुर्थी
उगिलैथ चौठी चान यो
चौरचन के भगवान यो ना
गाय गोबर सं अंगना निपल
चौखुट अरिपन ऊपर लिखल
गाय गोबर सं अंगना निपल
चौखुट अरिपन ऊपर लिखल
हिमकर अहीं के पूजब
सब विधि ए विधान यो
चौरचन के भगवान यो ना
भादव शुक्ल चतुर्थी
उगिलैथ चौठी चान यो
चौरचन के भगवान यो ना
राखल भरि थारी पचनेर
कलसक ऊपर नारिकेर
राखल भरि थारी पचनेर
कलसक ऊपर नारिकेर
बनलै भरि डाली पूरी
संग में पकवान यो
चौरचन के भगवान यो ना
भादव शुक्ल चतुर्थी
उगिलैथ चौठी चान यो
चौरचन के भगवान यो ना
चीनी के पूरी आ पिरिकिया
मोरर तर में खजुरी टिकिया
चीनी के पूरी आ पिरिकिया
मोरर तर में खजुरी टिकिया
माधव गाइब सुनावै
पावन के गुनगान यो
चौरचन के भगवान यो ना
भादव शुक्ल चतुर्थी
उगिलैथ चौठी चान यो
चौरचन के भगवान यो ना
भादव शुक्ल चतुर्थी
उगिलैथ चौठी चान यो
चौरचन के भगवान यो ना
भादव शुक्ल चतुर्थी
उगिलैथ चौठी चान यो
चौरचन के भगवान यो ना
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5 अग॰ 2026
Gauri Puja Geet
पारम्परिक गौरी पूजा गीत
गौरी पुजन के भेल अबेर,
सीया गेली खीसीआई हे
कीयो सखी आवे सीया के मनाबे,
कीयो सखी जल लेने ठाढ़
गौरी पुजन के भेल अबेर...
कीयो सखी आवे सीया के मनाबे,
कीयो सखी फूल लेने ठाढ़
गौरी पुजन के भेल अबेर...
कीयो सखी आवे सीया के मनाबे,
कीयो सखी नैवेद लेने ठाढ़
गौरी पुजन के भेल अबेर...।
Gauri Puja Geet
पारम्परिक गौरी पूजा गीत
गौरी पुजय लेल सीता बेहाल भेल छै,
मांग सिन्दुर भरल रंग लाल भेल छै
सीत सिन्दुर भरल रंग लाल भेल छै
फुल डाली सजल रंग बिरंग फूल सं
रंग बिरंगे कनैल जूही अड़हुल सं
धुप गुगुल स गम-गम महल भेल छै
मांग सिन्दुर भरल रंग लाल भेल छै
नव कोबर सजल दीप अहिबात सं
जेना सीता सटल राम के कात सं
लोक बाजै जोड़ी कमाल भेल छै
मांग सिन्दुर भरल रंग लाल भेल छै
सीता बिनती करै छैथ बहुत नेम सं
गीत गाबि-गाबि भक्ति मधुर प्रेम सं
सोभ देखी सुनैना नेहाल भेल छै ,
मांग सिन्दुर भरल रंग लाल भेल छै
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4 अग॰ 2026
Madhushravani Geet
• पारम्परिक मधुश्रावणी पाबनिक गीत
पावनि पूजू आजु सोहागिन प्राण नाथ के संग मे ।
कारी कम्बल झारि गंगाजल काजर सिन्दूर हाथ मे ।
चानन घसू मेहदी पीसू लिखू मैना पात मे ।
पाबनि साजी भरि-भरि आनल जाही-जूही पात मे ।
कतेक सुन्दर साज सजल अछि लिखल मैना पात मे ।


