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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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12 जुल॰ 2026

Gonu Jha Story

मैथिली कहानी - गोनू झा सँ भगवती प्रसन्न

मिथिला धरोहर
गोनू झा अपन ज्ञानसँ महाराजकेँ तँ प्रसन्न करिते छला। चोर-चुहारकेँ तँ छकबिते छला। सर-समाजक लोकक लग तँ अपना प्रत्युत्पन्नमतित्वसँ आदरणीय बनले छला, बेर पड़नि तँ देवी-देवताकेँ सेहो तेहन ठोका जवाब देथिन जे ओहो प्रसन्न भऽ उठथि। एक बेर भगवती कालीक समक्ष तेहन मनोरञ्जक प्रश्न रखलनि जे ओहो अपन भक्त गोनू झासँ प्रसन्न भऽ उठली आ हुनका वरदान देलनि जे बुद्धि-ज्ञानमे हुनका कहियो क्यौ ने पछाड़ि सकत।

भेलै जे गोनू झा नित्य भगवतीक पूजा करथि। एक दिन मनमे एलनि जे एते दिनसँ भगवतीक मनसँ विधि पूर्वक पूजा करै छी, मुदा ओ दर्शन नञि देलनि अछि। से आब पूजा तखने छोड़ब जखन ओ दर्शन देती। बस ई ठानि ओ पूजामे जुटि गेला। भरि-भरि दिन कालीक पूजा करऽ लगला। अहल भोरे पूजा शुरू करथि तँ सूर्य डूबि जेबाक बादे उठथि।

एक दिन पूजा-पाठक बाद ओछायनपर पड़ल छला कि हुनक पूजासँ प्रसन्न भऽ भगवती काली दर्शन देबा लेल पहुँचि गेलथिन। काली अपन विकराल स्वरूपमे आयल छली। हुनकर एक सय मुँह छलनि। हाथमे खप्पड़ आ खड्ग रखने छली। गोनू झा हलसि कऽ ओछायनपरसँ उठला आ हुनका प्रणाम केलनि। माताक दर्शनसँ अपनाकेँ कृत-कृत्य मानलनि। कनिञे कालमे गोनू झाक उत्साह बिला गेलनि आ ओ गम्भीर भऽ उठला। भगवती चौँकि उठली। एखने गोनू झा प्रसन्न छला तखन एकाएक चिन्तित किए भऽ गेला। भगवती कारण पुछलथिन तँ गोनू झा बजला- नञि कोनो खास बात नञि। हम ई सोचऽ लगलहुँ जे हमरा सभकेँ एक टा मुँह अछि आ दू टा हाथ अछि। तखन जँ कहियो सर्दी भऽ जाइत अछि तँ नाक पोछैत-पौछैत तबाह रहै छी। दू टा हाथसँ एक टा नाक नञि सम्हरैत अछि, तखन अहाँकेँ तँ एक सय मुँह आ दू टा हाथ अछि। जँ कहियो सर्दी भऽ जाइत होयत तँ दू हाथसँ एक सय नाक कोना सम्हरैत होयत, यैह सोचऽ लागल रही। गोनू झाक बात सुनि भगवती ठठा कऽ हँसि पड़ली आ हुनका आशीर्वाद देलथिन जे बुद्धि-ज्ञानमे दुनिञामे अहाँकेँ क्यौ ने पछारत। दोसर दिन गोनू झा दरबार गेला तँ महाराजकेँ सभटा बात कहलथिन तँ ओहो खूब हँसला आ हुनका एहि मनोरञ्जक बात लेल खूब बिदाइ देलनि। 

2026 2027

मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा 2026 - Bhadwa Mithila Panchang 2026

मिथिला धरोहर

Mithila Panchang Bhadwa 2026

जुलाई-अगस्त 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 30 जुलाई, संध्या 06:08
• भदवा समाप्ति — 04 अगस्त, रात्रि 08:13

अगस्त-सितम्बर 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 26 अगस्त, प्रातः 01:33
• भदवा समाप्ति — 3 सितंबर, रात्रि 04:12

सितम्बर 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 23 सितंबर, दिन 08:58
• भदवा समाप्ति — 28 सितंबर, दिन 12:10


अक्टूबर 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 20 अक्टूबर, दिन 03:31
• भदवा समाप्ति — 25 अक्टूबर, रात्रि 08:04

नवम्बर 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 16 नवंबर, रात्रि 11:29
• भदवा समाप्ति — 21 नवंबर, रात्रि 03:55

दिसम्बर 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 13 दिसम्बर, रात्रि 05:40
• भदवा समाप्ति — 29 दिसम्बर, दिन 11:38

Hindi Story

विद्यापति रचित पुरुष परीक्षा का पूरा विवरण और संपूर्ण कथा | Vidyapati Purusha Pariksha Stories in Hindi

मिथिला धरोहर
ग्रंथ का ऐतिहासिक परिचय
मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति की लेखनी से जन्मा 'पुरुष-परीक्षा' केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि मानव जीवन की कसौटी है। हम जिस दुर्लभ संस्करण की बात कर रहे हैं, वह पंडित चंद्रकांत पाठक जी द्वारा अनुवादित 'भाषा गद्य-पद्य सहित' रूप है। इसका प्रकाशन ऐतिहासिक 'लक्ष्मीवेंकटेश्वर स्टीम प्रेस, कल्याण-मुंबई' द्वारा किया गया था, जो इसे हमारे साहित्यिक इतिहास की एक अनमोल धरोहर बनाता है।

11 जुल॰ 2026

2026 2027

Mithila Panchang 2026-27 PDF Download | मैथिली पंचांग 2026-2027 पीडीएफ डाउनलोड करू

मिथिला धरोहर
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फाइलक नाम: Mithila_Panchang_2026_27.pdf
कुल पेज: 35 पेजेस
फाइलक साइज: ~ 22.7 MB
प्रारूप: PDF (.pdf)
भाषा: मैथिली (Maithili)
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10 जुल॰ 2026

Dahakan Geet

राम लखन सन सुन्दर वर के जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे लिरिक्स - Ram Lakhan San Sundar Bad Ke Juni Padhiyoun Keo Gari He

मिथिला धरोहर
पारंपरिक मैथिली डहकन लोकगीत (Maithili Dahkan Geet)

राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे
केवल हाश विनोद में पुछियौन
उचित कथा दुई चारि हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे

पहिल कथा ई पुछियोन सखि सब
कहता कनिक बिचारि हे
गोर लक्ष्मण गोर कौसल्या
भरत राम किया कारि हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे


सुनु सखि एक अनुपम घटना
अचरज लागत भारि हे
खीर खाय बालक जनमौलन 
अवधपूरी के नारी हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे

अकध कथा कि बाजि सजनी
रघुकुल के गति न्यारी हे
साठि हजार पुत्र जनमौलनी 
सगरक नारी छीनारी हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे

स्नेहलता किछु आब ने कहियोन
अतबे करथि करारि हे
हंसी खुसी मिथिला सं जैता
ओतय सं भेजता महतारी हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे

गीत - स्नेहलता

इहो पढ़ब:-


8 जुल॰ 2026

Maithili Lokgeet

चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई लिरिक्स - Chalu dekhan he daai raja janak ke jamai lyrics

मिथिला धरोहर
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
नैना जोगिन विध कनिको नै जांनय
नैना जोगिन विध बुझय नै जांनय
बुझय ने विध वयवहार
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई

बाम में कनियाँ दहिन छथि साइर
बाम में कनियाँ दहिन छथि साइर
कहथिन के हिनका बुझाय
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई

सखि सब मिलि जुलि पढ़य छथि गारी
सखि सब मिलि जुलि पढ़य छथि गारी
करै छथि माई के उद्धार
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई

6 जुल॰ 2026

5 जुल॰ 2026

Bishari Geet

कहाँ तोहर आसन बासन लिरिक्स. Kahan Tohar Aasan ब3aasan Lyrics

मिथिला धरोहर
पारंपरिक मैथिली बिषहरि गीत

कहाँ तोहर आसन बासन कहाँ निज धाम,
राम कहाँ निज धाम,
राम किनकर तु पाँचो बेटी, किये तोहर नाम,
राम किनकर तु पाँचो बेटी, किये तोहर नाम,

गंगा हमर आसन बासन गहबर निज धाम,
आहे गहबर निज धाम,
राम गौरी के पाँचो बेटी, बिषहरि नाम,
राम गौरी के पाँचो बेटी, बिषहरि नाम…..

नाव दे रे मलहा भैया रुपे करुआर,
राम रुपे करुआर
राम बिषहरि जेती मृतु भुवन हेतन अतिकार
राम बिषहरि जेती मृतु भुवन हेतन अतिकार

दीप दे रे कुम्हरा भैया पाट सूत बाती
राम पाठ सूत बाती
राम तेल दे रे तेलिया भैया लेसु प्रहलाद
राम तेल दे रे तेलिया भैया लेसु प्रहलाद

धन्य हि विद्यापति सुनु बिषहरि माई
राम सुनु बिषहरि माई
राम हमरो पर दानी रहबै हेबय सहाय
राम हमरो पर दानी रहबै हेबय सहाय

4 जुल॰ 2026

Gauri Geet Lyrics

गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी लिरिक्स - Gauri Pujan Ham Jaayb Yau Raghunandan Svami Lyrics

मिथिला धरोहर
मैथिली गौरी लोकगीत

गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गिरजा पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गिरजा पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी

आसन कम्बल हम अपने सं आनब
आसन कम्बल हम अपने सं आनब
आहाँ सिंघासन लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
आहाँ सिंघासन लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी

फूल बेलपत्र हम अपने सं आनब
फूल बेलपत्र हम अपने सं आनब
आहाँ गंगाजल लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
आहाँ गंगाजल लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी

सिंदूर सपरि हम अपने सं आनब
सिंदूर सपरि हम अपने सं आनब
आहाँ नबेद लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
आहाँ नबेद लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी

गौरी पूजीए पूजी भाग्य जे मांगब
गौरी पूजीए पूजी भाग्य जे मांगब
मांगी लेब दीर्घ अहिवात  यौ रघुनंदन स्वामी
मांगी लेब दीर्घ अहिवात  यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गिरजा पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी

Maithili Lokgeet

कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ लिरिक्स - Katek Dinana Saun Asra Lagaylahun

मिथिला धरोहर
पारंपरिक मैथिली खोइछा खोलबाक गीत

कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ 
कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ 
भैया के होयत बियाह हे
भैया के होयत बियाह हे

भौजो के खोंइछा में हीरा मोती आयत
भौजो के खोंइछा में हीरा मोती आयत
ओहि लए गहना घडाऐब हे
ओहि लए गहना घडाऐब हे

एहन दरिद्र घर भैया बियाहलनी
एहन दरिद्र घर भैया बियाहलनी
भौजो के खोंइचा दुभि धान हे
भौजो के खोंइचा दुभि धान हे
कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ 
कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ 
भैया के होयत बियाह हे
भैया के होयत बियाह हे


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