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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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✨ आगामी त्यौहार
मधुश्रावणी
📅 अगस्त 2026
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15 जुल॰ 2026

Madhushravani Puja

मधुश्रावणी व्रत कथा संग्रह - सम्पूर्ण पूजा बिधि विधान सहित Madhushravani Vrat Katha

मिथिला धरोहर
मिथिलाक सांस्कृतिक जीवनमे 'मधुश्रावणी' पावनिक महत्त्वपूर्ण स्थान अछि । ई पावनि प्राय: मिथिलहिटामे होइछ तैं एकर महत्त्व आओर विशेष अछि । एहि अवसर पर नविवाहिता कन्या श्रावण मासमे नागपूजा करैत अपन सोहागक दीर्घकामना करैत छथि । ई पूजा तेरह दिन धरि चलैत अछि तथा प्रत्येक दिनक पृथक्-पृथक् कथा सेहो अछि । एहि पावनिक पौराणिक आधार अछि तथा किछु दन्तकथाकेँ सेहो आधार बनाए कथा कहल जाइछ ।

पूजाक सामिग्री आ ओरिआओन
नव विवाहित याने वर्षाभ्यन्तरमे जाहि कन्याक विवाह भेल होइक ओ साओन विद चौठ कऽ संध्या काल जाही, जूही, अगर, तगर, नीम दाड़िम तथा मेहदीक पात लोढ़ि कऽ राखथि । ता कन्याक अभिभाविका किंवा माय जाहि घरमे मधुश्रावणीक पूजा हेतैक, ओहि घरमे निपि क' राखथि । तहन जाहिठाम पूजा हेतैक ओहिठाम पिठार सँ चौखूट क' अरिपन देथि । अरिपनमे पश्चिमसँ वर-कन्याक प्रवेश हेतु थोरेक बाट राखि देथि ।

• अरिपन :- 
चौकोर जे अरिपनक घेरा ताहि मध्य दुनू उत्तर आ दक्षिण कोन पर पुरहरा पातिल रखबाक जगह पर दू टा गोल अरिपन रहै छै, जाहि पर बालु पसारि देल जाइत छैक । उत्तर दिशक बालु पर पुरहर आ दक्षिण दिशक बालु पर पातिल राखल जाइत अछि । पातिलमे तेल-बाती देल दीप रहैत अछि । पुरहर पातिलक पश्चिममे अरिपन द' केँ कलशक स्थान बनावथि । एक गोट नव ढौरल डाबा पर माटि आ गोवरसँ पाँच टा साँप बनाकेँ साटल रहैत अछि । पाँचो साँपक मुँहमे दूबि खोंसि देल जाइत अछि । कलशक दक्षिण दिश सूर्य तथा चन्द्रमाक अरिपन रहैत अछि आ तकर उत्तर दिश एक जोड़ लटकल साँपक (नाग–भाग) अरिपन रहैत अछि । एकर पश्चिममे नौ फूलवाला नवग्रहक अरिपन रहैत अछि, कलशक पश्चिममे दू गोट तीन फूलवाला अरिपन होइत अछि, उत्तरमे कुसुमावतीक हेतु आ दक्षिणमे पिंडलाक हेतु । ऐ दुनू अरिपनक नीचाँ बीचमे फेर दूटा तीन फूलवाला अरिपन देल जाइत अछि, उत्तरमे चनाइक हेतु आ दक्षिणमे लीलीकेँ हेतु । चनाइक अरिपनसँ उत्तर दिश मैनाक पात सन अरिपन बैरशीक एक सय एक भांइक हेतु देल जाइत अछि । दक्षिनमे एहिना लीलीक एक सय एक बहिनक हेतु एक सय एक नागिन बाला मैनाक पात सन अरिपन रहैत अछि । 'एहि दुनू अरिपनक बीच मे ठीक कलशक सामने सबसँ पश्चिम पाँच फूलवाला गौरीक हेतु अरिपन रहैत अछि । एहि फूलक बिचला तीन फूल पर गौरीक दुनू पैरक चित्र अथवा गौरीक यन्त्र लिखल रहबाक चाही । ऐ अरिपनसँ सटल दक्षिण तीन फूलवाला षष्ठिका (साठि)क अरिपन रहैत अछि ।
चित्र - मधुश्रावणीक अरिपन) कन्या वरक प्रवेशक रास्ता
• पूजाक सामग्री :– 
गौरी बनेबाक लेल हरिद, कुसुमक फूल, सिन्दुर, पान आ मेथीकेँ सिलौट पर पीसिक' शिवलिंगक आकारक प्रतिमा बनाके एकटा नव ढौरल सरबामे ठाढ़ करिथ । जाही–जूही सब पीसि पाँच टा पूड़ामे राखिथ । चारिटा मैनाक पात पैघ पैघ रहक चाही जाहिमेसँ एकटा मैनाक पात पर श्रीखण्ड चानन सँ एक सय आ पिठारसँ एकटा साँपक चित्र लिखिथ । दोसर पर एक सय पीठारसँ आ एकटा चानन सँ लिखिथ । ई दुनू प्रात भिनसर पूजाक काल उत्तर भागक मैनाक पातवाला अरिपन पर राखल जायत, जाहिमे अधिक चाननवाला ऊपर आ अधिक पिठारवाला तरमे राखल जाएत । तेसर मैनाक पात पर सिन्दूरसँ एक सय आ काजरसँ एकटा नागिन के चित्र लिखिथ । चारिम मैनाक पात पर काजरसँ एक सय आ सिन्दूरसँ एक नागिनक चित्र बनाबिथ । इहो दुनू पात भिनसरमे दक्षिण भागक मैनाक पातक आकार वला अरिपन पर राखल जाएत, जाहिमे अधिक सिन्दूरवाला ऊपर आ अधिक काजरवाला तरमे राखल जाइत अछि । कुसुमावती, पिंडला, चनाइ एवं लीलीक पूजा लेल चारि गोट केराक पातक पुड़ा बनाओल जाइत अछि । नैवेद्यक वस्तु यथा–अरबा चाउर, चुड़ा, चुड़लाइ, चीनी, लाबा, आम, कटहर, केरा, भीजल अंकुरी आदिक व्यवस्था कऽ लेल जाइत अछि । चाँईक हेतु एक गोट डालीमे अरबा चाउर, पाइ आ एक छाँछी दही रहैत अछि । बिनीक मोटरी हेतु–धनी, धान, दूबि, हरिद, सुपारी, बड़की अँड़ाची, छोटकी अँड़ाची, जाफर, लबंग, बड़की हरीर, छोटकी हरीर, बहेड़ा आ पाइ (ई प्रत्येक पन्द्रह–पन्द्रह गोट) एहि सबकेँ एक कचुआ (आँगी) मे बान्हि पोटरी बना राखिथ । पुरहर पातिल आ कलशक तरमे देबाक लेल धान रहक चाही । गाय दूध, कुसुमक फूल, पान–सुपारी, साँख–सहेली, गौरीक लेल लाल आ पीयर फूलक माला, नीमक पात, नेबो, अमतौआ दाड़िम, पखुआ, नेङरा कुश, धामिक पात इत्यादि पूजामे रहब आवश्यक अछि । किनयाँ लेल लाल पाढ़िक पीयर साड़ी, आ तीसी फूल सन लाहक पीयर लहठी राखिथ।

• पूजा आरम्भ:-
नाग पञ्चमी दिन पवनैतिन भिनसरे उठि नित्यकर्मसँ निवृत्त भऽ पूजाक हेतु जे सासुर सँ साड़ी, लहठी आएल हो तकरा पहिरि हाथ पैर पवित्रपूर्वक धो कऽ भगवतीक स्तुती गीत सुनैत भगवती तथा कुलदेवताकेँ प्रणाम कऽ पूजाक स्थान पर आबि बैसिथ । तहन पातील पुरहर आ कलशवाला अरिपन पर पहिने किछु बालु धऽ जल सँ सींचि ऊपरसँ किछु धान राखि तीनूकेँ यथास्थान राखिथ तखन कलशकेँ जलसँ भरि ऊपरसँ एक आमक पल्लव दय देथि । तकरा बाद पातिलमे दीप लेसि देथि ।

आब पूजिनहार अपन आसन पर बैसिथ आ गीतगाइन लोकनि गौरीक गीत गाबिथ । तहन सबदीना सड़बामे बनल हाथी पर चढ़ल जे गौड़ तिनका गौड़ीक लेल जे बनल तीनटा अरिपन ताहिमे उत्तरबिरिया फूल पर राखि सासुरसँ जे आएल गौरी तिनका बीचवाला फूल पर राखि मधुश्रावणीक लेल जे बनल गौरी तिनूका दक्षिणविरिया फूल पर स्थान देथि ।

एकटा केराक पात पर नैवेद्य आ दोसर पर फूल, अक्षत, चानन, बेलपात, धूप, दीप, आदिक व्यवस्था कऽ लेथि आ तहन गौरीक पूजा निम्न मंत्रसँ पंचोपचार करिथ ।


• गौरी पूजा:-
आब किनयाँ निम्नलिखित क्रमे पूजा करैत छथि । दहिना हाथक औंठा आ अनामिकासँ सिन्दूर लऽ – ''ऐं गौरी ! महामाये, चन्दन डारि तोड़ैत एलहुँ सोहाग भाग बटैत एलहुँ फूलक माला अहाँ लिअ, सोहाग–भाग हमरा दिअ, स्वामी–पुत्र सहित गौयेँ नम: ।'' एहि मन्त्रसँ तीन बेरि सिन्दूर दऽ कऽ गौरीक आवाहन करती । तीनु बेर मन्त्र पढ़ती । तखन जल लऽ–''एतानि पाद्यादीनि नम: स्वामी–पुत्र सहित गौयेँ नम: ।'' एहि मन्त्रसँ सरबाक नीचामे जल देथिन । ''इदं रक्तचंदनं नम: स्वामीपुत्र सहित गौयेँ नम: ।'' एहि मन्त्रसँ ललका चानन देथिन । ''इदं सिन्दूरं नम: स्वामी–पुत्र सहित गौयेँ नम: ।'' एहि मन्त्रसँ सिन्दूर देथिन । तखन ''एतानि स्कत पुष्पाणि नम: स्वामी–पुत्र सहित गौयेँ नम: ।'' बहुत रास लाल फूल चढ़ैती तखन ''एतानि विल्वपत्राणि नम: स्वामी–पुत्र सहित गौयेँ नम:'' किहि बहुत रास बेलपात चढ़ैती । तखन ''इदं पुष्पमाल्यं स्वामी–पुत्र सहित गौयेँ नम:'' किहि लाल अथवा पीयर फूलक माला चढ़ैती । तखन ''एतानि गन्ध–पूष्प–धूप–दीप, ताम्बुल यथाभाग नानाविधि नैवेद्यानि नम: स्वामी–पुत्र सहित गौयेँ नम:'' किहि नैवेद्यक उत्सर्ग करती । तखन ''इदमाचमनीयम् नम: स्वामी–पुत्र सहित गौयेँ नम:'' जल देथिन । तखन ''एष रक्तपुष्पाञ्जलि: नम: स्वामी–पुत्र सहित गौयेँ नम:'' कहिकेँ आँजुरि भरि ललका फूल चढ़ैती । अहिना एहि मन्त्र सबसँ सासुर एवं नैहरक गौरीकेँ पूजा कऽ प्रणाम करती ।

• कलशक पूजा:-
तकर बाद किनयाँ कलशक पूजा करैत छथि ओ अक्षत ल' ''नम: शान्ति कलश इहगच्छ इहतिष्ठ'' किहि कलशकेँ आवाहन करैत छथि । तखन ''एतानि पाद्यादीनि नम: शान्ति कलशाय नम:'' किहि जल जेना गौरीक पूजा केने छलीह तहिना क्रमश: ''इदमनुलेपनम् श्वेत चंदनम् नम: शान्ति कलशाय नम:'' किहकेँ उजरा चानन, ''इदं रक्तानुलेपनम्'' किहकेँ ललका, ''इदमक्षतं नम: शान्तिकलशाय नम:'' किहि अक्षत फेर एहिना फूल, बेलपात, दूबि, धूप, दीप, नैवेद्य चढ़बैत छथि । फेर, ''इदमाचमनीयम् नम: शान्ति कलशाय नम:'' किहकेँ जल, ''नम: शान्ति कुम्भ महाभाग सर्व–काम–फलप्रद । पुष्पं गृहं शुभ यच्छ पूण्याधार नमोस्तुते। एष पुष्पाञ्जलि नम: शान्ति कलशाय नम:'' किहकेँ आँजुर भरि फूल दऽकेँ शान्ति कलशकेँ प्रणाम करैत छथि ।

तखन क्रमश: सूर्य, चन्द्रमा आ नवग्रहक पूजा निम्नवत–''नम: सूर्य इहागच्छ इहतिष्ठ'' कहि सूर्यक आवाहन कऽ उपरोक्त प्रकारेँ यथा–''एतानि पाद्यदीनि नम: सूर्याय नम:'' आदि मन्त्र पढ़ि–पढ़िकेँ क्रमश: हुनका जल, उजरा, ललका चानन, सिन्दूर, अक्षत, ललका फूल, बेलपात, दूबि, नैवेद्य चढ़बैत छथि, आचमन करबैत छथि आ लाल फूल सँ पुष्पांजलि दैत छथि ।

तत्पश्चात् अक्षत ल' ''नम: चन्द्र इहागच्छ इहतिष्ठ ।'' कहि चन्द्रमाक आवाहन क' हुनका उपरोक्त ढंग सँ क्रमश: ''नम: चन्द्राय नम:'' किहि–किहि जल, उजरा चानन, अक्षत, उजरा फूल, बेलपात, दूबि, नैवेद्य चढ़ा आचमन करा भरि आँजुर फूलसँ मन्त्र पढ़िकेँ पुष्पाञ्जलि दैत छथि ।

तखन फेर अक्षत लऽ ''नमो नवग्रह इहागच्छत इहतिष्ठत'' किहि, चानन, अक्षत, फूल, बेलपात, दूबि, नैवेद्य आदि क्रमश: उपरोक्त प्रकारे नाम लऽ ''नवग्रहेभ्यो नम:'' मन्त्र पढ़ि कए चढ़ाबिथ । अन्त मे आचमन कराकेँ पुष्पाञ्जलि दऽ प्रणाम करैत छथि ।

• विषहाराक पूजा:- 
अक्षत लऽ–''नमो नाग दाम्पत्य इहागच्छह इहतिष्ठत'' किहि नागभागक आवाहन कऽ । जल लय–''एतानि पाद्यादीनि नमो नाग दाम्पितभ्यां नम:'' इदमनुलेपनं, इदं रक्त चन्दनं, इदमक्षतं, एतानि पुष्पाणि, इदं विल्वपत्रं, इदं दुर्वादलं, एतानि गन्ध–पुष्प–धूप–दीप–ताम्बुल, इदमाचमनीयं, एष पुष्पाञ्जलि किहि आंजुर भरि फूल चढ़ा नाग–भाग के प्रणाम करी ।

• वैरसीक पूजा:-
पुन: अक्षतसँ उतरविरिया मैनाक पात पर ''नम: शतानुज सहित वैरस्यै नम:'' किहकेँ वैरसीक आवाहन कएल जाइत अछि । फेर जल लऽ ''एतानि पाद्यादीनि नम: शतानुज–सहित वैरस्यै नम:'' मन्त्र पढ़िकेँ जल, एही तरहे क्रमश: मन्त्र पढ़ि–पढ़ि उजरा चानन, अक्षत, उजरा फूल, बेलपात, दूबि, धूप, दीप, नैवेद्य चढ़ाओल जाइत अछि । तखन जलसँ आचमन कराय पुष्पाञ्जलि चढ़ाए वैरसीकेँ प्रणाम कएल जाइत अछि ।

• चनाइ नागक पूजा:-
तखन अक्षत लऽ केँ वैरसी लगक पूड़ा पर ''नम: चनाइ नाग इहागच्छ इहतिष्ठत'' ई मन्त्र पढ़िकेँ चनाइक आवाहन कएल जाइत अछि । तखन ''एतानि पाद्यादीनि नम: चनाइ नागाय नम:'' मन्त्र पढ़ि जल आर एहिना मन्त्र पढ़ि–पढ़िकेँ क्रमश: उजरा चानन, उजरा फूल, बेलपात, दूबि, धूप, दीप, नैवेद्य चढ़ाओल जाइत अछि । ''इदमाचमनीय नम: चनाइनागाय नम:'' एहिसँ जल, आ ''एष पुष्पांजलि: नम: चनाइ नागाय नम:'' एहिसँ भरि आँजुर उजरा फूलसँ पुष्पांजलि दऽ चनाइ नाग केँ प्रणाम कएल जाइत अछि ।

• कुसुमावतीक पूजा:-
आब अक्षत लए उतरविरिया–पुबिरिया पूड़ा पर ''नम: कुसुमावती इहागच्छ इहातिष्ठ ।'' मन्त्र पढ़ि कुसुमावतीक आवाहन कएल जाइत अछि । तखन फेर पूर्ववते ''एतानि पाद्यादीनि नम: कुसुमावत्यै नम:'' मन्त्र पढ़िकेँ ललका चानन यथा–''इदं रक्तानुलेपनं नम: कुसुमावत्यै नम: ।'' सिन्दूर, अक्षत, कुसुमक फूल, बेलपात, धूप, दीप, नैवेद्य चढ़ाओल जाइत अछि । अन्तमे ''इदमाचमनीयं नम: कुसुमावत्यै नम:'' मन्त्र सँ आचमन करा, भरि आँजुर कुसुमक फूल लए मन्त्र पढ़ि पुष्पांजलि दए प्रणाम कएल जाइत अछि ।

• पिङ्गलाक पूजा:-
तखन अक्षत लएकेँ पुबिरिया दछिनविरिया पूड़ा पर ''नम: पिंगले इहागच्छ हइतिष्ठ ।'' मन्त्र पढ़ि पिंगलाक आवाहन कएल जाइत अछि । उपरोक्त ढंगसँ प्रत्येक वस्तुक मन्त्र पढ़ि क्रमश: जल, लाल चानन, सिन्दूर, अक्षत, फूल, बेलपात, धूप, दीप, नैवेद्य चढ़ाओल जाइत अछि । आचमन कराओल जाइत अछि आ पुष्पांजलि दए प्रणाम कएल जाइत अछि ।

• लीली नागक पूजा:-
तखन गोसाउनिसँ उत्तरक पूड़ा पर लीलीक आवाहन कएल जाइत अछि, अक्षत लऽ ''नम: लीली नागे इहागच्छ इहतिष्ठ ।'' मन्त्र पढ़ल जाइत अछि । आब पुन: पुर्वोक्त क्रमे एक–एक वस्तुक मन्त्र पढ़ि क्रमश: जल यथा ''एतानि पाद्यादीनी नमो लीली नागायै नम:'' ''इदमनुलेपनं नमो लीली नागायै नम:'' ''इदं रक्तानुलेपनं नमो'' किहि लाल चानन, सिन्दूर, अक्षत, फूल, बेलपात, दूबि, धूप, दीप, नैवेद्य आदि चढ़ाओल जाइत अछि । ''इदमाचमनीयम्'' ई मन्त्र पढ़ि आचमन करा भरि आँजुर फूलसँ पुष्पाञ्जलिक मन्त्र पढ़ि पुष्पाञ्जलि देल जायत ।

• शतभागिनी सहित गोसाउनि नागक पूजा:-
तखन अक्षत लऽ केँ ''नम: शतभागिनी सहित गोसाउनि नागे इहागच्छ इहतिष्ठ'' मन्त्र पढ़ि दछिनविरिया मैनाक पात पर गोसाउनिक आवाहन कएल जाइत अछि । पुन: पूर्वोक्त क्रमे ''एतानि पाद्यादीनि नम: शतभागिनी–सहित गोसाउनि नागायै नम:'' किहि जल आ क्रमश: प्रत्येक वस्तुक मन्त्र पढ़ि–पढ़ि ललका चानन, सिन्दूर, अक्षत, फूल, बेलपात, दूबि, धूप, दीप, नैवेद्य चढ़ाओल जाइत अछि । मन्त्र पढ़ि आचमन तथा आँजुर भरि फूल लऽ पुष्पाञ्जलि देल जाइत अछि । पहिलुक दिनक तोड़ल जाही, जुही आदि सेहो गोसाउनिकेँ चढ़ाओल जाइत अछि ।

• साठिक पूजा:-
तत्पश्चात साठि (षष्ठिका) क पूजा होइत अछि । सराइ व पात पर साठिक मन्त्र लिखि गौरीक दक्षिण साठिक अरिपन पर राखि देल जाइत अछि । तखन अक्षत लऽ केँ ''नम: षष्ठी इहागच्छ इहतिष्ठ'' किहकेँ साठिक आवाहन कएल जाइत अछि । तखन उपरोक्त क्रमसँ जल लऽ केँ ''एतानि पाद्यादीनि नम: षष्ठी देव्यै नम:'' आ प्रत्येक वस्तुक मन्त्र पढ़ि–पढ़ि अक्षत, उजरा फूल, बेलपात, चढ़ाओल जाइत अछि । तखन ''एतानि दूर्वादलानि नम: षष्ठी देव्यै नम:'' किहकेँ साठिटा निह तऽ कम–सँ–कम छबो गोट दूबि चढ़ाओल जाइत अछि । तखन जल लऽ मन्त्र पढ़ि हुनका आचमन कराओल जाइत अछि आ ''एष श्वेत पुष्पांजलि नम: षष्ठी देव्यै नम:'' मन्त्र पढ़िकेँ भरि आँजुर उजरा फूल चढ़ा साठिकेँ प्रणाम कएल जाइत अछि ।

तत्पश्चात किनयाँ बीनीकेँ मोटरीकेँ खोँछिमे राखि निम्नलिखित पाँच गोट बीनी क्रमश: तीन बेर सुनैत छथि ।

बीनी १
जिहयाँ सँ भेल मन–मनारे । बिसहरि खसली शम्भू–भड़ारे ।।
कानिथ गौड़ा फोड़िथ ढाह । हे दाई बिसहरि राखू नाह ।।
आब तुलाएिल पाँचो बहिनी । सकल शरीर घामि गेल बीनी ।।
बीनी हे विसकर्मी देलिन । देव–दोतिलकेँ देखए देलिन ।।

सामिल–बाइल हरे परेखी । बेनी–गुण यति कहब विशेषी ।।
आँतर–आँतर लागल मोती । मुक्ता गाछ पाट के थोपी ।।
चारि कंचन चारि सामिका वरना । से देखि माह हे ! आदित भुलना।

से देखि माई हे ! मालिन भुलना । डाँटी लागि गरुड़ के वाला ।।
सोने बान्हू–बान्ह करोड़ा । रूपे बान्हूँ गजमोती माला ।।
जे बीनइ तिन बीनई सारी । गहा–गुही पलटा दे नारी ।।
अन्हरा पाबए नयन–संपुक्ता । कोढ़िया पीबए निर्मल काया ।।
बाँझी नारि पाबए पुत्ता । जे ई बीनी सुनए चित्ता ।।
अनधन लक्ष्मी बाढ़ए वित्त । जे ई बीनी सुनए मन लागि ।।
तकरा वंश निह हो विष–दोष । तकर पुरुष चलए लछ कोस ।।
जेँ एहि बीनीक लागए बसात । बीष–दोष निह आवए पास ।।

बीनी–२
गोसाउनि दान बड़ि, सोहाग बड़ि, सुन्दर बड़ि, आधा साओन, जगत्र गोसाउनि, मधस्थ राजाक बेटी, युगे कुमरक बहिन, मधु–मधु महानाग–श्रीनाग–नागश्री दाइकेँ पाँच पुत्र कोखि धरि, नाहर परतारि बैरसी वियाहि, मद्र–मिनका धरहर ढाहि, गोसाउनि सन भाग, लीली सन सोहाग, सुनिनहारि केँ होइन ।

बीनी–३
गोसाउनि दाईकेँ एक ढक छिअनि, पुरिबा–पछबा बसात छिअनि, कोखिलाक सात छिअनि, भमराक लात छिअनि, मेघडम्बर सन छाती छिअनि, मुक्तावली पाँती छिअनि ।

बीनी–४
बीनी बूनल झारि कोन, बीनी उठल पहिल कोन ।
बीनी बूनल झारि कोन, बीनी उठल दोसर कोन ।
बीनी बूनल झारि कोन, बीनी उठल तेसर कोन ।
बीनी बूनल झारि कोन, बीनी उठल चारिम कोन ।
बीनी बूनल झारि कोन, बीनी उठल पाँचम कोन ।
चारू कोना रूना टूना भेल सम्पूर्ण, गौरा दाइकेँ पांचो बेटिया ।
भल भाइ शंकर हमहीं जियाओल गौरी दाइ के बेटी ।।

बीनी–५
दीप दिपहरा जाथु धरा । मोती–मानिक भरथु घरा ।।
नाग बढ़थु, नागिन बढ़थु । पाँच बहिन बिसहरा बढ़थु ।।
बाल बसन्त भैया बढ़थु । डाढ़ी–खोंढ़ी मौसी बढ़थु ।।
आश्चरो पोसो बढ़थु । बासुकौ राजा नाग बढ़थु ।।
बासुकिनी माए बढ़थु । खोना–मोना मामा बढ़थु ।।
राहो शब्द लए सुतौ । काँसा शब्द लए जगी ।।
होइत प्राण सोना कटोरामे दूध–भात खाई ।।
साँझ सूतो प्रात उठो, पटोर पहिरो कचोर ओढ़ी ।।
बह्याक देल कोदारि, विष्णुक चाँछल बाट ।
भाग–भाग रे कोड़ा–मकोड़ा । ताही बाट आओताह ईश्वर महादेव,
पहल गरुड़ के डाव । आस्तीक, आस्तीक, गरुड़, गरुड़ ।।

• किनञाक कथा सुनक नियम:-
किनयाँ ई पाँचो बीनी तीन बेरि बाद कथा सुनैत अछि जे तेरहो दिन भिन्न–भिन्न होइत अछि । पहिल दिन मौना पंचमीक कथा होइत अछि । कथा सुनलाक बाद अन्तमे एक बेर वाचो बीनी सुनिथ–

• वाचो बीनी
पुरैनिक पत्ता, झिलमिल लत्ता ताहि चढ़ि बैसली बिसहरि माता ।
हाथ सुपारी खोंईछा पान, विसहरि करती शुभ कल्याण ।

ई पढ़ि पूजित देवता सबकेँ प्रणाम क' बिनीक पोटरा के कलश पर राखि अपन कुलदेवता तखन श्रेष्ठ लोकनिकेँ प्रणाम कऽ पूजा करयवाला साड़ी बदलि तहन सासुरसँ पठाओल अरबा चाउर, चुड़लाई, दही आदिसँ ऐहब–कुमारिकेँ भोजन करौती तहन अपने भोजन करतीह । मधुश्रावणी पाबनि भरि किनयाँ साग निह खेतीह । बेर खन जाही–जूही, फूल पात इत्यादि लोढ़ि पएर–हाथ धो पूजाबला साड़ी पहिरि खोंईछामे बीनीक मोटरी लेती आ तीन बेरि पाँचो बीनी सुनतीह । एक बेरि पुन: वाचो बीनी सुनि पातिलमे दीप लेसतीह, धूप, दीप देथिन । गीत–गाइन लोकनि साँझमे साँझ आ कोबरक गीत गौती । सुविधा लेल पोथीक अन्तमे साँझ आ कोबरक गीत देल अछि ।

एहिना पूजा–कथा मधुश्रावणी (साओन सुदि तृतीया) सँ एक दिन पहिने तक होइत रहतैक । पहिल आ अन्तिम दिन छोड़ि आनू दिन ऐहब कुमारिकेँ खोआएब आवश्यक निह रहैत अछि ।

मधुश्रावणीसँ एक दिन पूर्व कथा समाप्त भेलाक बाद कलश छोड़ि सब देवताक विसर्जन भ' जएतिन । पिहलुका अरिपन आ सब पात पूड़ा हटाए पूजाक स्थानकेँ नीपि, पुन: पहिनहि जकाँ सब ओरिआओन हेबाक चाही । एहि दिन बरक उपस्थित आवश्यक छनिह । हुनक परिछिन होएतिन । प्रतिदिन पूजाक बाद बीनी सुनलाक उपरान्त जे भिन्न–भिन्न कथा होइत अछि से यथाक्रम दिनक अनुसार देल गेल अछि ।

मधुश्रावणी दिन पञ्चमीए दिन जकाँ सबटा पूजा यथा स्थान करिथ । आइ वर नव वस्त्र पहिरि नव पाग दोंपटा राखि किनञाक पीठ पर हाथ रखने पाछूमे बैसल रहथिन । आइ लीलीके तेरह टा लीलीमौनी उत्सर्ग होएत । जाहि मौनी सबमे निम्न वस्तु सब रहक चाही बड़की अड़ाँची, दक्षिणी, लवंग, ललका तथा करीका सूतसँ बान्हल दू गोट बन, एक लाल दोसर कारी, अएना, ककबा नव पीयर कपड़ा सँ बान्हल एक गोट डोका जकरा ऊपर सिन्दूर काजर लागल रहक चाही । आइ पबनैतिन गौड़ीके चूड़ा, दही, लाबा, अंकुरी, आम, कटहर, केरा, लताम, कुड़नी पनपिथया आदि उत्सर्गिथ ।

पूजा सम्पन्न भेलाक बाद तीन बेर बीनी सुनि श्रीकर राजाक कथा सुनिथ तहन गणेशजी द्वारा सोहाग मथबाक कथा सुनिथ तहन आम, बेल तथा नीम तीनू काठके बामा हाथे पकरि बामा जाँघ तर कऽ राखि तामामे राखल धान, धनी तथा पानि के मथैत रहिथ । कथा समाप्त भेला पर पुन: एक बेर बीनी सुनि जेठ छोटक अनुसार दस गोट अइहब के बामा हाथे तामासँ बहार कऽ धान आ धनीक सोहाग देल जाय । आब बरक हाथे किनयाक पुन: सिन्दुरदान कैल जाइछ तहन कुलक अनुसार टेमी देल जाय ।

• टेमी देबाक सामग्री ओ विधि:-
सरबा–१, टेमी–५, आरतक पात–७, पान–७ । तहन सरबामे घी राखि टेमी भिजाओल जाइछ । वर अपन दुनू हाथमे एक–एकटा पान आ आरतक पात लऽ लेथि पानक पात जाहिसँ तरमे परैक ओहिसँ किनञाक दुनू आँखि झाँपिथ । बिधकरी बीचमे भूर कैल पानक पात तथा आरतक पात किनञाक दुनू ठेहुन बामा हाथक लुल्हुआ आ दुनू पैर पर साटि देथि ताहि परसँ बीचमे भूर कैल आरतक पातके साटि देथि । ध्यान राखिथ जे आरतक पातक भूर बाटे चमरा देखार रहै तखन एक–एकटा बरैत टेमी पाँचो ठाम सटा देथि ।

तकर बाद जल लय पूजित देवता आ नाग लोकनिके विसर्जन करा किनञा वर पूजाक स्थानसँ उठि गोसाउनिके प्रणाम कऽ सिरहरमे सलामी देथि । किनञा अइहब कुमारिके भोजन करा अपने ओहि दिन आ राति अनोन भोजन करिथ । गौड़ी पूजाक बैन घरे–घर बाँटिथ । साँझमे साँझ आ कोवरक गीत हेतैक आ तकरा बाद निर्मल भसाओल जाय ।















14 जुल॰ 2026

Kohbar Geet

सिया के सजन मोरा बड़ा रे दुलरुआ लिरिक्स - Siya Ke Sajan Mora Bada Re Dularua in Lyrics

मिथिला धरोहर
(पारम्परिक मैथिली कोहबर गीत) 

सिया के सजन मोरा बड़ा रे दुलरुआ
रखितंहुँ हिया में लगाय हे
सिया के सजन मोरा बड़ा रे दुलरुआ
रखितंहुँ हिया में लगाय हे

एकहूँ पलक लय संग नहि छोरितहूँ
देखितहि नैना अघाय हे 
एकहूँ पलक लय संग नहि छोरितहूँ
देखितहि नैना अघाय हे 

फुलबा के हार जौं हम बनि जैतहँ
प्रीतम करल पटाय हे
फुलबा के हार जौं हम बनि जैतहँ
प्रीतम करल पटाय हे

पीताम्बर जौं हम बनि जैतहँ
लिहथत अंग लपटाय हे
पीताम्बर जौं हम बनि जैतहँ
लिहथत अंग लपटाय हे
सिया के सजन मोरा बड़ा रे दुलरुआ
रखितंहुँ हिया में लगाय हे
सिया के सजन मोरा बड़ा रे दुलरुआ
रखितंहुँ हिया में लगाय हे

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12 जुल॰ 2026

Gonu Jha Story

मैथिली कहानी - गोनू झा सँ भगवती प्रसन्न

मिथिला धरोहर
गोनू झा अपन ज्ञानसँ महाराजकेँ तँ प्रसन्न करिते छला। चोर-चुहारकेँ तँ छकबिते छला। सर-समाजक लोकक लग तँ अपना प्रत्युत्पन्नमतित्वसँ आदरणीय बनले छला, बेर पड़नि तँ देवी-देवताकेँ सेहो तेहन ठोका जवाब देथिन जे ओहो प्रसन्न भऽ उठथि। एक बेर भगवती कालीक समक्ष तेहन मनोरञ्जक प्रश्न रखलनि जे ओहो अपन भक्त गोनू झासँ प्रसन्न भऽ उठली आ हुनका वरदान देलनि जे बुद्धि-ज्ञानमे हुनका कहियो क्यौ ने पछाड़ि सकत।

भेलै जे गोनू झा नित्य भगवतीक पूजा करथि। एक दिन मनमे एलनि जे एते दिनसँ भगवतीक मनसँ विधि पूर्वक पूजा करै छी, मुदा ओ दर्शन नञि देलनि अछि। से आब पूजा तखने छोड़ब जखन ओ दर्शन देती। बस ई ठानि ओ पूजामे जुटि गेला। भरि-भरि दिन कालीक पूजा करऽ लगला। अहल भोरे पूजा शुरू करथि तँ सूर्य डूबि जेबाक बादे उठथि।

एक दिन पूजा-पाठक बाद ओछायनपर पड़ल छला कि हुनक पूजासँ प्रसन्न भऽ भगवती काली दर्शन देबा लेल पहुँचि गेलथिन। काली अपन विकराल स्वरूपमे आयल छली। हुनकर एक सय मुँह छलनि। हाथमे खप्पड़ आ खड्ग रखने छली। गोनू झा हलसि कऽ ओछायनपरसँ उठला आ हुनका प्रणाम केलनि। माताक दर्शनसँ अपनाकेँ कृत-कृत्य मानलनि। कनिञे कालमे गोनू झाक उत्साह बिला गेलनि आ ओ गम्भीर भऽ उठला। भगवती चौँकि उठली। एखने गोनू झा प्रसन्न छला तखन एकाएक चिन्तित किए भऽ गेला। भगवती कारण पुछलथिन तँ गोनू झा बजला- नञि कोनो खास बात नञि। हम ई सोचऽ लगलहुँ जे हमरा सभकेँ एक टा मुँह अछि आ दू टा हाथ अछि। तखन जँ कहियो सर्दी भऽ जाइत अछि तँ नाक पोछैत-पौछैत तबाह रहै छी। दू टा हाथसँ एक टा नाक नञि सम्हरैत अछि, तखन अहाँकेँ तँ एक सय मुँह आ दू टा हाथ अछि। जँ कहियो सर्दी भऽ जाइत होयत तँ दू हाथसँ एक सय नाक कोना सम्हरैत होयत, यैह सोचऽ लागल रही। गोनू झाक बात सुनि भगवती ठठा कऽ हँसि पड़ली आ हुनका आशीर्वाद देलथिन जे बुद्धि-ज्ञानमे दुनिञामे अहाँकेँ क्यौ ने पछारत। दोसर दिन गोनू झा दरबार गेला तँ महाराजकेँ सभटा बात कहलथिन तँ ओहो खूब हँसला आ हुनका एहि मनोरञ्जक बात लेल खूब बिदाइ देलनि। 

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2026 2027

मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा 2026 - Bhadwa Mithila Panchang 2026

मिथिला धरोहर

Mithila Panchang Bhadwa 2026

जुलाई-अगस्त 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 30 जुलाई, संध्या 06:08
• भदवा समाप्ति — 04 अगस्त, रात्रि 08:13

अगस्त-सितम्बर 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 26 अगस्त, प्रातः 01:33
• भदवा समाप्ति — 3 सितंबर, रात्रि 04:12

सितम्बर 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 23 सितंबर, दिन 08:58
• भदवा समाप्ति — 28 सितंबर, दिन 12:10


अक्टूबर 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 20 अक्टूबर, दिन 03:31
• भदवा समाप्ति — 25 अक्टूबर, रात्रि 08:04

नवम्बर 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 16 नवंबर, रात्रि 11:29
• भदवा समाप्ति — 21 नवंबर, रात्रि 03:55

दिसम्बर 2026 में मिथिला पंचांग के अनुसार भदवा (पंचक)
• भदवा आरम्भ — 13 दिसम्बर, रात्रि 05:40
• भदवा समाप्ति — 29 दिसम्बर, दिन 11:38

Hindi Story

विद्यापति रचित पुरुष परीक्षा का पूरा विवरण और संपूर्ण कथा | Vidyapati Purusha Pariksha Stories in Hindi

मिथिला धरोहर
ग्रंथ का ऐतिहासिक परिचय
मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति की लेखनी से जन्मा 'पुरुष-परीक्षा' केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि मानव जीवन की कसौटी है। हम जिस दुर्लभ संस्करण की बात कर रहे हैं, वह पंडित चंद्रकांत पाठक जी द्वारा अनुवादित 'भाषा गद्य-पद्य सहित' रूप है। इसका प्रकाशन ऐतिहासिक 'लक्ष्मीवेंकटेश्वर स्टीम प्रेस, कल्याण-मुंबई' द्वारा किया गया था, जो इसे हमारे साहित्यिक इतिहास की एक अनमोल धरोहर बनाता है।

11 जुल॰ 2026

2026 2027

Mithila Panchang 2026-27 PDF Download | मैथिली पंचांग 2026-2027 पीडीएफ डाउनलोड करू

मिथिला धरोहर
Mithila Panchang 2026-27 PDF Download: मिथिलांचल क' पारंपरिक आ बाजार में उपलब्ध प्रसिद्ध मिथिला पंचांग कें अहाँक सुविधा लेल पीडीएफ रूप में उपलब्ध कएल गेल अछि। ई पंचांग कें डाउनलोड क' क' अहाँ अपन मिथिलांचल क' रीति-रिवाज, विशिष्ट पावनि-तिहार, शुभ विवाह, मुंडन मुहूर्त आदि आसानी स' देखि सकैत छी। अखने नीचा देल गेल बटन स' मुफ्त पीडीएफ फाइल डाउनलोड करू।
साथ ही, एने तरहक शानदार मैथिली पंचांग, पावनि-तिहारक तिथि आ लोकगीत लिरिक्स (Lyrics) कें हमेशा अपन मोबाइले में देखबाक लेल प्ले स्टोर पर हमर बेहतरीन ऐप 'मिथिला धरोहर' डाउनलोड क' सकैत छी, जे अहाँक लेल उपलब्ध अछि।
फाइलक नाम: Mithila_Panchang_2026_27.pdf
कुल पेज: 35 पेजेस
फाइलक साइज: ~ 22.7 MB
प्रारूप: PDF (.pdf)
भाषा: मैथिली (Maithili)
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10 जुल॰ 2026

Dahakan Geet

राम लखन सन सुन्दर वर के जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे लिरिक्स - Ram Lakhan San Sundar Bad Ke Juni Padhiyoun Keo Gari He

मिथिला धरोहर
पारंपरिक मैथिली डहकन लोकगीत (Maithili Dahkan Geet)

राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे
केवल हाश विनोद में पुछियौन
उचित कथा दुई चारि हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे

पहिल कथा ई पुछियोन सखि सब
कहता कनिक बिचारि हे
गोर लक्ष्मण गोर कौसल्या
भरत राम किया कारि हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे


सुनु सखि एक अनुपम घटना
अचरज लागत भारि हे
खीर खाय बालक जनमौलन 
अवधपूरी के नारी हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे

अकध कथा कि बाजि सजनी
रघुकुल के गति न्यारी हे
साठि हजार पुत्र जनमौलनी 
सगरक नारी छीनारी हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे

स्नेहलता किछु आब ने कहियोन
अतबे करथि करारि हे
हंसी खुसी मिथिला सं जैता
ओतय सं भेजता महतारी हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे

गीत - स्नेहलता

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8 जुल॰ 2026

Maithili Lokgeet

चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई लिरिक्स - Chalu dekhan he daai raja janak ke jamai lyrics

मिथिला धरोहर
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
नैना जोगिन विध कनिको नै जांनय
नैना जोगिन विध बुझय नै जांनय
बुझय ने विध वयवहार
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई

बाम में कनियाँ दहिन छथि साइर
बाम में कनियाँ दहिन छथि साइर
कहथिन के हिनका बुझाय
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई

सखि सब मिलि जुलि पढ़य छथि गारी
सखि सब मिलि जुलि पढ़य छथि गारी
करै छथि माई के उद्धार
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई

6 जुल॰ 2026

5 जुल॰ 2026

Bishari Geet

कहाँ तोहर आसन बासन लिरिक्स. Kahan Tohar Aasan ब3aasan Lyrics

मिथिला धरोहर
पारंपरिक मैथिली बिषहरि गीत

कहाँ तोहर आसन बासन कहाँ निज धाम,
राम कहाँ निज धाम,
राम किनकर तु पाँचो बेटी, किये तोहर नाम,
राम किनकर तु पाँचो बेटी, किये तोहर नाम,

गंगा हमर आसन बासन गहबर निज धाम,
आहे गहबर निज धाम,
राम गौरी के पाँचो बेटी, बिषहरि नाम,
राम गौरी के पाँचो बेटी, बिषहरि नाम…..

नाव दे रे मलहा भैया रुपे करुआर,
राम रुपे करुआर
राम बिषहरि जेती मृतु भुवन हेतन अतिकार
राम बिषहरि जेती मृतु भुवन हेतन अतिकार

दीप दे रे कुम्हरा भैया पाट सूत बाती
राम पाठ सूत बाती
राम तेल दे रे तेलिया भैया लेसु प्रहलाद
राम तेल दे रे तेलिया भैया लेसु प्रहलाद

धन्य हि विद्यापति सुनु बिषहरि माई
राम सुनु बिषहरि माई
राम हमरो पर दानी रहबै हेबय सहाय
राम हमरो पर दानी रहबै हेबय सहाय

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जगदम्ब अहिं अबलम्ब हमर छोट छोट रोड़ी गरैया सिर के सिंदूर रे गवानवा सबहक सुधि अहाँ लै छी

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गोनू झा कहानी

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मधुश्रावणी पूजा कथा
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मधुश्रावणी पहिल दिन कथा मधुश्रावणी पांचम दिन कथा

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