अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
10 जुल॰ 2026
Dahakan Geet
पारंपरिक मैथिली डहकन लोकगीत (Maithili Dahkan Geet)
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे
केवल हाश विनोद में पुछियौन
उचित कथा दुई चारि हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे
पहिल कथा ई पुछियोन सखि सब
कहता कनिक बिचारि हे
गोर लक्ष्मण गोर कौसल्या
भरत राम किया कारि हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे
सुनु सखि एक अनुपम घटना
अचरज लागत भारि हे
खीर खाय बालक जनमौलन
अवधपूरी के नारी हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे
अकध कथा कि बाजि सजनी
रघुकुल के गति न्यारी हे
साठि हजार पुत्र जनमौलनी
सगरक नारी छीनारी हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे
स्नेहलता किछु आब ने कहियोन
अतबे करथि करारि हे
हंसी खुसी मिथिला सं जैता
ओतय सं भेजता महतारी हे
राम लखन सन सुन्दर वर के
जूनि पढ़ियौन केओ गारि हे
गीत - स्नेहलता
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8 जुल॰ 2026
Maithili
Lokgeet
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
नैना जोगिन विध कनिको नै जांनय
नैना जोगिन विध बुझय नै जांनय
बुझय ने विध वयवहार
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
बाम में कनियाँ दहिन छथि साइर
बाम में कनियाँ दहिन छथि साइर
कहथिन के हिनका बुझाय
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
सखि सब मिलि जुलि पढ़य छथि गारी
सखि सब मिलि जुलि पढ़य छथि गारी
करै छथि माई के उद्धार
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
7 जुल॰ 2026
Hindi Story
ग्रंथ का ऐतिहासिक परिचय
मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति की लेखनी से जन्मा 'पुरुष-परीक्षा' केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि मानव जीवन की कसौटी है। हम जिस दुर्लभ संस्करण की बात कर रहे हैं, वह पंडित चंद्रकांत पाठक जी द्वारा अनुवादित 'भाषा गद्य-पद्य सहित' रूप है। इसका प्रकाशन ऐतिहासिक 'लक्ष्मीवेंकटेश्वर स्टीम प्रेस, कल्याण-मुंबई' द्वारा किया गया था, जो इसे हमारे साहित्यिक इतिहास की एक अनमोल धरोहर बनाता है।
6 जुल॰ 2026
Geet Sangrah
» बेटी के वियोग हम कोना विधि सहबई
» बिलखि-बिलखि काने, सती हे सुलोचना राम / सुलोचना विलाप
» केकयी के पग छानी, पूछथि भरत कानी आहे / भरत विलाप
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5 जुल॰ 2026
Bishari Geet
• पारंपरिक मैथिली बिषहरि गीत
कहाँ तोहर आसन बासन कहाँ निज धाम,
राम कहाँ निज धाम,
राम किनकर तु पाँचो बेटी, किये तोहर नाम,
राम किनकर तु पाँचो बेटी, किये तोहर नाम,
गंगा हमर आसन बासन गहबर निज धाम,
आहे गहबर निज धाम,
राम गौरी के पाँचो बेटी, बिषहरि नाम,
राम गौरी के पाँचो बेटी, बिषहरि नाम…..
नाव दे रे मलहा भैया रुपे करुआर,
राम रुपे करुआर
राम बिषहरि जेती मृतु भुवन हेतन अतिकार
राम बिषहरि जेती मृतु भुवन हेतन अतिकार
दीप दे रे कुम्हरा भैया पाट सूत बाती
राम पाठ सूत बाती
राम तेल दे रे तेलिया भैया लेसु प्रहलाद
राम तेल दे रे तेलिया भैया लेसु प्रहलाद
धन्य हि विद्यापति सुनु बिषहरि माई
राम सुनु बिषहरि माई
राम हमरो पर दानी रहबै हेबय सहाय
राम हमरो पर दानी रहबै हेबय सहाय
4 जुल॰ 2026
Gauri Geet Lyrics
मैथिली गौरी लोकगीत
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गिरजा पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गिरजा पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
आसन कम्बल हम अपने सं आनब
आसन कम्बल हम अपने सं आनब
आहाँ सिंघासन लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
आहाँ सिंघासन लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
फूल बेलपत्र हम अपने सं आनब
फूल बेलपत्र हम अपने सं आनब
आहाँ गंगाजल लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
आहाँ गंगाजल लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
सिंदूर सपरि हम अपने सं आनब
सिंदूर सपरि हम अपने सं आनब
आहाँ नबेद लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
आहाँ नबेद लेने ऐब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजीए पूजी भाग्य जे मांगब
गौरी पूजीए पूजी भाग्य जे मांगब
मांगी लेब दीर्घ अहिवात यौ रघुनंदन स्वामी
मांगी लेब दीर्घ अहिवात यौ रघुनंदन स्वामी
गौरी पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
गिरजा पूजन हम जायब यौ रघुनंदन स्वामी
Maithili Lokgeet
पारंपरिक मैथिली खोइछा खोलबाक गीत
कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ
कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ
भैया के होयत बियाह हे
भैया के होयत बियाह हे
भौजो के खोंइछा में हीरा मोती आयत
भौजो के खोंइछा में हीरा मोती आयत
ओहि लए गहना घडाऐब हे
ओहि लए गहना घडाऐब हे
एहन दरिद्र घर भैया बियाहलनी
एहन दरिद्र घर भैया बियाहलनी
भौजो के खोंइचा दुभि धान हे
भौजो के खोंइचा दुभि धान हे
कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ
कतेक दिन सं असरा लगयलहुँ
भैया के होयत बियाह हे
भैया के होयत बियाह हे
2 जुल॰ 2026
Geet Sangrah
पारम्परिक मैथिली चैती लोकगीत संग्रह
Geet Sangrah
• कजरी गीत लिरिक्स संग्रह
● सावन मास में गाओल जाय वाला मैथिली कजरी गीत बरसात के मौसम, मेघ के गति आ प्रियतम स भेंट के तड़प पर आधारित गीत अछि।
24 जून 2026
Maithili Lokgeet
अहाँ ई बिध केए अंगा पैर दिअ
अहाँ ई बिध केए अंगा पैर दिअ
एकटा बात हमर कनी सुनी लिअ
अहि ठामक ई बिध प्रशिद्ध अछि
अहि ठामक ई बिध प्रशिद्ध अछि
माय बहिन केर नाम लिअ
माय बहिन केर नाम लिअ
एकटा बात हमर कनी सुनी लिअ
बिना नाम जनने जननी के
बिना नाम जनने जननी के
गावति कोना गीतगाईंन धिया
गावति कोना गीतगाईंन धिया
एकटा बात हमर कनी सुनी लिअ
मूंद मन्द हँसि कहलनि मधुस्वर
मूंद मन्द हँसि कहलनि मधुस्वर
ताकि तिरक्षि मुसकाती सिया
ताकि तिरक्षि मुसकाती सिया
एकटा बात हमर कनी सुनी लिअ
एकटा बात हमर कनी सुनी लिअ
अहाँ ई बिध केए अंगा पैर दिअ
अहाँ ई बिध केए अंगा पैर दिअ
एकटा बात हमर कनी सुनी लिअ
एकटा बात हमर कनी सुनी लिअ
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