आँचरक कोर पकरिने रहितौं,
तोहर स्नेह, दुलार पाबय लेल
माँ गई हम नेना रहितौं।
कोरा में घूमीतौं।
तोहर ऑंगुरी पकैर के चलीतौं
माँ गई हम नेना रहितौं।
बौआ कहि के, सुग्गा कहि के
अपन पांजर लागी सुतयतैं
माँ गई हम नेना रहितौं।
नै लागय दैं हमरा केकरो नजैर
तूँ जिनगी भरी एहिना बचबितैं
माँ गई हम नेना रहितौं।
दूध-भात खयतौं हम तोरे हाथ
तोहर संग नै कहियो छोरितौं
माँ गई हम नेना रहितौं।
✍️ प्रभाकर मिश्रा ' ढुन्नी '

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