अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
16 अप्रैल 2020
जगत विदित बैद्यनाथ लिरिक्स - Jagat Vidhit Baidyanath Lyrics
रचनाकार - श्री विद्यापति
जगत विदित बैद्यनाथ, सकल गुण आगर हे
तोहें प्रभु त्रिभुवन नाथ, दया कर सागर हे
अंग भसम शिर गंग, गले बिच विषधर हे
लोचन लाल विशाल, भाल बिच शशिधर हे
जानि शरण दीनबन्धु, शरण धय रहलहूँ हे
दया करू मम प्रतिपाल, अगम जल पड़लहूँ हे
सुनाँ सदा शिव गोचर, मम एहि अवसर हे
कौन सुनत दुःख मोर, छोड़ी तोहि दोसर हे
कार नाट निज दोष, कतेक हम भोखव हे
तोहें प्रभु त्रिभुवन नाथ, अपने कय राखब हे
Tags
Vidyapati Geet
शेयर करू
नव पोस्ट
⏳
पुरान पोस्ट
⏳
https://mithiladharohar.blogspot.com/2025/12/bilakhi-bilakhi-kane-bekal-bhart-ji.html
https://mithiladharohar.blogspot.com/2020/04/mithila-wonderful-pic.html
❤ अहाँक इहो पसंद आयत:
⏳
Tags:
Vidyapati Geet
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !