अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
14 जुल॰ 2022
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अगहन दिन उत्तम सुख-सुन्दर लिरिक्स | विद्यापति
अगहन दिन उत्तम सुख-सुन्दर लिरिक्स | विद्यापति
रचनाकार - विद्यापति
बारहमासा गीत
अगहन दिन उत्तम सुख-सुन्दर घर-घर सारी समाय
रतन बयस सँ मोन सुख सुन्दर से छोड़ने कोना जायव
ललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…
पूष कोठलिया ऊँच अटरिया, तकिया तुराय
अतर, गुलाब, सेन्ट गमकायब अतेक मजा कहाँ पाएब
ललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…
माधक सेला सचे हूमेला जैब बिदेसर धाम
पान सुपारी जरदा खाएब घुमब शहर बजार
ललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…
फागून फगुआ दूनू मिली खेलब घोरब रंग अबीर
ललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…
अतर गुलाब, सेन्ट गमकाएब घोटि-घोटि धारब अबीर
ललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…
चैतहिं बेली फुलय बनबेली, अद फुलय कचनार
सेहो फूल लोढि-लोढि हार बुनाएब भेजब पीयाजी के पास
ललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…
बैसाखक ज्वाला करे मोन ब्योला सोने मुढी बेनिया डोलारब
कोमल हाथ सँ बेनिया डोलाएब अतेक मजा कहाँ पाएब
ललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…
जेठहिं कान्त कतय गमाओल आयल अषाढ़क मास
लाल रे पलंगिया घरहिं ओछाएब सेवा करब अपार
ललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…
सावन-भादब के मेघबा गरजै जुनि मेघ बरसु आजु
कोना क बालमु पार उतरताह नै रे नाव करुआर
ललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…
आसिन-कातिक के पर्व लगतु हैं सब सखी गंगा-स्नान
बिना बालमुजी के नीको ने लागय
पुरि गेल बारह मास
ललन ससुरारि छोड़ि कोना जाएब…
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