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19 नव॰ 2015

मिथिला संस्कृति के राग सामा-चकेबा पावैन शुरू

मिथिला धरोहर : मिथिलांचलकऽ महान लोक पर्व सामा-चकेबा Sama Chakeva छैठकऽ पारन सँ शुरु होईत अछि आ पूर्णिमा धरि चलैत अछि। भाई-बहिनकऽ अद्भुत प्रेमकऽ प्रतीक लोक उत्सव सामा-चकेबा के रूप में सेहो मनायल जाइत अछि। जेकर सुरुवात महिला द्वारा गीत-नाद सँ होइत अछि, आयल कातिक मास, सामा लेल अवतार', 'सामा-चकेबा खेले गेली..', 'वृंदावन में आग लगले कियो ने बुझावे..', साम चक, साम चक अयऽह हे... आदि गीत गाबैत महिला सभ मईट सँ बनायल गेल सामा, चकेवा, वृन्दावन, चुगिला सहितक मूर्ति सभ बना कऽ प्रत्येक राति खेत तक जाइत छथि आ सामा खेलैत छथि।

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जतय चुगला-चुगली केँ जरायल जाइत अछि। भगवान कृष्णक पुत्रीक नाम सँ खेलल जाएवाला सामा खेलला सँ भाई केँ औरदा बढएकेँ जनविश्वास अछि। ग्रामीण आ शहरी इलाका मे लोग घरकऽ आगो एही लोक पर्व केँ मनाबैत छथि। एकर अलावा भाई द्वारा मईट सँ बनल मूर्ति कऽ तोड़ल जाइत अछि। पर्व कऽ लऽ केँ महिला म खासा उत्साह रहैत अछि। मिथिलाकऽ संस्कृति कऽ अनुसार कार्तिक पूर्णिमा कऽ अवसर पर इ पर्व मनायल जाइत अछि। मान्यता अछि जे अय दिन सामा कऽ विदाई देल जाइत अछि ऑउर अगिला वर्ष आवैय कऽ नोत देल जाइत अछि। संस्कृति कऽ संगे लोग सुख-समृद्धि आ भाई कऽ रक्षा कऽ प्रार्थना सेहो करैत छथि।

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