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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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30 अप्रैल 2021

ससन-परस खसु अम्बर रे देखल धनि देह - विद्यापति Sasan Paras Khasu Ambar Re Lyrics

ससन-परस खसु अम्बर रे देखल धनि देह। 
नव जलधर-तर चमकए रे जनि विजुरी-देह॥ 

आज देखलि धनि जाइते रे मोहि उपजल रंग। 
कनक-लता जनि संचर रे महि निर अवलंब॥ 

ता पुन अपरुब देखल रे कुच-जुग अरबिंद। 
बिगसित निह किछु करन रे सोझाँ मुख-चंद॥ 

विद्यापति कवि गाओल रे रस बुझ रसमंत। 
देवसिंह नृप नागर रे हासिनि देइ कंत॥ 

रचनाकार - विद्यापति

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