सोमवार, 7 मार्च 2022

मिथिला पेंटिंग के गोदना शैली के पहिल विश्व प्रशिद्ध कलाकार चानो देवी

गोदना चित्रकलाक शुरुबात करबाक श्रेय चानो देवी ( Godna Painting Artist Chano Devi ) के जाइत अछि। हुनकर जन्म 20 अप्रैल 1955 के जयनगर, मधुबनी स्थित गांव रमना के एकटा मजदूर परिवार मे भेलनि। हुनकर माता-पिताक नाम रवनी देवी आ सूरज पासवान छलनी। 1967 मे चानो देवी के बियाह मधुबनी जिलाक जितवारपुर गामक निवासी रौदी पासवान सं भेलनि, जतए ओ गोदना चित्र बनेनाय सिखबाक संगे खुद के स्थापित सेहो केलनि। 


तमाम जर्नर्ल्स एवं रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1972 मे जहन जर्मन एंथ्रोपोलॉजिस्ट एरिका मोजर मिथिला चित्रकला पर फिल्मांकन के उद्देश्य सं जितवारपुर अयली आ सीता देवी के घर रुकली, तहन ओतय हुनक मुलाकात चानो देवी सं भेलैन। ओ चानो देवी के देह पर बनल गोदना चित्र के देखली आ हुनका कागज पर उतारबाक सलाह देलनि।


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एरिका मोजर के सलाह आ सीता देवी के प्रेरणा सं चानो देवी गोदना चित्र के कागज पर बनेनाय शुरू केलनि। एकटा अड़चन इहो रहल जे चानो के देह पर बेसी गोदना नै छलैन। तहन रौदी पासवान रांटी गांव सं एकटा नटिन जायदा के ल'क घर एलैथ। जायदा गोदना गोदय मे माहिर छलैथी। रौदी के आग्रह पर जायदा चानो देवी के कतेको दिन धरि कागज पर गोदना चित्र बनेनाय सिखेलैथ। यैह वजह ऐछ जे चानो आजीवन जायदा के अपना गुरु मानैत रहलीह।

छवि साभार - रविन्द्र दास
बेसी सं बेसी गोदना चित्र बनेनाय सीखबाक उपरांत जल्दीए चानो देवी अपन चित्र मे लोकगाथा राजा सलहेस, मोतीराम, बुधेश्वर, दौना मालिन, रेशमा-कुसमा, चूहड़हल आदि के चित्रण शुरू केलथि। इ चरित्र गोदना चित्रकलाक केंद्रीय पात्र बैन उभरल। ओहि दौरान भास्कर कुलकर्णी हुनकर चित्र के देखलैथ आ बहुते प्रभावित भेलैथ। ओ  चानो देवी के चित्र खरीदाबाक संगे हुनका प्रोत्साहित सेहो करैत रहलाह।

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गोदना चित्र बनेबाक सं पूर्व चानो देवी भित्ति चित्रण बनैत छलथि। जहन ओ कागज पर गोदना चित्र बनेनाय शुरू केलनि, तहन ओहि कागजक खरखर सतह पर गोबरक घोल के प्रयोग केलनि जाहिमे बगुरक गोंद मिलल होइत छल। अहि दौरान कतेको बेर ओ कारी रंगक ठोप द के आकृति के साजबैत छलथि।


चानो देवी के इ तकनीक अस्सी के दशक के अंत धरि बहुते लोकप्रिय रहलनी आ ओकर प्रभाव जितवारपुर के ज्यादातर लोक कलाकार पर स्पष्ट रूप सं देखाइत छल। अहि दशक'क शुरुआत मे जापान सं मधुबनी आयल टोकिये हासेगावा के रौदी पासवान सं भेंट होइत अछि। ओहो चानो देवी के कलात्मक क्षमता सब बड़ प्रभावित होइत छैथ आ हुनका प्रोत्साहित करैत छथि।

चानो देवी के कलात्मक क्षमताक अंदाजा अहि सं भेटैत अछि जे हुनका द्वारा बनायल चित्र फ्रांस, अमरीका, जर्मनी के गैलरि आ जापान'क मिथिला म्यूजियम मे संकलित अछि। एकर अलावा हुनकर चित्र पटना, रांची, मुंबई, दिल्ली, कलकत्ता, ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, और गोवा मे प्रदर्शित कैल गेल अछि। 

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मिथिला चित्रकला मे हुनकर योगदान के देखैत वर्ष 1984-85 के लेल हुनका राज्य पुरस्कार आ 2007 मे हुनका राष्ट्रीय पुरस्कार सं सम्मानित कैल गेलनि। 


चानो देवी के देहांत 2009 मे कैंसर सं भ गेलनि।


(मैथिली अनुवाद - फ़ोककार्टोपीडिया)

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