अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
30 दिस॰ 2021
आदरे अधिक काज नहि बन्ध - विद्यापति
आदरे अधिक काज नहि बन्ध,
माधव बुझल तोहर अनुबन्ध।
आसा राखह नयन पठाए,
कत खन कउसलें कपट नुकाए।
चल चल माधव तोहें जे सयान,
ताके बोलिअ जे उचिज न जान।
कसिअ कसउटी चिन्हिअ हेम,
प्रकृति परेखिअ सुपुरूख पेम।
सउरभें जानिअ कमल पराग,
नयने निवेदिअ नव अनुराग।
भनइ विद्यापति नयनक लाज,
आदरें जानिअ आगिल काज।
रचनाकार : विद्यापति
शेयर करू
नव पोस्ट
⏳
पुरान पोस्ट
⏳
https://mithiladharohar.blogspot.com/2022/01/gupt-kali-mandir-kasba-purnia.html
https://mithiladharohar.blogspot.com/2021/12/laliya-ge-laliya-full-lyrics.html
❤ अहाँक इहो पसंद आयत:
⏳
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !