अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
3 दिस॰ 2021
बड़ि जुड़ि एहि तरुक छाहरि ठामे ठामे - विद्यापति
बड़ि जुड़ि एहि तरुक छाहरि,
ठामे ठामे बस गाम।
हम एकसरि, पिआ देसाँतर,
नहि दुरजन नाम।
पथिक हे, एथा लेह बिसराम।
जत बेसाहब किछु न महघ,
सबे मिल एहि ठाम।
सासु नहि घर,
पर परिजन ननन्द सहजे भोरि।
एतहु पथिक विमुख
जाएब तबे अनाइति मोरि।
भन विद्यापति सुन तञे जुवती जे पुर परक आस।
रचनाकार : विद्यापति
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