अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
26 दिस॰ 2021
परतह परदेस, परहिक आस - विद्यापति
परतह परदेस, परहिक आस।
विमुख न करिअ, अबस दिस बास।
एतहि जानिअ सखि पिअतम-कथा।
भल मन्द नन्दन हे मने अनुमानि।
पथिककेँ न बोलिअ टूटलि बानि।
चरन-पखारन, आसन-दान।
मधुरहु वचने करिअ समधान।
ए सखि अनुचित एते दुर जाए।
आओर करिअ जत अधिक बड़ाइ।
रचनाकार : विद्यापति
शेयर करू
नव पोस्ट
⏳
पुरान पोस्ट
⏳
https://mithiladharohar.blogspot.com/2021/12/laliya-ge-laliya-full-lyrics.html
https://mithiladharohar.blogspot.com/2021/12/biography-of-ganga-devi.html
❤ अहाँक इहो पसंद आयत:
⏳
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !