अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
12 अग॰ 2016
कामिनि करए सनाने लिरिक्स - विद्यापति
Kamini Kare Sanane
कामिनि करए सनाने।
हेरितहि हृदय हनए पँचबाने॥
चिकुर गरए जलधारा।
जनि मुख-ससि डरें रोए अँधारा॥
कुच-जुग चारु चकेवा।
निअ कल मिलत आनि कोने देवा॥
ते संकाएँ भुज-पासे।
बाँधि धएल उड़ि जाएत अकासे॥
तितल बसन तनु लागू।
मुनिहुक मानस मनमथ जागू॥
सुकवि विद्यापति गावे।
गुनमति धनि पुनमत जन पावे॥
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