अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
9 दिस॰ 2016
सुंदरि तुअ मुख मंगल दाता लिरिक्स - विद्यापति
Sundari Tu Mukh Mangal Data Lyrics
बिगलित चिकुर मिलित मुखमंडल चाँद बेढ़ल घनमाला॥
मिनिमय कुंडल स्रवन दुलित भेल धाम तिलक बहि गेल॥
सुंदरि तुअ मुख मंगल दाता॥
रति-विपरीत समर जदि राखब। कि करब हर धाता॥
किंकिनि किनिकिनि कंकन कनकन। घनघन नूपुर बाजे॥
रति-रन मदन पराभव मानल जय-जय दुंदुभि बाजे॥
तिल एक जघन सघन रब करइत होअल सैनिक भंग॥
विद्यापति कवि ई रस गाबए जामुन मीललि गंग॥
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