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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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28 दिस॰ 2025

क्षमा करू जगदम्बे मैया लिरिक्स - Kshama Karo Jagdambe Maiya Lyrics

क्षमा करू जगदम्बे मईया
केने बड़ अपराध छी
निर्बल सन्तानक रक्षक हे
माई अहाँ निर्बाध छी

भजन भाव कहियो नै केलौ
फस क अहि जनजाल मे
जीवन भर ओझरैले रहलौं
व्यर्थक माया जाल मे
दयामयी दि सरण अपन अछि 
दु पल के ई राज की
निर्बल सन्तानक रक्षक हे
माई अहाँ निर्बाध छी
क्षमा करू जगदम्बे मईया

विपदिक मारल कण्ठ न खूजै
अहाँ बिना हम जाऊ कतै
अहिं कहु हे माई अहाँ बिनु
दोसर अछि के माई एतए
गाबि सकै ने गीत अहाँ के
से कण्ठक सुर साज की
निर्बल सन्तानक रक्षक हे
माई अहाँ निर्बाध छी
क्षमा करू जगदम्बे मईया

काम क्रोध मद मोह लोभ सं
जर जर अछि पापी काया
मुदा अहिं छी असुर भयावनी
भक्त उबारिणी जग माया
विपदही मे जीवन जौं बितै
तैं जीवन के काज की 
निर्बल सन्तानक रक्षक हे
माई अहाँ निर्बाध छी
क्षमा करू जगदम्बे मईया

महीखा मर्दनी विघ्न विनाशिनी
शिवा भवानी तारा छी
सरणागत हम चरण चंद्रमणि 
मईया अहिं सहारा छी
तारू नहीं हे माई सरन सं
राखु हमरो लाज इ
निर्बल सन्तानक रक्षक हे
माई अहाँ निर्बाध छी
क्षमा करू जगदम्बे मईया

गीतकार: चंद्रमणि झा

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