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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

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23 जून 2020

मैथिली किस्सा : गोनू झा के नोकर

गोनू झाक बुद्धिमत्ताक खिस्सा मिथिलाक घर-घर मे आइयो कहल-सुनल जा रहल अछि । गोनूक नोकर रहनि - वसुआ। वसुआ रहय सोझमतिया लोक आ ओकरा एहि बातक मलाल रहैक जे अपन गिरहथे जेंका ओहो चन्सगर किएक ने अछि। ओ बेर-बेर गोनू सँ आग्रह करैक - “मालिक हमरो अपन किछ गुण सिखा दिअ ताकि अहीं जेंका हमरो नाम हुअय। लोक कहैत अछि जे गोनू अपने केहेन बुधियार छथि परन्तु हुनकर नोकर वसुआ केहेन बकलेल अछि आ ई गप्प हमरा एको रत्ती नीक नहि लगैत अछि।” गोनू ओकरा आई-काल्हि करैत टारैत रहथिन्ह। परन्तु एक दिन वसुआ अड़ि गेल जे आई हम जरुर अहाँ सँ किछु गुण सीखब। गोनू ओकरा हर लऽ कऽ खेत जाय कहलथिन्ह आ पूछि देलथिन्ह जे तों आई की जलखै करबें? “हलुआ लेने आयब गिरहथ” वसुआ जबाव देलक। “ठीक छै” कहैत गोनू ओकरा विदा केलनि आ संगहि गोनू इहो कहलनि जे समय अयला पर हम तोरा सबटा सिखा देबौक। आश्वासन पाबि वसुआ हर लऽ कऽ खेत चलि गेल। ओ खूब मोन सँ खेत जोतलक। ओकरा उम्मीद छलैक जे मालिक आई हलुआ लऽ कऽ आबि रहल छथि। तथापि गोनू जलखैक बेर मे नहि पहुँचलाह। जखन करीब एगारह बजलैक तँ एकटा बड़का बरतन माथ पर लदने गोनू हाजिर भेलाह। हुनक हाव-भाव सँ लगैन जे हो ने हो बरतन मे बहुत रास हलुआ छैक। ओ बर्तन नीचाँ रखलाह आ वसुआ कें जलखै क’ लेबाक लेल कहलथिन्ह।

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वसुआ हाथ मुँह धोलक आ बैसि गेल जलखै करय। तथापि जलखै करै सँ पहिने ओ पुछ्लक जे मालिक एतेक देरी किएक भऽ गेल? हलुआ बनबै मे देरी तँ लगिते छैक – गोनूक सोझ जबाव छल। परन्तु जखनहि गोनू बरतनक ढक्कन हटेलनि तँ वसुआ देखलक जे ओहि मे मात्र एक कौर जोकरक हलुआ छैक। ओ तामसे लाल-पीयर भऽ गेल आ बाजय लागल। तथापि गोनू ओकरा बुझबैत कहलथिन्ह जे देखह! कनिये छैक ताहि सँ की। छैक तँ कतेक नीक। खा के देखहक। वसुआ व्यर्थ मे बहस करब उचित नहि बुझलक। ओ बुझि गेल जे गोनू ओकरा आई छका देलनि अछि। ओ चुपचाप जे हलुआ छलैक से खेलक आ अपन काज मे लागि गेल।

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दू-चारि दिनक बाद फेर वसुआ पहुँचल दोसर खेत मे हर लऽ कऽ। ओहो आब नियारि लेने छल जे गोनू सँ बदला जरूर लेत। ओहि दिन ओ कनिके दूर मे लगातार हर जोतैत रहल। जखन गोनू जलखै लऽ कऽ अयलाह तँ बेस तमसेलाह जे तों भिनसर सँ एतबे खेत किएक जोतलें। आब वसुआ हुनका बुझबय लागल – “मालिक! बेसक हम कम्मे खेत जोतलहुँ अछि परन्तु देखियौक जे कतेक सुन्दर जोतलौं अछि। माटि कें कतेक मेंही कऽ देलियैक अछि। गर्दा-गर्दा भऽ गेल अछि एतेक दूरक खेत।” गोनू वसुआक गप्प सुनैत रहलाह आ चुप्प रहलाह। जखन वसुआक गप्प खतम भऽ गेल तँ ओ ओकरा गला लगा लेलाह आ आशीर्वाद देलनि जे एहिना बुधियार बनल रह। वसुआ बुझि गेल जे ओहि दिनक हलुआ वला घटना मालिक हमरे बुझेबाक वास्ते कयने रहथि। आब गोनुए सदृश हुनक नोकर वसुआ सेहो बुधियार भऽ गेल आ शीघ्रे ओकर नाम परोपट्टा मे पसरि गेलैक।

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