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12 जुल॰ 2026
Gonu Jha Story
गोनू झा अपन ज्ञानसँ महाराजकेँ तँ प्रसन्न करिते छला। चोर-चुहारकेँ तँ छकबिते छला। सर-समाजक लोकक लग तँ अपना प्रत्युत्पन्नमतित्वसँ आदरणीय बनले छला, बेर पड़नि तँ देवी-देवताकेँ सेहो तेहन ठोका जवाब देथिन जे ओहो प्रसन्न भऽ उठथि। एक बेर भगवती कालीक समक्ष तेहन मनोरञ्जक प्रश्न रखलनि जे ओहो अपन भक्त गोनू झासँ प्रसन्न भऽ उठली आ हुनका वरदान देलनि जे बुद्धि-ज्ञानमे हुनका कहियो क्यौ ने पछाड़ि सकत।
भेलै जे गोनू झा नित्य भगवतीक पूजा करथि। एक दिन मनमे एलनि जे एते दिनसँ भगवतीक मनसँ विधि पूर्वक पूजा करै छी, मुदा ओ दर्शन नञि देलनि अछि। से आब पूजा तखने छोड़ब जखन ओ दर्शन देती। बस ई ठानि ओ पूजामे जुटि गेला। भरि-भरि दिन कालीक पूजा करऽ लगला। अहल भोरे पूजा शुरू करथि तँ सूर्य डूबि जेबाक बादे उठथि।
एक दिन पूजा-पाठक बाद ओछायनपर पड़ल छला कि हुनक पूजासँ प्रसन्न भऽ भगवती काली दर्शन देबा लेल पहुँचि गेलथिन। काली अपन विकराल स्वरूपमे आयल छली। हुनकर एक सय मुँह छलनि। हाथमे खप्पड़ आ खड्ग रखने छली। गोनू झा हलसि कऽ ओछायनपरसँ उठला आ हुनका प्रणाम केलनि। माताक दर्शनसँ अपनाकेँ कृत-कृत्य मानलनि। कनिञे कालमे गोनू झाक उत्साह बिला गेलनि आ ओ गम्भीर भऽ उठला। भगवती चौँकि उठली। एखने गोनू झा प्रसन्न छला तखन एकाएक चिन्तित किए भऽ गेला। भगवती कारण पुछलथिन तँ गोनू झा बजला- नञि कोनो खास बात नञि। हम ई सोचऽ लगलहुँ जे हमरा सभकेँ एक टा मुँह अछि आ दू टा हाथ अछि। तखन जँ कहियो सर्दी भऽ जाइत अछि तँ नाक पोछैत-पौछैत तबाह रहै छी। दू टा हाथसँ एक टा नाक नञि सम्हरैत अछि, तखन अहाँकेँ तँ एक सय मुँह आ दू टा हाथ अछि। जँ कहियो सर्दी भऽ जाइत होयत तँ दू हाथसँ एक सय नाक कोना सम्हरैत होयत, यैह सोचऽ लागल रही। गोनू झाक बात सुनि भगवती ठठा कऽ हँसि पड़ली आ हुनका आशीर्वाद देलथिन जे बुद्धि-ज्ञानमे दुनिञामे अहाँकेँ क्यौ ने पछारत। दोसर दिन गोनू झा दरबार गेला तँ महाराजकेँ सभटा बात कहलथिन तँ ओहो खूब हँसला आ हुनका एहि मनोरञ्जक बात लेल खूब बिदाइ देलनि।
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27 सित॰ 2023
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गामक उचक्का सभ ओही समय इनार पर नहाइत छल जखन गामक स्त्रीगन सभ पानि भरय आबैत छल। एहि उचक्का मे मुला नामक एकटा छौरा सबसँ बेसी बदमाश छल। ओ अपन आठ-दस संगी सभक संग भरि दिन इनार पर रहैत छल। भांग आ गांजा के आदी मुला के टीम गामक लड़की आ महिला के जीनाय दुर्लभ कऽ देने छल। जँ कियो शिकायत वा विरोध करैत छल तऽ झगड़ा पर उतारू भऽ जाइत छल।
मुला के एहि हरकत सं सगरो गाम परेशान छल। मुदा ओ गामक साहूकार अंजनी मांझीक एकलैता बेटा छल। अंजनी माझी ब्याज पर पूरा गाम मे पाइ लगेने छल।
"की भेलै! जबान चंचल छौरा छै। मजाके टा तऽ करैत छैक। ककरो सँ किछु छीन तऽ नै लैत छै। खबरदार जे कियो किछ कहलक।"
मुदा मुला के माय के अपन बेटाक ई करतूत नीक नै लागैत छल। ओ ओकरा लाख बुझबैत छलीह मुदा मुला हुनकर बात नहि सुनैत छल। आ हाइर के ओ एक दिन गोनू झाक शरण मे चलि गेली।
"पंडित जी, हमर बेटा तऽ हाथ सँ निकलल जा रहल अछि।" मुलाक माय कानैत बजलीह - "ओकरा बाप के कुनो चिंता नै छै। उल्टा ओकर खराब आदतिक समर्थन करैत छैक। मुदा हम ओकर माय छी आ नीक बेटाक कामना करैत छी। आब एकरा अहाँ टा मात्र ठीक कऽ सकैत छी।
'भौजी, यैह उम्र मे बच्चा सुधड़ैत आ बिगाड़ैत छै। अहाँ निश्चिंत रहू, हम ओकरा बुझेबाक पूरा प्रयास करब। काली माँ चाहथि तऽ एके बेरा में ओकर बुद्धि ठिकाना पर आबि जायत। हमरा मोन मे एकटा योजना अछि मुदा ताहि मे हमरा अहाँक मदद चाही।
'हम अपन बेटाकेँ नीक बनेबाक लेल जे किछु क' सकब से करब।'
"ठीक छै। हम कहब जे की करबाक चाही।"
गोनू झा हुनका अपन योजना बतौलनि। दोसर दिनक बात अछि। मुला आ ओकर उधम मचाबय बला संगी सभ भोरेसँ इनार पर बैसल गांजा पीबैत आ उल्टा-सीधा गप्प कऽ छल।
अचानक गामक लड़की सभक एकटा समूह पानि भरय लेल आबैत देखायल। ओहि समूह में एकटा घूंघटधारी महिला सेहो छलीह। घूंघट वाली महिलाक गागर चानीक छलैक आ ओकर चाल सँ बुझाइत छल जे ओ सब दिन अबै मे सँ नहि छथि। मुला आ ओकर संगी सभ उत्सुकता मे पड़ि गेल जे चानीक घैल अननिहार सुन्दरी के अछि। ओ सभ पूछताछ केलक मुदा कियो नहि कहि सकल। तखन मुला निर्णय लेलक जे एम्हर-ओम्हर पूछबाक बदला नीक हएत जे घूंघट उठा क' देखू। कियो ओकर सभकेँ की बिगाईर सकैत अछि।
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'चल रे पंगा।'। मुला अपन एकटा संगी केँ कहलकै, "जा कऽ घोग तऽ उठा एहि नबका पतुरिया कऽ जे चानिक घयला लऽ कऽ लचकैत-मटकैत आयल छैक। कल्पना कर, जँ ककरो हाथ एतेक सुन्दर छैक तऽ चेहरा कतेक सुन्दर हेतैक।"
गुरु, जँ बेसी सुन्दर भेल तऽ की करबै?" एकटा मित्र चुटकी लैत बाजल।
'तखन हमर विवाह कऽ लेबै!'
"मुदा ओकर विवाह भऽ गेलै छैक।"
'होय दियौक।' नीक लागलै तऽ नीक लागलै।
"मुदा ओकर पति।"
''हमर की बिगाड़त। हमर पिताजी गामक सेठ छैक। पाइ सं कीन लेतै।"
सब चिलमची ठहका लगा कऽ हँसै परल। पंगा नामक चिलमची नशा मे झुमैत आगू बढल आ घोग बाली महिलाक घूंघट उघाईर देलक।
आ जेना बिजली खसि पड़ल हो। मुलाक आँखि चौड़ा भ’ गेलै। घूंघटक पाछूक मुंह तऽ सुन्दर छल मुदा ओ ओकर माय छलीह। ओकर आँखि जमीन मे धसल जा रहल छलैक। माँ बहुत आगि सन आँखि सँ ओकरा दिस एकटक ताईक रहल छलीह।
कुलकलंक की भेलै !" माँ बजलीह - "तोरा हमर चेहरा नीक नहि लागलौ। आगू आबि अपन सब मनोकामना पूरा कर। ई छियै तोहर असली रूप! यैह लेल हम तोरा पालन-पोषण केलहुँ जे एक दिन तो अपन मायक घूंघट उठेमे।"
मूला तऽ लाजसँ जमीनमे गड़ल जा रहल छल ।
हे, आइ तों तऽ लजा रहल छैं। की भेलै, ई तऽ तोहर रोजक खेल छियौ। एहि लाज किएक? हम तऽ तोहर माय छीयौ ताहिलेल। रे सरधुआ, आन महिला सेहो ककरो माय, बहिन आ बेटी छियै।"
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'मां', मुला कानि उठल - "हमरा क्षमा करू। हम बहुत खराब छी मां, मुदा आइ अहाँ जे पाठ देलहुँ से जीवन भरि मोन राखब। हमरा एकटा अंतिम मौका दिअ मां।"
''तोरा आई ग्लानि भऽ रहल छौ। आब जँ तों सुधरय चाहैत छं तखन माफी हमरा सँ नहि एहि स्त्रीगण सब सँ मांग। 'त' एतहि सँ शुरू कर।' अहाँ भाइ बनि हुनका सभक रक्षा कर।
मुला सेहो एहने केलक। आ ओ अपन चिलमची संगी सभकेँ एतेक धमकी देलक जे सभकेँ ओतहिसँ भागब नीक बुझना गेल। आब गामक स्त्रीगण सब मुला के हृदय-परिवर्तन पर प्रसन्न छल।
ई हमर माँ के कृपा अछि जे आइ हमर आँखि खोललक।
'मां कऽ एहन कतऽ? ओ गोनू झा छथि जे कनि बुद्धि सँ हमर बिगड़ल बेटा केँ घर वापस अनलनि ।
"गोनू झा!" सब आश्चर्यचकित भऽ गेल।
पूरा गाम जय-जयकार करैत गोनू झाक दरबज्जा पर पहुँचि गेल। गोनू झा जखन बाहर अयलाह तऽ मुला हुनकर पएर पर खसि पड़ल आ अपन अपराधक क्षमा मंगलक ।
"माफी नहि माँग। जँ तों किछु नीक काज करबें तऽ बुझबौ।" गोनू झा बजलाह।
आ दोसरे दिनसँ मुला पितासँ बहुत रास पाइ लऽ कऽ गाममे दूटा आओर नवका इनार खोदब शुरू कऽ देलक। मुला के एहि बदलल रूप देखि पूरा गाम खुश छल। जखन कखनो लोक एहि लेल मुला कए धन्यवाद दैत छलाह तऽ ओ मात्र एकटा बात कहैत छला – “ई सबटा हमर नव मुखिया गोनू झाक् बुद्धि कऽ कमाल अछि।
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1 जुल॰ 2023
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एक बेर गोनू झाक आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय भऽ गेल छलनि, तेँ हुनका एकटा सेठ सँ कर्ज लेबय पड़लनि। ब्याज दर बेसी हेबाक कारणे मूलधन आ ब्याज मिला कए दस गुना सं बेसी भऽ गेल।
सेठ रुपयाक तगेदा लेल बेर-बेर पहुँचय लागल। गोनू झा कोनो तरहेँ मूलधन आ किछु ब्याज चुकौलनि, मुदा बेसी ब्याज रहि गेल।
सेठ के अपना एतय लगातार दौड़ैत देखि गोनू झा अक्छ भऽ गेलाह आ आश्वासन देलखिन जे पूर्णिमा के दिन एक-एकटा पैसा चुका देब। ओहि दिन ओ अपन आँगन मे यज्ञ कुंड बना पूजा मे बैसि गेलाह। हवन के सबटा सामग्री तैयार छल।
यज्ञ एकदम नवीन छल। वेदी के सोंझा कागज के मूर्ति आ दहकैत अंगार राखी देल गेल। आगि पर सरसोंक तेल कड़कय लेल छोड़ि देल गेल छल। गोनू झा कुंड मे हविष्य दए जा रहल छलाह। ओहि यज्ञ मे प्रत्येक काज स्वयं करैत छलाह, तेँ बीच मे ककरो सँ गप्प करब सेहो वर्जित छल।
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गोनू झा के हवन करैत देखि सेठ चुपचाप बैस गेल। भोर सँ साँझ भऽ गेल, एखनो धरि गोनू झाक ध्यान नहि टूटलनि, तखन सेठक धैर्य जबाब देबय लागल। सेठ गोनू झा के हिलाबैत ध्यान तोड़ि देलक।
ध्यान भंग होइते ओ क्रोधित भऽ गेलाह; आँखि क्रोधसँ लाल। ओ आँखि मे नोर भरि बजलाह, ' सेठ, अहाँ हमर यज्ञ में विघ्न कऽ देलहुँ; एकर परिणाम भयावह होयत। फेरो बड़बड़ाइत बजलाह - पहिने अपन मंत्रक शक्तिक आजमाइश एहि पुतला पर कऽ के देख ली।
गोनू झा हाथ मे जल लऽ कऽ 'ॐ, ह्रीं, क्लीं स्वाहा' मंत्रोचार के संग पुतला लगनारा लग कड़कैत तेल मे छिड़कि देलनि। पानि खसैते देरी तेल धधैक उठल आ पुतला फन-फना कऽ जरय लागल। फेर गोनू जल लऽ कऽ मंत्रोच्चार करैत सेठ दिस तकलनि। मंत्रसिक्त जल के संग घुमैत देखि सेठ घबरा गेल आ चादर, चप्पल आदि छोड़ि बदहवाश भागल। तकर बाद गोनू झाक घर लग जेबाक नाम तक नहि लेलनि आ तगेदा के तऽ बिसैर गेलाह।
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20 जून 2023
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एक दिन गप्प करैत-करैत तीनू मे अपना के सबसँ पैघ गप्पी साबित करबाक शर्त लागल आ निर्णय भेल जे जे बेसी झूठ बाजत ओकरा 100 रुपैया जुर्माना देबय पड़तैक।
सबसँ पहिने दीवानक बेटा कहलक जे हमर दादा एतय राजा छलाह आ वर्तमान राजाक पिता हुनकर नोकर छलाह।
ई सुनिते राजाक पुत्र कूदि उठल आ कहलक जे ई झूठ अछि; एहि ठामक राजा हमर परदादा, दादा आ हमर पिता रहल छथि। हमर दादा कहियो ककरो नोकरक काज नहि केलनि।
दीवानक बेटा चहकैत बाजल, जँ ई झूठ अछि तखन सौ रुपैया लाऊ। राजकुमारक शर्त के अनुसार पाइ देबय पड़लनि। आब व्यापारीक बेटाक बारी आयल। ओ गंभीरतापूर्वक बाजल, ताहि दिन मे एहि ठामक राजा सब बहुत गरीब छलाह। एक बेर ओ अपन पोताक संग हमर दादाजीक घर पर भीख मांगय लेल आयल छलाह।
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अतेक सुनिते राजकुमार झपटैत बजला - ईहो सरासर झूठे अछि। हमर दादा आ बाबूजीक संग कहियो एहन स्थिति नहि भेल।
बनियाक बेटा प्रसन्नता सं ओकरा शर्त मोन पाड़ैत कहलकै, "तखन अहाँ हारलहुँ आ हम जीतलहुँ, तेँ सौ रुपैया लाऊ।"
ओकरो पाइ देबय पड़ल। आब राजकुमारक बारी आयल। ओ अनिच्छापूर्वक बजला, 'हमरा आब घर जेबाक अछि; काल्हि फेर एतय उपस्थित रहब।
राजकुमार सोचैत रहि गेलाह जे झूठक सेतु कोना बान्हल जाय जाहि सँ पाइ वापस भऽ सकय। ओकरा किछु मोन नहि पड़ि रहल छलैक। अंततः ओ गोनू झा सँ संपर्क केलनि। गोनू झा आश्वस्त करैत बजलाह - राजकुमार, ई बामा हाथक काज थिक; बस अहाँ अपना जगह हमरा कहानी कहबाक लेल मना लेब।
अहि पर दुनू मित्रक कोनो आपत्ति नहि भेल। गोनू झा साधारण भेश-भूषा मे पहुँचल छलाह। ओ गप्प कहै लगला, एक बेर भयंकर अकाल पड़ल। लोक अन्न लेल त्राहि -त्राहि करय लागल। राजा कागज बना बना कऽ अन्न देबऽ लगलाह। अहाँक दुनूक दादा सेहो आयल। राजा एक-एक क्विंटल गहूम दऽ रहल छलाह, मुदा कतेको बेर कहला पर दस-दस क्विंटल दऽ देलनि। आब ओ एहि संसार मे नहि छथि। ओकर बेटा आ ने पोता गहूम घुरेलक। एहन कृतघ्न आजुक लोक भऽ गेल छथि। खैर, राजाक कागज दुरुस्त अछि; आइ नहि काल्हि साधये पड़त।
ई सुनि दीवान आ बनियाक बेटा कूदि उठल आ एक सुर मे कहलक जे ई बात एकदम असत्य अछि । हमर दादा वा बाबूजी कहियो एहि पर चर्चा नहि केलनि।
गोनू झा हँसैत बजलाह, जँ झूठ अछि तखन सौ रुपैया लाऊ आ जँ सत्य अछि तखन गहूम चुकता करू।
दुनू गोटे पाइ देब नीक बुझलक।
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18 जून 2023
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दरबार मे पड़ोसी राज्यक पुरोहित पहुँचलाह। ओ अपन परिचय देलनि आ आबय के उद्देश्य बताबैत कहलखिन, 'महाराज, हम तीर्थ यात्रा सँ वापस आबि रहल छी। अहाँक यश दूर-दूर धरि पसरल अछि, तेँ सोचलहुँ जे अहाँक दरबारक दर्शन किएक नहि कऽ लूँ।
तखन झोरा मे हाथ राखि बताशा निकालैत बजलाह 'महाराज, ई चारि बताशा चारि धामक प्रसाद अछि। एकरा अहाँ उपस्थित दरबारी मे समान रूप सँ बाँटि दियौक।
राजा चिंतित हो गया, किंतु उसने चार ईमानदार दरबारियों को बुलाकर प्रसाद वितरण का भार सौंपा। चार ही बताशे में समान रूप से वितरण दुष्कर था, इसलिए वे एक-दूसरे को देखने लगे।
तभी एक का ध्यान गोनू झा पर गया। उसने राहत की साँस लेते हुए कहा, 'महाराज, यह काम गोनू झा के हाथों अत्यंत शुभ होगा।
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राजा हर्षोल्लाससँ बजलाह - 'शुभस्य शीघ्रम।' आ गोनू झा के एकर जिम्मेदारी भेट गेलनि। स्थितिक गंभीरताक भांपैत गोनू झा सेहो हर्षोल्लासपूर्वक चुनौती स्वीकार कयलनि आ राजा सँ कहलखिन - महामहिम, सबसँ पहिने हमरा करीब पौन बाल्टी के करीब पवित्र जल, चारि लोटा चीनी, एक बोतल केवड़ा जल आ एकटा चम्मच चाही। ता धरि चुक्कड़ के सेहो व्यवस्था करबा दियौ।
सब वस्तु तुरन्त उपलब्ध भऽ गेल। गोनू झा सुगन्धित शरबत बना ऊपर सँ चारू बताशा चुईर कऽ खसाबय लगला।
एकटा दरबारी आश्चर्यचकित भऽ कऽ बाजल, 'अरे, रे, रे! गोनू झा, अहाँ ई की कऽ रहल छी? आ तुरन्त महाराज दिस घुमि गोनू झा दिस इशारा करैत बजलाह - महाराज बताशा केँ सर्वनाश कऽ देलखिन। ।
गोनू झा फुर्सत सँ बजलाह - भजार, अहाँ घबराब नहि; हमरा अपन जिम्मेदारी बहुत नीक जकाँ मोन अछि। हम महाराज के इच्छानुसार काज कऽ रहल छी।
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पुरोहित सहमत भेलाह आ बजलाह - महाराज, प्रसादक एकटा धर्म प्रसन्नता प्रदान केनाय अछि। कम हो वा बेसी, ठोस हो वा तरल, अर्थात जतेक आ जाहि रूप रूप मे हो, एहि सँ कोनो फर्क नहि पड़ैत अछि। दोसर बात जे गोनू झा द्वारा अपनाओल गेल विधि सँ संतुष्टि सेहो भेटत। एतबे नै, एकर असरि सेहो ठंढा रहत और सरलतापूर्वक समान रूप सँ वितरण के लेल एकरा सँ नीमन ढंग आओर की भऽ सकै छै। एकर अतिरिक्त अहाँक समता सेहो सिद्ध होयत। हमहूँ आइ अहाँक दरबारक लोहा स्वीकार लेलहुं।
गोनू झा सबके अपन-अपन चुककड़ लऽ कऽ कतार लगा देलखिन आ प्रसाद के समान रूप सँ बाँटि देलखिन।
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