अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
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6 जुल॰ 2026
Geet Sangrah
» बेटी के वियोग हम कोना विधि सहबई
» बिलखि-बिलखि काने, सती हे सुलोचना राम / सुलोचना विलाप
» केकयी के पग छानी, पूछथि भरत कानी आहे / भरत विलाप
इहो पढ़ब :-
29 सित॰ 2024
Maithili Lokgeet
(समदाओन, उदासी)
जनम जनम केर थिकहु चिन्हार,
जननि अहाँक नहि पाओल पार ॥
जे जननी सभ दुख हरि लेल,
तनिक अपरिचित हम बकलेल।
बिगड़ल के नित कएल सुधार॥
जननि ....
नचलहु जे नटवर केर संग,
छिलकि जटा बनलहु माँ गंग ॥
पाप विमोचिनि सुरसरि धार॥
जननि...
जनम जनम बहुतो दुःख भेल,
गरभ जोगाओल ककरा लेल।
कहिया करब दुःख नदिया सँ पार॥
जननि....
तेज भरल दृग तेसर दीप,
हम अनुखन जड़ि भेलहुँ 'प्रदीप '
करब कखन मा हमर उद्वार॥
जननी.............
गीतकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)
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Udasi Geet
3 फ़र॰ 2022
Chandramani Jha
समदाओन / चन्द्रमणि
रगड़ि-रगड़ि उबटन धिया सेवल
सेहो करेज लगाय
बाँहिक पलनहिं झुलना झुलाओल
सेहो धिया चलि जाय।
फूल फुलायल देखितो मलिनियाँ
दहो-बहो नोरे दहाय
कतेक मनोरथ मनहि जोआओल
सबटा संगहि संग जाय।
हिचुकि-हिचुकि धिया चुप नहि भए रह
आंगन कानथि माय
डोलिया उठाय आगू बढ़ल कहरिया
अहिना युगक युग जाय।
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25 जून 2021
Samdaun Geet
बिलखि-बिलखि काने, सती हे सुलोचना राम
सतीहेला हिया भेल पिपरक पात ।।
बीच रे कपार पर डकि देल कगबा राम
डकि देल कगबा।
कहि देल अधखि के बात ।।
आरे, खसल अंगनमा में पिया जी हथबा राम
पियाजी के हथबा
लिखि देल अपन हबाल ।।
आरे हमरा वियोग में न कानू खिजू तनिको राम
कानू खिजू तनिको
रामजी से होयत मुलाकात ।।
आरे 'लतिका सनेह' एहो गाबे समदौनियाँ राम,
गाबे समदौनियाँ रानी के अमर अहिबात ।।
16 अप्रैल 2021
Samdaun Geet
धिया केर हाथ बाबा वर के समरपल
धिया भेली ममता विभोर गे माई।
मुसुकल सन मुँह काँपे दूनू ढोरबा,
आँखिया में रोकल लोर गे माई ।
हमर अपन धिया वंश बदलि गेल,
हमरो कलेजा कठोर गे माई।
लतिका स्नेह मइया छाती दाबि हुकरथि,
धिया लेई जायब पराय गे माई।
19 मार्च 2021
Samdaun Geet
कोना हम बिसरव बेटी के सुरतिया
कहुना न बिसरल जाय।
असरा लगाय हम दुलरी के पासली
छतिया के दूधवा पियाय
जनि कानू अनि खीजू धीर धरू जननी
मैया कर ममता बलाय
लतिका सनेह गावे सहो समदौनि
बेटी के शुभ दिन सहाय
Samdaun Geet
जबसे कुमारी के परलेन सगुनमा से
सुधि बुधि सब विसराय गे माई।
दिन नाही चैन पड़े रातियो न निंद आवे,
घर रे आंगन न सोहाय गे माई ।
भोज भात बन्द करू बन्द करू बजबा से,
गाजा बाजा लागत बलाय गे माई।
लतिका सनेह अब चुप रहू बबनी से,
जीवन के साथी मुसुकाय के माई।
19 फ़र॰ 2021
Samdaun Geet
मिथिला नगर तजि सिया जब चललि,
राम सिया जब चललि
मिथिला खसल मुरछाय-2
हिलि लिअव मिलि लिअव सखि हे सहेलिया राम
सखि हे सहेलिया अब न होयत मुलुकात - 2
लतिका स्नेहिया गावल समदओनियां
राम संत जन लिअव
30 जुल॰ 2020
Samdaun Geet
भाई के दरश लागी, बेकल भरत जी
रने बने कधि बिलाप ।।
केनाक बिसरि गेल भइया निरमोहिया राम
भइया निरमोहिया
चलि गेला बन चुपचाप ।।
केहन कपूत हम भेली भइया केकयी राम० ।।
हमरे चढ़ल सिर पाप ।।
अवध अनाथ लागे, मइया भेली बिधवा राम
मइया भेली बिधवा
पड़िगेल अन्हरी के श्राप ।।
गोड़ लागू पैयाँ परू, माता सिया जानकी राम
माता सिया जानकी
मेटू आब बिरहक ताप ।।
'लतिका सनेह' एहो गाबे समदौनियाँ राम
गाबे समदौनियाँ
एहो थिक भरत बिलाप ।।
24 अप्रैल 2020
Samdaun Geet
केकयी के पग छानी, पूछथि भरत कानी आहे
कि आहे माता, कियक भैया बनमा मांगलरे की।।
भाई निरमोही भेला, हमरो बिसरी गेला
कि आहे माता ममता कोना क हमर त्यागल रे की।।
जानकी, लखन धन, भइया संग गेला बन
कि आहे माता हुनके दूनू के भाग जागल रे की ।।
'लतिका सनेह कहे, आँखिया से नीर बहे
कि माता भाई बिनु भाई भेल पागल रे की।।
17 अप्रैल 2020
Samdaun Geet
बिलखि-बिलखि काने, बेकल भरत जी
एखनो न अयला भगवान ।।
एक दिन अवधि रहल आब बाँकी राम
रहल आब बाँकी
एहो भेल कलप समान ।।
मंथरा के बात सुनि राम जी के त्यागली राम,
रामजी के त्यागली
जग भेल अयश महान ।।
जौं मोरा भइया घर आइयो नहि अयता राम
आइयो नहि अयता हति लेब अपन परान ।।
'लतिका सनेह धरू धीरज भरत जी
देखू आबि गेला हनुमान ।।
15 जन॰ 2020
Maithili Lokgeet
समदाउन गीत लिरिक्स मैथिली में
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7 फ़र॰ 2019
Samdaun Geet
बेटी के वियोग हम कोना विधि सहबई,
हम ना करब धिया दान ।
अपन करेजबा के दुधबा से पोसली,
आजु भेल दुलरी विरान ।
जौं हम जनिति एहन दिन देखबई,
हति लिती अपन परान ।
लतिका सनेह अब कहाँ लतरायब,
उजरल स्नेहक बगान ।
20 दिस॰ 2017
Maithili Lokgeet
जखन सुनयना डोली दिस ताकथि,
सीता चली भेली कनैत अधीर
भरलो आंगन जतेक नर-नारी,
ककरहु हृदय नहि थीर
चहुँदिस रोबथि सखी रे सहेलिया,
आमा के झहरनि नयन मोती नीर
किए जे बेटी जानकी पोसल,
उड़ि भेली देश पराय
भनहि विद्यापति सुनू हे सुनएना,
इहो थिक नगर बेबहार
24 नव॰ 2017
Maithili Lokgeet
राजा दशरथ एक पतिया पठओलनि,
राजा जनक नहि मान
राजा जनक जी के एके जे बेटिया,
किए देखि धैरज बान्ह
जखन बरिअतिया दरबज्जा बिच आओल,
राजा खसल मुरछाइ
रानी जे कनथिन रंगमहलिया,
राजा कानथि दरबार
सखि सभ कानथिन जनक नगरिया,
सखि बिनु रहलो ने जाय
26 अक्टू॰ 2017
Maithili Lokgeet
नैहर हमर जनकपुर रे सखिया,
सासुर दूर के देश
आमा मोर आजु एकसरि सुतती,
छनेछन उठती चेहाय
किए जे देखि आमा धैरज धरती,
किए देखि रहती लोभाय
फूल जे देखि आमा धैरज धरती,
फल देखि रहती लोभाय
पलंगा बैसल हमर बाबा कनै छथि,
मचिया बैसल हमर माय
डोलिया के खूंटी धय सखि सभ कनै छथि,
आब सखि सासुर जाय
घुरू भइया घुरू सखि सभ,
अहूँ सभ घूरि घर जाउ
हमरो आमा जे कनैत हयती,
हुनिका कहब बुझाय
भनहि विद्यापति सुनू हे सखि सभ,
सभ बेटी सासुर जाय
21 सित॰ 2017
Maithili Lokgeet
डोलिया कहार नेने ठाढ़ दुअरिया,
विदा करू गौरी के चुमाय
गर धए हिलिमिलि हे कानथि,
देहरि बैसल मैना माय
आब ककरा दुलारब गे बेटी,
ककरा पेट लागि सुताएब
घूरि ताकू घूरि ताकू बेटी हे दुलरुआ,
फेर दीअ मुख देखाय
माया रे कानथि पुनि-पुनि रोबथि,
सखि सभ कहथि बुणय
नहिराक सुख कोना बिसरब हे आमा,
ससुरा मे दिवस गमाय
25 अग॰ 2017
Maithili Lokgeet
जखन गौरी दाइ घर सँ भेली,
सखि दस रोदना पसार
ककर बदनि हम हेरइते हरब,
संग छथि सहोदर भाय
एक कोस गेली बेटी दुइ कोस गेली,
तेसर कोस चललो ने जाय
डोलिया उधारि जौं ताकथि गौरीदाइ,
छूटि गेल बाबा केर राज
घुरू भइया घूरि घर जइयौ,
आमा के कहबनि बुझाय
आमा जे कनती हमरो सुरति करि,
छने छन उठबै चेहाय
29 जून 2017
Maithili Lokgeet
Jahi nikunj van hamaro ke deliyai lyrics
समदाउन लोकगीत
जाहि निकुंज वन हमरो के देलिअइ,
ताहि वन मायो ने बाप
सुन भवन केने जाइ छी हे बेटी,
अयोध्यामे बाजत बधाइ
हरियर गोबर आंगन निपाओल,
गजमोती अरिपन देल
अंगनामे बुलि-बुलि आमा जहे कानथि,
जनकजी भेला अचेत
नगरक सखिया बड़ा रे निरमोहिया,
धीया देल डोलिया चढ़ाय
भनहि विद्यापति सुनू सुनयना,
सभ बेटी सासुर जाय
Maithili Lokgeet
बाबा केर अंगनामे एलै कहरिया,
सूनू बाबा मिनती हमार
एक बेर फेरलहुँ बेटी दुइ बेर फेरलहुँ,
तेसर बेर फेरलो ने जाय
साँठू हे आमा पउती पेटरिया,
हाँकू बाबा गाय महींस
आमाकेँ कानबे नगर लोक कानय,
बाबा के कानबे दरबार
भइया के कानबे भीजल चदरिया,
भउजी केर हृदय कठोर
किए हम आहे भउजो, नून तेल हेरायल,
किए कोठी फोड़ल तोर
नहि अहाँ आहे ननदो, नून तेल हेरेलौं,
नहि फोड़ल कोठी मोर
भइया दुलारू, बाबा आमां के दुलारू,
तैं अहाँ बैरिन मोर
