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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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17 दिस॰ 2025

Banke Bihari Jha Kareel Geet

बाँके बिहारी झा 'करील' केर मैथिली गीत लिरिक्स - Banke Bihari Jha 'Kareel' Ji Ki Rachnaye

मिथिला धरोहर
बांके बिहारी झा करील जी की रचना और मैथिली गीत संग्रह






















19 सित॰ 2024

Banke Bihari Jha Kareel Geet

नेह लगा के सलौने सजन कित जैहो लिरिक्स - Neh Laga Ke Salona Sajan Lyrics

मिथिला धरोहर
नेह लगा के सलौने सजन कित जैहो॥धु्रव॥

लागी प्रीति अब कैसे छूटे,
अब न पिया बिछड़ैहो। सजन.॥1॥

तजि मिथिला, जल बिनु मीनहिं जिमि,
जनि जीवन तरसैहो। सजन.॥2॥

सिय सिय अलि सँग रुचिर केलि बहु,
कहु किंमि ललन भुलैहो। सजन.॥3॥

कोहबर हास-विलास सोहावन,
असि ससुरारी न पैहो। सजन.॥4॥

नित नव ब्याह रचैहो स्यामघन,
अगहन सावन बनैहो। सजन.॥5॥

पुनि पुनि विनबऊँ अब ‘करील’ पहु,
मिथिलाहिं अवध बसैहो। सजन.॥6॥

रचना : बांके बिहारी झा 'करील
लोक धुन - ताल-स्थायी दादरा

21 अग॰ 2024

Banke Bihari Jha Kareel Geet

सुगना जे हमरी अटरिया, रे सजनियाँ लिरिक्स - Sugna Je Hamri Atariya Re Sajaniya Lyrics

मिथिला धरोहर
सुगना जे हमरी अटारिया, रे सजनियाँ,
मीठे बोल बोलै ना।
मोरा आँगना रे पहुनमा अनमोल ऐलै ना॥1॥

नैन के कोठरिया में पुतरी पलंगिया,
हम बिछाय देबै ना।
डारि पलकन के चिकवा, पिया रिझाय लेबै ना॥2॥

जहिया से देखलौं सखि साँवरी सुरतिया,
सुधि भुलाय गेलै ना।
नेह नदिया में मनमा मोरा नहाय गेलै ना॥3॥

लोकवा के लाज सब प्रेम के अगनिया में,
जराय देलियै ना।
सब जग के जंजलवा विसराय देलियै ना॥4॥

मिटलै ‘करील’ सब चाह, छवि दुलहा,
हिया बसाय लेलियै ना।
प्रीति नदिया में ममता-लता, भँसाय देलियै ना॥5॥

लोक धुन। ताल दु्रत जलद तीन ताल

19 अक्टू॰ 2023

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झमकि झहरि छवि रस बरसे, अनमोल दुलहवा लिरिक्स - Jhamki Jhari Chhavi Ras Barse Lyrics

मिथिला धरोहर
झमकि झहरि छवि रस बरसे, अनमोल दुलहवा।

स्यामघटा छवि छटा छहरि रहौ,
लखि प्रेमिन मन-मोर हरसे, अनमोल.॥1॥

जनम-जनम के सूखल जियरा,
छवि रस बस रस-रस सरसे, अनमोल.॥2॥

छवि-माधुरि-रस सरस बरसि रहे,
तइयो प्रेमीगन पियास तरसे, अनमोल.॥3॥

ई छवि लखि सखि सब जग छूटल,
चलि भई अब पहु-प्रेम डगर से, अनमोल.॥4॥

सतत ‘करील’ सजनि लागी रहे,
लगन की डोरी सियावर से, अनमोल.॥5॥

लोक धुन - ताल दादरा

6 जन॰ 2022

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छूम छन नन नन पायल बाजै लिरिक्स - Chhum Chan Nan Nan Payal Bajai Lyrics

मिथिला धरोहर
छूम छन नन नन पायल बाजै,
उमगि आरती गावै॥धु्रव॥

रतिमदमोचनि सुभग सुहागिनी,
सुन्दर दुलह रिझावै।
सत-सत मदनमथन छवि माधुरि,
निरखत नैन जुड़ावै॥1॥

मुकुट लटक मनिमौर-छहर पर,
रवि-ससि-किरण लजावै।
नवल-जलद छवि-रुचिर दुलह-तन,
सिय-दामिनि लिपटाबै॥2॥

बरु जनु नील सरोजनाल सँग,
चम्पलता अरुझावै।
चंद्र चकोर-अमित छबि जोरी,
अलिगन-हिय उमगावै॥3॥

बीन-मुरलि-सुर मधुर मिलित अति,
ताल मृदंग सुहावै।
कंचन-थार सँवारि आरती,
कलुष ‘करील’ जरावै॥4॥

राग-बहार - ताल दु्रत तीन ताल

23 सित॰ 2021

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चंदन लकड़िया के बनल पलंगिया लिरिक्स - Chandan Lakadiya Ke Banal Palangiya Lyrics

मिथिला धरोहर
चन्दन लकड़िया के बनल पलंगिया,
फूलन सेज बिछाय हे।
सोवन आयो छैल रामजी पहुनमा,
सिया लिये अंग लगाय हे॥1॥

नवल दुलहि सिया चम्पक-कलिया,
नील कमल पहु मोर हे।
छवि माधुरी निरखत सखी लाजत,
रति रति पतिहू करोर हे॥2॥

निंदिया से मातलि बड़ि बड़ि अँखिया,
बरिसय प्रेम सिंगार हे।
एकहु बेरि नजरि जापर गई,
सोई हो जात बेकार हे॥3॥

धन्य धन्य मोरि बहिनी किसोरी,
जेही लगि पाहुन पाय हे।
चिर आनन्द रहै एही कोहवर,
मन ‘करील’ हुलसाय हे॥4॥

22 अक्टू॰ 2020

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राम रस बूँदिया झहरि बरसे, भींजे सब प्रेमीगनवाँ लिरिक्स - Ram Ras Bundiya Zhari Barse Lyrics

मिथिला धरोहर
राम रस बूँदिया झहरि बरसे, भींजे सब प्रेमीगनवाँ।
संत सुजान एहि बूँदन भींजे।
कूर-कुटिल मन-मन तरसे, भींजे सब.॥1॥

प्रेम घन-घटा हृदय नभ उमड़े,
नाचि नाचि मन-मोर हरसे, भींजे सब.॥2॥

एहि रस बूँदन नेकहू भींजत।
सब विषयन-रस लागे जहर-सें, भींजे सब.॥3॥

ज्ञान विराग जोग जप तप सब।
तुलत न प्रेम रस एक लहर से, भींजे सब.॥4॥

नाम-नेह-चिकनाई भरल मन।
नाहीं ‘करील’ माया-जल परसे, भींजे सब.॥5॥


14 नव॰ 2019

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ससुररिया में लुटै बहार हो चारो पहुना अलवेलवा लिरिक्स - Sasurariyaa Me Lutau Bahar Lyrics

मिथिला धरोहर
ससुररिया में लुटै बहार,
हो चारो पहुना अलवेलवा॥धु्रव॥

हिलि-मिलि अलिन नवेली चलीं लै,
कोहबर भवन कुमार, हो चारो.॥1॥

संकर-मानस-हंस लखहु सखि,
उड़ि आये मिथिला-किनार, हो चारो.॥2॥

छवि-सुषमा उपमा सब लाजै,
रोम-रोम लुठत सिंगार, हो चारो.॥3॥

कमल वदन अलकें जनु अलिगन,
झुमत करत गुंजार, हो चारो.॥4॥

घाव करै हिय तियगन के ये,
तिरछे नयन कजरार, हो चारो.॥5॥

छवि लोलुप अँग-अँग समाई,
सकुचि बसंत बहार, हो चारो.॥6॥

त्रिभुवन-सुन्दर पाहुन छवि पर,
जीवन ‘करील’ निसार, हो चारो.॥7॥

लोक धुन। ताल दादरा
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औढरदानी हरहु दुख मोर लिरिक्स - Audhardani Harahu Dukh Mor Lyrics

मिथिला धरोहर
ओढरदानी हरहुं दुःख मोर, 
आयलहूं शरण सुयश सुनि तोर

दुई एक दल बेल पात चढाए
अहाँ के शरण नव निधि जन पाएब

अपनेह भांग धथूर नीत खायब
जग में सब सुख देलनि लुटाई

मगन रास रस गौरी के संग
नाचए कतेक प्रमथ भरी रंग

दिन एक करील'क सुनहु महेश 
बड़ाही कठिन काटू करी के कलेस

18 सित॰ 2019

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शबरी बुहारै डगरिया हो राम लिरिक्स - Shabari Buhare Dagariya Ho Ram Lyrics

मिथिला धरोहर
शबरी बुहारै डगरिया, हो राम, सबरी॥धु्रव॥

उमगि-उमगि नित डगरी बुहारै,
आजु मोरा अइहैं सँवरिया, हो राम.॥1॥

जनम जनम के प्यासे नैना,
छविरस पैहौं गगरिया, हो राम.॥2॥

सैंपी राम-पद प्रान-धरोहर,
होइहौं मगन बाबरिया, हो राम.॥3॥

बहुत दिवस बीते पद जोहत।
प्रभु बिनु सूनी नगरिया, हो राम.॥4॥

गुरु वचनन की एक आस मोहि,
जोहति प्रभु की डगरिया, हो राम.॥5॥

छबि रस-प्यास -करीलहू’ के उर,
कमल नयन धनुधरिया, हो राम.॥6॥

25 जुल॰ 2019

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पहुनमा मोर, सखि अँखिया में बसलै लिरिक्स - Pahunma Mor Sakhi Ankhiyan Mein Baslai Lyrics

मिथिला धरोहर
पहुनमा मोर, सखि अँखिया में बसलै॥धु्रव॥

रूपरस-नदिया में आनन्द-लहरिया।
सहजे सहज मोर कुल लाज भँसलै॥1॥

रस-रस नस-नस सिथिल सजनियाँ।
प्रीति नगिनियाँ अंग-अंग डसलै॥2॥

छवि-केरऽ जाल सखि सुन्दर सजन के।
मन के मिरिग हँसि-हँसि कसि फँसलै॥3॥

चोट चितचोर करे तीर चितवनियाँ।
काजर-जहरबा-भरल हिया धँसलै॥4॥

पातहीन काँटमय कुटिल ‘करील’ तरु।
रंग भरि चिर-नव मधुरित हँसलै॥5॥

लोक धुन - ताल-दादरा

15 फ़र॰ 2019

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जोगिया दुलह आजु कोहवर जाय लिरिक्स - Jogiya Dulha Aaju Kohbar Jaay Lyrics

मिथिला धरोहर
गीत गौरीश

जोगिया दुलह आजु कोहवर जाय,
छवि कहलो न जाय॥धु्रव॥

सारी सरहज द्वार छेकलन्हि आय।
नेग दीजै दुलहा बाबू दीन्हि जो माय, छवि.॥1॥

एक सखी तब कही मुसुकाय।
सुनहु सजनि इनका बाप न माय, छवि.॥2॥

सुनहू सदाशिव, कहऊँ उपाय।
कोहवर जैहो लागू गौरी के पाय, छवि.॥3॥

करहि विनोद सब सखी समुदाय।
सहज निलज लाज लजाय, छवि.॥4॥

एही बीच नाग एक उठल फुफुआय।
सखी सब भागी संकर गेलन अगुआय, छवि.॥5॥

ऐसन दुलह नहिं देखल माय।
उमगि ‘करील’ एही कोहबर गाय, छवि.॥6॥

लोक धुन। ताल कहरवा

12 दिस॰ 2018

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मनवाँ सम्हार बार-बार हो, हरिनाम खजनवाँ लिरिक्स - Manwa Samhaar Baar Baar Ho Lyrics

मिथिला धरोहर
मनवाँ सम्हार बार-बार हो, हरिनाम खजनवाँ।

मनुष्य-जनम तूहूँ फेरू न पैहो, हो फेरू न पैहो,
अवसर बीते मन पछतैहो,
होने न पावे बेकार हो, हरिनाम.॥1॥

नाम-धन बिनु ठोकर बहु खैहो, ठोकर बहु खैहो,
स्वान समान कभी न सुख पैहो।
जैहो तू द्वार हजार हो, हरिनाम.॥2॥

जौं हरिनाम रतन अपनैहो, रतन अपनैहो,
बिनहि प्रयास सकल सुख पैहो।
नाम अभिमत दातार हो, हरिनाम.॥3॥

जग की हाट बहुत भरमायो, बहुत भरमायो,
जनम-दरिद्र करील अघायो।
अब सब दुखहिं बिसार हो, हरिनाम.॥4॥

22 नव॰ 2018

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राम भजन में मन रँगि गेलै लिरिक्स - am Bhajan Mein Man Rangi Gelai Lyrics

मिथिला धरोहर
राम भजन में मन रँगि गेलै॥धु्रव॥

जनम-जनम के हियरा के काई।
एके लहरिया में बहि गेलै यार॥राम.॥

अब न सोहाबै ई जग के बजरिया।
मोरा लेखें सगरो उजरि गेलै यार॥राम.॥

पचरंग चोला सफल भेलै, अब मन।
राम मिलन लागि उमगि गेलै यार॥राम.॥

मोह-निसा में सूतल रहलौं।
अब मन हमरो जगि गेलै यार॥राम.॥

तीत विषय रस त्यागि ‘करीलवा’।
प्रभु-पद पंकज पगि गेलै यार॥राम.॥

21 नव॰ 2018

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लाले लाल सुन्दर वदनवाँ हो जय गौरी के ललनवाँ लिरिक्स - Lale Lal Sundar Badanwa Ho Lyrics

मिथिला धरोहर
लाले लाल सुन्दर वदनवाँ हो, 
जय गौरी के ललनवाँ।

तीन नयन गजवदन मनोहर,
सोभे संग मूषिक वाहनबाँ हो॥जय.॥1॥

रिधि-सिधि निसिदिन चरनन चेरी,
नाम लेत काटे विघनवाँ हो॥जय.॥2॥

नाम के महिमा सबहिं जनाये,
होत जग प्रथम पूजनवाँ हो॥जय.॥3॥

माँगे ‘करील’ जोरि कर निसदिन,
बसैं हिय नन्द नन्दनवाँ हो॥जय.॥4॥

20 नव॰ 2018

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राम नाम के नदी बहल जाय लिरिक्स - Ram Naam Ke Nadi Bahal Jaaye Lyrics

मिथिला धरोहर
राम नाम के नदी बहल जाय, 
चाहे जो ले नहाय॥धु्रव॥

कलिजुग में भैया न कोनो उपाय।
राम नाम गाइ जीव भव तरि जाय॥चाहे जो.॥1॥

नदिया में नदी बहल गौर-निताय।
पापिहु तरि गेल जगाय मधाय॥चाहे जो.॥2॥

गिरि रे कैलाश एक जोगी सोहाय।
सेहो नित रामनाम जपि रहे भाय॥चाहे जो.॥3॥

जो एहि नदी में नहाय मन लाय।
सो जीव देखि जम दूरहिं पराय।चाहे जो.॥4॥

उमगि ‘करील’ प्रभु के गुन गाय।
जनम-जनम के जरनि जुड़ाय।चाहे जो.॥5॥


19 सित॰ 2018

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धन्य-धन्य आजु केर अति सुभ दिनवाँ लिरिक्स - Dhanya-dhanya aaju kera ati subh dinwa

मिथिला धरोहर
श्री सीताराम विवाह
लोक धुन - ताल स्थायी दादरा

धन्य-धन्य आजु केरऽ अति सुभ दिनवाँ, हाय रे सखिया।
रहि-रहि जियरा हुलसाय, हाय रे सखिया॥1॥

उमड़ि-घुमड़ि घन साँवर आयो, हाय रे सखिया।
लेहु मन-मोरवा नचाय, हाय रे सखिया॥2॥

सुन्दर पहुनवाँ के छवि लखि आजु, हाय रे सखिया।
अब मोहि कछु न सोहाय, हाय रे सखिया॥3॥

कबन सुकृत कइली मइया सुनैना, हाय रे सखिया।
धिया एसन पवली जमाय, हाय रे सखिया॥4॥

सिया के सोहाग विधि सफल बनावै, हाय रे सखिया।
गावत ‘करील’ उमगाय, हाय रे सखिया॥5॥



21 अग॰ 2018

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नाम के नदिया बहैबै, जनम फल पैबै हो लीरिक्स - Naam Ke Nadiya Bahaibai Lyrics

मिथिला धरोहर
नाम के नदिया बहैबै, जनम फल पैबै हो ॥धु्रव॥

जनम-जनम के मल के ढेरी।
सहजहिं सकल बहैबै ।जनम.॥1॥

कोटिन गंग-नहानहुँ ते बड़।
अमित परमरस पैबै ।जनम.॥2॥

उमगि-उमगि आनन्द-मगन मन।
सुरगन केॅ ललचैबै ।जनम.॥3॥

विषय-अगिनि-झुलसल जुग-जुग के।
जिय के जरनि जुड़ैबै ।जनम.॥4॥

तजि जग, कुंज ‘करील’ हुलसि उर।
स्यामसुन्दर पिया पैबै ।जनम.॥5॥


21 दिस॰ 2017

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ई छैला अवध के अन्हरिया लिरिक्स - Ee Chhaila Avadh Ke Anhariya Lyrics

मिथिला धरोहर
ई छैला अवध के अन्हरिया,
हमार सिया पूनम अँजोर॥धु्रव॥

सिय-छवि-छाह छअत वसनन्हि छनि।
हरिहर होत सँवरिया, हमार सिया.॥1॥

घुँघट-ओट छटा छिन निरखत,
बिरसत देन भँबरिया, हमार सिया.॥2॥

सहमि सकुचि झूकि उझकि चकित चलि।
चाहत छवि दृग भरिया, हमार सिया.॥3॥

मनि खंभन्ह प्रतिबिम्ब कबहूँ लखि।
टारत नाहिं नजरिया, हमार सिया.॥4॥

भाँवर देत जोरि अनुपम-छवि।
लखि ‘करील’ बलिहरिया, हमार सिया.॥5॥

लोक धुन - ताल दादरा

23 नव॰ 2017

Banke Bihari Jha Kareel Geet

मोरा जोगिया, मन भावै हो राम लिरिक्स - Mor Jogiya Man Bhawe Ho Ram Lyrics

मिथिला धरोहर
मोरा जोगिया, मन भावै हो राम॥धु्रव॥

लागै सोहावन कपूर जैसन देहिया।
भाल पर चंदा उगावै हो राम॥1॥

आठहू अग जोगी भसम रमावै।
जटा बीच गंगा बहावै हो राम॥2॥

बैठी मसान जोगी धूनियाँ रमावै।
घर-घर अलख जगावै हो राम॥3॥

दुनियाँ में बाँटि जोगी खोवा-मलाई।
भाँग धथूरा चबाबै हो राम॥4॥

अधम ‘करील’ सेवि सिव-पद; रज।
अमल-भगति वर पावै हो राम॥5॥

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