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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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13 अप्रैल 2023

Darbhanga

सुभद्रा देवी मिथिला पेपरमेसी कलाकार - Padma Shri Subhadra Devi

मिथिला धरोहर
Subhadra Devi Got Padma Shri Award 2023
मिथिला पेपर मेसी कला के सिद्धहस्त कलाकार सुभद्रा देवी के काल क्षेत्र (पेपर मेसी) में महत्वपूर्ण योगदान लेल पद्मश्री सम्मान 2023 सं सम्मानित कैल गेल छनि। सुभद्रा देवी मूल रूप सं मधुबनी जिला के रहिका प्रखंड अन्तर्गत भिट्टी सलेमपुर गांव के निवासी छथि। सुभद्रा देवी बाल्यावस्थे मे दोसर केँ देखि पेपरमेसी के कला सीखने छलीह। हुनका कोनो अंदाजा नहि छलनि जे हुनकर कला के एतेक प्रसिद्धि भेटतनि।

सुभद्रा देवी के माँ के घर दरभंगा जिलाक मनीगाछी मे परंपरागत रूप सं पेपरमेसी के निर्माण होइत छल। नेनपन मे चुल्हा, गुड़िया आ अन्य कलाकृति सेहो बनबैत छलीह। एहि दौरान ओ दरद मैदा गाछक छाल छीलि कए सुखा दैत छलीह, फेर पीसैत छलीह आ पाउडर बनबैत छलीह। तकर उपरांत ओहि पाउडर सँ कलाकृति बनबैत छलीह। बाद मे मेथी सँ कलाकृति सेहो बनौलनि।  

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सुभद्रा देवी 70 के दशक में पटना में शिल्प अनुसंधान संस्थानक लेल कनिया-पुतरा, पेंटिंग आ सामा-चकेवा बनेने छलथि। सामा चकेवा के बहुते पसंद कैल गेल आ हुनका पुरस्कार सेहो भेटलनि। 90 के दशक में एक बेरा मद्रास गेलथि तहन हुनका एकटा मैडम कहलैथ जे ‘राजा-रानी की शादी का सीन बना दीजिए’. जाहि पर सुभद्रा देवी कहलथि जे ‘राजा-रानी के शादी के हमारा नै पता। रामचंद्र भगवान केर शादी भेल अछि, वैह विधि सं शादी-विवाह के हम जानैत छी।’ कोहबर, कन्यादान, मंडप आदि पेपर मेसी पर बीस दिन धरि ओतय बनेने छलथि। 
जतय मिथिला कला पर बहुत चर्चा होइत अछि ओतय पेपर मेसी के लगभग कोनो जिक्र नै होइत अछि। एकर बाजार सेहो विकसित नहि भेल अछि।  जखन कि सुभद्रा देवी के वर्ष 1981 मे राज्य पुरस्कार आ वर्ष 1991 मे राष्ट्रीय पुरस्कार सं सम्मानित कैल गेल छलनी। एहि कलाक संबंध मे ओ वर्ष 2004 मे स्पेन सेहो गेल छलीह ।

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पेपर मेसी (पापिए माशे) फ्रेंच शब्द सँ बनल अछि, जकर अर्थ होइत अछि मसले या कटल कागज।  एहि कला मे कागज पहिने पानि मे भिजाओल जाइत अछि आ फेर गूदा बनाओल जाइत अछि। एकरा गोंद, फेविकोल के मदद सं आकार देलऽ जाय छै। रौद मे सुखला के बाद अलग-अलग रंग सं रंगल जाइत अछि।

18 जून 2022

Jivan Parichay

मालविका राज मिथिला पेंटिंग कलाकार

मिथिला धरोहर

Mithila Painting Artist Malvika Raj 
मालविका राज के जन्म 18 सितंबर 1990 समस्तीपुर के दलित परिवार मे भेलनि। निफ्ट मोहाली सं स्नातक क चुकली मालविका राज फैशन डिजाइनर सेहो छथि। पहिले मालविका राज दिल्ली मे फैशन डिजाइनर के तौर पर काज करय छलीह मुदा बाद कुनो कारणक सं ओ पटना आबि गेलीह। एतय ओ कलाकार अशोक विश्वास के द्वारा मिथिला कला मे प्रशिक्षण लेलीह।

कतेको प्रमुख प्रदर्शनि मे सेहो हुनक कलाक प्रदर्शन भ चूकल छनि। हुनकर एकटा पेंटिंग बाबासाहेब अंबेडकर के मिथिला प्रस्तुति एडिनबर्ग विश्वविद्यालय मे प्रदर्शित भ चुकल छनि। मालविका राज बुद्ध के समयक लोकगीत के चित्रित क के एहि शैली मे सालो सं चली आबि रहल पारंपरिक प्रथा मे विशेष रूप सं बदलाव अनबाक काज केलनि।
मालविका राजक कला के भारत मे जहांगीर आर्ट गैलरी, मुंबई आ भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद आ दिल्ली मे ललित कला अकादमी मे प्रदर्शित कैल गेल अछि। सावित्रीबाई फुले पर आधारित एकटा किताब “सावित्रीबाई और मैं”, संगीता मुले द्वारा लिखित एकटा पुस्तक के चित्रण सेहो केलनि।

15 मई 2022

Mithila Folkart

Mithila Painting - History, Designs And Artists | मिथिला चित्रकला - इतिहास, डिजाइन एवं कलाकार

मिथिला धरोहर
Mithila Art History : एकटा एहन कला जेकरा वैश्विक पटल पर महिआ सब पहुंचेलक। इ एकटा एहन लोक कला अछि, जेकर संवर्धन आ संरक्षण मे महिलाक हाथ अछि। हम बात क रहल छि मिथिला चित्रकला के। एकरा मिथिला पेंटिंग कहल जाइत अछि। मानल जाइछ इ चित्र राजा जनक जी राम-सीता के विवाहक समय महिला कलाकार सं बनबेने छलैथ। मिथिला क्षेत्रक कतेको गामक महिला अहि कला मे दक्ष अछि। अपन असली रूप मे त इ पेंटिंग गामक माट्टी सं नीपल गेल भीत मे देखबाक भेटय छल, मुदा एकरा आब कपड़ा या फेर कागजक कैनवास पर खूब बनायल जाइत अछि।

आय पूरा दुनिया मे एकर डंका बाएज रहल अछि। देशे नै, दुनिया के विकसित राष्ट्र मिथिला पेंटिंग के विशिष्टता पर मोहित अछि। स्वंय देशक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहम चीन दौरे पर जा रहल छलैथ, त हुनकर कन्हा पर जे शॉल राखल छलैन, मिथिला पेंटिंग ओकर सुंदरता मे चाइर चांद लगा रहल छल।भारतक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिथिला पेटिंग सं अतेक लगाव इ बतेबाक लेल बेसी अछि जे इ पूरा दुनिया मे प्रसिद्ध भ रहल अछि।

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मिथिलाक पहचान एतय के मेधा अछि। मिथिलाक मधुरता अछि। मिथिलाक संस्कृति आ पेंटिंग अछि। मधुबनी जिला मुख्यालय सं दस किलोमीटर दूर रहिका प्रखंडक नाजिरपुर पंचायतक एगो गांव अछि जितवारपुर। करीब 670 परिवार के अपन आँचर मे समेटने एहि गामक इतिहास गौरवशाली अछि। एकर सबसं बड़का कारण इ ऐछ जे एहि गामक तीनटा शिल्पि के पद्मश्री सं सम्मानित कैल जा चुकल अछि। साइठ वर्ष  सं मिथिला पेंटिंग सं जुड़ल बौआ देवी के 2017 मे पद्म पुरस्कार भेटलनि। बौआ देवी के 1985-86 मे नेशनल अवॉर्ड भेट चुकल छनि। एहिसं पहिले जगदम्बा देवी आ सीता देवी के इ सम्मान भेट चुक अछि। पूरा जितवारपुर गामे मिथिला पेंटिंग आ गोदना पेंटिंग विधा मे पारंगत अछि। लगभग छह सौ सं बेसी लोग एहि कला सं जुरि क देश-विदेश मे अपन नाम रोशन क चुकल अछि।

मिथिला देशक उत्तर मे हिमालय द्वारा घिरल अछि,  गंगा दक्षिण मे कोसी, पूर्व, पर आ गंडक पश्चिम मे अछि। मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, चंपारण, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर, भागलपुर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, सुपौल, बेगूसराय जिला के मिथिलाक नाम सं जानल जाइत अछि। नेपालक तराई जिला आ हिमालय के निचला पर्वतमाला के कतेको भाग मे मैथिलि भाषाक प्रयोग कैल जाइत अछि। प्रारम्भ मे रंगोली के रुप मे रहलाक उपरांत इ कला धीरे-धीरे आधुनिक रूप मे कपड़ा, दीवार आ कागज पर उतैर आयल अछि। मिथिलाक औरत द्वारा शुरू कैल गेल एहि घरेलू चित्रकला के पुरुषो अपना लेलक अछि।


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कला शैली के विकास 17वीं शताब्दीक आसपास मानल जाइत अछि। इ शैली मुख्य रूप सं जितवारपुर आ रतन गांव मे विकसित भेल। बहुते पहिले सं मिथिलाक स्त्रीगण अपन घर, दरबज्जा पर चित्र उकेरैत रहली हन जाहिमे एकटा सगरो संसार रचल जाइत रहल अछि। कोहबर, दशावतार, अरिपन, बांसपर्री आ अष्टदल कमल वियाहक अवसर पर घर मे बनाओल जाइत रहल अछि। चित्र मे मूल्यरूप पर कुल देवता के सेहो चित्रण होइत अछि। हिन्दू देवी-देवताक तस्वीर, प्राकृतिक नजारा जेना- सूर्य आ चंद्रमा, धार्मिक गाछ-वृक्ष जेना- तुलसी आ बियाहक दृश्य देखबाक भेटत।

7 मार्च 2022

Chano Devi

मिथिला पेंटिंग के गोदना शैली के पहिल विश्व प्रशिद्ध कलाकार चानो देवी

मिथिला धरोहर

गोदना चित्रकलाक शुरुबात करबाक श्रेय चानो देवी ( Godna Painting Artist Chano Devi ) के जाइत अछि। हुनकर जन्म 20 अप्रैल 1955 के जयनगर, मधुबनी स्थित गांव रमना के एकटा मजदूर परिवार मे भेलनि। हुनकर माता-पिताक नाम रवनी देवी आ सूरज पासवान छलनी। 1967 मे चानो देवी के बियाह मधुबनी जिलाक जितवारपुर गामक निवासी रौदी पासवान सं भेलनि, जतए ओ गोदना चित्र बनेनाय सिखबाक संगे खुद के स्थापित सेहो केलनि। 

तमाम जर्नर्ल्स एवं रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1972 मे जहन जर्मन एंथ्रोपोलॉजिस्ट एरिका मोजर मिथिला चित्रकला पर फिल्मांकन के उद्देश्य सं जितवारपुर अयली आ सीता देवी के घर रुकली, तहन ओतय हुनक मुलाकात चानो देवी सं भेलैन। ओ चानो देवी के देह पर बनल गोदना चित्र के देखली आ हुनका कागज पर उतारबाक सलाह देलनि।

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एरिका मोजर के सलाह आ सीता देवी के प्रेरणा सं चानो देवी गोदना चित्र के कागज पर बनेनाय शुरू केलनि। एकटा अड़चन इहो रहल जे चानो के देह पर बेसी गोदना नै छलैन। तहन रौदी पासवान रांटी गांव सं एकटा नटिन जायदा के ल'क घर एलैथ। जायदा गोदना गोदय मे माहिर छलैथी। रौदी के आग्रह पर जायदा चानो देवी के कतेको दिन धरि कागज पर गोदना चित्र बनेनाय सिखेलैथ। यैह वजह ऐछ जे चानो आजीवन जायदा के अपना गुरु मानैत रहलीह।
छवि साभार - रविन्द्र दास
बेसी सं बेसी गोदना चित्र बनेनाय सीखबाक उपरांत जल्दीए चानो देवी अपन चित्र मे लोकगाथा राजा सलहेस, मोतीराम, बुधेश्वर, दौना मालिन, रेशमा-कुसमा, चूहड़हल आदि के चित्रण शुरू केलथि। इ चरित्र गोदना चित्रकलाक केंद्रीय पात्र बैन उभरल। ओहि दौरान भास्कर कुलकर्णी हुनकर चित्र के देखलैथ आ बहुते प्रभावित भेलैथ। ओ  चानो देवी के चित्र खरीदाबाक संगे हुनका प्रोत्साहित सेहो करैत रहलाह।

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गोदना चित्र बनेबाक सं पूर्व चानो देवी भित्ति चित्रण बनैत छलथि। जहन ओ कागज पर गोदना चित्र बनेनाय शुरू केलनि, तहन ओहि कागजक खरखर सतह पर गोबरक घोल के प्रयोग केलनि जाहिमे बगुरक गोंद मिलल होइत छल। अहि दौरान कतेको बेर ओ कारी रंगक ठोप द के आकृति के साजबैत छलथि।

चानो देवी के इ तकनीक अस्सी के दशक के अंत धरि बहुते लोकप्रिय रहलनी आ ओकर प्रभाव जितवारपुर के ज्यादातर लोक कलाकार पर स्पष्ट रूप सं देखाइत छल। अहि दशक'क शुरुआत मे जापान सं मधुबनी आयल टोकिये हासेगावा के रौदी पासवान सं भेंट होइत अछि। ओहो चानो देवी के कलात्मक क्षमता सब बड़ प्रभावित होइत छैथ आ हुनका प्रोत्साहित करैत छथि।
चानो देवी के कलात्मक क्षमताक अंदाजा अहि सं भेटैत अछि जे हुनका द्वारा बनायल चित्र फ्रांस, अमरीका, जर्मनी के गैलरि आ जापान'क मिथिला म्यूजियम मे संकलित अछि। एकर अलावा हुनकर चित्र पटना, रांची, मुंबई, दिल्ली, कलकत्ता, ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, और गोवा मे प्रदर्शित कैल गेल अछि। 

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मिथिला चित्रकला मे हुनकर योगदान के देखैत वर्ष 1984-85 के लेल हुनका राज्य पुरस्कार आ 2007 मे हुनका राष्ट्रीय पुरस्कार सं सम्मानित कैल गेलनि। 

चानो देवी के देहांत 2009 मे कैंसर सं भ गेलनि।

(मैथिली अनुवाद - फ़ोककार्टोपीडिया)

20 फ़र॰ 2022

Jivan Parichay

मिथिला चित्रकला के गोदना शैली के स्वर्णिम हस्ताक्षर शिवन पासवान

मिथिला धरोहर

शिवम पासवान मिथिला पेंटिग के संगे-संग गोदना पेंटिग के माहिर कलाकार के रूप मे जान जाइत छथि। शिवन पासवान के जन्म 4 मार्च 1956 के मधुबनी जिलाक गांव लहेरियागंज के वार्ड नंबर एक मे भेलनि। 10वीं पास शिवन पासवान बच्चे सं पेंटिग बनाबय लगलाह। 

जितवारपुर के गोदना पेटिग के प्रसिद्ध कलाकार चानो देवी आ रौदी पासवान के छत्रछाया मे शिवन पासवान अहि कला मे आगू बढैत चली गेलाह। शिवन पासवान परंपरागत पूजा-पद्धति सं जुडल कथानक धरि सिमटल मिथिला पेंटिग के संगे-संग गोदना सं कला प्रेमि के आकर्षित करबा मे बहुते सफल रहलैथ।

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राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपन विशिष्ट पहचान बनेनिहार शिवन पासवान के पेंटिग के क्षेत्र मे श्रेष्ठ शिल्पी के लेल वर्ष 1984 मे राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान कैल गेलनि। शिवम पासवान के वर्ष 1983 मे राज्य पुरस्कार प्रदान कैल गेलनि। कैनवास, स्पेसक संतुलन, सुंदर रेखांकन आ प्राकृतिक रंग के संयोजन हुनकर पेटिग के विशेषता रहल अछि।
शिवम पासवान द्वारा तैयार भेल पेंटिग दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई सहित देशक विभिन्न हिस्सा आ इटली, हांगकांग सहित विश्वक आन देश मे प्रदर्शित भ चुकल अछि। वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकारक प्रशिक्षण परियोजना के तहत शिवम पासवान मिथिला पेंटिग के प्रशिक्षक सेहो रही चुकल छथि। मिथिला चित्रकला आ गोदना पेंटिग के क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान के लेल भारत सरकार, बिहार सरकार, चेतना समिति सहित दोसर संस्थान द्वारा हुनका सम्मानित कैल जा चुकल छनि। हस्तशिल्प के क्षेत्र मे शिवम पासवान कर्नाटक सरकार द्वारा सेहो सम्मानित कैल गेल छैथ।

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25 दिस॰ 2021

Ganga Devi

पद्मश्री गंगा देवी मिथिला चित्रकार और हुनकर जीवनी

मिथिला धरोहर

Padma Shri Ganga Devi - गंगा देवी के जन्म मधुबनी जिलाक रसीदपुर गांव में 1928 मे एकटा कायस्थ परिवार मे भेल छलनी। गंगा देवी बचपने सं मिथिला पेंटिंग बनेबाक अभ्यास करैत छलथि। हुनकर वैवाहिक जीवन सफल नै रहलनि, बच्चा नै भेलाक कारण हुनकर पति हुनका छोइड़ के दोसर विवाह क लेलकैन। समयक ओहनो परिस्थिति मे गंगा देवी मिथिला पेंटिंग लेल काज करैत रहली आ मिथिला के पारंपरिक पेंटिंग हस्तशिल्प सं आगू अपन अलग एकटा शैली बनेलनी जे कच्छनी शैली (रेखाचित्र) कहल जाइत अछि। 

एक दिन फ़्रांसिसी कला संग्राहक हुनका घर एलनी आ गंगा देवी के कागज द के ओहिपर अपना लेल किछ चित्र बनेबाक लेल कहलकैन। गंगा देवी के चित्रकारी देख क ओ अतेक प्रसन्न भेलैथ जे ओ गंगा देवी के इनामक तौर पर बहुते बड़का राशि द देलकैन। अहि प्रकार धीरे-धीरे हुनकर कला चित्रकारी के क्षेत्र मे उभरय लागल आ हुनकर चित्रक मांग बढैत गेलनि। हुनका दिल्ली शिल्प संग्रहालय एहन जगह पर आमंत्रित भेटनाय शुरू भेलनि।


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● अभिनेत्री निशा झा एकटा परिचय

ताहि उपरांत ओ दुनिया भर मे कला के रूप क लोकप्रिय बनेबाक प्रयास मे विभिन्न देशक यात्रा केलथि। गंगा देवी संयुक्त राज्य अमेरिका मे आयोजित एकटा कार्यक्रम, ‘भारत के त्योहार’ मे सेहो भाग लेलथि। अहि आयोजन मे ओ अपन चित्र के प्रदर्शित केलथि आ कतेको अंतरराष्ट्रीय कलाकार द्वारा सराहल गेलथि। 


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● भुईया बाबा : मिथिलाक लोक देवता 

मिथिला पेंटिंग मे हुनकर प्रयास के लिए भारत सरकार हुनका National Award for Crafts सं सम्मानित केलकनी। वर्ष 1984 मे गंगा देवी के भारत के राष्ट्रपति द्वारा पद्मश्री सं सेहो सम्मानित कैल गेलनि।

गंगा देवी के हिंसक मृत्यु 1991 मे हुनकर सौतेला बेटाक हाथो भेलनि। जे शायद हुनकर नबका अधिग्रहीत संपत्ति के हड़पय चाहैत छल। गंगा देवी जाहि परिस्थिति मे चित्रकारी के इ सफर शुरू केने छलथि, ओहिसँ स्पष्ट होइत अछि जे अहि यात्रा मे ओ बहुते किछ अर्जित केने छलथि।

6 दिस॰ 2021

Bhagalpur

उलूपी झा : घरक सृंगार मंजूषा सं, एकटा परिचय

मिथिला धरोहर

भागलपुर जिलाक नवगछिया के एकटा छोट सन गांव मे रहय वाली उलूपी झा Ulpi Jha From Bhagalpur ) एक दौर मे स्कूल मे टीचर छलथि, मुदा आय ओ एकटा एहन कला के बचेबाक काज कऽ रहल छथि जे लुप्त भऽ गेल अछि। इ अछि मंजूषा कला ( Manjusha Art )।

भागलपुर महोत्सव मे मंजूषा सं सजल दुकान देखलथी, ओतय सूप, बौनी आ डगरा पर सांप आ लहरिया बार्डर देखलथी। तहन हिनका पता चललैन जे मंजूषा की अछि। 2008 मे दिशा ग्रामीण विकास मंच आ नाबार्ड द्वारा मंजूषा कला के प्रशिक्षण मनोज पंडित सं लेलथि। ओतय सं उलूपी झा के मंजूषा कला साधना शुरू भऽ गेलनि। महिला सब के कला सं जोडऩाय शुरू केलथि। सामाजिक बाधा सेहो एलनी। उलूपी झा मधुबनी पेंटिंग सं सेहो प्रेरणा लऽ के मंजूषा मे बारीकि के शामिल केलथि। एक दशक पहिले तक मंजूषा मे सांपक चित्र बनेनाय अनिवार्य होइत छल, मुदा ओकरा दरकिनार कऽ उलूपी अंग प्रदेशक कथा, फल-फूल आ सरकारकऽ योजना के मंजूषा शैली मे उकेरनाय शुरू कऽ देलथि। आब मंजूषा कला आमदनी के जरिया बैन गेल ऐछ।

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मंजूषा कला के राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाबय वाली उलूपी झा सं तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी एकरा बारे मे पूछने छलखिन। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा 22 जनवरी 2016 के उलूपी झा के सम्मानित केने छलैन। उलूपी झा 26 जनवरी 2020 के दिल्ली मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सं भेंट कऽ मंजूषा कला के विशेषताक बारे मे बतेलथि। पीएचडी डिग्री के संग आशिहारा कराटा मे ब्लैक बेल्ट सेहो लेने छथि।

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2014 मे प्रगति मैदान मे आयोजित भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला मे मंजूषा के जीवंत प्रस्तुति केलनि। 2014 मे बिहार के कला संस्कृति आ युवा विभाग के कार्यशाला मे भागीदारी निभेलथि। वर्ष 2013 मे भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा वीरांगना सावित्री बाई फूले फेलोशिप सम्मान भेटलनि। 26 जनवरी के पटना मे कला संस्कृति विभाग के झांकी मे मंजूषा के शामिल कैल गेल छल। अहि दिन तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मल्लिक के रात्रिभोज मे शामिल भेलथि। 2 अक्टूबर 2017 आ 26 जनवरी 2018 के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सम्मानित कऽ चुकल छनि। अहिसँ पहिले 2015 मे राज्य पुरस्कार सं मुख्यमंत्री सम्मानित केलनि। वर्ष 2018 मे अखिल भारतीय विश्व ङ्क्षहदी समिति न्यूयार्क द्वारा विशिष्ट सम्मान भेट चुकल छनि। 

14 नव॰ 2021

Jagdamba Devi

पद्मश्री जगदम्बा देवी : मिथिला पेंटिंग लेल पद्मश्री सं सम्मानित पहिल कलाकार

मिथिला धरोहर
मिथिला चित्रकला जाहि कलाकारक जरिए वैश्विक पटल पर उभरल, ओहिमे एकटा नाम पद्मश्री जगदम्बा देवी  ( Padma Shri Jagdamba Devi, Mithila Penting ) के सेहो अछि। हुनकर जन्म 25 फरवरी, 1901 के मधुबनी जिलाक भोजपड़ोल गाँव मे भेल छलनी। जहन इ पाँच वर्षक छलीह, तहने हिनक पिता के देहांत भ गेलनि आ बाद मे लगभग एक साल बाद माँ सेहो नै रहलनि। ओहि समय मिथिला मे लड़कि सब के बीच शिक्षा के प्रचलन नै छल। ताहिलेल जगदम्बा के शिक्षा-दीक्षा नै भेलनि।

ओहि समय के सामाजिक प्रथा के मुताबिक नौ वर्षक छोट उम्र मे जगदम्बा के बियाह जितवारपुर के बालकृष्ण दास के संग क देल गेलनि। बियाहक किछे मासक बादे बालकृष्ण दास के निधन भ गेलैन।

सन् 1964-65 मे अखिल भारतीय हस्तशिल्प बोर्ड के कला पारखी आ अन्वेषक भाष्कर कुलकर्णी मधुबनी पहुंचला आ व्यावसायिक रूप सं चित्र बनेबाक लेल जाहि पांचटा महिला कलाकार के चयन केलैथ, ओहिमे जगदम्बा देवी सेहो छलथि। ओ जगदम्बा देवी के चित्र बनेबाक हेतु हस्तनिर्मित कागज देलथि। ओहि चित्र के प्रदर्शनी बाद में नई दिल्ली के दस जनपथ स्थित सेन्ट्रल कॉटेज इम्पोरियम में प्रदर्शित कैल गेल। जेकरा खूब सराहाना भेटल। एकर तुरन्त बाद पेरिस मे आयोजित प्रदर्शनी मे सेहो हुनकर चित्र के प्रदर्शित कैल गेल आ ओतहु हुनकर चित्र के खूब सराहना भेटलनि। देश-विदेशक कला प्रेमि के ध्यान मिथिलांचल के अहि पारम्परिक कला दिस आकृष्ट भेल आ ओकरा मिथिला पेंटिंग के नाम सं जानल जाय लागल। जगदम्बा देवी द्वारा बनाओल गेल चित्र अनेक देश मे संकलित ऐछ। हुनक बनाओल किछ चित्र साबरमती आश्रम मे सेहो प्रदर्शित ऐछ।

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● उच्चैठ दुर्गा स्थान, बेनीपट्टी : जतय कालिदास के भेंटलनि ज्ञान

मिथिलाक चितकलाक क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान के लेल 4 जनवरी, 1969 के अखिल भारतीय हैण्डीक्राफ्ट बोर्ड जगदम्बा देवी के सम्मानित केलकनी। 8 दिसम्बर, 1969 के बिहार सरकार के उद्योग विभाग हिनका ताम्रपत्र सं सम्मानित केलकनी। 26मा वैशाली महोत्सव (18-20 अप्रैल, 1970) के अवसर पर सेहो उद्योग विभाग द्वारा जगदम्बा देवी के सम्मानित कैल गेलनि। 6 मार्च, 1970 के नव दिल्ली के विज्ञान भवन मे आयोजित एकटा विशेष समारोह मे तत्कालीन राष्ट्रपति वी.वी. गिरि ने 10 X 5 फीट केे कागज पर बनाओल गेल पेंटिंग "दशावतार" के लेल हुनका राष्ट्रीय पुरस्कार (1970) सं सम्मानित केलकनी। उल्लेखनीय ऐछ जे राष्ट्रीय पुरस्कार के श्रेणी मे मिथिला पेंटिंग के ओहि वर्ष पहिल बेरा शामिल कैल गेल छल आ अहि विधा मे राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त केनिहारी पहिल कलाकार छलखिन।
पद्मश्री जगदम्बा देवी के पेंटिंग (छवि साभार- आलेखन)
मधुबनी पेंटिंग के विकास मे अन्यतम योगदान के लेल बिहार सरकार 4 सितम्बर, 1973 के जगदम्बा देवी के दक्ष शिल्पी सम्मान सं सम्मानित केलकैंन। सन 1975 के वर्ष जगदम्बा देवी के लेल अत्यन्त महत्वपूर्ण साबित भेलनि। अहि वर्ष भारत सरकार हिनका "पद्मश्री" सम्मान (1975) सं विभूषित केलकनी। अहि तरह सं ओ मिथिला पेंटिंग मे पद्मश्री पाबय वाली पहिल कलाकार सेहो बैन गेल छलथि।

18 अक्टू॰ 2021

Jivan Parichay

पद्मश्री महासुंदरी देवी, मिथिला पेंटिंग लेल समर्पित हिनकर जीवनी

मिथिला धरोहर

पद्मश्री महासुंदरी देवी Padmashree Mahasundari Devi के जन्म 15 अप्रैल 1922 के मधुबनी जिला अंतर्गत चतरा गाम मे भेल छलनी। जहन इ पांच वर्ष के छलथि तहने हिनकर पिता रामजीवन लाभ आ मां दुलारी देवी के निधन भऽ गेलनि। चाचा पुनीत लाभ और चाची देवसुंदरी देवी के देख-रेख मे औपचारिक प्राथमिक शिक्षाक संगे-संग सामाजिक, सांस्कृतिक तथा पारम्परिक कला के व्यावहारिक शिक्षा पूर्ण भेलनि। 15 वर्ष के आयु मे महासुन्दरी देवी मधुबनी पेंटिंग के संगे संग सिक्की, सुजनी, कानियाँ-पुतरा तथा पेपरमेशी शिल्प मे माहिर भऽ गेल छलथि।

महासुन्दरी जखन 17 वर्ष के छलथि, तहने हिनकर बियाह मधुबनी जिलाक राँटी गाम के कृष्ण कुमार दास के संग भऽ गेलनि। महासुन्दरी अपन गाँव चतरा सं अपन परम्परा आ संस्कृति के सहेज कऽ राँटी चली एलथि।

1964-65 मे मिथिलांचल मे भीषण अकाल पड़ल छल। ताबे धरि तक इ चित्रकला मिथिलांचल धरि सीमित छल। ओहि समय के तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री ललित नारायण मिश्र के अहि कला के जानकारी छलनी। हुनके पहल पर कला पारखी, डिजाइनर भास्कर कुलकर्णी जाहि पाँच टा स्थानीय महिला सब के अहि चित्रकला के व्यावसायिक उपयोग के लेल प्रेरित केलनि ओहि मे महासुंदरी देवी सेहो छलथि। भास्कर कुलकर्णी हैण्डमेड पेपर पर महासुन्दरी देवी द्वारा चित्रित 4 विलक्षण कृति के दिल्ली मे प्रदर्शित केलनि, जे बहुप्रशंसित भेल।

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वर्ष 1966 मे मधुबनी चित्रकला के मौलिकता आ अनोखापन के चर्चा सुनी अखिल भारतीय हस्तकला बोर्ड के अध्यक्ष श्रीमती कमला देवी चट्टोपाध्याय मधुबनी एलथि। ओहि क्रम मे चट्टोपाध्याय के भेंट महासुन्दरी देवी सं भेलनि। महासुन्दरी देवी द्वारा बनायल गेल चित्र के देख बहुते प्रभावित भेलथि। चट्टोपाध्याय महासुन्दरी देवी के अहि कला सं लऽग-पासक महिला के सेहो प्रशिक्षित करबाक सलाह देलथि। अन्ततः हुनकर प्रयास रंग अनलनि आ लऽग-पासक महिला हुनकर  "मिथिला हस्तशिल्प कलाकार औद्योगिक सहयोग समिति लिमिटेड" सं जुड़य लगलनि।

महासुन्दरी देवी हैण्डमेड कागज सं आगू बैढ़ 1970 में साड़ी पर, 1973 में लकड़ी पर आ 1980 मे सनमाइका आ प्लाइबोर्ड पर चित्रकारी शुरू कऽ देलथि।। जाहिमे दशावतार, कृष्ण जन्मकथा, राम-सीता विवाह, सीता जन्म कथा, रासलीला आ शिव-पार्वती एहन धार्मिक विषय के शामिल केलथि। सिल्क, सूती कपड़ा आ सनमाइका एवं प्लाइबोर्ड पर मिथिला चित्रकला के शुरूआत करय बाली पहिल कलाकार के श्रेय हिनके जाइत छनि।

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सन् 1976 मे 66 फीट लम्बा आ 8.1/2 फीट चौड़ा चित्र बनने छलथि, जाहिमे मिथिला में जन्म लय वाली लड़की के जन्म सं लऽ के द्विरागमन धरिक पारम्परिक जीवन के श्रृंखलाबद्ध चित्रण छल। इ चित्र बिहार सरकार द्वारा उपहार स्वरूप राज्यसभा भवन, नई दिल्ली मे लगा देल गेल। कहल जाइत अछि जे अहि पेंटिंग के देखी श्रीमती इंदिरा गाँधी बहुते प्रभावित भेल छलथि आ हुनका दिल्ली बजा कऽ सम्मानित सेहो केने छलखिन। सामान्य तौर पर एकटा कलाकार 18-20 तरीका सं अरिपनक निर्माण करैत अछि। मुदा पश्चिमी जर्मनी के एरिका मोआइजर के अनुरोध पर महासुन्दरी देवी एक बेरा 85 तरहक अरिपन के निर्माण केने छलथि, जे  बहुप्रशंसित भेल छल, और आय जर्मनी के राष्ट्रीय संग्रहालय मे सुशोभित अछि।

1970-80 के दशक मे तत्कालीन रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र के पहल पर हावड़ा सं नई दिल्ली जाय बला ट्रेन ’जयंती जनता एक्सप्रेस’ के बाहरी भाग के मिथिला पेंटिंग सजायल गेल छल। इ एकटा नव प्रयोग छल आ पूरा दुनिया मे एकर चर्चा भेल छल। ओहि समय फ्रांस के लेखक-प्रोफेसर इब्स मिको के अनुरोध पर महासुन्दरी देवी मिथिलांचल के जीवन पर आधारित 50 सुन्दर चित्रावलि के सृजन केने छलथि, जे यूरोप के कतेको देश मे प्रदर्शित भेल। इब्स मिको अहि चित्र के  ’"The Art of Mithila" नामक पुस्तक मे स्थान देलनि आ संगे "The Mithila" नामक डाक्यूमेन्ट्री फिल्म सेहो बनेलनी। कनाडा के फिल्म प्रोडयूसर एलान वैस हिनक चित्र के अपन वृतचित्र मे शामिल केलनि, जेकरा "An Ospecious Diagram'' के नाम देल गेल।
वर्ष 1978 में बिहार सरकार हुनका राज्य पुरस्कार सं सम्मानित केलकैन। 1982 मे भारत सरकार सं राष्ट्रीय पुरस्कार आ 1996-97 मे मध्य प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ सम्मान ’"राष्ट्रीय तुलसी सम्मान" प्राप्त भेलैन। वर्ष 2008 मे हिनका शिल्पगुरू सम्मान सं सम्मानित कैल गेलनि। वर्ष 2010 मे हिनका भारत मे कला के क्षेत्रक सबसं बड़का सम्मान "पद्मश्री" भेटलनि। मिथिला पेंटिंग मे पद्मश्री भेटनिहार चारिम कलाकार छलथि। जापान मे अवस्थित "Mithila Museum" के उदघाटन समारोह मे सेहो हुनका मुख्य अतिथि के रूप मे आमंत्रित कैल गेलनि। फ्रांस आ माॅरीशस मे सेहो हुनक चित्र के प्रदर्शनी भेलनि।

4 जुलाई, 2013 के 91 वर्षक उम्र मे महासुन्दरी देवी अहि संसार सं सदा के लेल चली गेलथि। एहन कलाकारक यशः शरीर के कहियो अन्त नै होइत अछि। देश-विदेशक प्रसिद्ध आर्ट गैलरि मे हुनकर कतेको चित्र आयो सुशोभित अछि।

17 सित॰ 2021

Jivan Parichay

पद्मश्री सीता देवी, मिथिला पेंटिंग के महान कलाकार : सम्पूर्ण परिचय

मिथिला धरोहर

सीता देवी ( Padma Shri Sita Devi ) के जन्म 1914 मे सुपौल जिलाक वसहा गाँव मे एकटा सभ्रान्त गृहस्थ परिवार मे भेलनि। हुनकर पिता के नाम चुमन झा आ माता के नाम सोन देवी छलनी। सीता देवी गामे मे प्राईमरी स्कूल के शिक्षा प्राप्त केलथि आ अपन माँ तथा नानी सं भित्ति चित्र बनेनाय सिखलथि। 

तत्कालीन समाज मे व्यापत प्रथा के मुताबिक 12 वर्ष के उम्र मे हुनकर बियाह मधुबनी जिला के जितवारपुर गाँव के एकटा गरीब ब्राह्मण परिवार मे शोभाकान्त झा के संग भ गेलनि। हुनकर सासुरक परिवार बहुते गरीब छलनी। भोजन तक के संकट छलनी। आर्थिक विपन्नता एहन रहलनि जे अंत मे जितवारपुर छोइर के सहरसा स्थित बड़का भाईक एतय अपन संतान ल के चली गेलथी। ओतय बड़का बेटा रामदेव स्कूली शिक्षा पूरा केलकैन। दोसर पुत्र सूर्यदेव के आठवीं धरिक ओतय पढ़ाई करेलखिन। तेसर पुत्र महादेव के जन्म एतय भेलनि। फेर अपन तीनों बेटाक संगे जितवारपुर आबि गेलथी।

सन् 1962 मे मिथिला मे भीषण अकाल पड़ल छल। ओहि अकाल सं निपटबाक लेल भारत सरकार के हैण्डीक्राफ्ट बोर्ड डिजाइनर भास्कर कुलकर्णी के अहि क्षेत्र के ग्राम्य जीवन मे विद्यमान भित्ति-चित्र के व्यवसायिक आयाम देबाक लेल मधुबनी भेजल गेलनि। ओहि समय धरि ब्राह्मण एवं कायस्थ जाति के महिला मे सेहो भित्ति-चित्रों के बनेबाक प्रचलन छल।

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Sita Devi photographed by Edouard Boubat, 1970, for the book The Art of Mithila by Yves Véquaud (छवि साभार : सीता-देवी.ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम)
भास्कर कुलकर्णी के किनको सं जानकारी भेटलैंन जे जितवारपुर के महापात्र परिवार के सीता देवी भित्ति-चित्रण मे दक्ष छथि आ गरीबी मे अपन जीवन-यापन क रहल छथि। कुलकर्णी के बहुते बुझेला पर तैयार भ गेलथि। माँ-नानी सं मधुबनी चित्रकला के दान भेटल छलनी। सीता देवी के संग-संग जितवारपुर के जगदम्बा देवी एवं किछ अन्य महिला सेहो अहि कार्य मे आगू एलथि। अहि तरहे मिथिला पेंटिंग, जे पूर्व मे भित्ति-चित्र छल, ओकर व्यवसायिक रूपांतरण कागज पर प्रारम्भ भेल। कुलकर्णी के अनुरोध पर सीता देवी 30X22 के कागज पर किछ चित्र बनेलथि। सीता देवी समेत अन्य कलाकार द्वारा बनाओल गेल चित्र के नई दिल्ली के 10 जनपथ पर प्रदर्शित कैल गेल। 

हुनकर द्वारा बनाओल गेल चित्र के माँग दिनों-दिन बढैत गेलनि। दिल्ली सं आमंत्रण एलनी। चाणक्य आर्ट गैलरी मे सीता देवी अपन चित्रावलि प्रदर्शित केलथि। प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के हुनका बारे मे सूचना भेटलनि। हुनका भेंट करबाक लेल बजेलथी। इंदिरा गांधी अनुरोध केलथि - हमरा सोंझा चित्र बनाबु। एकटा दियासलाईक काठी के ब्रश सं दुर्गा माता के भव्य चित्र उकेर देलथि। एतय सं हुनकर ख्याति आ अवदान के चमत्कार रंग भरय लगलनि। भारतक सर्वोपरि धनी महिला गिरा साराभाई अपन नबक़ा मकानक दीवार पर माटीक रंगों सं चित्र उकेरबाक लेल हुनका अहमदाबाद बजेलथि। फेर दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित अकबर होटल के मधुबन काफी शाॅप के दीवार पर चित्र बनेलथि, जे बहुते लोकप्रिय भेल। 1972 मे दिल्ली के प्रगति मैदान मे आयोजित ग्राम झांकी मे हुनकर द्वारा बनायल गेल भित्ति-चित्र के काफी सराहना भेटलनि। नई दिल्ली स्थित इंदिरा गाँधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के मुख्य द्वार के अंदर के दीवार पर हुनके द्वारा बनायल पेंटिंग सेहो सुर्खि रहलनि। हुनकर चित्र के ख्याति देश सं ल के विदेश धरि पसरय लगलनि। मिथिला पेंटिंग मे हुनकर उल्लेखनीय योगदान के लेल बिहार सरकार 1969, 1971 आ 1974 मे हुनका श्रेष्ठ शिल्पी, दक्ष शिल्पी आ राज्य पुरस्कार सं सम्मानित केलकनी। 1975 मे भारत सरकार के दिस सं राष्ट्रीय पुरस्कार भेटलनि।

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अर्द्ध-नारीश्वर, सीता-हरण, सीता-स्वयंवर, महाकाली, तथा कृष्ण-कथा एहन हिनकर चित्र ओहि समय एतेक लोकप्रिय भेलनि जे हुनका सन् 1976 मे अमेरिका, जर्मनी आ जापान सं आमंत्रण भेटलनि। वाशिंगटन, न्यूयाॅर्क आ बर्लिन सहित विश्व के 10 देश मे हिनकर चित्र के प्रदर्शनी भेलनि आ ओतय हिनकर कला कुशलता के खूब प्रशंसा भेलनि। वाराणसी मे प्रथम श्रेणी के रेलक डब्बा मे लकड़ी के खाली पैनल पर चित्रण सेहो केलथि।
सीता देवी 8 सितंबर, 1969 के नई दिल्ली में प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के मिथिला पेंटिंग प्रस्तुत करैत (छवि साभार: द टाइम्स ऑफ इंडिया)
वर्ष 1981 मे भारत सरकार हिनका 'पद्मश्री' सम्मान सं सम्मानित केलकनी। जर्मनी के एरिका स्मिथ, फ्रांस के इव्स विको, अमेरिका के रेमण्ड ओएन्स एवं डेविड फेमस आ जापान के टोकियो हासेगावा समेत कतेको ख्याति प्राप्त कला समीक्षक हिनकर चित्र पर शोध केलनि आ वृत चित्र सेहो बनेलनी।

लगभग पाँच दशक धरि मिथिला पेंटिंग मे सक्रिय रहबाक उपरांत सीता देवी के 12 दिसम्बर, 2005 के 91 वर्ष के उम्र मे निधन भ गेलनि। हुनकर बनाओल गेल चित्र लंदन के विक्टोरिया आ अलबर्ट म्यूजियम, लाॅस एंजिल्स केके काउन्टी म्यूजियम ऑफ़ आर्ट, द फिलाडेल्फिया म्यूजियम ऑफ़ आर्ट, पेरिस के मसी द क्यू ब्रान्ली और जापान के मिथिला म्यूजियम सहित भारत के कतेको संग्रहालय मे सुशोभित अछि।

15 सित॰ 2021

Mithila Folkart

मिथिलांचल के परम्परा, धरोहर सं जुड़ल कला अछि सिक्की कला

मिथिला धरोहर

मिथिला धरोहर : मिथिलाक एकटा कला आय अपन अस्तित्व आ प्रचार-प्रसार के लेल जी-तोड़ मेहनत कऽ रहल अछि। इ कला अछि - सिक्की कला ( Sikki Art, Sikkim Kala )। सिक्की कला सं बनय बला कलाकृति नै केवल सुंदर होइत अछि,  बल्कि महिला के स्वरोजगार सेहो उपलब्ध करय मे सक्षम अछि। बहुते लोग एकरा मिथिलांचल के गरीबी के सौंदर्य कहय छथि। सच तऽ इहो अछि जे लोग के कठिन परिस्थिति मे रहय बला जीवनशैली सं प्रमुखता सं उभैर कऽ निकलल गरीबी आ कठिन परिस्थिति मे कला कोन प्रकार जन्म लइत अछि आ पहचान बनाबैत अछि सिक्की कला अहिके प्रतीक अछि।

सिक्की कला : काइल, आय आ काइल
सिक्की कला मिथिलांचल के प्रमुख कला मे सं एक अछि। सिक्की एक तरहक खऽर (घास) होइत अछि, जे मिथिलांचल मे नदी आ धार, पोखैरिक कात पैल जाइत अछि। सिक्की सं बनल कलाकृति अतेक मनमोहक होइत अछि जे अहिसे नजैर हटेने नै हटय। इ कला देशक संगे विदेश मे सेहो खूब पसंद कैल जाइत अछि। पीढ़ी दर पीढ़ी अहि कला के उत्थान होइत रहल आ आय इ कला अपन नव अवतार मे आगू बैढ़ रहल अछि। अहि कला के लेल रैयाम गांमक विदेश्वरी देवी के वर्ष 1969 मे तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान कैल गेल छलनी। 
सिक्की के इतिहास
सिक्की कला के इतिहास बताबैत अछि जे सिक्की तकरीबन 100 वर्षो सं पहिले सं चली रहल अछि।  अहि कला के सटीक समय बतेनाए कनि कठिन अछि, मुदा एकर उलेख प्राचीन भारत मे भेटैत आबि रहल अछि। मिथिलांचल के मिथिलानी आइयो सिक्की सं वस्तु बनाबैत छथि। सिक्की कला हुनका लेल एकटा नीक रोजगारक साधन साबित भेल ऐछ।

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सबसं पहिले सिक्की के काइट कऽ सुखाओल जाइत अछि। ओहिके उपरांत रंग बिरंगा रंऽग मे रंगल जाइत अछि। अहि सब के बाद टकुआ (एक तरहक सुइया) कऽ मदद सं अलग अलग वस्तु मे एकरा ढालल जाइत अछि।

सिक्की सं बनाबल जाइ बला वस्तु
मौनी - एक तरहक ट्रे जाहिमे फल आ पानक पत्ता राखल जाइत अछि। 
पौती - पौती एकटा छोट डब्बा होइत अछि जे मेवा, आभूषण आ कीमती वस्तु जे रखबाक काज आबैत अछि।
झप्पा- एकटा बड़का कंटेनर होइत अछि।
गुलमा- छोटका कंटेनर होइत अछि।
सजी- फूलदान के लेल उपयोग होइत अछि।
बास्केट्स, आभूषण, खिलौना

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केहन अछि वर्तमान स्थिति ?
आय सिक्की कला मे बहुते बदलाव आबि गेल अछि। सिक्की के कम मात्रा मे भेटनाय अहि कला के लेल एक तरहक अभिशाप भ जाइत अछि। सिक्की के व्यापारिक उद्देश्य के लेल उत्पादन नै के बराबर भ रहल अछि, जाहिसँ अहि कला के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न भ गेल अछि। मुदा आयो मिथिलांचल के मधुबनी, दरभंगा आ सीतामढ़ी के किछ महिला सिक्की सं वस्तु बनाबैत छथि। राज्य सरकार के दिस सं सेहो कतेको प्रयास कैल गेल हन। अहि दिशा मे रैयाम गावं मे पश्चिमी टोला के सिक्की कला सेंटर सिक्की कलाकार के लेल वरदान साबित भ रहल अछि। आब सिक्की सं पारंपरिक वस्तु के संगे-संग पेन बॉक्स, मोबाइल केस, खिलोना एहन वस्तु सेहो बनायल जा रहल अछि। 

17 मार्च 2021

Bharti Dayal

भारती दयाल मिथिला पेंटिंग के बनेलनी अपन पहचान, देश-विदेश मे क रह छथि मिथिलाक नाम उंच

मिथिला धरोहर

समस्तीपुर जिलाक काशीपुर निवासी स्व. विजय कुमार सिन्हा आ श्रीमती इंदू सिंहा केर बेटी भारती दयाल ( Bharti Dayal, Mithila Painting Artist ) मिथिला पेंटिग के क्षेत्र मे अपना बुते नै केवल अपन जिलाक बल्कि सगरो मिथिलाक नाम राष्ट्रीय स्तर पर रौशन केलथि। मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र मे पूरा देश मे नाम कमा रहली मिथिलाक अहि बेटी भारती दयाल के राष्ट्रपति सम्मान सेहो भेट चुकल छनि।

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अपन घरक देबाल पर पावैन-तिहारक अवसर पर बनाओल जाय बला चित्रकारी सं ओ एतेक प्रेरित भ गेलथि जे अहि कला के अपन कैरियर बना लेलथी।

वर्ष 2006 मे भारतक तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल भारती के मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र मे उत्कृष्ट योगदान के लेल सम्मानित केने छलथि संगेह दिल्ली सरकार सेहो हिनका मिथिला पेंटिंग के लेल सम्मानित केने छल। भारती जतए जाइत छथि मिथिलाक संस्कृति के बढ़ाबा देबाक लेल अहि सं जुड़बाक लेल लोग के प्रेरित करैथ छथि। एखन धरि दस सं बेसी देश मे अपन पेंटिंग के प्रदर्शनी लगा चुकल छथि। भारती दयाल के केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संग सितम्बर 2016 मे कल्चरल एम्बेसडर बैन के जेबाक सौभाग्य प्राप्त भेलनि।

27 जून 2020

Dulari Devi

पद्मश्री दुलारी देवी : संघर्ष के मिसाल, मिथिला चित्रकला के कलाकार

मिथिला धरोहर
मिथिला धरोहर : मिथिला चित्रकला के कलाकार दुलारी देवी ( Dulari Devi ) के जन्म मधुबनी जिला अंतर्गत रॉटी गामक एक मलाह परिवार मे २७ दिसंबर १९६७ के भेल छलनी। दुलारी के पिता मुसहर मुखिया आ भाई परीक्षण मुखिया माछ पकड़बाक काज करैत छलैथ आ मां धनेश्वरी देवी दोसरक घर मे खेत खरिहान मे मजदूर करै छलथि। 

जेना की ओइ दिन प्रचलन छल, १२ सालक उम्र मे  दुलारी के बियाह मधुबनी जिलाक बेनीपट्टी प्रखंड के बलाइन कुसमौल गाँव मे भ गेलनि। मुदा दुलारी के दामपत्ये जीवन सुखद नै रहलनि और नैहर एलि आ ओतय भ के रहि गेलथि। नैहर मे मिथिला पेंटिंग के सुप्रसिद्ध कलाकार महासुंदरी देवी और कर्पूरी देवी के एतइ दुलारी के ६ रु महीना पर झाड़ू-पोछा के काज भेटलनि। काज सं जहन समय भेटैन, त महासुंदरी देवी और कर्पूरी देवी के पेंटिंग बनाबैत ध्यान सं देखए छलथि। हुनका सब के देख दुलारी के मोन मे सेहो पेंटिंग बनेबाक लालस जगलनी।साँझ के घर लौटला के बाद अपन अंगना के पाइन सं भिजा क करची सं पेंटिंग बनाबए छली। इ काज कतेको महीना धरि चलैत रहल।
संयोगवश, ओहि दिन भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा महासुंदरी के आवास पर मिथिला पेंटिंग मे ६ मासके प्रशिक्षण शुरू कैल गेल। महासुंदरी देवी केर पहल सं दुलारी के सेहो प्रशिक्षण मे शामिल क लेल गेलनी। महासुंदरी देवी अपन सान्निध्य मे दुलारी के सीखेनाइ सुरु क देलनि। फेर त दुलारी के कल्पना उड़ान भरइ लगलनि। दुलारी के मेहनत रंग अनलनी और मिथिला पेंटिंग की तत्कालीन दुनिया में भली-भांति परिचित भ गेली फेर पाछु घुइम के नै देखलनि।

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ओहि समय धरि उच्च जातिक महिला ज्यादातर पौराणिक कथा रामायण आ महाभारत तथा दलित महिला राजा सहलेस सं जुड़ल प्रसंग के अपन चित्र मे उकेरै छलथि। मुदा दुलारी देवी परम्परा सं चली आबि रहल चित्र के नै अपनेलनी। इ अपन चित्र मे नव भाव के सात विषय के चुनाव मे नवीनता अनलनी।
दुलारी देवी के मिथिला पेंटिंग के कचनी शैली (रेखा चित्र) मे महारथ हासिल छनि। पातर डहीर (लकीर) सं चित्र आकार द रंगक जाहि कुशलता सं सम्मिश्रण करए छथि, ओ सर्वथा मौलिक होइत अछि हिनक चित्र मे, प्रेम आ समानता के सुंदर अभिव्यक्ति देखबाक भेटय अछि।

ललित कला अकादमी सं वर्ष १९९९ मे भेटल सम्मान आ उद्योग विभाग सं वर्ष २०१२-१३ मे बिहार सरकार के प्रतिष्ठित राज्य पुरस्कार भेटबाक उपरांत दुलारी देवी के उत्साह और बढ़लनी। देशक दोसर राज्य सं सेहो हुनका बुलावा आबय लगलनि। कला माध्यम नामक संस्था के माध्यम सं बेंगलुरु के विभिन्न शिक्षण संस्थान सरकारी आ गैर सरकारी भवन'क की दीवार पर ५ साल धरि चित्रण केलथि। फेर मद्रास, केरल, हरियाणा, चेन्नई आ कोलकाता मे मिथिला पेंटिंग पर आयोजित कार्यशाला मे शामिल भेलथि। बोध गया के नौलखा मंदिर के देबाल पर दुलारी देवी द्वारा बनायल गेल मिथिला पेंटिंग आयो लोग के ध्यान आकर्षित करैत अछि।

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देश-विदेशक पत्र-पत्रिका सेहो दुलारी देवी के पेंटिंग के प्रकाशन केने अछि। विदेशी कला प्रेमी गीता वुल्फ दुलारी देवी के जीवन प्रसंग पर आधारित एकटा सचित्र पुस्तक “फॉलोइंग माई पेंट ब्रश” के प्रकाशन केने छथि। अहि पुस्तक मे दुलारी देवी के मिथिला पेंटिंग के विस्तृत ज्ञान उद्घाटित भेल अछि। मार्टिल ली कॉलेज के फ्रेंच भाषा मे लिखल गेल इ पुस्तक “मिथिला” हिंदी के कला पत्रिका सतरंगी एवं ‘मार्ग’ मे  सेहो दुलारी के जीवन गाथा आ हुनक पेंटिंग के सुंदर वर्णन अछि। बिहार के राजधानी पटना मे बिहार संग्रहालय मे सेहो कमलेश्वरी (कमला नदी) पूजा पर दुलारी देवी द्वारा बनायल गेल पेंटिंग के प्रमुखता सं प्रदर्शित कैल गेल छनि। एखन धरि दुलारी देवी विविध विषय पर लगभग 10 हजार पेंटिंग बना चुकल छथि।

मिथिला पेंटिंग में महत्पूर्ण योगदान लेल 9 नवम्बर 2021 के दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द जी अपन हाथ सं दुलारी देवी के पद्मश्री सम्मान सं सम्मानित केलकनी।

15 मार्च 2019

Jivan Parichay

मिथिला चित्रकला और सुजनी कला के अंतरराष्ट्रीय पहचान देलनि स्व० कर्पूरी देवी

मिथिला धरोहर
जापान, अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी समेत दुनिया के विभिन्न देशक लोग बिहारक मिथिला पेंटिंग के पसंद क रहल अछि। भारत मे एखन भले ही  एकर म्यूजियम नै बनल होय मुदा जापान मे मिथिला पेंटिंग के म्यूजियम बनी चुकल अछि। फ्रांस होय या जर्मनी ओतय आर्ट गैलरी मे मिथिला पेंटिंग लागल रहैत अछि। मिथिलाक अहि कला के अंतरराष्ट्रीय फलक पर प्रसिद्धि भेटेबा मे कर्पूरी देवी केर महत्वपूर्ण योगदान छनि।
 
मिथिला पेंटिंग के क्षेत्र मे देश नै दुनिया भरी मे जानल पहचानल नाम अछि कर्पूरी देवी ( Karpuri Devi )। 90 सालक अवस्था में मधुबनी में हिनक देहांत (7/2019) भ गेलनि। बृद्ध अवस्था भेलाक उपरांतो हिनक उत्साह में कमी नै छलनी और स्वर्गवास भेला सं किछ दिन पहिले धरि अपन कला के सृजन क रहल छलथि। दुनियाभरी मे मिथिलाक कला के सांस्कृतिक दूत के रूप मे पहुंचेबा मे हिनकर बरका योगदान छनि। जापान नौ बेर, अमेरिका दु बेर और फ्रांस एक बेरा जा चुकल छथि। मूल रूप सं मधुबनी जिला के रांटी गामक निवासी कर्पूरी देवी केर मिथिला चित्रकला के क्षेत्र मे उल्लेखनीय योगदान लेल राष्ट्रीय पुरस्कार भेट चुकल छनि। मिथिला पेंटिंग के संरक्षक जापानी व्यक्ति हाशिगावा के निमंत्रण पर पहिल बेर 1988 मे जापान गेल रहथी।

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हाशिगावा जापान मे मिथिला म्यूजियम स्थापित केने छथि। एहिके उपरांत त बेसी काल जापान एनाय-जेनाय होइत रहलनी। बिहार के सुदूर ग्रामीण इलाका सं निकैल के विदेशी धरती के सफर अल्लुक नै छलनी। जहन पहिल बेर जापान जेबाक निमंत्रण भेटलनि त असमंजस मे छलथि जे जाय की नै जाय। भाषा के सेहो समस्या छलनी मुदा हिम्मत क आगू बढ़ली और विदेशी धरती पर मिथिला के अहि  लोक कला के पहचान भेटेबा मे अपन योगदान देलथी। आय जापान के संगे अमेरिका, फ्रांस आदि देशक आर्ट गैलरी मे हिनकर बनाओल मिथिला पेंटिंग भेट जाइत अछि।विदेशी लोग अपन अहि कला के भरपूर सम्मान दैइत अछि ओतय इ बहुते लोकप्रिय अछि।

4 सित॰ 2018

Godawari Dutt

पद्मश्री सँ सम्मानित मिथिला चित्रकला के गुरु गोदावरी दत्त

मिथिला धरोहर
मिथिला धरोहर : १९३० मे दरभंगा के बहादुरपुर गांव मे जन्मलि गोदावरी दत्त बच्चे सँ मिथिला कला मे रूचि लेबय लागल छलथि। अपन माँ सुभद्रा देवी केर आधा बनल चित्र मे नुका क रंग भरनाई शुरू क देने छलथि फेर माँ प्रशिक्षण देलनि। ओहि के बाद अपन पूरा समय कला के समर्पित क देलथि। एखन रांटी मधुबनी मे रहयवाली मिथिला सहित पूरा बिहारक गौरव गोदावरी दत्त मिथिला पेंटिंग (Mithila Painting Artist Godawari Dutt) के महादेवी वर्मा कहल जाइत छथि। मिथिला चित्र कला के देश-विदेश मे पहुंचेबा मे हिनको अहम योगदान रहल छनि।

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गोदावरी दत्त चारीम कलाकर छथि जिनका मिथिला पेंटिंग लेल पद्मश्री सम्मान सं सम्मानित कैल गेल छनि। हिनका राष्ट्रीय पुरस्कारक अलावा शिल्पगुरु पुरस्कार सेहो भेट चुकल छनि। कचनी शैली के श्रेष्ठ कलाकार मे सँ एक मानल जाइत छथि। अधिकतर इ पौराणिक कथा और धार्मिक विषये पर चित्रण केने छथि आ अपन चित्रक बैकग्राउंड के खास ध्यान राखय छथि। किछुए मास पहिने महादेवी वर्मा बिहार म्यूजियम मे एकटा बड़का पेंटिंग उकेर क खूब बाराइ कमेने छलथि। हिनकर पेंटिंग जापान के मिथिला म्यूजियम मे सेहो प्रदर्शित कैल गेल छनि।

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हिनक तीनटा चित्र विशेष क याद कैल जायत त्रिशूल, धनुष और डमरू जाहिमे ओ अपन असीम कल्पनाशीलता के परिचय देने छथि गोदावरी दत्त केर सपना छनि जे भारत मे सेहो जापान सन मिथिला कला के कुनो म्यूजियम बनय।

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