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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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✨ मिथिला संस्कृति के राग
सामा चकेबा
📅 सामा चकेबा पूजा 2026
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7 जन॰ 2022

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लोक देवता बंठा चमार

मिथिला धरोहर
“लोरिकायन के जीवंत पात्र बंठा चमार Bantha Chamar मिथिलाक चर्मकार कुलक दीपक छलाह। ई तंत्रोपासक, वाहुबली, साधक एबं महान लोक नायक लोउरिकक दाहिना हाथ छलाह। छायाक भाँति बंठा हुनक रक्षा मे तत्पर रहैत छलाह। अपन स्वतंत्र ब्यक्तित्वक प्रभाव सँ ई दीं हीनक मध्य देवताक सरिस पूजित छलाह। किम्बदन्ति अछि जे ई अपन हाथ मे जे सोटा राखैत छलाह तकर मूठ पांच मोन चानी सँ मढल रहैत छल। अपन वज्र सोटाक प्रहार सँ ई मत्त हाथी केँ परास्त कए दैत छलाह। ई अपन सोटाक एक्के हुरेठ मे पैघ सँ पैघ ह्रिन्स जंतु यथा बाघ, चीता, भालु, सुगर, हुड़ाड़क अस्थिपंज़र चूर चूर कए दैत छलाह। ई मल्ल विद्याक निष्णात पंडित छलाह। महामल्लक पैघ टोली हिनक संग रहैत छल जे चुटकी बजैत केहनो कठिन कार्यक निष्पादन कए दैत छल।

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● शमशान घाटक बीच ३०० वर्ष पुरान मिथिलाक एकटा मंदिर


मिथिला मे जन स्वास्थ्य तथा रक्षात्मक भावना सँ इ गाम गाम मे अषाढाक निर्माण कराओल जाहि पर मिथिलाक वीर संतति मल्ल विद्याक अभ्यास कए नव निर्माणक नीव दैत छलाह। हिनक पहाड़क सामान मुरेठा एबं हाथीक सूंढ़क सामान बाहु मे सुशोभित शाल वृक्षक सोटा देखि केँ पैघ सँ पैघ दुश्मनक फौज लंक लैत छल। हिनक ढोलक एक चोट पर समस्त क्षेत्र सचेत भय जैत छल। हिनक मल्ल नृत्य कालीन ढोलक आबाज़ मेघ गर्ज़न केँ लज्जित के दैत छल। महान तंत्र साधनों हिनक प्रिय क्षेत्र छल।  ई तंत्र विद्याक प्रयोग मात्र जीव हितार्थ करैत छलाह। अइयो मिथिलाक चर्मकार वर्ग अपन कुल भूषण बंठाक अनन्य भक्ति एबं कृतग्य भाव सँ द्वारि रक्षक रूप मे हिनक स्थापना करैत अछि। एतवे नहि स्नान काल अँजलि मे जल लय श्रद्धा सँ जलदान करैत अछि। आजीवन अखंड ब्रह्मचारी बंठाक गात मे देवोपम ज्योति ब्याप्त छल।

आलेख - शैलेश झा

13 दिस॰ 2021

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लोक देवता बिहुला विषहरी के लोक कथा

मिथिला धरोहर

Bihula Bishahari Lok Katha : अंग के लोकगाथा के मुताबिक बाला - बिहुला विषहरी पूजा के लेल अंग प्रदेशक राजधानी चंपा नगरी (भागलपुर) मे उद्भव स्थल अछि। एतय माता विषहरी के सती बिहुला के कारण ख्याति प्राप्त भेलनि। भगवान शंकर जी के दत्तक पुत्री विषहरी माता भगवान शंकर जी जंका ख्याति प्राप्त करय चाहैत छलथि। अहि लऽके भगवान शंकर सं अपन इच्छा व्यक्त केलथि। भगवान शंकर कहलखिन, हमर एकटा भक्त अंग प्रदेश मे अछि अगर ओ अहाँक पूजा श्रद्धा भाव सं कऽ लैत अछि, तऽ अहाँक ख्याति भेट जायत।


विषहरी माता चांदो सौदागर सं अपन इच्छा व्यक्त केलखिन तऽ, चांदो सौदागर प्रस्ताव कऽ ठोकरा देलनी। ओ कहलैथ जे हम शिव केर भक्त छी। अहिसँ माता विषहरी क्रोधित भऽ गेलथि आ चांदो सौदागर कऽ सतेनाय शुरू कऽ देलथि। अहि क्रम मे चांदो सौदागर के छह पुत्र के हत्या कऽ देल गेल। संपत्ति के तितर-बितर कऽ देल गेल। सतमा आ आखिरी पुत्र बाला के बियाह सती बिहुला सं संपन्न भेलनि। एकरा अर्थात अपन वंश के बचेबाक लेल चांदो सौदागर भगवान विश्वकर्मा के आह्वान केलथी।

विश्वकर्मा द्वारा बाला के जीवित रखबाक लेल एकटा लोहाक बांसक घर बनाओल गेल, ताकि कुनो ठाम सं सर्प के प्रवेश नै भऽ सकै। इ घर अखनो चंपानगर मे मौजूद अछि। अहि बीच विषहरी विश्वकर्मा के लऽग पहुंच के चेतावनी देलनि, जे एकटा बाल भरी छेद घर मे छोड़य पड़त, नै तऽ परिणाम ठीक नै हैत। भगवान विश्वकर्मा माता विषहरी के बात माइन लेलखिन।


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● अंधराठाढ़ी के कन्दर्पी घाटक पर भेल छल मिथिलाक सबसं बड़का भीषण युद्ध


सुहाग राइतिक दिने विषहरी के भेजल दूत नाग रात्रि 12 बजे सिंह नक्षत्र के प्रवेश होएते बाला लखेंद्र के डइस लेलक, जाहिसँ हुनक मृतु भऽ गेलनि। बिहुला सती छलीह, ओ हाइर नै मनलनी।सती बिहुला चंपा नदी के जल मार्ग सं मंजूषा नाउ पर चइढ़ कऽ देवलोक जाइत छथि आ अपन पति लखेंद्र के जिंदा लऽ के आनैत छथि।

देवलोक सं देवराज इंद्र माता विषहरी सं अनुरोध करैत छथिन आ सती बिहुला के महत्व पर चर्चा करैत छथिन। सती बिहुला सं माता विषहरी फेर वैह बात दोहराबैत छथिन, जे चांदो सौदागर के कहने छलखिन। सती बिहुला के प्रस्ताव पर चांदो सौदागर ना-नुकूर करैत हामी भैर देलन आ कहलैथ जे दहिना हाथ सं भगवान शंकर जी के आ बांमा हाथ सं माता विषहरी के पूजा करब, तहिया सं आय  धरि विषहरी पूजा मे बांमा हाथे सं पूजा होइत अछि।


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● मिथिलाक लोग पर्व सामा चकेबा के कहानी


लोक कथाक अनुसार बताओल गेल अछि जे मंजूषा एकटा नाव अछि, जेकर निर्माण शिल्पराज विश्वकर्मा जी स्वयं तैयार केने छलखिन। एकर भित्ती पर लहसन मालाकर चित्रकारी केने छलाह। अहि चित्रकारी के माध्यम सं हुनक मृतुक घटना के वर्णन कैल गेल छल। अहि नाव सं फेरो सती बिहुला वापस सेहो आयल छलीह। तैं तहने सं मंजूषा कला Manjusha Art के महत्व सेहो बइढ़ गेल।

9 नव॰ 2021

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भुईया बाबा : मिथिलाक लोक देवता | Bhuiya Baba Story

मिथिला धरोहर

मिथिला मे सब जातीके अनेक लोक देवता के पुजा होइत अछि, ओहि मे एकटा लोक देवता भूइया बाबा के पूजा सेहो होइत छनि। हिनकर काल 14 शताब्दी बताओल गेल अछि, पूजा मे मुख्य रूपसं तीन गोटे के पूजा होइत छैक बाबा बसावन, बाबा बखतौर ( Baba Bakhtor ), माँ गहिल के!

बाबा बसावन वैशाली जिलाक बसौली लंगा के रहथिन हिनकर वास्तविक नाम बसावन खिरहर रहैन आ बाबा बखतौर तिरहुत के उत्तर अंग कोनो गढ़ीया रसलपुर के रहथिन हिनकर नाम आंसिक बखतौर रहैन आ बाबुजिके नाम पूरन राउत रहैन माँ कोइला रहथिन! ताही युग में नारी महथि डेहुरी दरबार के राजा "दलेल सिंह" रहैन जे अत्यंत क्रुर आ निर्दय रहइ जे समाज के लोक सब पर बड़ अत्याचार करैत रहइ, राजा दलेल सिंह एक लाख मुश्हर जातिक लोक सबके हत्या करेबाक निश्चय केने रहइ, बाबा भुइयां ( Bhuiyan Baba ) राजा दलेल सिंह के प्रकोप सं सगर समाज के रक्षा केने रहथि आ दलेल सं युद्घ करी के 52 कोस के गोरीया वन पर विजय प्राप्त केने रहथिन आ समाज के शोषण सं मूक्त करेलखिन।
एही पूजा मे मनरिया द्वारा कहल गेल कथा अनुसार माता कोईला विवाह समय अपन खोइछा मे कुलदेवी "गहिल'' के लय के अपन सासुर आएल रहथिन जाहि कारणे हुंनक भाई "बदल सिंह" तामस मे रहथिन!

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मामा बदल सिंह अपन कुल देवी के मनाबय लेल अपन घर मे अपन नाम सँ पूजा कएले रहथिन, सगरो गढ़िया मे न्योत हकार दय देलखिन्ह मुदा अपन बहिन घर न्योत नहि पठओलन, जखन बाबा बखतौर अपन खैरा (भैस) के बोरीया वन मे चिक्नी घाट पर चरबैत रहथिन तखन हुनका कान मे मानर  के अनुराग पड़ी गेल जे मामा बदल सिंह नरहर नदी पार डिह सत्औरा मे कराबैत रहलन!
"बाबा बखतौर माए कोइला के कहलनजे हम पूजा देखे जाएब हमरा चद्दर लाठी दे, हुनकर माय मना कऽ देलखिन्ह जे बउआ तु बिनु न्योत-हकार के पूजा देखे नय जो तोरा मान सम्मान नय हेतौ, बाबा बखतौर जिद्द् पर आइब गेलखिन जे हम पूजा देखे जय्बे करब तखन माई कोईला हुनका चद्दर के खुट मे पान आऽ किछ खाय लेल समाग्री बान्ह देलखिन्ह जे तु पूजा के कोनो प्रसाद नइ खईअह" जखन बाबा पूजा देखे अपन मानिहाल गेलखिन ओतही हुन्कर अपमान कएल गेल बाबा बखतौर पूजा भङ् करी बोरिया वन घुरी चली एलखिन तखने बदल सिंह आ दलेल सिंह सर्यंत्र करी तांत्रिक गुण सं तैयार शेला बाघ आ लुलिया बाघिन सं हुन्कर हत्या करवा देलखिन्ह!

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किएक तऽ सामान्य कोनो बाघ आ बाघिन सं हुनकर हत्या सम्भब नय रहइ हुनका असगरे 7 भैसा के शक्ति रहइ, हुन्कर मृत्यू होइते हुनकर कनिया हिरा मोती के संदेश प्राप्त भऽ गेल रहैन्ह किएक तऽ हीरा मोति अपने एक गोट सत्वर्ती स्त्री रहथिन हुनका लोक देवताक ख्याति प्राप्त भेल आ सब जाति में मान सम्मान भेटल, भुइया बाबा समाज सुधारक सेहो रहथिन एवं पशु रक्षक सेहो रहथि हिनक कथा के रस मात्र मनारिया द्वारा गायल गेल मे भेटत जकर कोनो परतर नहीं।

11 अक्टू॰ 2021

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कुल देवता वीरभद्र अर्थात सोखा बाबा उत्पति के पौराणिक कथा - Sokha Baba History in Maithili

मिथिला धरोहर

मिथिला धरोहर : कुल देवता के रूप मे विख्यात वीरभद्र अर्थात सोखा बाबा Kuldevta Sokha Baba के घरक कुनो कोन मे नियत स्थान पर स्थापित क पूजल जाइत छनि। मान्यताक अनुसार वीरभद्र अपन आराधक आ भक्त के कष्ट, विपता के सोइख लैत छथिन अहि कारणे हिनका सोखा बाबा नाम सं विख्यात छथिन। 


वीरभद्र (सोखा बाबा) उत्पति के पौराणिक इतिहास

सोखा बाबा के अध्यात्मिक उल्लेख 80 के दशक में लोधास निवासी पं. रामस्वरूप तिवारी द्वारा रचित 'सोखा चालिसा' मे भेटैत अछि। जाहिमे चालीस चौपाई मे पौराणिक साक्ष्य के संगे श्री वीरभद्र के उत्पति के चर्चा कैल गेल अछि। 

लिंग पुराण के अनुसार भगवान शिव केर अर्द्धांगिनी सत्ती के पिता छलखिन दक्ष प्रजापति। कुनो कारणवश ओ भगवान शिव सं नाराज रहैत छलथि।  एक बेरा ओ यज्ञ के अनुष्ठान केलथि। मुदा भगवान शिव के अपमानित करबाक नियत सं हुनका आमंत्रित नै देलखिन। देवता के यज्ञ मे जाइत देख देवी सत्ती पति शंकर भगवान सं जिज्ञासा जतेलथि। पिता द्वारा यज्ञ के आयोजन मे हुनका आ भगवान शिव के आमंत्रित नै करबाक बावजूद अपना संगे हुनको ओतय चलबाक जिद करय लगली। भगवान शंकर बिना बजायल जेबा सं मना कऽ देलखिन। बावजूद सत्ती के जिद पर शंकर जी जय-विजय नामक अपन दु टा गण के संग हुनका भेज देलखिन। पिता के यज्ञ मे निरादर भेटय सं आहत सत्ती ओतय यज्ञ कुंड मे भष्मीभूत भऽ के अपन देह त्याग देलखिन। एहिके सूचना भेटला पर भगवान शंकर क्रोधित भऽ गेलाह आ ओ अपन जटा के नाचाबय लगलऽखिन। सिर के जटा सं एकटा टूटल बाल सं वीरभद्र के अवतरण भेलनि। जे भगवान शंकर के इच्छा पर यज्ञ स्थल पर जा कऽ दक्ष के यज्ञ के विध्वंस कऽ देलखिन। 


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● कंकाली मंदिर : दरभंगा


जाहिके साक्ष्य सोखा बाबा के मंदिर आ बक्सर जिलाक लोधास गाम स्थित सती कुंड अछि। उक्त कुंड एकटा पोखरीक रूप मे आयो अस्तित्व मे अछि। जाहिके तट पर सत्ती अर्थात मां दुर्गा के मंदिर स्थापित अछि। हरिद्वार के समीप जाहि 'कनखल' मे सोखा बाबा के अवतरित हेबाक बात कहल जाइत अछि ओ अपभ्रंश भऽ के आय कड़सर भऽ गेल अछि।


सोखा बाबा के कुल देवता के रूप मे किछ लोग प्रतीक स्वरूप अपन घरे मे हुनकर पूजा करैत अछि। मुदा पूरा देश मे दु जगह उतराखंड के कनखल आ बक्सर के कड़सर मे हिनकर मंदिर अछि।


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● दरभंगा के अहि स्कूल मे बच्चा निभावैत अछि गुरुकुल के पुरान परंपरा

बक्सर : सिद्धाश्रम के नाम सं विख्यात बक्सर के अहि पावन क्षेत्र के बखान पुराण मे ओहिना नै अछि। अहि वृत्त क्षेत्र मे कतेको एहन घटना घटल, जाहिके वर्णन विभिन्न धर्म ग्रंथ मे त भेटते कछि, मंदिर आ प्रतिमा के रूप मे साक्ष्य सेहो भेटय अछि। ओहि मे सं एक अछि इटाढ़ी प्रखंड के विक्रम इंगलिश पंचायत अंतर्गत कड़सर गामक ( Sokhababa Dham, Buxar, Kauresar ) पास स्थित सोखा धाम। जतय रूद्रावतार वीरभद्र के मंदिर अछि जे सूबे के इकलौता आ देशक दोसर वीरभद्र सोखा मंदिर अछि।

28 सित॰ 2021

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लोक देवता दिना भदरी के लोकगाथा - दोसर भाग

मिथिला धरोहर

दीना-भद्री के गाथा ( प्रथम भाग ) मे दूनु भैयारी मनुसदेवा (पूजित मृतात्मा ) बैन के आबैत अछि आ फेर संघर्ष करैत अछि। मुसहर आयो अपन अहि नायक के वापस एबाक बाट ताकैत अछि।


राजा कनक सिंह के मृत्य के घाट उतारबाक उपरांत दीना-भद्री राजपूत जाति के सामंत जोराबर सिंह के लऽग पहुंचैत छथि जे कुनौली बाजारक सामंत अछि। ओ कुनौली मे बसल सात सौ मुसहर परिवार पर अत्याचार करैत छल, अपना खेत मे जबरदस्ती बेगारी कराबैत छल। इ जानकारी जहन दीना-भद्री के भेटय अछि तऽ जोराबर सिंह के युद्ध के लेल ललकारैत अछि आ ओकरा माइर क मुसहर परिवार कऽ ओकर अत्याचार सं बचबैत छथि।

कुनौली बाजार मे एकटा बनिया रहैत छल जेकर नाम रूपचनमा छल। ओ बड़का बेईमान आ सूइदखोर छल। दीना-भद्री के दाह संस्कारक बाद हुनकर पत्नि हंसा और संझा परंपरानुसार भोज-भात के लेल गांव-जवार के लोग के आमंत्रित केलनि। ताहिलेल दूनु गोतनी बियाहक समय अपन-अपन घर सं खोंइछा मे भेटल चाऊर के, जे गोंसाईक आगू राखल छल, लऽ के कुनौली बाजार बेचय रूपचनमा के दुकान पर पहुंचल ताकि भोजक सामान खरीद सकै।

प्रेतात्मा बनल दीना-भद्री हुनक रक्षा के खयाल सं योगी के भेष धऽके हुनका पाछु-पाछु रूपचनमा के दुकान धरि पहुंच कऽ ओकरा सं किछ दूर चौबटिया पर बैस गेला। हंसा आ संझा रूपचनमा के सोंझा चाऊरक गेठरी राखय छथि ताकि बदला मे ओ सामान लऽ सकै। रूपचनमा हुनका औरत जैन बेवकूफ बनेबाक चालाकी करैत अछि। ओ बाट-बटखरा के खेल कऽ के चौबीस पसेरी चाउर कऽ चौबीस सेर तौलैत अछि। इ देख कऽ दूनु गोतनी छाती पीटय लागैत अछि ओ घर सं तऽ बारह-बारह पसेरी चाउर आनने छली, ओ बारह-बारह सेर कोना भऽ गेल ?

योगी बनल दीना-भद्री रूपचनमा के साबटा खेल देख रहल छल। ओ इ देख रहल छलाह जे चौबीस पसेरी के चौबीस सेर बनेलाक बाद रूपचनमा केना हंसा-संझा के समान दैत समय आधा सेर के एक सेर बना रहल छल, पचीस रुपये किलो मसाला कऽ पचास रुपये किलो बना रहल छल।

दीना-भद्री योगीमल किरात के स्मरण करैत छथि आ योगीमल जहन ओतय प्रकट होइत छथिन तहन हुनका सं रूपचनमाक सबटा खेल बताबैत छथि। पूरा बात जाइन रूपचन कऽ सबक सिखेबाक लेल योगीमल अपन मंतर सं माखी कऽ रूप धऽ कऽ रूपचनमा के पलड़ा पर बैस जाइत अछि। रूपचनमा जहन हंसा-संझा के चाउरक बदले समान दैय लागैत अछि तहन दूनु पलड़ा बराबर नै होइत अछि। एक-एक कऽ के रूपचनमा दुकानक सबटा सामान पलड़ा पर दऽ दैत अछि आ आखिरकार जहन ओ हंसा-संझा के आनल दूनु गेठरि सेहो पलड़ा पर राखैत ऐछ तहन जा कऽ दूनु पलड़ा बराबर होइत अछि। रूपचनमा अहि घटना सं हतप्रभ भऽ कऽ बैस जाइत अछि ओहि समय ओकर नजैर चौबटिया पर बैसल दूनु योगि पर पडैत अछि। ओकरा अपन गलती कऽ आभास होइत ऐछ। ओ दौड़ कऽ योगी लऽग जाइत अछि आ अपन गलती के लेल क्षमा मांगैत अछि। तहन योगी वेषधारी दीना-भद्री कहैत छथि जे  हंसा-संझा जे चाउर लऽ कऽ आयल छली ओकरा बदले उचित तौल आ उचित सामान दे, तखने तहर खैर छौ। रूपचनमा वैह करैत अछि। अहि तरहे भोज संपन्न होइत अछि।

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◆ एक बेराक बात अछि, दीना-भद्री भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लेल जगन्नाथपुरी मंदिर पहुंचैत अछि, मुदा मंदिर के पुजारी हुनका अछूत कैह मंदिर प्रवेश सं रोइक दैत अछि। दूनु भैयारी सात दिन सात राइत मंदिरक बाहर भूखे-प्यासे पड़ल रहैत अछि ताकि हुनका कुनो तरहे भगवान जगन्नाथ के दर्शन होइन। मुदा हुनका दर्शन कऽ अवसर नै भेटय अछि। थाइक-हारी दूनु भैयारी मंदिरक आधार स्तंभ के अपन छाति सं हिलेनाय शुरू करैत अछि जाहिसँ पूरा मंदिर दरकय लागैत अछि। अहि स्थिति सं घबरा कऽ भगवान जगन्नाथ दीना-भद्री के समक्ष उपस्थित भऽ दर्शन दैत छथिन। अहि दर्शन सं दीना-भद्री के प्रेत योनि सं मुक्ति भेट जाइत अछि।

◆ एकता अन्य गाथाक मुताबिक दीना-भद्री मगध क्षेत्र मे दु टा वीर पहलवान हंसराज आ वंशराज सं सेहो युद्ध लड़लैथ आ दूनु कऽ माइर कऽ विजयी भेलैथ।

एक बेराक बात अछि, मिथिला के राजा मगध गेलैथ। ओतय हुनका हंसराज आ वंशराज के शक्ति बारे मे पता चललैन जे दूनु मुसहर भैयारी दु कट्ठा खेतक माइट देखते-देखते काइट लैत अछि। तखन ओ अपन राज्य मे अवस्थित नरुआर गांव मे एकटा पोखरी खुनेबाक लेल दूनु कऽ बजेलक। दूनु पोखैर खोइद देलक, मुदा पूजा-पाठ कऽ बाद जखन पोखैर मे जांइठ गाड़बाक बारी आयल, तहन ओ दूनु भैयारी जांइठ कऽ उठा नै सकल। वैह जांइठ कऽ दीना-भद्री आसानी सं उठा कऽ ओकरा पोखैर मे अहि तरहे सं फेंकलैथ जे ओ पोखरिक बीचों-बीच जा कऽ धैस गेल। अहि घटना सं दूनु भैयारी अपमानित महसूस करैत ऐछ आ दीना-भद्री के युद्ध लेल ललकारैत ऐछ। चारुक बीच भीषण युद्ध होइत ऐछ जाहिमे हंसराज आ वंशराज हाइर जाइत अछि।

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◆ एकटा और अन्य कथा, दीना-भद्री मिथिलाक सिंहेश्वर स्थान मंदिर के पवित्रता भंग करबाक लेल आयल अघोरी बाबा के सेहो पराजित करैत अछि। अहि सिंहेश्वर स्थान मंदिर मे सब वर्ष भव्य मेला लागैत अछि। एक बेरा ओहि मेलाक समय पांचोनाथ अघोरी बाबा सिंहेश्वर स्थान मंदिर पहुंचैत अछि, मुदा ताबेधरि मंदिरक पट बंद भऽ जाइत अछि। अघोरी बाबा कहैत अछि जे अगर महादेव के दर्शन नै भेल तऽ ओ मंदिर कऽ उखाइर कऽ फेंक देबै। अहिसँ सिंहेश्वर महादेव घबरा गेलैथ आ ओ देवता सं सहायता मांगलैथ मुदा सब देवता असहाय छलैथ। अंत मे राजा सलहेस हुनकर सहायताक लेल एलैथ। सलहेस अघोरी बाबा के लऽग पहुंचैत  अछि तऽ देखैत छथि जे चौबीस कट्ठा मे हाथी सदृश अघोरी बाबा सुतल छल। जहने राजा सलहेस लऽग  पहुंचैत छथि अघोरीनाथ अपन सांस खींच कऽ आ सांस कऽ वेग सं सलहेस हुनका नथुना मे खिंचय लागैत छथि। घबरा कऽ सिंहेश्वर महादेव लऽग मे पड़ल पुआरक टाल मे सं पुआल लऽ अघोरी बाबा  के नाक मे ठूंइस दैत छथिन जाहिसँ अघोरी बाबा  कऽ छींक आबि जाइत अछि आ सलहेस छींक कऽ कारण नाथुन सं बाहर आबि जाइत छथि। 

सिंहेश्वर महादेव के लागय छनि जे आब ओ मंदिर नै जा पेता, ताहिलेल ओ सलहेस के सांत्वना दैत कहैत छथिन जोगिया नगर मे कालू सदाक बेटा ऐछ दीना-भद्री। ओ हमर सहायता कऽ सकैत ऐछ। ओतय चलु। दूनु गोटे फेर जोगिया नगर पहुंचैत छथि आ दीना-भद्री सं सहायता मांगैत छथि। दीना-भद्री, बाबा सिहेश्वर आ सलहेस के संगे सिंहेश्वर स्थान पहुंचैत छथि आ अघोरी बाबा सं घनघोर युद्ध करैत अछि जाहिमे अघोरी बाबा पराजित होइत अछि आ दीना-भद्री हुनक सिर काइट कऽ सिंहेश्वर महादेव के रक्षा करैत छथि। 

18 सित॰ 2021

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लोक देवता दिना भदरी के लोकगाथा, दिना भदरी के कहानी - प्रथम भाग

मिथिला धरोहर

छवि साभार - अक्षय आनन्द सन्नी
लोक देवता दीना भद्री ( Dina Bhadri Story ) के कथा मिथिलांचल, सीमांचल क्षेत्रमे मुसहर अर्थात सदा जातिक दूनु भैयारीक लोकगाथा जन-जनमे संघर्षक कथाक रूप में चर्चित अछि। श्रम एवं संघर्ष के द्वारा समाज मे व्याप्त अत्याचार, अनाचार आ शोषण के खत्म करबाक लेल अपन प्राण गंमा देनिहार दलित वीर के कथा अछि दीना भद्री।

लोककथाक अनुसार दिना आऽ भद्रीके जनम नेपालक सप्तरी जिला स्थित जोगिया गाममे कालु सदा आ नीरसो कोखि सऽ भेलनि। दिना जेठ आऽ भद्री छोट छल। बाल्यकालसऽ दूनु भैयारी बीर आ साहसी छल । दूनु भाइ कुस्ती खेलए मे माहिर छल। लोकगाथा मे वर्णन भेल अनुसार भैया दिना आऽ भाइ भद्री पाँच मनके कोदारि चलवैत छलैथ।

दिना भद्री दूनु भैयारी के विआह नेपाल के सप्तरी जिलाक बरहा गामक फुकन सदाक बेटी हंसा आ संझा संग भेल छल। दूनु भाइ सामन्ती प्रथाके कट्टर विरोधी छल। जोगिया नगर के राजा कनक सिंह धामि छल। ओ बहुते बड़का अत्याचारी आ निरंकुश छल आ राज्य मे रहय बला मुसहर सहित उपेक्षित, उत्पिडित प्रजा सं बेगारी कराबैत छल। जे कियो भी बेगारी नै करैत, ओकरा पर राजा शोषण, दमन एवम् अत्याचार करैत छल।


राजा कनक सिंह धामि के एकटा बहिन छल जेकर नाम बचिया छल जे तंत्रमंत्र मे सिद्धहस्त छलीह। ओ दीना-भद्री के नीचा देखेबाक उद्देश्य सं अपन भाई सं कही के एकटा पोखैर और अपन जादू सं ओहिमे पनियांदराज के एक जोड़ा द देलक। अहि तरहे जे भी व्यक्ति ओय पोखैर मे स्नान के लेल आबैत छल पनियांदराज ओकरा डंइस लैइत छल। जे जानवर ओहिमे पइन पीबाक लेल जाइत त ओकरो डंइस लैइत छल। जहन नगरक लोग के ओहि समस्या के पता चलल त निजात पेबाक लेल के दीना-भद्री के पास गेल। लोगक आग्रह पर दूनु भैयारी पोखर सं सबटा मरल जानवर के बाहर निकाइल देलक जाहिसँ नगर वासिके राहत भेटल।

अहि घटना सं बचिया खुद के बहुते अपमानित महसूस केलक। ओ दीना-भद्री के सबक सिखेबाक लेल षडयंत्र रचय लगली। ओ अपना भाई राजा कनक सिंह धामि के दीना-भद्री सं बेगारी करेबाक लेल उकसेलक। राजा अपन चौर बरेला मे तमाम प्रजा के बेगारी मे खेती करबाक हुक्म देलक। जखन लोग बेगार कऽ रहल छल तहन बचिया अपन मंत्र सं एकटा बुढ़िया के वेश धारण कऽ चौर पहुंच  बड़बड़ाबै लागैत छली जे केहन बेवकूफ गिरहत छैक। हरवाहा के संगे-संग दु गो जवान कुदाइर चलाबय बला सेहो बजा लैतै तऽ ओ खेतक आड़ी के निक सं काइट कऽ मिला दैतै। बुढ़िया बनल बचिया हरवाहा के सेहो इ सुनेलक आ कहलक जे कनक सिंह धामि के इ कहिए जे जोगिया नगर मे कालू सदा के बेटा दीना-भद्री बहुते बलशाली अछि। ओकरा बजा लाबइ कुदाइर चलेबाक लेल। 

अहि बीच कनक सिंह धामि चौर बरेला पहुंचैत अछि जतय हरवाहा ओहि बुढ़िया द्वारा कहल बात राजा के बताबैत अछि। हरवाहा के बात सुइन आगबबूला राजा ताड़क बारह पसेरी के छड़ी लऽके दीना भद्री के घर पहुंचैत अछि। दीना-भद्री के मां निरसो चनन गाछक नीचा बैस कऽ पथिया बूइन रहल छली। कनकसिंह निरसो सं पूछैत अछि जे तोहर बेटा कहां छउ ? निरसो डरक मारल चुप्पी साइध लइत अछि। निरसो के चुप्पी सं खौंजा कऽ कनक सिंह ओकरा अपन जूता सं मारैत अछि जाहिसँ निरसो मुंहक बल गिर जाइत अछि आ जोर-जोर सं विलाप करै लागैत अछि। दीना-भद्री तहन घरे मे सुतल छल। भद्री सपन मे देखैत अछि जे ओकर मां जोर-जोर सं काइन रहल अछि। भद्री हड़बड़ा कऽ उठैत अछि आ दीना के सेहो जगाबैत अछि। दूनु भैयारी अपन मां के देखय गाछक लऽग जाइत अछि तऽ देखै अछि जे ओ जोर-जोर सं विलाप कऽ रहल अछि। निरसो पूरा बात दीना-भद्री के कहैत अछि तऽ दूनु भैयारी तामस सं भैर जाइत अछि। तहने दीना-भद्री के नजैर राजा कनक सिंह पर परैत अछि जे ओतय सं जा रहल छल। ओ दौड़ कऽ जाइत अछि आ राजा के पीठ पर फांद कऽ ओकरा डांर पर पैर मारैत अछि आ ओकरा पटैक दैत अछि। तहन कनक सिंह अपन जेबी सं जादू कऽ किताब निकाइल कऽ साबरमंतर (एक तरहक जादू) पढ़य लागैत अछि, मुदा एहिसँ पहिले कि ओ अपन जादू सं दीना-भद्री पर प्रहार कऽ पेतै, दूनु भैयारी ओकरा पर हमला कऽ दैत अछि। तखन कुनो चारा नै देख, राजा कनक सिंह ओतय सं भाइग खड़ा होइत अछि। एकरा बाद दीना-भद्री चौर बरेला जा कऽ बेगारी कऽ रहल लोग सं काज बंद करवा दैत अछि आ लोग सब के बेगारी खटय सं छुट्टी भेट जाइत अछि।


दीना आ भद्री के जान सं मारबाक नीयत सं बचिया तखन राजा सलहेस आ दीना-भद्री के आराध्य देवी बहोसरि सं छलपूर्वक इ प्रतिज्ञा करा लैइत अछि जे ओ दूनु बचिया के उद्देश्य पूर्ति मे सहायक हेति। जहन राजा सलहेस आ देवी बहोसरि के पता चलैत अछि जे बचिया दीना-भद्री के हुनका हाथों मृत्यु के शपथ करा लेलक तऽ ओ दूनु बहुते दुखी होइत छथि। चूंकि दूनु प्रतिज्ञा केने छलथि ताहिलेल ओ दूनु दीना-भद्री के मारबाक षडयंत्र मे नै चाहितों शामिल होइत छथि। देवी बहोसरि दूनु भैयारी के सपना मे बताबै छथि कटैया खाप नामक जंगल मे एकटा सुआर मरल पड़ल अछि। दूनु भैयारी ओहि जंगल मे जेबाक लेल तैयार होइत अछि। माता निरसो के ननिहाल भेज कऽ आ अपन मामा बुहरन के संगे लऽक दीना-भद्री कटैया खापक दिस प्रस्थान करैत अछि। जंगल मे बहुते खोजलो पर हुनका सूअर नै भेटैत अछि। बुहरन गाछ पर चैढ़ कऽ देखैत अछि जे दूर मे एकटा हिरणक बच्चा अछि। दूनु भैयारी ओहि बच्चा लऽग जाइत अछि, तहन हिरणक बच्चा बाघ बैन जाइत अछि आ दीना-भद्री सं ओकर लड़ाई शुरू भऽ जाइत अछि। एक-एक कऽके सबटा खत्म भऽ जाइत अछि मुदा लड़ाई खत्म नै होइत अछि। अंत मे दूनु भैयारी ओहि बाघ सं शारीरिक युद्ध करै लागैत अछि आ बाघ'क शरीर के दु भाग मे चीर दैत अछि। तहन राजा सलहेस ओतय गीदड़ बैन उपस्थित होइत छथि आ बाघ के अलग-अलग शरीर कऽ एक कऽ दैत अछि जाहिसँ  बाघ जिंदा भऽ जाइत अछि। 

सात दिन आ सात राइत युद्ध चलैत अछि जाहिमे बाघ जीत जाइत अछि, दीना-भद्री मइर जाइत छथि। जंगल मे दूनु भैयारी लहाश पड़ल रहैत अछि, कियो अंतिम संस्कार करय बला ओतय नै अछि। अंतिम संस्कार नै भेला सं दूनु भैयारी प्रेतात्मा बैन जाइत अछि आ अपन संस्कार के तैयारी में जुइट जाइत छथि। प्रेतात्मा बनल दूनु भैयारी मुनष्य वेश धारण कऽ मुसहरक बस्ती एकौशी पहुंचैत अछि आ  बस्ती कऽ लोगक समक्ष जंगल मे पड़ल दीना-भद्री के शव कऽ अंतिम संस्कार के प्रस्ताव राखैत अछि। एकौशी के लोग दीना-भद्री के प्रस्ताव के अस्वीकार कऽ लैत अछि। तहन दीना-भद्री एकटा फकीर के वेष धऽ कऽ अपन गांव पहुंचैत छथि आ एकटा वणिक के सबटा खिस्सा कहै छथि। ओहिके बाद कफन आ एवं दाह-संस्कार के अन्य सामग्रि के प्रबंध होइत अछि, दाह संस्कार संपन्न होइत अछि आ फेर भोजक आयोजन कैल जाइत अछि।

दीना-भद्री के प्रेतात्मा बनबाक पश्चात अनेक छोट-छोट कथा जुडैत अछि। लोककथाक अनुसार दाह-संस्कार सं पूर्व दीना-भद्री प्रेत योनी मे समाजक भलाई के लेल अनेक लड़ाई लरैत अछि आ बुराई के खिलाफ हुनक संघर्ष तेज होइत अछि जेना, सबसं पहिले बचिया के पीछा करैत अछि तऽ बचिया दीना-भद्री सं बचबाक लेल कोशी पर भागय  चाहैत अछि, मुदा दीना-भद्री ओकरा पकैड़ लैत अछि आ तलवार सं ओकर गरदैन काइट दैत अछि। ओहिके बाद राजा कनक सिंह धामि के लऽग पहुंचैत अछि आ युद्ध कऽ के राजा आ रानी के माइर दैत अछि। 

● लोक देवता दीना भद्री के लोकगाथा - दोसर भाग

7 मई 2019

Lokdevata

कारू बाबा धाम महपुरा, बरेटा, सहरसा

मिथिला धरोहर
मिथिला धरोहर : संत बाबा कारू धाम  ( Sant Baba Karu Dham Mahpura Bareta ) सहरसा जिला के महपुरा बरेटा मे स्थित अछि। संत बाबा कारू भगवान शंकर केर वरदान सं महान पुरुष और भगवान छथि। एतय प्रतिदिन दुध आ आन सामाग्री श्रद्धा सं चढ़ायल जाइत अछि एतय कोबला मांगनिहार के सबटा मनोकामना पुर होइत अछि। एतय एला सं दिव्य शांति के अनुभुती होइत अछि।

कलयुग मे कारू बाबा अपन कर्म के बल पर अपन पूजा के बलपर भगवन शंकर नाकुचेश्वर महादेव केर ऐतिहासिक स्थान पर आबय लेल विवश क देलनि, दर्शन देलाक पश्चत भगवन शंकर बाबा करू के कहलनि, वत्स, कारु हम अहाँके भक्ति सं अति प्रसन्न भेलहुँ अहाँ हमरा सं वरदान मांगु, बाबा कारु नम्र भाव सं बजला हमरा अहाँ भेट गेलहुँ आब हम अहाँ सं की मांगू तहन भगवन शंकर बजला जाऊ आय सं अहाँके प्रतिदिन दूध, घी, खीर, गाजा इत्यादि चढ़त और जा धरि इ धरती सूर्य चन्द्रमा रहत ता धरि अहाँके नाम रहत और ह जाबे धरि अहाँ कलयुग मे जिन्दा रहब आ जहन हमरा याद करब हम अहाँक सोंझा आबि जायब।

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आय एतय सब दिन लोग पूजा करबाक लेल बहुते दूर सं आबय छथि चाहे रैद होय, गर्मी होय या बरसात, बाबा कारु केर जीवन काल बहुते छोट छलनी, बाबा करू गौ माता के सेवा करै छलथि, महपुरा बरेटा गामक बीच मे बरका टा जगह छल लहठा बथान ओतय लघभग हजारो गायक झुण्ड एक संग राखय छलथि।

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एतय के मुख्य विशेषता अछि जे इ मंदिर कोशी नदी कात बसल अछि जतय नदी के वेग सदिखन बनल रहैत अछि। एतय सब साल दुर्गा पूजा मे बहुते विशाल मेलाक आयोजन होइत अछि।

24 जून 2017

Lokdevata

Raja Salhesh Ki Kahani | लोक देवता राजा सलहेस के इतिहास, किया पूजल जाइत छनि हिनका?

मिथिला धरोहर
मिथिला धरोहर : महाराज सल्हेश केर जन्म मधुबनी जिला सँ सटल नेपाल के महिसौथा मे भेल छलनी। हिनक पिता के नाम सोमदेव और माँ के नाम शुभ गौरी छलनी। विराट नगर के राजा श्री हलेश्वर केर बेटी सत्यवती सँ हिनकर बियाह भेल छलनी। श्री सल्हेश पूर्व मे जयवर्द्धन केर नाम सँ जानल जाइत छलथि मुदा बाद मे सर्वसम्मति सँ राजतिलक केर समय हिनकर नाम श्री जयवर्द्धन सँ शैलेश पड़ि गेलनि। कालान्तर मे शैलेश सल्हेश भऽ भेलथि। श्री भंडारी तरेगनागढ़ के राजा छलथि, जिनका चाइर गो बेटि छल। बेटि सब मालिन सम्प्रदाय के स्वीकार कऽ छली और आजीवन अविवाहित रहबाक के व्रत लऽ रखने छली।कुसमा, जे सबसँ छोट छली, शिव उपासक आ सिद्ध योगिनी हेबाक संगे-संग राष्ट्र्हित्कारिणी सहो छली। एक पथ के पथिक हेबाक कारणे सल्हेश केर चारु बहिन सँ प्रेम भऽ गेलनि। सल्हेश दु भाई छलथि और हुनक एकटा बहिन बनसपती छली। ओ चीन और भूटान के आक्रमण सँ मिथिला के बेर-बेर रक्षा करैत रहली। हिनक प्रतिद्वंद्वी वीर चौहरमल छल, जे बहुते बड़का महर्षि योद्धा छल।
अलौकिक और दिव्य शक्ति प्राप्त कऽ बनलैथ पूजनीय
प्रो० राधाकृष्ण चौधरी लिखित “Mithila in The Age Of Vidyapati” मे राजा सल्हेश केर पूजा के और हुनकर गीत आ गाथा पर आधारित नृत्य के उल्लेख भेटय अछि स्पस्ट अछि जे राजा सल्हेश केर पूजा के परम्परा बहुते प्राचीन अछि ओहि समय मिथिला के मूलवासि मे सेहो शुद्र राजा भेल करैत छलथि और अपन अलौकिक कृति आ पौरुष केर कारण दिव्य व्यक्तित्व के प्राप्त कऽ पूजनीय भऽ जाइत छलथि। राजा सल्हेश ओहि कोटि केर मिथिलावासी छलथि जे अपन पराक्रम, शौर्य और विशिष्ट व्यक्तित्व के कारण तत्कालीन मिथिला के राजा बनलैथ आ अपन कार्यकाल मे अनेको कल्याणकार्य केलनि।  अपन कर्म के बल पर देवत्व प्राप्त कऽ देवता केर श्रेणी मे आबि गेलाह और आयधरी श्रद्धा, निष्ठां सँ घर-घर जन-जन मे हुनक पूजा होइत अछि।

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कोना होइत अछि हुनकर पूजा ?
मिथिलांचलक गाँव मे सल्हेश पूजा केर समय हुनक भगत अथवा भगता अर्द्धनग्न शरीर पर लाल रंगक जंघिया गर्दन मे माला, एक हाथ मे अक्षत और दोसर हाथ मे बेंत राखैत भाव-विभोर भऽ जाइत अछि। झाल-मृदंग पर भाव -गीत गाबैत लोग सल्हेश केर अध्यात्म मे पारलौकिकता के अनुभव करैत छथि। गह्वर के सोंझा माटिक E टाइप कऽ पिंड बनायल जाइत  अछि। अहिक बगल मे बेदी बनायल जाइत अछि। ओतहि अड़हुल, कनैल के फुल सरर , अगरवत्ती, चीनी कऽ लड्डू खीर, पान, सुपारी, गांजा, खैनी, पीनी, जनेऊ,अरवा चाउर, झांप, फल, प्रसाद आदि सामग्री राखल जाइत अछि।

इहो पढ़ब:-
सब ग्रामीण साफ़-सुथरा वस्त्र मे निष्ठां सँ डाली लगाबै छथि। भगता के ऊपर बारी-बारी सँ सल्हेश आ हुनक पार्षद के भाव आबय अछि। गोहारि होइत अछि। प्रसाद अक्षत लऽ के मंगल कामनाक संगे लोग अपन-अपन घर जाइत अछि। भगत के खीर कऽ भोजन कराओल जाइत अछि। पूजा आरम्भ करबा सँ पहिले भगत सब लोकदेवता के आवाहन भगत गाबि कऽ और पूजा ढ़ार कऽ करैत अछि। व्यक्तिगत पूजाक संग-संग साल मे एक बेरा सामूहिक पूजा सेहो उत्सब कऽ रूप मे कैल जाइत अछि।

Tags # King Salhesh # Raja Salhesh Pooja # Raja Salhes Nach
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