शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

लोक देवता बंठा चमार

“लोरिकायन के जीवंत पात्र बंठा चमार Bantha Chamar मिथिलाक चर्मकार कुलक दीपक छलाह। ई तंत्रोपासक, वाहुबली, साधक एबं महान लोक नायक लोउरिकक दाहिना हाथ छलाह। छायाक भाँति बंठा हुनक रक्षा मे तत्पर रहैत छलाह। अपन स्वतंत्र ब्यक्तित्वक प्रभाव सँ ई दीं हीनक मध्य देवताक सरिस पूजित छलाह। किम्बदन्ति अछि जे ई अपन हाथ मे जे सोटा राखैत छलाह तकर मूठ पांच मोन चानी सँ मढल रहैत छल। अपन वज्र सोटाक प्रहार सँ ई मत्त हाथी केँ परास्त कए दैत छलाह। ई अपन सोटाक एक्के हुरेठ मे पैघ सँ पैघ ह्रिन्स जंतु यथा बाघ, चीता, भालु, सुगर, हुड़ाड़क अस्थिपंज़र चूर चूर कए दैत छलाह। ई मल्ल विद्याक निष्णात पंडित छलाह। महामल्लक पैघ टोली हिनक संग रहैत छल जे चुटकी बजैत केहनो कठिन कार्यक निष्पादन कए दैत छल।

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मिथिला मे जन स्वास्थ्य तथा रक्षात्मक भावना सँ इ गाम गाम मे अषाढाक निर्माण कराओल जाहि पर मिथिलाक वीर संतति मल्ल विद्याक अभ्यास कए नव निर्माणक नीव दैत छलाह। हिनक पहाड़क सामान मुरेठा एबं हाथीक सूंढ़क सामान बाहु मे सुशोभित शाल वृक्षक सोटा देखि केँ पैघ सँ पैघ दुश्मनक फौज लंक लैत छल। हिनक ढोलक एक चोट पर समस्त क्षेत्र सचेत भय जैत छल। हिनक मल्ल नृत्य कालीन ढोलक आबाज़ मेघ गर्ज़न केँ लज्जित के दैत छल। महान तंत्र साधनों हिनक प्रिय क्षेत्र छल।  ई तंत्र विद्याक प्रयोग मात्र जीव हितार्थ करैत छलाह। अइयो मिथिलाक चर्मकार वर्ग अपन कुल भूषण बंठाक अनन्य भक्ति एबं कृतग्य भाव सँ द्वारि रक्षक रूप मे हिनक स्थापना करैत अछि। एतवे नहि स्नान काल अँजलि मे जल लय श्रद्धा सँ जलदान करैत अछि। आजीवन अखंड ब्रह्मचारी बंठाक गात मे देवोपम ज्योति ब्याप्त छल।

आलेख - शैलेश झा

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