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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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27 सित॰ 2023

Jha Caste Meaning

झा शब्दक उत्पत्ति कोना भेल ? Jha Caste Meaning

मिथिला धरोहर
'झा' (JHA) उपनाम मैथिल ब्राह्मण द्वारा प्रयोग कयल जाइत अछि।  मैथिल ब्राह्मण पंचगौड ब्राह्मणक अंतर्गत अबैत छथि आ मैथिल कहल जाइत छथि कारण ओ मूलतः मिथिलाक निवासी छथि। 

‘झा’ शब्द संस्कृत शब्द उपाध्याय के अपभ्रंश (Degeneration) अछि।  वैदिक काल मे वैदिक आचार्य लोकनि केँ उपाध्याय कहल जाइत छलनि। जकरा पाली मे ‘उवज्झा’ कहल जाइत छल। यैह ‘उवज्झा’, कालखंडक उत्तरोत्तर प्रवाह में, ‘ओझा’ सँ घटीके मात्र ‘झा’ रही गेल।

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Jha शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई ?
झा (Jha) उपनाम का प्रयोग मैथिल ब्राह्मण करते हैं। मैथिल ब्राह्मण पंचगौड़ ब्राह्मणों के अंतर्गत आते हैं और मूलतः मिथिला के निवासी होने के कारण मैथिल कहे जाते हैं। 

'झा' शब्द संस्कृत भाषा के शब्द उपाध्याय का अपभ्रंश है। वैदिक काल में वैदिक शिक्षकों को उपाध्याय कहा जाता था। जिसे पालि में 'उवज्झा' कहा जाता था। यही 'उवज्झा' काल के उत्तरोत्तर प्रवाह में 'ओझा' से होते हुए घटकर केवल 'झा' रह गया।

22 अग॰ 2022

Chandog Janeu

यज्ञोपवीत ब्रह्म सूत्र - मिथिलाक जनेऊ धारण, मंत्र और लाभ

मिथिला धरोहर
सनातन संस्कृति के तीनटा प्रमुख उदगम स्थल मे मिथिला, काशी, उज्जैन जाहिमे वैदिके काल सं मिथिलाक अनुपम स्थान रहल अछि। शास्त्रीय वैदिक कर्मकांडक अनुसार मिथिलाक सांस्कृतिक व्यवहार के श्रेष्ठता विरासत सं प्राप्त अछि आ इ आदि शक्ति के जन्मभूमि हेबाक कारणो विख्यात अछि। वैदिक पद्धति सं उपनयन संस्कार सम्पन्न करबाक पश्चात् एतय यज्ञोपवीत धारण करबाक अधिकार प्रदान कैल गेल अछि। एहि अधिकार के प्राप्त करबाक उपरांते मनुष्य ब्रह्मत्व प्राप्ति के दिस अग्रसर होइत अछि। एहिके पश्चात् देवकर्म, पितरकर्म, पूजा पाठ, यज्ञकर्म करबाक अधिकारी बनैत अछि। आध्यात्मिक दृष्टिकोण सं यज्ञोपवीत उपनयन संस्कार के अति विशिष्ट महत्व अछि। मिथिला क्षेत्र मे वैदिक काले सं गोसाओनि पूजा, मुण्डन, उपनयन, विवाह, यज्ञ अनुष्ठान एवं पितर कर्म आदि मे जनेऊ के महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त अछि।

जनेऊ बनेबाक कला मे मिथिला के महारथ प्राप्त अछि। एतय के बनायल गेल यज्ञोपवीत के श्रेष्ठ कहल जाइत अछि। यज्ञोपवीत कपास के रुइ सं विशेष विधि सं ग्रन्थित क के बनायल जाइत अछि। एकर संरचना मे नौ सूक्ष्म सूत सं एकटा सूत्र बनायल जाइत अछि आ इ कम सं कम एकैस (21) फुट लंबा हेबाक चाहि। एहि विशिष्ट एक सूत्र के तीनबेरा लपेट क तीन तानी बना क वाजसनेयि ब्राह्मण पाँच गाँठ तथा छन्दोग ब्राह्मण के द्वारा तीन गाँठ देल जाइत अछि जेकरा प्रवर कहल जाइत अछि। मिथिला मे वाजसनेयि ब्राह्मण आ छन्दोग ब्राह्मण के अपना विशेष गौरव गाथा अछि।
शास्त्रानुसार वेद के जाहि ॠचा के निर्माण पाँच व्यक्ति मिल क कैल गेल हुनका वाजसनेयि ब्राह्मण आ जिन ॠचा के निर्माण तीन व्यक्ति मिल क केलक हुनका छन्दोग ब्राह्मण कहल जाइत अछि। यज्ञोपवीत के तीन तानी के सूत्र हिंदू त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनु के प्रतीक कहल गेल अछि।अहि प्रकार तीन तानी के दु टा तैयार यज्ञोपवीत एकटा जोड़ा ब्रह्म सूत्र कहैत अछि जेकरा उपनयन संस्कार सं संस्कारित हेबाक बाद धारण करबाक विधान अछि। अभिमंत्रित कैल गेल जनेऊ बाँया कन्धा सं ल के दाहिना दिस डार सं लगभग छह इंच नीचा धरि लटका क पहिरबाक विधान अछि अपवित्र भेलाह पर यज्ञोपवीत बदैल लेल जाइत अछि, बिना यज्ञोपवीत धारण केने अन्न जल गृहण नै कैल जाइत अछि।



8 अप्रैल 2022

Mithila Information

खोंइछ : मिथिलाक एकटा पुराण बिद्ध

मिथिला धरोहर

Khoicha Ka Mahatva मिथिलाक एकटा पुराण परंपरा जे पता नै कहिया सं चली आबि रहल अछि। एहि परंपराक शुरुआत होइत अछि जहन लड़की बियाक बाद पहिल बेरा दुरणमन भऽ सासुर जाइत अछि तऽ मां ओकरा आंचर मे अरवा चाउर, हरैदक पाँच टा गाँठ, हरीयरका दूइभ आ यथाशक्ति रूपया रखी कऽ बांधैत अछि एकरे मिथिलांचल मे खोइछ (खोइछा) कहल जाइत अछि। 
खोइछ हमेशा बाँसक सूप या चंगेरा सं देल जाइत अछि। कन्या खोइछ मे सं पाँच चुटकी आपस सूप मे राखैत अछि। इ खोइछ बेटीक नव जीवनक शुरुआतक आशीष होइत अछि। चाउर ओकर भंडार भरल रहबाक, हरैद ओकर घर मे मंगल होयबाक, हरैदक गाँठ जंका कनियाँ पूरा परिवार के संग बांधने रहय। दूइभ परिवार के संजीवनी देबाक लेल आ पैसा ओकर मजबूत आर्थिक स्थिति के शुभकामना दइत अछि। अहि खोइछाक खोलबाक हक ननैद के होइत अछि आ ओहि पैसा पर सेहो ओकरे अधिकार होइत अछि आ नयहर मे बहिन के भेटल खोइछ के छोटकी बहिन खोलैत अछि। खोइछ हमेशा पूजा घर मे खोलल जाइत अछि।

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आब समय बहुत बदैल गेल अछि। दुरणमन उपरांत आब खोइछ लेबाक परंपरा कमे बेस होइत अछि  जल्दी सं लिक्विड सिनुर सौंथ मे लगा कऽ खोइछ छोट -छोट रंगबिरही पोटरी मे भेटैत अछि ताकि जींस या सूट पहिरय बाली बेटी - पुतौह आसानी सं एकरा अपन पर्स मे लऽ सकै। खोइछ चाहे आंचर मे होय या पोटरी मे मुदा भेटैत रहबाक चाही कियाकि एहि सुंदर सन परंपरा हमर धरोहर अछि आ ढेर रास याद सं जोरने राखैत अछि। 
खोइछ भरबाक धार्मिक महत्व सेहो अछि :-
दुर्गा पूजा आ काली पूजाक अवसर पर दुर्गा माता, काली माता के खोइछ भरबाक परंपरा सेहो अछि।  मानल जाइत अछि जे मां के खोइछ भरला सं माता के असीम कृपा होइत अछि। लोग धन-धान्य सं संपन्न होइत अछि। महाष्टमी मे मां के सोलह श्रृंगार क महिला मां के खोइछ भरैत अछि। खोइछ भरबाक लेल पान, सुपारी, फूल ,हरैत, अक्षत, दूइभ, मिठाई आदि लागैत अछि।
 
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27 मार्च 2022

Mithila Information

दरभंगा : मिथिला, मैथिली के केंद्र आ बंगाल के दरवाजा रहल मिथिलाक इ जिला

मिथिला धरोहर

About Darbhanga - दरभंगा शब्द फारसी भाषाक दर-ए-बंग सं निकलल ऐछ। एकर मतलब होइत अछि बंगाल कऽ दरवाजा। एकर मैथिलीकरण होइत इ नाम दरभंगा तक पहुंचल अछि।


आम, माछ, पान आ मखान के लेल प्रसिद्ध दरभंगा कला-संस्कृति के गढ़ रह अछि। बिहारक छठमा सबसं बड़का शहर दरभंगा बागमती नदीक कात बसल अछि। दरभंगा के मिथिलाक राजधानी सेहो कहल जाइत अछि। कहल जाइत अछि जे मुगल काल मे दरभंगी खां अंहि शहर के बसने छल। दरभंगी खां ब्राह्मण छलैथ। मुदा कालांतर मे इस्लाम अपना लेने छल।

सन 1845 मे ब्रिटिश सरकार दरभंगा सदर के अनुमंडल बनेलक आ सन 1864 मे दरभंगा शहर नगर निकाय भऽ गेल। सन 1875 मे स्वतंत्र जिला बनबा तक इ तिरहुत के संग छल। 1908 मे तिरहुत के प्रमंडल बनला पर एकरा पटना प्रमंडल सं हटा कऽ तिरहुत मे शामिल कऽ लेल गेल। आजादी भेटबाक उपरांत 1972 मे दरभंगा के प्रमंडलक दर्जा दऽ कऽ मधुबनी आ समस्तीपुर के एकरा अंतर्गत राखल गेल। जिला मे हिमालय सं उतरय वाली नित्यवाही आ बरसाती नदिक जाल बिछल अछि। कमला, बागमती, कोशी, करेह आ अधवारा समूहक नदि सं उत्पन्न बाइढ़ सब साल लाखों लोगक लेल तबाही आनैत अछि।


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कला-संस्कृति
दरभंगा मिथिला संस्कृति के अंग आ केंद्र बिंदु रहल अछि। रामायण मे एकरा राजा जनक के प्रदेश बताओल गेल अछि। मिथिला पेंटिंग, ध्रुपद गायनक गया शैली आ संस्कृत के विद्वान एहि इलाका के खास पहचान देलक अछि। प्रसिद्ध लोक कला मे सुजनी, सिक्की आ लकड़ी पर नक्काशी के काज शामिल अछि। सामा चकेवा, जड़ जटिन और झिझिया दरभंगा के प्रसिद्ध लोकनृत्य अछि। मिथिला क्षेत्र के इ जिला अपन प्राचीन संस्कृति, संस्कृत और बौद्धिक परंपरा के लेल जानल जाइत रहल अछि। दरभंगा शहरक आधुनिक स्वरूप सोलहवीं सदी मे मुगल व्यापारि आ ओईनवार शासक विकसित केलक। एहि इस क्षेत्र सं कुमारिल भट्ट, मंडन मिश्र, गदाधर पंडित, शंकर, वाचास्पति मिश्र, विद्यापति, नागार्जुन एहन चोटीक विद्वान निकलल अछि।

दरभंगा का सामाजिक तानाबाना
2011 के जनगणनाक मुताबिक जिलाक आबादी करीब 39.38 अछि। अहिमे पुरुख के संख्या लगभग 20.60 लाख आ महिला के आबादी करीब 18.78 लाख अछि। जिला मे स्त्री-पुरूख अनुपात 910:1000 अछि। जिला मे 72.75% लोग मैथिली बाजैत अछि। दरभंगा मे उर्दू बजनिहारक संख्या 20.67% अछि आ करीब 6.51% लोग हिंदी के अपन पहिल भाषा बताबैत अछि। दरभंगा के साक्षरता दर- 35.42% (पुरूख-45.32%, स्त्री- 24.58%) अछि। परंपरागत तौर पर इ शहर मिथिलाक ब्राह्मण के लेल संस्कृत मे उच्च शिक्षा के लेल प्रसिद्ध रहल अछि। दरभंगा मे करीब 77 फीसदी आबादी हिंदू धर्म के मानैत अछि त लगभग 22 फीसदी आबादी इस्लाम धर्म मानय बाली अछि।


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दरभंगा की राजनीतिक तस्वीर
दरभंगा जिला मे दरभंगा के अलावा मधुबनी आ समस्तीपर लोकसभा सीटक किछ हिस्सा आबैत अछि। दरभंगा लोकसभा सीट पर पुराना समय मे कांग्रेसक दबदबा रहल छल। कांग्रेस के एतय सात लोकसभा चुनाव मे जीत भेटल ऐछ त भाजपा के चाइर आ जनता दल के तीन बेरा जीतक स्वाद भेटल अछि। दरभंगा जिला मे 10 विधानसभा सीट आबैत अछि। एहिमे सं गौड़ाहौराम, बेनीपुर, अलीनगर, दरभंगा ग्रामीण, दरभंगा, आ बहादुरपुर विधानसभा सीट दरभंगा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र मे अछि तऽ दु-दु सीट मधुबनी (केवटी आ जाले) आ समस्तीपुर (कुशेश्वरस्थान (SC) और हायाघाट) लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र मे अछि।

दरभंगा के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल - Famous Places In Darbhanga


● दरभंगा राज किला-परिसर


● लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय


● कंकाली मंदिर


● मनोकामना मंदिर ( हनुमान मंदिर )


● काली (श्यामा) मंदिर


● दुर्गा मंदिर


● कुशेश्वर शिव मंदिर और पक्षी अभयारण्य


● अहिल्या स्थान


● ज्वालामुखी भगवती


● कैथोलिक चर्च


● रहमतुल्लाह अलैह की मजार


● दरभंगा टावर मस्जिद


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जिलाक प्रसिद्ध शख्सिय
पूर्व सांसद हुकुमदेव नारायण यादव, फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली, पूर्व क्रिकेटर आ दरभंगा के सांसद रहल कीर्ति आजाद, बॉलीवुड एक्ट्रेस कावेरी झा, प्रसिद्ध जनकवि बाबा नागार्जुन, फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा, मिथिला रत्न हेमकान्त झा, एक्टर सुभम झा एहन विभिन्न क्षेत्रक प्रसिद्ध चहरा दरभंगा सं निकलल अछि।

जिलाक प्रमुख अधिकारी
दरभंगा के एसएसपी बाबू राम अछि। हिनका सं  मोबाइल नंबर- 9431822992 पर संपर्क कैल जा सकैत अछि। दरभंगा के डीएम त्यागाजन एसएम अछि हिनकर E-Mail ID dm-darbhanga.bih@nic.in अछि हुनका सं टेलीफोन नंबर- 06272240200 पर संपर्क कैल जा सकैत अछि।

9 फ़र॰ 2022

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मिथिलाक अजब-गजब तिलकोर गुण

मिथिला धरोहर

तिलकोर मिथिलाक संस्कृति के पहचान अछि। तिलकोर एक प्रकारक बेल अछि जे अपन औषधीय गुण सं सेहो परिपूर्ण अछि आ एकर वनस्पति नाम मोमोरेडिका मोनाडेल्फा अछि।


अहि तिलकोरक पत्ता के ल मिथिला मे विशेष प्रकारक व्यंजन बनायल जाइत अछि जेकरा तिलकोरक तरुआ कहल जाइत अछि।


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एकर फूल उज्जर होइत अछि आ एकर फल कुंदरु एहन होइत अछि जे पक्षिय के मनपसिंद भोजन अछि, खास क सुग्गा क।

तिलकोर पर लगातार शोध भ रहल अछि आ अहिमे औषधीय गुण के मौजूदगक पुष्टि सेहो विशेषज्ञ द्वारा कैल गेल अछि। विशेषज्ञ के माननाय अछि जे तिलकोरक पत्ता के सेवन सं रक्त शुद्ध होइत अछि।


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● दिगंबर जैन मंदिर - श्री वासुपूज्य दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र, भागलपुर


डायबिटिज'क मरीज के लेल इ सच मे औषधी के काज करैत अछि। 

कुनो भी पावैन होय या अथिति के आगमन मिथिला मे भोजनक थारि तिलकोरक तरुआक बिन अदहे मानल जायत। मिथिला मे तिलकोर के महत्वक अंदाजा अहि बात सं लगायल जा सकैत अछि जे मिथिला मे गायल जाय बला गीतक बोल अहि प्रकार अछि।


सखी हे आज तरब तिलकोर

जे पाहुन ( मेहमान) कहियो नही आयल 

से आयल घर मोर।

12 जन॰ 2022

Mithila Information

अरिकोंच के औषधीय गुण - Arikanchan Benefits

मिथिला धरोहर

भारत के अधिकांश भाग में अरिकोंचक (अरिकंचन) खेती कएल जाइत छैक। अपना मिथिला में खेती त नै मुदा प्रत्येक घरक पछुआर में ई उपलब्ध होइत छल। अरिकोंचक वानस्पतिक नाम कोलोकेसिया एस्कुलेंटा थिकै। अरिकोंच के पात सँ बनल तीमन बहुत स्वादिष्ट होईत छैक। अरिकोंच के कोमल पात के तीमन के रूप में सेवन कएल जाइत छैक।कचका अरिकोंचक सेवन कखनो नै करबाक चाही। एकर पात वा कंद के नीक सँ उसीनलाक पश्चात उपयोग करबाक चाही।


अरिकोंचक पात के डाँट के तोड़ि कऽ अलग कऽ ली आ पात के जरा कऽ छौर (राख) के नारीकेलिक तेल में फेंट कऽ घाव-घोस पर लगेला सँ लाभ होईत छैक।


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● मैथिली कविता : मिथिलाक पकवान


एकरा पात मे घाइट (बेसन) लगा तरुआ बना खाउ।ओ जोड़क दर्द में कारगर दवाई के काज करैत छैक।

अरिकोंचक पात के डाँट के संग पैन में उसैन ली। बाद में ओहि पैन में थोड़ेक घी मिला ३ दिन में दू बेर सेवन करी। गैसक समस्या में अत्यंत लाभ होयत।


अरिकोंच के पातक रस ३ दिन तक पीयला सँ  लघुशंका में जलन के समस्या से समाप्त भऽ जैत छैक।


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● अरिकोंच के तरकारी विधि : अरिकंचन के सब्जी 


अरिकोंचक तीमन खायला सँ प्रसूता स्त्री के दूध बढैत छैक।


अरिकोंचक पात के तीमन बना क खायला सँ एसिडिटी दूर होईत छैक।


कोनो कीड़ा के कटला पर ओहि स्थान पर अरिकोंच के रस लगौला सँ, दर्द सँ आराम भेटैत छैक।

अरिकोंचक कंद शक्ति वीर्यवर्धक होईत अछि। एकर पात शरीर के मजगूत बनबैत छैक। एकर कंद नीक सँ उसैन नोन फेंट कऽ खएला सँ नपुंसकता दूर होइत छैक।


ह्रदय सँ संबंधित रोग भेला पर अरिकोंचक तीमन नित्य खएला सँ लाभ होईत छैक।


अरिकोंच के पीस किछु दिन तक नियमित रूप सँ केश में लागेला सँ केस टूटबाक समस्या सँ छुटकारा भेटैत छैक।


संकलन आ अनुवाद : नीरज मिश्र “मुन्नू”

8 दिस॰ 2021

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अंधराठाढ़ी के कन्दर्पी घाट पर भेल छल मिथिलाक सबसं बड़का भीषण युद्ध

मिथिला धरोहर

सन 1745 मे कन्दर्पी घाटक लड़ाई मातृभूमि के रक्षा आ कर मुक्त के लेल एतय के बीर योद्धा लड़ने छल। कन्दर्पी घाटक विजय स्तम्भ ओहि वीर सपूतक स्मरण मे निर्मित अछि। जे मिथिलावासि अपन मातृभूमि के लेल प्राण न्योछावर केने छलखिन। 


History Of Kandarpi Ghat : कंदर्पी घाट अंधराठाढ़ी प्रखंडक हरना गांव मे कमला नदीक पूब कात अवस्थित अछि। झंझारपुर के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी डाॅ. रंगनाथ चौधरी 20 जनवरी 2010 के ओहि अमर शहीद के याद मे एकटा मिथिला विजय स्तम्भ के आधारशिला रखने छलथि। जे चाइर साल में बैन क तैयार भेल। बिहार सरकार के तत्कालीन मंत्री नीतिश मिश्रा 20 फरवरी 2014 के अहि विजय स्तम्भ के अनावरण किया।


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● एकमात्र अंकुरित सरस्वती - गम्हरिया (बेनीपट्टी)

कन्दर्पी घाटक लड़ाइ राजस्व मुक्त के लेल लड़ल गेल अछि वर्ष 1745 मे अलीवर्दी खां आ बबरजंग के बीच भयंकर लड़ाइ लड़ल गेल छल। मिथिला नरेश नरेंद्र सिंह अलीवर्दी खां के लड़ाइ मे बहादुरी के संग सहायता केने छल। ओहि लड़ाइ मे अलीवर्दी खां के जीत भेल छल। लड़ाइ मे सहायता करबाक कारण अलीवर्दी खां मिथिला राज्य के राजस्व मुक्त क देलक। 1748 मे अलवर्दी खां के जमाय हैवत जंग के अफगानि माइर देने छल। 1752 मे राम नारायण के सूबेदार क पद भेटल छल। राम नारायण राजस्व लेबाक मामला मे बहुते क्रुर मानल जाइत छल। राम नारायण के जहन मिथिला सं राजस्व नै भेटबाक बात पता भेल त ओ राजा नरेंद्र सिंह सं राजस्व के मांग केलक। मिथिला नरेश नरेंद्र सिंह राजस्व दय सं मना क देने छल। अहि मनाही क उपरांत पटना सं भिखारी महथा के तिरहुत फतह करबाक लेल भेजल गेल। भिखारी महथा करीब पांच हजार सैनिक क संग आक्रमण क देलक। इ लड़ाई हरना के मैदान मे लड़ल गेल छल। हरना गांव कन्दर्पी घाट के बगल मे आयो बसल अछि।


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● जनेऊ मंत्र - वाजसनेयि यज्ञोपवीत मंत्र - छन्दोग जनेऊ मंत्र


इतिहासकारक अनुसार नरेंद्र सिंह के दादा उमराव सिंह अहि युद्ध मे शहीद भेलाक पश्चात नरेंद्र सिंह अपने लड़ाइ मे कूइद गेल छलखिन। अपन राजा के लड़ाइ करैत देख सेना के संगे-संग आम अवाम सेहो जातिवाद सं ऊपर भ लड़ाइक मैदान मे आबि गेल आ 1753 के 5 अक्बटूर सं 7 अक्टूबर धरि भीषण लड़ाइ भेल आ नरेंद्र सिंह ओहि लड़ाइ मे विजयी भेलैथ। हरना के कंदर्पी घाट के लड़ाइ मे अतेक यज्ञोपवीत धारि के प्राण गेल जे युद्ध के बाद अहि रणभूमि सं रक्त आ बाउलू सं सनल 74 सेर जनेऊ भेटल छल। अहि सं अनुमान लगायल जा सकैत अछि जे कतेक गैर यज्ञोपवीत धारि के शहादत भेल हैत। 

18 नव॰ 2021

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दरभंगा जंक्शन : मिथिला संस्कृति आ धरोहर के जीवंत छवि

मिथिला धरोहर

दरभंगा रेलवे जंक्शन ( Darbhanga Junction ) पर एबाक साथ यात्री के मोन प्रसन्न भऽ जाइत अछि। जंक्शन के विशाल भवन एतय के ऐतिहासिक कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के तस्वीर पेश करैत अछि। अंदर गेलाक साथ दरभंगा महाराज के विरासत आ मिथिलाक संस्कृति सं जुड़ल कलाकृति आ चित्र मोन के लोभाबैत अछि। 

छवि साभार
जखन उद्घोषक मैथिली मे घोषणा करैत अछि तऽ एतुका लोगक संवेदना सम्मान पावैत अछि। समय बदलैत रहल। मुदा, स्टेशन रेलवे प्रशासन के सक्रियताक कारण दरभंगा के धरोहर आ सांस्कृतिक विरासत के संभारबा मे काफी हद तक सफल रहल अछि। सरकारक प्रयासक उपरांत अहि  साल इ स्टेशन बिल्कुल मिथिलाक रंग मे रंगी गेल अछि। 

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मिथिलाक इतिहास'क जानकार बताबै छथि, रेलवे के स्वर्णिम इतिहास सं दरभंगा महाराज के गहिर संबंध रहल। अंग्रेजी हुकूमत मे महाराज तिरहुत स्टेट रेलवे कंपनी बना क अपन रेलगाड़ी चलेलथि। बहुते स्टेशनों के निर्माण करने छलथि। फेर पूर्व मध्य रेलवे हुनकर 145 वर्ष पुरना इंजन के धरोहरक रूप मे संरक्षित केलक। दरभंगा सं रेलवे दरभंगा राज के रेल इंजन के हाजीपुर जोनल कार्यालय मे तिरहुत स्टेट रेलवे के इंजन के धरोहरक रूप मे रखलक। समस्तीपुर डीआरएम कार्यालय मे सेहो एकटा इंजन सुरक्षित अछि। 

छवि साभार
1873 मे तिरहुत स्टेट रेलवे के भेल छल स्थापना अंग्रेजी हुकूमत मे दरभंगा महाराजक 14 कंपनि मे एकटा रेलवे विश्वविख्यात छल। एकर स्थापना 1873 मे तिरहुत स्टेट रेलवे नाम सं महाराज लक्ष्मेश्वर सिंह केने छलथि। 1873-74 मे जहन उत्तर बिहार भीषण अकालक सामना क रहल छल, तहन राहत आ बचाव के लेल लक्ष्मेश्वर अपन कंपनीक माध्यम सं बरौनी के समयाधार बाजितपुर सं दरभंगा धरि  रेल लाइन के निर्माण करेलथि।
अहि रेलखंड के ट्रायल 17 अप्रैल 1874 के वाजितपुर (समस्तीपुर) सं दरभंगाक बीच अनाज लादल मालगाड़ी के परिचालन करायल गेल। बाद मे 1 नवंबर 1875 मे पैसेंजर ट्रेनक परिचालन भेल महाराज तीन स्टेशनक निर्माण सेहो करबेने छलथि।

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नरगौना स्टेशन पर उतरलथी महात्मा गांधी समेत कतेको दिग्गज 
महाराज अपना लेल नरगौना मे निजी टर्मिनल स्टेशन के निर्माण करबेने छलथि। ओतय हुनकर सैलून रुकैत छलैन। हुनकर ट्रेन आ सैलून सं महात्मा गांधी आ डॉ. राजेंद्र प्रसाद जेहन स्वतंत्रता सेनानी सफर क दरभंगा आबैत छलथि। जानकार के कहब अछि जे 1922, 1929 और 1934 सहित पांच बेरा महात्मा गांधी अहि ट्रेन सं दरभंगा आयल छलथि। देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन सहित राष्ट्रीय फलक के कतेको चर्चित हस्ति सफर केने छलथि। 
छवि साभार
समय तालिका के होइत छल छपाई
दरभंगा महाराज के थैकर्स एंड स्प्रंक कंपनी स्टेशनरी के निर्माण करैत छल। तहन इ पूर्वी भारतक सबसं बड़का कंपनी छल। इ भारतीय रेलवे के समय तालिका छापय बला एकमात्र कंपनी अछि। एहिके बंद हेबाक पश्चात इ अधिकार रेलवे के लग चैल गेल। तिरहुत रेलवे कंपनी लग बड़का लाइन आ छोटका लाइन के लेल कुल दु सैलून या पैलेस ऑन व्हील छल।
रेलवे 1929 मे केलक अधिग्रहण
दरभंगा महाराज के तिरहुत स्टेट रेलवे के अधिग्रहण भारतीय रेलवे मे 1929 मे केने छल। धीरे-धीरे दरभंगा महाराज के योगदान के बिसरा देल गेल। पिछला किछ साल मे रेलवे दरभंगा महाराज के याद आ धरोहर के संजोबय मे दिलचस्पी देखेलक अछि। रेलवे के 150वीं जयंती पर प्रकाशित स्मारिका मे दरभंगा महाराज के शाही सैलून के तस्वीर छापल गेल। 'रेलवे मिथिलाक धरोहर के सुरक्षित करबाक दिशा मे काज केलक अछि। भवन एतय के प्रसिद्ध संस्कृत विश्वविद्यालय के रूप मे बैन के तैयार भ गेल अछि। जंक्शन के प्लेटफार्म मिथिला आ एतय के संस्कृति के छाप साफ अछि। इ अभियान लगातार जारी अछि।

6 सित॰ 2021

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समुद्र मंथन के साक्षी अछि मिथिला मे स्थित मंदार पर्वत, निकलल छल हलाहल आ 14 रत्न

मिथिला धरोहर

मिथिला मे एहन कतेको दार्शनिक स्थान अछि, जे दुनिया भरी मे अपन इतिहास आ प्राकृतिक सौन्दर्यता के लेल प्रशिद्ध अछि। भागलपुर सं लगभग 45 किलोमीटर के दूरी पर बसल बांका जिला मे 'मंदार पर्वत' ( Mandar Parvat ) स्थित अछि। 700 फीट ऊंचगर अहि पर्वत के बारे मे पुराण आ महाभारत मे कतेको खिस्सा प्रचलित अछि। अहिमे सं एकटा खिस्सा एहन अछि जे देवता अमृत प्राप्ति के लेल दैत्यक संग मिल क मंदार पर्वत सं समुद्र मंथन केने छल, जाहिमे हलाहल विष क संग 14 रत्न निकलल छल। 


ओतय एकटा कथा इहो प्रचलित अछि जे भगवान विष्णु मधुकैटभ राक्षस के पराजित क वध केलखिन आ ओकरा इ कैह के विशाल मंदार के नीचा दाइब देलखिन जे ओ पुनः विश्व के आतंकित नै करै। पुराण'क अनुसार इ लड़ाई लगभग दस हजार साल धरि तक चलल छल।

मंदार पर्वत पर स्थित अछि पापहरणी पोखैर (तालाब)

मंदार पर्वत पर पापहरणी पोखैर स्थित अछि। प्रचलित खिस्साक मुताबिक कर्नाटक के एकटा कुष्ठपीड़ित चोलवंशीय राजा मकर संक्रांतिक दिन अहि पोखैर मे स्नान केने छलैथ, जाहिक उपरांत हुनकर स्वास्थ ठीक भेलैन। तहिये सं एकरा पापहरणी के रूप मे जानल जाइत अछि। अहिके पूर्व पापहरणी ‘मनोहर कुंड’ कुंड नाम सं जानल जाइत छल। 


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मृतु सं पहिले मधुकैटभ राक्षस भगवान विष्णु जी सं इ वादा लेने छल जे सब साल मकर संक्रांति के दिन ओ ओकर दर्शन देबय मंदार आयल करथिन। कहल जाइत अछि, भगवान विष्णु ओकरा आश्वस्त केने छलखिन। यैह कारण अछि जे सब साल मधुसूदन भगवान के प्रतिमा के बौंसी स्थित मंदिर सं मंदार पर्वत तक के यात्रा कराओल जाइत अछि। 

पर्वत पर अंकित अछि डहिड़ 

एहन मान्यता अछि जे समुद्र मंथन मे नाग के रस्सी जंका प्रयोग कैल गेल छल, जेकर साक्ष्य पहाड़ पर अंकित डहिड़ सं होइत अछि। पर्वत पर एकटा समुद्र मंथन के दर्शाबैत स्मारक सेहो बनायल गेल अछि।  अहि पर्वत के पूरा हिस्सा ग्रेनाइट पत्थर के एकटा टुकड़ा एहन अछि। पर्वत के मध्य मे गरुड़ रथ'क  पहिया आ सर्प के निशान अछि। पर्वत पर लखदीपा मंदिर, सीता कुंड, पाल कालीन मृदभांड़, शंखकुंड आदि के निशान एकरा ऐतिहासिक हेबाक प्रमाण दैत अछि।

पोखरिक बीच स्थित अछि लक्ष्मी -विष्णु मंदिर

पापहरणी पोखरिक बीचों बीच लक्ष्मी -विष्णु मंदिर सहित अछि। सब मकर संक्रांति पर एतय मेलाक आयोजन होइत अछि। मेलाक पहिले यात्रा सेहो होइत अछि, जाहिमे लाखों लोग शामिल होइत अछि।


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एतय एकटा पंचजन्य शंख सेहो स्थित अछि, मान्यताक अनुसार इ वैह पंचजन्य शंख अछि जाहिमे भगवान शिव जी समुद्र मंथन सं निकलल हलाहल विष के पान केने छलथि। लोगक कहब अछि जे इ शिव रात्रि सं एक दिन पूर्व देखाइत अछि, शेष 364 दिन 70 सं 80 फुट पाइनिक अंदरे रहैत अछि आ प्रातः पाइन कतअ जाइत अछि केकरो नै बुझल अछि, शिवरात्रि के दोसर दिन प्रातः पुनः पाइन आइब जाइत अछि।

9 जुल॰ 2021

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Mithila Famous Tilkor Ka Tarua | मिथिलाक तरूआ तरूआ छियै, पकौड़ा नै छियै

मिथिला धरोहर

मिथिला धरोहर (ब्लॉगर.कॉम) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रोजगारक लेल पकौड़ा के नाम की लेलथि, सड़क सं संसद धरि सब दिस पकौड़ा प्रकरण चर्चे मे आबि गेल छल। मुदा मिथिला के भोजन मे तरूआ ( Taruaa Dish ) बहुते खास ऐछ। मिथिला मे तरूआ मे तिलकोर सं ल'के आलू, भांटा, कोभी सं ल'के विविध तरकारी के समेटल जाइत अछि। 
मिथिला मे खान-पानक संस्कृति मे तीन चीजक भेनाय बहुते जरूरी छैक : मिथिलाक भोजन तीन, कदली, कबकब, मीन । एतय कदली यानी केला, कबकब यानी ओल आ मीन यानी माछ। 

तरूआ के लेल एकटा आन कविता अछि-

भिंडी - भिनभिनायत भिंडी के तरुआ, 
आगु आ ने रे मुँह जरुआ 
हमरा बिनु उदास अछि थारी, 
करगर तरुआ रसगर तरकारी...

पूरा अर्थ नै बुझियौ खाली एतबे ध्यान रखियौ जे अहि गीत मे भिंडी सं ल'के कुम्हर तक के तरूआ के चर्चा अछि।
तरूआ त लगभग सभ तरकारी के बनैत छैक। आलू, भांटा, कोभी, सजमैन, कदीमा, कुम्हर, परोर, ओल, अरिकंचन। मुदा मिथिला मे अतिथि के सत्कार मे सबसं महत्वपूर्ण तरूआ होइत छैक तिलकोरक। मिथिला मे तिलकोरक लत्ती अहाँक सभ घरक बाड़ी मे भेट जायत। जानकारक दावा छैन जे तिलकोर टाईप वन डायबिटीज के लेल प्राकृतिक चिकित्सा के रामबाण अछि। मैथिल सब कहै छथि जे तिलकोर के नियमित सेवन सं पेनक्रियाज सं इंसुलिन के स्राव नियमित भ जाइत अछि।
बहरहाल, मिथिला मे तिलकोरे नै औरो तरकारीक तरुआ बनेबाक विधि लगभग एके जेहन अछि। अहिके लेल अमूमन चाऊर सं बनल पिठार के इस्तेमाल कैल जाइत अछि। उदाहरणक तौर पर आलूक तरुआ के गप्प कैल जाइत त ओकरा पातर टुकड़ा मे स्लाइस एहन काइट के राईख लेल जाइत अछि। जहिना कि चिप्स के लेल काटल जाइत छैक। पिठार फेंट क ओहिमे निमक हरैद मिला देल जाइत अछि। अगर इच्छा होय त कनि लाल मिर्चीक बुकनी सेहो। 


फेर आलू के फ्लेक के ओहि पिठार मे डुबा क कड़कैत तेल मे तैर लेल जाइत अछि। आंच मध्यम रखला सं तरूआ निक सं पाकैत अछि। अहिना, भांटा आ तिलकोर समेत आन तरकारी के लेल कैल जाइत अछि। 

27 जन॰ 2021

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परिचय : मैत्रेयी मिथिला के विदुषी

मिथिला धरोहर
मिथिला धरोहर : मिथिलाक राजा जनक केर दरबार मे मैत्री नामक मंत्री भेल करैत छलैथ जिनकर पुत्री मैत्रेयी ज्ञान पिपासु छलथि। हुनका भौतिक संपत्ति मे कुनो रूचि नै छलनी। मैत्रेयी एकटा सुविख्यात ब्रह्मवादिनी स्त्री छलथि। ओ ब्रह्मवाह के पुत्र याज्ञवल्क्य महर्षि के पत्नी छलथि। महर्षि के दु टा पत्नि मे मैत्रेयी बड़की छलिथि आ कात्यायनी छोटकी। ओ विदुषी छलथि। ओ संसार सं उपराम और ब्रह्मतत्व के जिज्ञासु छलिथि। मैत्रेयी सुशीला, निश्छल, निःस्वार्थ, साध्वी, सहनशीला, चरित्र के निर्मलताक संग ज्ञान रस मे डूइब के अमरत्व प्राप्त करए चाहय छलिथि। अतः जहन महर्षि सन्यास लेबाक सोचलनी त ओ अपन दुनू पत्नि के बजा के अपन सम्पत्ति (धन) के दुनू पत्निय के बीच बाँटबाक इच्छा बतेलनी।

एना महर्षि अहिलेल चाहए छलथि जे दुनू पत्नि मे आपसी विवाद नै होइन आ सदा प्रेम बनल रहैइन जाहिसे हिनका निश्चिंतता पूर्वक सन्यास लेबाक  लाभ भेटैइन। मैत्रयी के त सांसारिक वस्तु अर्थात भौतिक सुख के प्रति लेश मात्रो मोह नै छलनी। हुनका आध्यात्मिक ज्ञान के क्षुधा छलनी। ओ अपन पति के आध्यत्मिक ज्ञान के हिस्सा बनए चाहए छलिथि। हुनक सोच छलनी जे साक्षात् सुवर्णमय पृथ्वी प्राप्त भेलो पर अमरत्त्व प्राप्त नै होइत अछि। अतः जाहि संपत्ति सं हमरा अमरता प्राप्त नै होयत, ओ हमरा लेल व्यर्थ अछि, हम की करब? अतः प्रत्यक्ष मे कहलनी - स्वामी अगर अहाँ सम्पूर्ण ऐश्वर्य सं युक्त सम्पूर्ण धरा सेहो द देबय तहनो हम ओहि सं की अमरत्व प्राप्त क सकय छी। महर्षि याग्यवल्क्य अपन बुद्धिमती पत्नी के गप्प सुनी विस्मित आ प्रसन्न होइत कहलैथ - "नै देवी ! इ कदापि संभव नै अछि, व्यर्थ आशा छी." ब्रह्मवादिनी मैत्रेयी कहलनी - भगवन ! जाहिसँ हमरा अमरत्व प्राप्त नै होयत आ हमरा लेल तृण सदृश अछि. हमर कोन काजक इ भौतिक वस्तु? 


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अहाँके एहन वस्तु निश्चित रूप सं ज्ञात अछि जाहिके समक्ष इ धन और ऐश्वर्य तुच्छ अछि। अत: अहाँ एकर मोह नै क के त्याग क के जा रहल अछि। हमहुँ एकरा जानय चाहय छी। 'यदेव भगवन वेद तदेव ब्रूहि' जाहि वस्तु के स्वामी अमरता के साधन मानय अछि। हम जानय छी आत्मा के अध्ययन आ मनन केले सं संसार के प्रत्येक वस्तु के ज्ञान प्राप्त होइत अछि, अतः हमरा एकर ज्ञान प्रदान करु जाहिसे हमर ज्ञान पिपासा तृप्त होयत। 

अपन श्रेष्ठ भार्या के विद्वत्तापूर्ण तथा जिज्ञासापूर्ण गप्प सुनी महर्षि प्रसन्न भेलथि, और मैत्रेयी सं कहला- अहाँके दिव्य दृष्टि तथा जिज्ञासा कुनो असाधारण नारी मे टा भ सकए अछि। धन्य छी अहाँ मैत्रेयी ! इ धरा सेही धन्य अछि जे एहन रत्नगर्भा उत्पन्न केलक अछि। महर्षि विभिन्न युक्ति सँ मैत्रेयी के ब्रह्मज्ञान के उपदेश देलथि। मैत्रेयी के आत्मज्ञान के प्यास , अपना आपके जानबाक प्यास, महर्षि सं उपदेशित भ के ओ नारी सं नारायणी के श्रेणी मे आबि गेलीह। महर्षि हुनका उपदेश द के तप करए चली गेलाह। 

ओ श्रेष्ठ नारी के रूप मे विख्यात भेली अमरत्व प्राप्त क ब्रह्मवादिनी बनी के अनंत ब्रह्माण्ड मे स्थान प्राप्त क सब नारी के लेल आदर्श बनी गेलीह। मैत्रेयी मैत्रेयी उपनिषद लिखलनि। मैत्रेयी उपनिषद मे लिखए छथि - तपस्या सं मनुष्य अच्छाइ के प्राप्त करए अछि, अच्छाई सं मस्तिष्क पर पकड़ बनए अछि, मस्तिष्क सं स्वयं सं साक्षात्कार अछि, आ स्वयं सं साक्षात्कार मुक्ति अछि। पुनः कहए छथि मस्तिष्के संसार अछि, एकरा शुद्ध करबाक चाहि। मस्तिष्के हमरा भविष्य के मार्गक निर्धारण बताबय अछि और संसार'क सबटा रहस्य के खोइल दैइत अछि। भगवान के नै कुनो प्रारम्भ छैन, नै अन्त इ  शुद्ध ज्योति अछि, नै एकरा पकड़ल जा सकैत अछि नै छोड़ल जा सकैत अछि, नै कुनो चिन्ह होइत अछि नै कुनो पहचान , इ शांत और सुदृढ़ होइत अछि। अतः यैह मुक्ति अछि आ मोक्ष अछि। एहन ब्रह्मवादिनी विदुषी, ज्ञान पिपासु, परार्थ जीवनधारिणी पतिपरायण, त्यागमयी आदर्श गृहणी के करबद्ध नमन।

6 सित॰ 2020

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अहि दरभंगा सपूत के हस्ताक्षर अंकित अछि भारत'क मूल संविधान पर

मिथिला धरोहर
दरभंगा के रामनाथ गोयनका ( Ramnath Goenka ) महाराजा डा. सर कामेश्वर सिंह के संगेह देश के आज़ादीक उपरांत संविधान सभा के सदस्य छलथि आ दुनू गोटेक हस्ताक्षर भारत के मूल संविधान पर अंकित अछि। दुनू गोटे करीब करीब एकेह उम्र के छलथि आ दुनू प्रेस टाइकून ( INDIAN NATION or INDIAN EXPRESS) और सफल उद्योगपति।
रामनाथ गोयनका एकटा पहेली छलथि। ३ अप्रैल, १९०४ के दरभंगा मे जन्म भेलनी। गोयनका व्यवसाय सीखबाक लेल चेन्नई गेलथि और फ्री प्रेस जर्नल के संग एकटा प्रेषण विक्रेता के रूप मे काज केलथि। १९३६ मे, द इंडियन एक्सप्रेस के स्थापना केलथि। १९४१ मे, ओ राष्ट्रीय समाचार पत्र संपादक सम्मेलन के अध्यक्ष चुनल गेलथि। रामनाथ गोयनका भारत के संविधान पर अपन हस्ताक्षर राखए बला दरभंगा के दोसर  संविधान सभा के सदस्य सेहो छलथि। १९७५ मे आपातकाल के समय श्रीमती इंदिरा गाँधी के भयंकर विरोध केलथि और जयप्रकाश नारायण के पूण समर्थन देलथि। हिनकर समर्थन के बिना इंदिरा गाँधी के हटेनाए आसान नै छल। जे. पी. इंडियन एक्सप्रेस टावर, मुंबई मे ठहरए छलथि। 
आपातकाल के समय अरुण शोरी इंडियन एक्सप्रेस के संपादक बनाओल गेल छल। एमर्जेन्सी के समय इंडियन एक्सप्रेस बिना भय के इंदिरा गाँधी के विरोध जारी रखलक। अहि तरहे महाराजा कामेश्वर सिंह जे इंडियन नेशन ग्रुप सेहो प्रेस बिल के विरोध मे मोर्चा खोलने छल। प्रेस के आजादी और अभिव्यक्ति के स्वतंत्रता के दरभंगा के रामनाथ गोयनका जी हमेशा समर्थन देखती आ प्रेस के आज़ादी के ध्वजवाहक बनल रहलथि।  ५ अक्टूबर, १९९१ के हुनक निधन भ गेलनि। 

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आपातकाल के विरुद्ध दरभंगा के सपूत रामनाथ गोयनका जी अपन दम पर लड़ाई लड़लथि आ श्रीमती गाँधी के आपातकाल हटाबए और चुनाव करबाक लेल बाध्य होमए पड़लनि।  दरभंगा के डा. कामेश्वर सिंह सेहो संविधान के मौलिक अधिकार के ल'के न्यायलय मे लड़ाई लड़लथि और पंडित नेहरू के संविधान मे पहिल संसोधन करबाक लेल बाध्य होमए पड़लनि।
“हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् l
तस्मात्  उत्तिष्ट  कौन्तेय  युद्धाय कृत निश्चयः  ll
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि।।"

25 अग॰ 2020

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1983 सं बन्द पड़ल दरभंगाक अशोक पेपर मिल के अनसुनल इतिहास - History of Darbhanga Ashok Paper Mill

मिथिला धरोहर
दरभंगा जिलाक हायाघाट प्रखंड के समीप अवस्थित अशोक पेपर मिल ( Ashok Paper Mill, Darbhanga ) इतिहास सं जुड़ल रहल अछि। 1960 मे बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री एकर शिलान्यास केने छलथि। जाहिसे अहि ठामक लोग मे विश्वास जागल जे अपन जमीन देला सं आबए बला पीढ़ी के भविष्य उज्जवल होएत और क्षेत्र'क लोग के दोसर प्रदेश जेबाक जरूरत नै पड़त। मुदा भेल ठीक एकर विपरीत। 1983 सं बंद पड़ल अहि मिल के कतेको बेरा फेर सं शुरू करबाक नाकाम प्रयास सब नबका सरकार केलक। ओतय स्थानीय लोगक मानी तऽ 1983 सं एखन धरि कतेको बेरा एकरा चालू करबाक घोषणा कैल गेल, मुदा भेल किछ नै। 
केंद्र सरकारक पहल पर फ्रांस सं एकटा समझौता भेल जाहिके अनुसार ओतए सं कागज बनेबाक मशीन सहित ओतए के अभियंता एतए आबि के स्थानीय कर्मि के प्रशिक्षित करत। योजनाक अनुरूप काम शुरू भेल आ किछे साल मे आधारभूत संरचना सहित मशीन लागि के तैयार भऽ गेल और जेना की स्थानीय लोग के आस छल करीब 800 नियमित तथा हजारक संख्या मे अनुबंध पर मजदूर सहित दु दर्जन के समीप अधिकारि के नियुक्ति भेल। 

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1983 मे आर्थिक संकट अहि मिल मे उत्पन्न भेल बैंक के ऋण समय पर भुगतान नै भेलाके कारण मिल नीलामी के स्थिति मे पहुंच गेल। तहन हारी के मिल प्रबंधन आसाम के एकटा कम्पनी सं समझौता कऽ मिल के चालू रखलक। मुदा मिल प्रबंधन के इ नीति कारगर नै भेल। 
दरभंगा महाराजा द्वारा स्थापित ई मिलके महाराजाक अचानक देहावसानक समय जखनि बन्द भऽ गेलैक आर दरभंगा राज्यक एक्सक्यूटर पं. लक्ष्मीकान्त झा जखनि एकरा आसाम सरकारक हाथे बेचबा ले तैयार भेलाह तऽ तत्कालीन मुख्यमंत्री एवं कर्पूरी ठाकुरक अथक प्रयत्न सँ ई मिल के आसाम आर बिहार सरकारक ज्वाइन्ट वेन्चरक रुपमे पुर्नजीवित कैल गेल। आर श्री ए. डी. अधिकारी आई. ए. एस. क’ निर्देशनमे आसाम आ बिहार दुनू जगह मे मिल सुचारु रुपसँ चलिक’ बहुत जल्दी देशक कागज उद्योगमे अपन छवि नीक बना लेलक।  

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किन्तु डा. जगन्नाथ मिश्रक कार्यकालमे अहू पर ग्रहण लागि गेलै, सब किछु नष्ट भऽ गेलैं। बिना कारण के हिनका लोकनिक व्यक्तिगत स्वार्थ अशोक पेपर मिल के बन्द करा देलक। हिनके लोकनिक व्यक्तिगत स्वार्थक कारणे आपसी बंटवारा वाली बात उठलै आर कम्पनी बन्द भऽ गेलै।
दुर्भाग्यवश एहि कम्पनी के ने तऽ पैसाक कमी भेलै, ने मार्केंटिंगक समस्या, ने कच्चा मालक कमी, ने मजदूरे ल’ के परेशानी भेलै, सब चीज अछैत, बन्द भऽ गेलै। किछु राजनीतिज्ञ मंत्री एवं बिहार सरकारके तत्कालिन अधिकारी लोकनि एहि कम्पनी के अपन चारागाह बनबए चाहैत छलाह, जे नै भऽ रहल छलनि। ओ चाहैत छलाह जे यदि आपसी बटवारा भऽ के बिहार सरकारक हाथमें आवि जाए, तऽ बिहारक मंत्रिलोकनि एवं ऑफि़सरोक व्यक्तिगत रुपसँ लाभ होइतनि।

10 अग॰ 2020

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मिथिलाक पान के औषधीय गुण : संस्कृति संगे सेहत लेल सेहो अछि शुभ

मिथिला धरोहर
मिथिला धरोहर : मिथिलाक संस्कृति मे पान के सब तरहे सँ शुभ मानल जाइत छै पूजा-पाठ, पावनि-तिहार, उपनयन, बियाह, भोज भात आ आध्यात्मिक क्रिया मे सेहो पान के प्रयोग कतेको साल सँ होइत आबि रहल ऐछ। एकर अलावा पान कऽ रोग के दूर भगेबा में सेहो बेहतर तरीका सं इस्तेमाल कैल जाएत ऐछ।


खाना खेलाक बाद आ मुँहक जायका बनल रखबाक लेल पान बहुते कारगर ऐछ। कतेको बीमारि के उपचार मे पानके प्रयोग लाभप्रद मानल जाएत ऐछ। पान में दस ग्राम करपूर लऽ कऽ दिन मे तीन-चाइर बेर चिबेला सं पायरिया के शिकायत दूर भऽ जाएत ऐछ। एकर इस्तेमाल मे एकटा सावधानी रखनाय जरूरी छै जे पानक पीक पेट मे नै जाय।
कानक असहनीय दर्द कऽ दूर करबाक लेल पानक पत्ता बहुते लाभप्रद ऐछ। कानक दर्द सं राहत पेबाक लेल पानक पतता के तेल मऽ नारियलक तेल मिला कऽ आ एकर दु बूंद कान मे दऽ दियौ अहि सं कानक दर्द सं राहत भेटत।

इहो पढ़ब :-

एकर अलावा चोट लगला पर पान कऽ गर्म कऽ परत-परत कऽ के चोट बला जगह पर बाँईध लेबाक चाही। अहिसँ किछे घन्टा मे दर्द दूर भऽ जाइत अछि।
खाँसी आबैत हुए तऽ गर्म हरैद कऽ पान मे लपेट कऽ चबाउ। यदि खाँसी राइत मे बैढ़ जाइत अछि तऽ हरैदक जगह अहि में अजवाइन दऽ के चिबेबाक चाहि।

इहो पढ़ब :-

यदि किडनी खराब होय तऽ पानक इस्तेमाल बिना किछो मिलेने करबाक चाहि। अहि दौरान मसल्ला, मिर्च आ शराब (मांस एवं अंडा सेहो) सं पूरा परहेज रखनाय जरूरी अछि। (ओना एखन तऽ शराब बिहार मे बन्दे छै मुदा चोरा नुकाक तऽ भेटे जाइत ऐछ )
जलनाय या छाला पड़ला पर पानक रस गर्म कऽ के लगेला सं छाला ठीक भऽ जाइत अछि। पीलिया ज्वर और कब्ज में सेहो पानक उपयोग बहुते फायदेमंद होइत ऐछ। सर्दी जुकाम भेला पर पान मऽ लौंग दऽ कऽ खेला सं जुकाम जल्दी पाइक जाइत अछि।

इहो पढ़ब :-

श्वास नली के बीमारि में सेहो पानक इस्तेमाल अत्यंत कारगर ऐछ। अहि में पानक तेल गर्म कऽ के सीना पर लगातार एक हफ्ता धैर लगेबाक चाहि।
बाल झड़य सं परेशान लोग पानक पत्ता कऽ नीक सं पीस कऽ आ एकरा नारियलक तेल मे मिला लिअ, आब अहि तेल कऽ केसक जैर पर नीक जँका सं लगा लिअ और तीन चार घंटा बाद शेम्पू सं केश धोय लिअ। अहि प्रक्रिया सं अहाँ के हेयरफालक समस्‍या सं छुटकारा भेटत।

पान मे पाकल सुपारी आ मुलेठी दऽ के खेनाइ सं मॅन पर नीक असर पडैत ऐछ। ओना तऽ अपना देश में कतेको तरहक पान भेटय ऐछ। अहिमे मगही, बनारसी, गंगातीरी और देशी पान दवाइके रूप में ज्यादा कारगर सिद्ध होइत ऐछ। भूख बढेनाय, प्यास बुझेनाय मसूड़क समस्या सं निजात भेटबा में बनारसी आ देशी पान फायदेमंद साबित होइत ऐछ।

चेतावनी : पान के अत्यधिक प्रयोग मुँह के कैंसर के कारण सेहो भ सकैत अछि। एतय केवल पान के औषधीय महत्व के जानकारी देल गेल अछि।
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