सोमवार, 26 जनवरी 2026

गे माई देख कने तु नजैर उठा के बैसल छी आस लगाय लिरिक्स - Maiya Dekh Najair Utha Ke Lyrics

गे माय देख कने तु नजैर उठा क 
बैसल छी आस लगाय
गे माय देख कने तु नजैर उठा क 
बैसल छी आस लगाय
बैसल छी आस लगाय गे माई,
बैसल छी आस लगाय,
गे माय राख अपन तू हृदय लगा क
बैसल छी आस लगाय

लाले बिंदिया लाल चुनरिया 
लाल छै सेनुर सजाय,
मुख पर पसरल चंद्र किरणीयाँ
देलक तिमिर मिटाय
गे माय हाथ मे चमकौ सोन कंगनवां
ताकय छी सुधि बिसराय
गे माय हाथ मे चमकौ जे सोन कंगनवां
ताकय छी सुधि बिसराय

खूट पकड़ी मां करब निहोरा
लेबौ तोरा हम मनाय
रहबय कतेक तु रुसल मैया
तेखबे भैर मुस्काय
गे माय रूप अनूप संग ममता भरल मन
रहै छी अहिं मे ओझराय
गे माय रूप अनूप संग ममता भरल मन
रहै छी अहिं मे ओझराय
गे माय देख कने तु नजैर उठा क 
बैसल छी आस लगाय
गे माय राख अपन तू हृदय लगा क
बैसल छी आस लगाय

गायक: अमित झा, अन्वेषा झा
गीत: आशुतोष मिश्रा 'अज़ल'

शनिवार, 10 जनवरी 2026

मिथिला पद्धतिक अनुसार सरस्वती पूजा विधि मंत्र सहित - Mithila Saraswati Puja Vidhi Mantra

-: सरस्वती पूजा-विधि :-

पूर्व दिन निरामिष एकभुक्त कए प्रतिमा आदि पूजा - सामग्रीक संकलन करी ।

पूजाक दिन अपन नित्यकर्म कए (सूर्यादिपंचदेवताक आ विष्णुक पूजाकए) कुश, तिल आ जल लए- 

ॐ तत्सत् ॐ विष्णुः विष्णुः ।

संकल्प - ॐ अद्य माघे मकरार्के शुक्लपक्षे पञ्चम्यां
तिथावमुकगोत्रास्यामुकशर्मणः सदारापत्यस्य अतुलविभूतिपुत्रपौत्रादिसद्विद्या- लाभपूर्वकसरस्वतीप्रीतिकामो लक्ष्म्याद्यङ्गदेवतापूजनपूर्वकसरस्वतीपूजन महङ्करिष्ये।। 
प्रतिमा में, घटक जल में, शालग्राम मे, फोटो मे अथवा ऐनामे सरस्वती कें स्नान कराए।

सां एहि मन्त्र सँ मूर्ति में आँखिक स्पर्श कए, आँखि दए तीन बेरि प्राणायाम करी।

मूर्तिक हृदय पर दहिना हाथ दए वामा हाथ सँ कच्छप- मुद्रा बनाए एहि मन्त्र सँ ध्यान करी ।

ॐ तरुण- शकलमिन्दोर्बिभ्रती शुभ्रक्रान्तिः । 
कुचभर - नमिताङ्गी सन्निषण्णा सिताब्जे ।
निजकर-कमलोद्यल्लेखनीपुस्तकश्रीः । सकलविभवसिद्ध्यै पातु वाग्देवता नः ।।

ध्यान कए प्राणप्रतिष्ठा करी । तेकुशा हाथ मे लए नीचाँ लिखल मन्त्र पढी ।

ॐ आँ ह्रीं क्रीं यं रं लं वं शं षं सं हौं हं सः श्रीसरस्वतीदेव्या इह प्राणाः । 
ॐ आँ ह्रीं क्रीं यं रं लं वं शं षं सं हौं हं सः श्रीसरस्वतीदेव्या इह प्राणाः ।
ॐ आँ ह्रीं क्रीं यं रं लं वं शं षं सं हौं हं सः श्रीसरस्वतीदेव्या इह स्थितिः । 
ॐ आँ ह्रीं क्रीं यं रं लं वं शं षं सं हौं हं सः इह श्री सरस्वतीदेव्याः सर्वेन्द्रियाणि ।

ॐ आँ ह्रीं क्रीं यं रं लं वं शं षं सं हौं हं सः श्रीसरस्वतीदेव्या वाङ्मनः चक्षुः श्रोत्रघाणप्राणा इहागत्य सुखं चिरं तिष्ठन्तु स्वाहा । 

ॐ मनोजूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमन्तनोत्वरिष्टं यज्ञं समिमन्दधातु विश्वेदेवास इह मादयन्तामोम् प्रतिष्ठ ॥ ॐ सरस्वतीदेवि ! इहागच्छ इह सुप्रतिष्ठिता भव ॥

ॐ अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणाः अस्यै प्राणाः क्षरन्तु च । अस्यै देवत्वसंख्यायै स्वाहा ॥

देवीक हृदय पर हाथ धेने सां ई मूलमन्त्र तीन बेरि जप कए, देवीक शरीरक अङ्गन्यास आ करन्यास कए, ऐँ एहि बीज सँ संनिरोधनी मुद्रा देखाबी आ सां एहि मूलमन्त्रसँ पुष्पाञ्जलि दी।

-: कलश स्थापना :-

तखनि आसन पर बैसि कलश स्थापित करी। जल छीटि, बीचमे पूजा करी।

आवाहन - अक्षत लए, ॐ कलशाधारशक्ते इहागच्छ इह तिष्ठ ।

जल - एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि ॐ कलशाधारशक्तये नमः ।

श्रीखण्ड चानन - इदमनुलेपनं कलशाधारशक्तये नमः। 
रक्तचानन - इदं रक्तचन्दनम् कलशाधारशक्तये नमः।
रोली - इदं कुङ्कुमं कलशाधारशक्तये नमः। 
सिन्दूर - इदं सिन्दूरं कलशाधारशक्तये नमः। 
अक्षत- इदमक्षतं कलशाधारशक्तये नमः। 
फूल - एतानि पुष्पाणि कलशाधारशक्तये नमः।
नैवेद्य - एतानि नानाविधनैवेद्यानि कलशाधारशक्तये नमः । 
आचमन - इदमाचमनीयं कलशाधारशक्तये नमः । पुष्पाञ्जलि - एष पुष्पाञ्जलिः कलशाधारशक्तये नमः । 
भूमिक स्पर्श कए, ॐ भूरसि भूमिरसि अदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धर्त्री । पृथिवीं यच्छ पृथिवीं ह पृथ्वीं मा हिंसीः । 

गायक गोबरसँ निपबाक मन्त्र- ॐ मानस्तोके तनये मान आयुषि मानो गोषु मानोऽअश्वेषुरीरिषः । मानोव्वीरान् रुद्रभामिनोव्वधीर्हविष्मन्तः सदभित्त्वा हवामहे ।

गंगाजल छिटबाक मन्त्र - वेद्या वेदिः समाप्यते बर्हिषा बर्हि इन्द्रियम् । यूपेन यूपआप्यते प्रणीतोऽअग्निरग्निना ।।

एकर बाद एहि पर पिठारसँ अष्टदल कमल बनाबी। कमलक बीच में धान अथवा जौ राखी, तकर मन्त्र- धान्यमसि घिनुहि देवान् प्राणय त्वोदानाय त्वा व्यानाय त्वा । दीर्घामनु प्रसितिमायुषे धां देवो वः सविता हिरण्यपाणि: प्रतिगृभ्णात्वच्छिद्रेण पाणिना चक्षुषे त्वा महीनां पयोऽसि ।

खाली कलश रखबाक मन्त्र - ॐ आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्त्वन्दवः

पुनुरूर्जा नि वर्तस्व सा नः सहस्त्रं धुवोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशाद्रयिः । कलश पर दही आ अक्षतक लेप करी । तकर मन्त्र- ॐ दधिक्राव्णोऽअकारिषं जिष्णोरश्वस्य वाजिनः । सुरभि नो मुखाकरत्प्रण आयूंषि तारिषत् ।

लोटासँ कलश में जल भरबाक मन्त्र- ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य स्कम्भ सर्ज्जनीस्थो वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमासीद ।

पंचरत्न - ॐ सरलानि दाशुषे अरातिसहिता भगो भाग्यन्य तत्र मीमहे ।

सप्तमृत्तिका - ॐ उद्धृतासि वराहेण कृष्णेन शतबाहुना । नमस्ते सर्वदेवानां प्रभुवारिणि सुव्रते । 

सर्वौषधी- ॐ या ओषधीः पूर्व्वा जाता देवेभ्यस्त्रियुगं पुरा । मनैनु बभ्रूणामहं शतं धामानि सप्त च ।

श्रीखण्ड चानन- ॐ गन्धद्वारां दुराधर्षा नित्यपुष्टां करीषिणीम ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोपहये श्रियम् ।

सुपारी- ॐ याः फलिनीर्या अफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः । बृहस्पति प्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्वं हसः ॥

पंचपल्लव अथवा केवल आमक पल्लव- ॐ अम्बे अम्बिके अम्बालिके न मानयति कश्चनः । ससस्त्यश्वकः सुभद्रिकाम् काम्पीलवासिनीम् । दूबि - ॐ काण्डात् काण्डात् प्ररोहन्ती परुषः परुषस्परि । एवानो दूर्वे प्रतनु सहस्रेण शतेन च ।

गंगाजल - ॐ इमम्मे वरुण श्रुधीहवमदद्या च मृडय त्वामवस्युराचके । गंगाद्याः सरितः सर्वाः समुद्राश्च सरांसि च । 
सर्वे समुद्राः सरितः सरांसि दलदायकाः ।
आयान्तु यजमानस्य दुरितक्षयकारकाः 

ॐ आपो हि ष्ठा मयोभुवः, ता नऽऊर्जे दधातन । महे रणाय चक्षसे । ॐ यो वः शिवतमो रसः, तस्य भाजयतेह नः । उशतीरिव मातरः । ॐ तस्माऽअरंगमामवो, यस्य क्षयाय जिन्वथ । आपो जन यथा च नः । 

पानक पात - ॐ प्राणाय स्वाहा । ॐ अपानाय स्वाहा । ॐ व्यानाय स्वाहा । 
पाइ - ॐ हिरण्यगर्भः समवर्तताग्रे भूतस्य जातः पतिरेकासीत । स दाधार पृथ्वीं ध्यामुतेमां कस्मै देवाय हविषा विधेम । 
नारिकेर - ॐ याः फलिनीर्या अफला अपुष्पा याश्च पुष्पिणीः । बृहस्पति प्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्वं हसः ।

वस्त्र - ॐ युवा सुवासाः परिवीत आगात् स उ श्रेयान् भवति जायमानः । तं धीरासः कवय उन्नयन्ति स्वाध्यो मनसा देवयन्तः । 
कलशक कात अरवा चाउर भरल ढकना राखी- ॐ धान्यमसि धिनुहि देवान् प्राणयत्वोदानाय त्वा व्यानाय त्वा । दीर्घामनु प्रसितिमायुषे धां देवो वरू सविता हिरण्यपाणिरू प्रतिगृभ्णात्वच्छिद्रेण पाणिना चक्षुषे त्वा महीनां पयोऽसि ।

ओहि धान पर दीप राखी- ॐ अग्निर्ज्योतिः ज्योतिरग्निः स्वाहा। सूर्यो ज्योतिर्ज्योतिः सूर्यः स्वाहा। अग्निर्वर्चो ज्योतिर्वर्चः स्वाहा। सूर्यो वर्चो ज्योतिः वर्चः स्वाहा । ज्योतिः सूर्यः सूर्यो ज्योतिः स्वाहा । 

दही आ अक्षत लए कलशक स्पर्श करैत- ॐ मनोजूतिर्जुषता माज्यस्य बृहस्पति र्यज्ञमिमं तन्नोत्वरिष्टं यज्ञं समिमं दधातु । विश्वे देवास इह मादयन्तामों

प्रतिष्ठ। कलशस्थितगणेशादिदेवता इह सुप्रतिष्ठिता भवन्तु । ॐ कलशस्थितगणेशादिदेवताभ्यो नमः एहि मन्त्रसँ कलश पर पूजा करी ।
।। इति कलशस्थापन विधि ।।

कलश स्थापित कए विघ्नापसारण करी । पयरक एंडी पर तीन बेरि थपकी दए, तीन बेरि ताली बजाए, आँखि कड़ा कए चारूकात देखि, ॐ फट् एहि मन्त्रसँ तीन बेरि ताली बजा कए दसो दिशा मे चुटकी बजाबी । चानन आ फूलसँ हाथ के शोधित कए नाराच मुद्रासँ ओकरा ईशानकोण में फेंकि आसन पर बैसी -
ॐ पृथ्वीति मन्त्रस्य मेरुपृष्ठ ऋषिः, सुतलं छन्दः, कूर्मो देवता आसनोपवेशने विनियोगः ॥

ॐ पृथ्वि त्वया धृता लोका: देवि त्वं विष्णुना धृता । त्वं च धारय मां नित्यं पवित्रं कुरु चासनम् । ॐ आधारशक्तिकमलासनाय नमः ।

एहि तरहें आसनक पूजा कए - 
ॐ अस्त्राय फट् ई मन्त्र पढ़ेत पूर्व अथवा उत्तरमुख बैसि
वाम भागमे ॐ गुरुभ्यो नमः। 
दहिन भागमे ॐ गणेशाय नमः । 
सोझाँमे - ॐ सरस्वत्यै नमः । एहि मन्त्रसँ एक एक फूल राखी । तकर बाद ऋष्यादिन्यास करी - 
बिचला तीन आँगुरसँ माथक स्पर्श करी- ॐ ब्रह्मणे ऋषये नमः । 
बिचला तीन आँगुरसँ मुखक स्पर्श करी ॐ गायत्रीच्छन्दसे नमः । 
बिचला तीन आँगुरसँ हृदयक स्पर्श करी- ॐ ऐं सरस्वतीदेवतायै नमः । तकर बाद ऐं एहि बीजमन्त्रसँ तीन बेरि प्राणायाम कए कराङ्गन्यास करी । यथा -
आं हृदयाय नमः || बिचला तीन आँगुरसँ हृदयक स्पर्श करी ई शिरसे स्वाहा । बिचला तीन आँगुरसँ माथक स्पर्श करी ॐ शिखायै वषट् । बिचला तीन आँगुरसँ टीकक स्पर्श करी ऐं कवचाय हुम्। दूनू हाथक बिचला तीन आँगुरसँ उलटा कए दूनू कान्हक स्पर्श करी । (दहिना हाथसँ वामा कान्ह आ वामा हाथसँ दहिना कान्ह । )

ॐ नेत्रत्रयाय वौषट् । अनामिका सँ वामा आँखि, मध्यमासँ भोंह आ तर्जनीसँ दहिना आँखिक स्पर्श करी ।

घुमाए वामा तरहत्थी पर अः अस्त्राय फट् ।। दहिना हाथ के पाँछा दिस सँ बिचला तीन आँगुरसँ थपडी बजाबी ।

एहि प्रकारें करन्यास कए यथाशक्ति प्राणायाम कए सामान्यार्घ स्थापित करी। अपन वामा कात में रक्त चाननसँ त्रिकोण लीखि, फूल, अक्षत चाननसँ पूजा करी।

ॐ आधारशक्तये नमः । ॐ अनन्ताय नमः । ॐ कूर्माय नमः, ॐ पृथिव्यै नमः । एहि प्रकारें पूजा कए, ओतए शंखक बैसना राखि, फट् एहि मन्त्रसँ शंख कें ओहि बैसना पर स्थापित कए शंखक तीन भाग जलसँ भरि,

अंकुश मुद्रासँ - 
ॐ गङ्गे च यमुने चौव गोदावरी सरस्वती ।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेस्मिन् संनिधिं कुरु ।

तीर्थक आवाहन कए

सां एहि मन्त्रसँ ओहि में चानन, पूल, अक्षत दए, धेनुमुद्रा देखा कए आठ बेरि सां जपि, ओहि जलसँ अपना कें आ आनो सामग्री कें सिक्त कए दी।

तखनि पंचोपचारसँ निम्नलिखित देवताक पूजा करी 
सूर्य - भगवन् सूर्य इहागच्छ इह तिष्ठ । एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि ॐ भगवते श्री सूर्याय नमः। इदमनुलेपनं भगवते श्री सूर्याय नमः। इदं रक्तचन्दनम् भगवते श्री सूर्याय नमः। इदं कुङ्कुमं भगवते श्री सूर्याय नमः। इदमक्षतं भगवते श्री सूर्याय नमः। एतानि पुष्पाणि भगवते श्री सूर्याय नमः। एतानि नानाविधनैवेद्यानि भगवते श्री सूर्याय नमः। इदमाचमनीयं भगवते श्री सूर्याय नमः। एष पुष्पाञ्जलिः भगवते श्री सूर्याय नमः ।

विष्णु - भगवन् विष्णो इहागच्छ इह तिष्ठ । एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि ॐ भगवते श्री विष्णवे नमः । इदमनुलेपनं भगवते श्री विष्णवे नमः । एते यवतिलाः भघवते श्रीविष्णवे नमः । एतानि पुष्पाणि भगवते श्री विष्णवे नमः । एतानि नानाविधनैवेद्यानि भगवते श्री विष्णवे नमः । इदमाचमनीयं भगवते श्री विष्णवे नमः । एष पुष्पाञ्जलिः भगवते श्री विष्णवे नमः ।

शिव - भगवन् शिव इहागच्छ इह तिष्ठ । एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि ॐ भगवते शिवाय नमः । इदमनुलेपनं भगवते शिवाय नमः । इदं रक्तचन्दनम् भगवते शिवाय नमः । इदं कुङ्कुमं भगवते शिवाय नमः । इदमक्षतं भगवते शिवाय नमः । एतानि पुष्पाणि भगवते शिवाय नमः । एतानि नानाविधनैवेद्यानि भगवते श्री शिवाय। इदमाचमनीयं भगवते शिवाय नमः । एष पुष्पाञ्जलिः भगवते शिवाय नमः ।

दुर्गा - भगवति दुर्गे देवि इहागच्छ इह तिष्ठ । एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि ॐ भगवत्यै दुर्गादेव्यै नमः । इदमनुलेपनं भगवत्यै दुर्गादेव्यै नमः । इदं रक्तचन्दनम् भगवत्यै दुर्गादेव्यै नमः । इदं कुङ्कुमं भगवत्यै दुर्गादेव्यै नमः। एदं सिन्दूरं भगवत्यै दुर्गादेव्यै नमः । इदमक्षतं भगवत्यै दुर्गादेव्यै नमः । एतानि पुष्पाणि भगवत्यै दुर्गादेव्यै नमः । एतानि नानाविधनैवेद्यानि भगवत्यै दुर्गादेव्यै नमः । इदमाचमनीयं भगवत्यै दुर्गादेव्यै नमः । एष पुष्पाञ्जलिः भगवत्यै दुर्गादेव्यै नमः।

अग्नि - भगवन् अग्निदेव इहागच्छ इह तिष्ठ । एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि ॐ भगवते अग्निदेवाय नमः । इदमनुलेपनं भगवते अग्निदेवाय नमः । इदं रक्तचन्दनम् भगवते भगवते अग्निदेवाय नमः । इदं कुङ्कुमं भगवते भगवते अग्निदेवाय नमः । इदमक्षतं भगवते भगवते अग्निदेवाय नमः । एतानि पुष्पाणि भगवते भगवते अग्निदेवाय नमः । एतानि नानाविधनैवेद्यानि भगवते भगवते अग्निदेवाय नमः । इदमाचमनीयं भगवते भगवते अग्निदेवाय नमः । एष पुष्पाञ्जलिः भगवते भगवते अग्निदेवाय नमः ।

केशव - भगवन् श्रीकेशव इहागच्छ इह तिष्ठ । एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि ॐ भगवते श्रीकेशवाय नमः । इदमनुलेपनं भगवते श्रीकेशवाय नमः। एते यव-तिलाः भगवते श्रीकेशवाय नमः । एतानि पुष्पाणि भगवते श्रीकेशवाय नमः । एतानि नानाविधनैवेद्यानि भगवते श्रीकेशवाय नमः । इदमाचमनीयं भगवते श्री केशवाय नमः । एष पुष्पाञ्जलिः भगवते श्रीकेशवाय नमः ।

कौशिकी - भगवति कौशिकि देवि इहागच्छ इह तिष्ठ । एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि ॐ भगवत्यै कौशिक्यै नमः । इदमनुलेपनं भगवत्यै कौशिक्यै नमः । इदं रक्तचन्दनम् भगवत्यै कौशिक्यै नमः । इदं कुङ्कुमं भगवत्यै कौशिक्यै नमः । इदं सिन्दूरं भगवत्यै कौशिक्यै नमः । इदमक्षतं भगवत्यै कौशिक्यै नमः । एतानि पुष्पाणि भगवत्यै कौशिक्यै नमः । एतानि नानाविधनैवेद्यानि भगवत्यै कौशिक्यै नमः। इदमाचमनीयं भगवत्यै कौशिक्यै नमः । एष पुष्पाञ्जलिः भगवत्यै कौशिक्यै नमः ।

आदित्यादिनवग्रह - आदित्यादिनवग्रहाः इहागच्छत इह तिष्ठत। एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि ॐ आदित्यादिनवग्रहेभ्यो नमः । इदमनुलेपनं आदित्यादिनवग्रहेभ्यो नमः । इदं रक्तचन्दनम् आदित्यादिनवग्रहेभ्यो नमः । इदं कुङ्कुमं आदित्यादिनवग्रहेभ्यो नमः । इदमक्षतं आदित्यादिनवग्रहेभ्यो नमः । एतानि पुष्पाणि आदित्यादिनवग्रहेभ्यो नमः । एतानि नानाविधनैवेद्यानि आदित्यादिनवग्रहेभ्यो नमः । इदमाचमनीयं आदित्यादिनवग्रहेभ्यो नमः । एष पुष्पाजलि: आदित्यादिनवग्रहेभ्यो नमः ।

इन्द्रादिशदिक्पाल - इन्द्रादिदशदिक्पालाः इहागच्छत इह तिष्ठत । एतानि पाद्यार्घाचमनीय स्नानीयपुनराचमनीयानि ॐ इन्द्रादिदशदिक्पालेभ्यो नमः । इदमनुलेपनं ॐ इन्द्रादिदशदिक्पालेभ्यो नमः । इदं रक्तचन्दनम् ॐ इन्द्रादिदशदिक्पालेभ्यो नमः । इदं कुङ्कुमं ॐ इन्द्रादिदशदिक्पालेभ्यो नमः । इदमक्षतं ॐ इन्द्रादिदशदिक्पालेभ्यो नमः । एतानि पुष्पाणि ॐ इन्द्रादिदशदिक्पालेभ्यो नमः । एतानि नानाविधनैवेद्यानि ॐ इन्द्रादिदशदिक्पालेभ्यो नमः । इदमाचमनीयं ॐ इन्द्रादिदशदिक्पालेभ्यो नमः । एष पुष्पाञ्जलिः ॐ इन्द्रादिदशदिक्पालेभ्यो नमः ।

तखनि लक्ष्मीक ध्यान करी-
ॐ पाशाक्षमालिकाम्भोज शृणिभिर्याम्यसौम्ययोः  ।प्रसनास्थां ध्यायेच्च श्रियं त्रैलोक्यमातरम् । गौरवर्णा सुरूपाञ्च सर्वालङ्कारभूषिताम् । रौक्मपद्मव्यग्रकरां वरदां दक्षिणेन तु । 
ध्यान कए पाद्य आदि उपलब्ध वस्तुसँ ॐ लक्ष्मीदेव्यै नमः एहिसँ पूजा कए,

ॐ लक्ष्मीदेव्यै नमः ई दस बेरि जप करी ।
ॐ नमस्ते सर्वदेवानां वरदासि हरिप्रिये ।
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्त्वदर्चनात् । 
एहिसँ पुष्पाञ्जलि दए स्तोत्र आदि पाठ कए लक्ष्मीकें प्रणाम करी ।


-: सरस्वतीक पूजा :-

ध्यान - ॐ तरुणशकलमिन्दोर्बिभ्रती शुभकान्तिः ।
कुचभर - नमिताङ्गी सन्निषण्णा सिताब्जे ।
निजकर - कमलोद्यल्लेखनीपुस्तकश्रीः । सकलविभवसिद्धयै पातु वाग्देवता नः ।। 
ध्यान कए अपन माथ पर एकटा फूल राखि मनहिं मन सरस्वतीक पूजा करी । तकर बाद, ॐ ऐं भगवति सरस्वति स्वकीयगणसहिते इहागच्छ इहागच्छ, इह तिष्ठ, इह सन्निधेहि इह सन्निरुद्धा भव, अत्राधिष्ठानं कुरु, मम पूजां गृहाण स्थां स्थों स्थिरा भव ॥

एहिसँ आवाहन कए - 
जल - इदं पाद्यम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।

अर्घ्य - एषोर्घ्यः ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । ( अरघा में जल, चानन, अक्षत, दूबि, दूध, दही, कुशक अगिला भाग, पीरा सरिसब, तिल दए ) 
जल - इदमाचमनीयम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।

जल - इदं स्नानीयम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः

जल - इदं पुनराचमनीयम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । वस्त्र - इदं शुक्लवस्त्रं वृहस्पतिदैवतम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।

श्रीखण्ड चानन - इदमनुलेपनम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।

सिन्दूर - इदं सिन्दूरम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।

अबीर- इदम् अबीरकं ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । अक्षत इदमक्षतम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।
फूल - एतानि पुष्पाणि ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । 
आमक मज्जर - इदम् आम्रमञ्जरीकं ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।
माला - इदं माल्यम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । 
आभूषण - इदं भूषणम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।
सौन्दर्य-प्रसाधन - एतानि नानाविधसौन्दर्यप्रसाधनानि ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।
धूप - एष धूपः ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।

दीप - एष दीपः ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । 
नैवेद्य - एतानि नानाविधनैवेद्यानि ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । फल - एतानि नानाविधफलानि ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । पकमान- एतानि नानाविधपक्वान्नानि ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः । 
जल - इदमाचमनीयम् ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ।
फूल - ॐ पुष्पं मनोहरं दिव्य सुगन्धं देवनिर्मितम् । हृद्यमभुतमायं देवि! तत् प्रतिगृह्यताम् ॥ एष पुष्पाञ्जलिः ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः एहि प्रकारें षोडशोपचारसँ सरस्वतीक पूजा करी ।
तकर बाद पुस्तक पर ॐ पुस्तकाय नमः एहि मंत्रसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी ।

मोसिदानी पर ॐ मस्याधाराय नमः । एहि मंत्रसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी ।

कलम पर ॐ लेखन्यै नमः । एहि मंत्रसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी । 
चक्कू पर ॐ सर्वशस्त्रेभ्यो नमः । एहि मन्त्रसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी । 
ॐ अस्त्रेभ्यो नमः । एहि मंत्रसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी । आरती कए पुष्पाञ्जलि दी

ॐ यथा न देवो भगवान् ब्रह्मा लोकपितामहः । त्वां परित्यज्यं सन्तिष्ठेत्तथा भव वरप्रदा ।। वेदा: पुराणशास्त्राणि नृत्यगीतादिकं च यत् । न विहीनं त्वया देवि तथा मे सन्तु सिद्धयः ।। विशदकुसुमतुष्टा पुण्डरीकोपविष्टा धवलवसनवेशा मालतीबद्धकेशा । शशधरकरवर्णा सुभ्रताटङ्ककर्णा जयति जितसमस्ता, भारती वेणुहस्ता । 
पुष्पाञ्जलिक बाद प्रणाम करी 
ॐ सरस्वत्यै नमो नित्यं भद्रकाल्यै नमोनमः । वेदवेदान्तवेदाङ्गविद्यास्थानेभ्य एव च ( स्वाहा ) । । 
एहिसँ प्रणाम कए प्रार्थना करी । 
ॐ लक्ष्मीर्मेधा धरापुष्टिगौरी तुष्टिः प्रभा धृतिः । एताभिः पाहि तनुभिरष्टाभिर्मा सरस्वति ।। रूपं देहि यशो देहि भाग्यं भवगति ! देहि मे । धर्मान् देहि धनं देहि सर्वाविद्याः प्रदेहि मे ॥ सा मे वसतु जिह्वायां वीणां पुस्तकधारिणी । मुरारिवल्लभा देवि ! सर्वशुक्ला सरस्वती ।। भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः । वेदवेदान्त- वेदाङ्ग विद्यां देहि नमोस्तु ते ।। 
एहिसँ प्रार्थना कए प्रणाम करी ।

नाच-गान करैत दिन-राति बिताए, भोरे विसर्जन करी । तखनि कुश, तिल आ जल लए -
ॐ कृतैतत्साङ्गसपरिवार सरस्वती पूजनकर्म-प्रतिष्ठार्थमेतावद्दव्यमूल्यक - हिरण्यमग्निदैवतं यथानामगोत्राय ब्राह्मणाय दक्षिणामहं ददे । ब्राह्मणकें दय दी।

।। इति सरस्वतीपूजाविधिः॥

शनिवार, 3 जनवरी 2026

गोरकी पतरकी लऽ चलबौ दरिभंगा गे लिरिक्स - La Chalbo Darbhanga Ge Lyrics

तोरे लेल हम आंगी सीएलियो
हमहुँ सीएलौ अंगा गे
तोरे लेल हम आंगी सीएलियो
हमहुँ सीएलौ अंगा गे
हे गे सुनरकी, हाय हाय गोरकी, बाह रे पतरकी
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे

मधुबनी के आंगी पहिर ले, मधेपुरा के सारी
बेगुसराय साया पहिर ले, चोली बहेड़ा बाली
मधुबनी के आंगी पहिर ले, मधेपुरा के सारी
बेगुसराय साया पहिर ले, चोली बहेड़ा बाली
सीतामढ़ी के पायल पहिर ले -2
सहरसाक मनटिका गे
हे गे सुनरकी, हाय हाय गोरकी, बाह रे पतरकी
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे -2
तोरे लेल हम आंगी सीएलियो
हमहुँ सीएलौ अंगा गे
तोरे लेल हम आंगी सीएलियो
हमहुँ सीएलौ अंगा गे
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे 
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे 

पूर्णिया के पहुची पौंची पहिरे, चूड़ी भागलपुर के -2
चन्द्रहार गरदैन मे पहिरै जिला समस्तीपुर के 
पूर्णिया के पहुची पौंची पहिरे, चूड़ी भागलपुर के
चन्द्रहार गरदैन मे पहिरै जिला समस्तीपुर के 
बूटा खगड़िया बाला, झुमका दुमका बाला गे
हे गे सुनरकी, हाय हाय गोरकी, बाह रे पतरकी
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे 
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे 

कटिहारक कटि डरकस पहिरै, दलसिंहसराय के बिंदिया 
सुंदर रूप निहारब कनि हे, भागत हमरो निंदिया
कटिहारक कटि डरकस पहिरै, दलसिंहसराय के बिंदिया 
सुंदर रूप निहारब कनि हे, भागत हमरो निंदिया
जी भैर कऽ देखब तोरा हम -2
मोन हैत बड़ चंगा गे
हे गे सुनरकी, हाय हाय गोरकी, बाह रे पतरकी
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे 
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे 
तोरे लेल हम आंगी सीएलियो
हमहुँ सीएलौ अंगा गे
तोरे लेल हम आंगी सीएलियो
हमहुँ सीएलौ अंगा गे
हे गे सुनरकी, हाय हाय गोरकी, बाह रे पतरकी
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे
हे गे सुनरकी गोरकी पतरकी
लऽ चलबौ दरिभंगा गे

गायक, गीत : चन्द्रमणि झा

लोहा में सटी गेल सोना हम बाजब कोना लिरिक्स - Loha Mein Satti Gel Sona Hum Bajab Kona Lyrics

मैथिली शिव नचारी गीत

लोहा में सटी गेल सोना हम बाजब कोना
सखीहे हम बाजब कोना, दैय्या हम बाजब कोना
लोहा में सटी गेल सोना हम बाजब कोना...

बूढ़ बरद पर अपने, झोरा डामर सं झपने
बुढ़बा जानय यै किछु टोना
हम बाजब कोना...

भंगिया भकूआएल जेना, संगही में भूतक सेना
गौरी के लिखल छल किछु होना
हम बाजब कोना...

मन छल चित छल, करितौं पण्डित बर
कहथिन विद्यापति लिखल बिधना
हम बाजब कोना...

सोमवार, 29 दिसंबर 2025

ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह लीरिक्स - Baram Baba Hamro Karada Biyah Lyrics

खीर खाय लै थारी दे बऽ
दूध खाय लै पारि दे बऽ
खीर खाय लै थारी दे बऽ
दूध खाय लै पारि दे बऽ
हो दे बऽ, हो दे बऽ,
हौ दे बऽ गरमा गरम नित चाह
हौ ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह
ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह..
खीर खाय लै थारी दे बऽ
दूध खाय लै पारि दे बऽ
हो ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह -2

गोरकी जे भेटअ तऽ बात बुझह बनलै -2
करकी जे भेटअ तऽ चिन्ता नै करि'ह
टाका चोरौक सं पाउडर आ अलता
कीन लेबै बाबा फिकिर जूनि करि'ह
बांकी जोगार सब तोरे पर रह'तऽ -2
बाबू हमर मरखाह,
हौ ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह
ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह

नमकी जे भेटअ तऽ बात बुझह बनलै -2
छोटकी जे भेटअ तऽ चिन्ता नै करि'ह
गुदरी बजार सं आन कऽ रखने छी
एड़ी बला जूती फिकिर जूनि करि'ह
बीत रहल उत्पाती गदहा पचीसी -2
हमरा पर क'रऽ परवाह 
हौ ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह
ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह

पूरब जे भेटअ तऽ बात बुझह बनलै -2
पच्छिम जे भेटअ तऽ चिन्ता नै करि'ह
लाठी कऽ हाथे हम सारी पहिरेबै
गरबर डरेस लऽ फिकिर जूनि करि'ह
अय बेर लगन मे ने लॉटरी लगे बऽ -2
तोरे सं कर बऽ बियाह
हौ ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह
ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह
खीर खाय लै थारी दे बऽ
दूध खाय लै पारि दे बऽ
हो ब्रह्म बाबा हमरो करा दऽ बियाह -2

स्वर: Hemkant Jha, गीत: चंद्रमणि झा

अम्बे आयल छी बड़ी दूर से लऽ फूलकऽ डाली लिरिक्स - Aayal Chhi Badi Dur Sa लीरिक्स

आयल छी बड़ी दूर सं लऽ फूल कऽ डाली
करूणामयी करुणा करू अम्बे महा काली
आयल छी बड़ी दूर सं लऽ फूल कऽ डाली
करूणामयी करुणा करू अम्बे महा काली
आयल छी बड़ी दूर सं

माते गोसाउनि छी अहाँ आराधना सुनियो
पूजा करि हम पूर्ण मनोकामना करियो
माते गोसाउनि छी अहाँ आराधना सुनियो
पूजा करि हम पूर्ण मनोकामना करियो
अंतरयामी छी अम्बे की अर्जी सुनाबि
करूणामयी करुणा करू अम्बे महा काली
आयल छी बड़ी दूर सं

भैरवी भयहारनी उधार करू माँ
कण्ठ परहक कंस के संघार करू माँ
भैरवी भयहारनी उधार करू माँ
कण्ठ परहक कंस के संघार करू माँ
विणाक संग वाणी दिअ रागनी गाबि
करूणामयी करुणा करू अम्बे महा काली
आयल छी बड़ी दूर सं

नारायण के घर लक्ष्मी दिनों के घर अबियो
निर्धन के घरे रुखल सुखल भाव सं पबियो
नारायण के घर लक्ष्मी दिनों के घर अबियो
निर्धन के घरे रुखल सुखल भाव सं पबियो
चंद्रमणि मेवा मधुर आब कोन विध लाबि
करूणामयी करुणा करू अम्बे महा काली
आयल छी बड़ी दूर सं...।

गीत: चंद्रमणि झा

फेरु नयन से अम्बे अपन पुत्र जानी क लिरिक्स - Pheru Nayan Se Ambe Lyrics

फेरु नयन से अम्ब अपन पुत्र जानी कऽ
ककरा कहु दुखरा सघन कानी कानी कऽ
फेरु नयन से अम्ब...

जगतारणी दुख हारनी हे माई छी अहाँ -2
माताक चरण छोड़ सरण जाइ हम कहां 
आँचर के छाह दान दि नीह मान कऽ
ककरा कहु दुखरा सघन कानी कानी कऽ
फेरु नयन से अम्ब... 

माया महान ध्यान सं सबहक सुनैत छी -2
गलती लेल माई हम माफी मंगौत छी
दारुन कथा अति दीन के सुनियो अकान कऽ
ककरा कहु दुखरा सघन कानी कानी कऽ
फेरु नयन से अम्ब... 

जिंदगी के सऽख बिंदु पर घिरनी बना देलौं -2
दर्शन लै हमर आँखि कै हिरनी बना देलौं
आशीष धुनि लऽ चंद्रमणि बैसल यै ठानी कऽ
ककरा कहु दुखरा सघन कानी कानी कऽ
फेरु नयन से अम्ब... 

स्वर, गीत: चंद्रमणि झा

सिद्धपीठ उच्चैठक देवी लिरिक्स - Sidhpeeth Uchaith Devi Lyrics

सिद्धपीठ उच्चैठक देवी
दुख सं माई उबरू हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी
दुख सं माई उबरू हे
हारल थाकल शरण मे एलौ -2
मईया अहाँ समहारू हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी
दुख सं माई उबरू हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी...

बेनीपट्टी धन्य भेल अछि
माँ के अजगुत माता हे
निर्धन के घर अन-धन दै छथि
आ कोढ़िया के काया हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी
दुख सं माई उबरू हे
हारल थाकल शरण मे एलौ
मईया अहाँ समहारू हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी...

दोसर पूजब माँ जगतार
बनगांव महिषी जाय हे
फल पायब मईया के चरण मे
माथा अपन झुकाय हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी
दुख सं माई उबरू हे
हारल थाकल शरण मे एलौ
मईया अहाँ समहारू हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी..

तेसर पूजब दुर्गा मईया
डीह नवादा वासिनि हे
मनोकामना पूर्ण करै छथि
जगदम्बा दुख हारनी हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी
दुख सं माई उबरू हे
हारल थाकल शरण मे एलौ
मईया अहाँ समहारू हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी..

चारिम पूजब बाबा कुशेश्वर
मिथिला के वैद्यनाथ हे
हार गंगाजल चढा चंद्रमणि 
सब मिली होउ सनाथ हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी
दुख सं माई उबरू हे
हारल थाकल शरण मे एलौ
मईया अहाँ समहारू हे
सिद्धपीठ उच्चैठक देवी...

स्वर, गीत: चंद्रमणि झा

रविवार, 28 दिसंबर 2025

क्षमा करू जगदम्बे मैया लिरिक्स - Kshama Karo Jagdambe Maiya Lyrics

क्षमा करू जगदम्बे मईया
केने बड़ अपराध छी
निर्बल सन्तानक रक्षक हे
माई अहाँ निर्बाध छी

भजन भाव कहियो नै केलौ
फस क अहि जनजाल मे
जीवन भर ओझरैले रहलौं
व्यर्थक माया जाल मे
दयामयी दि सरण अपन अछि 
दु पल के ई राज की
निर्बल सन्तानक रक्षक हे
माई अहाँ निर्बाध छी
क्षमा करू जगदम्बे मईया

विपदिक मारल कण्ठ न खूजै
अहाँ बिना हम जाऊ कतै
अहिं कहु हे माई अहाँ बिनु
दोसर अछि के माई एतए
गाबि सकै ने गीत अहाँ के
से कण्ठक सुर साज की
निर्बल सन्तानक रक्षक हे
माई अहाँ निर्बाध छी
क्षमा करू जगदम्बे मईया

काम क्रोध मद मोह लोभ सं
जर जर अछि पापी काया
मुदा अहिं छी असुर भयावनी
भक्त उबारिणी जग माया
विपदही मे जीवन जौं बितै
तैं जीवन के काज की 
निर्बल सन्तानक रक्षक हे
माई अहाँ निर्बाध छी
क्षमा करू जगदम्बे मईया

महीखा मर्दनी विघ्न विनाशिनी
शिवा भवानी तारा छी
सरणागत हम चरण चंद्रमणि 
मईया अहिं सहारा छी
तारू नहीं हे माई सरन सं
राखु हमरो लाज इ
निर्बल सन्तानक रक्षक हे
माई अहाँ निर्बाध छी
क्षमा करू जगदम्बे मईया

गीतकार: चंद्रमणि झा