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8 जुल॰ 2026
Maithili
Lokgeet
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
नैना जोगिन विध कनिको नै जांनय
नैना जोगिन विध बुझय नै जांनय
बुझय ने विध वयवहार
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
बाम में कनियाँ दहिन छथि साइर
बाम में कनियाँ दहिन छथि साइर
कहथिन के हिनका बुझाय
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
सखि सब मिलि जुलि पढ़य छथि गारी
सखि सब मिलि जुलि पढ़य छथि गारी
करै छथि माई के उद्धार
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
चलू देखन हे दाई राजा जनक के जमाई
17 फ़र॰ 2026
Maithili Lokgeet
lali meri chhoti si lyrics
सखी हे चलियो मिथिला देश
चान तरेगन चमकन लागे
नर नारी मुनि गावन लागे
चान तरेगन चमकन लागे
नर नारी मुनि गावन लागे
देखी सिया राम, राम सिया के
हैत जयमाल जनकसुता के
ठार सिया निहारे नैना
झुकी जैइयो तनिक रघुवीर
लली मोरी छोटी सी
झुकी जैइयो तनिक रघुवीर
लली मोरी छोटी सी
लली मोरी छोटी सी, छोटी सी रे
सिया मोरी छोटी सी, छोटी सी रे
जूनि करियौ, हो जूनि करियौ
अहाँ किछु धीर
लली मोरी छोटी सी
झुकी जैइयो तनिक रघुवीर
लली मोरी छोटी सी
झुकी जैइयो तनिक रघुवीर
लली मोरी छोटी सी
वीरो के वीर मोरे राम रघुवीर
झुकी कोना जेता अवध के सीर
हे यौ, अहाँ सन वीर बर-बर बलवीर
जनक दुअरिया लागल ऐछ भीर
नरम कलैया भार पड़ेना
नरम कलैया,
नरम कलैया भार पड़ेना
नरम कलैया,
मोरी लाली कोनो पीड़ सहे ना
काहे बनोगे वीर,
लली मोरी छोटी सी
झुकी जैइयो तनिक रघुवीर
लली मोरी छोटी सी
झुकी जैइयो तनिक रघुवीर
लली मोरी छोटी सी
वीरो के वीर मोरे राम रघुवीर
झुकीको ना जेता अवध के सीर
हे यौ, अहाँ सन वीर बर बर बलवीर
जनक दुअरिया लागल ऐछ भीर
बेरी बेरी विनती करत हैं
बेरी बेरी,
बेरी बेरी विनती करत हैं
पैइया परु तोहे काहे ना सुनत हैं
कहन मानु पाहुन रघुवीर
लली मोरी छोटी सी
झुकी जैइयो तनिक रघुवीर
लली मोरी छोटी सी
झुकी जैइयो तनिक रघुवीर
लली मोरी छोटी सी...।
गायक: जय झा, शिवानी भगत, देव अहिरराव
लिरिक्स: लव कर्ण, हुक लाइन: पारम्परिक
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14 फ़र॰ 2026
Maithili Lokgeet
Mangal Geet Lyrics
आज जनकपुर मंगल, चारु दिस मंगल हे
आज जनकपुर मंगल, चारु दिस मंगल हे
जानकी के होइत बियाह -2
जनकपुर मंगल हे
आज जनकपुर मंगल, चारु दिस मंगल हे
हरियर बांस कटायब की मड़वा गढ़ाएब हे
मोतियन झाल लगायब की चुनड़ी रँगायब हे
जगमग दीप जरायब की विदेह राज मंगल हे
गगन कुसुम बरसायत की तिहु लोक मंगल हे
अड़हुल माल बनायब, पाहुन पहिरायेब हे
आज जनकपुर मंगल, चारु दिस मंगल हे
जानकी के करियो सिंगार -2
जनकपुर मंगल हे
आयल बर रघुनंदन जानकी बियाहल हे
आयल बर रघुनंदन जानकी बियाहल हे
गायक: शिवानी भगत, देव अहिरराव
लिरिक्स: लव कर्ण, हुक लाइन: पारम्परिक
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13 फ़र॰ 2026
Maithili Lokgeet
दूल्हा किया रूसल छी अहाँ ससुरारी में
खीर परोसल थारी मे ना
दूल्हा किया रूसल छी अहाँ ससुरारी में
खीर परोसल थारी मे ना
मांगू अहाँ की लेब
अहाँ जे मांगब से हम देब
मांगू ओझा अहाँ की लेब
अहाँ जे मांगब से हम देब
अहाँके कीन देब फटफटीया हम घीढारी में
खीर परोसल थारी मे ना...
सुंदर कनियाँ भेटल आय
दहिना बैसल छथि साइर
सुंदर कनियाँ भेटल आय
दहिना बैसल छथि साइर
जूनि होउ उदास अहाँ ससुरारी में
खीर परोसल थारी मे ना...
अहाँ धीरे धीरे खीर खाउ
लाज सं मुड़ी नै झुकाउ
अहाँ धीरे धीरे खीर खाउ
लाज सं मुड़ी नै झुकाउ
हम की देब अहाँ के गरीब ससुरारी मे
खीर परोसल थारी मे ना...
गायक: अंजू
29 दिस॰ 2025
Chandramani Jha
फेरु नयन से अम्ब अपन पुत्र जानी कऽ
ककरा कहु दुखरा सघन कानी कानी कऽ
फेरु नयन से अम्ब...
जगतारणी दुख हारनी हे माई छी अहाँ -2
माताक चरण छोड़ सरण जाइ हम कहां
आँचर के छाह दान दि नीह मान कऽ
ककरा कहु दुखरा सघन कानी कानी कऽ
फेरु नयन से अम्ब...
माया महान ध्यान सं सबहक सुनैत छी -2
गलती लेल माई हम माफी मंगौत छी
दारुन कथा अति दीन के सुनियो अकान कऽ
ककरा कहु दुखरा सघन कानी कानी कऽ
फेरु नयन से अम्ब...
जिंदगी के सऽख बिंदु पर घिरनी बना देलौं -2
दर्शन लै हमर आँखि कै हिरनी बना देलौं
आशीष धुनि लऽ चंद्रमणि बैसल यै ठानी कऽ
ककरा कहु दुखरा सघन कानी कानी कऽ
फेरु नयन से अम्ब...
स्वर, गीत: चंद्रमणि झा
28 दिस॰ 2025
Chandramani Jha
दुल्हा कतहुँ ने पायब एहन कनियाँ
एहन कनियाँ, यौ एहन कनियाँ
दुल्हा कतहुँ ने पायब एहन कनियाँ
कमल मुखी अति कोमल किसलय
रचलनी विधना बड़ारे जतन कए
गोर भुभुक मन-मोहनियाँ
दुल्हा कतहुँ ने पायब एहन कनियाँ
चान बदन दुनु नयन तरेगन
दांत अधर बीच फुटल खुशम सन
कोकिल कण्ठ कतेक गुणयाँ
दुल्हा कतहुँ ने पायब एहन कनियाँ
तन्नूक ततेक जतेक लजकोटर
बाजब मधुर चलब बड़ सुंदर
छुन छुन पायरक पैजनिया
दुल्हा कतहुँ ने पायब एहन कनियाँ
सैंतल सिया सन दिया रे मनोहर
दान कएल हम अपन धरोहर
मान बढ़ाओत लक्ष्मीनिया
दुल्हा कतहुँ ने पायब एहन कनियाँ
गायक - सवर्ण लता झा
गीतकार - चंद्रमणि झा
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26 दिस॰ 2025
Maithili Lokgeet
चाँद सन कनियाँ पुतोहु दुलहिनिया
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ
चाँद सन कनियाँ पुतहु दुलहिनिया
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ
हे सुनय जाऊ,
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ
पहिने जे देखली अपन सासु
पहिने जे देखली अपन सासु
कनियाँ के देख कऽ निहाल
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ
हे सुनय जाऊ,
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ...
तखन देखथु गोतनो सहोदर
तखन देखथु गोतनो सहोदर
मणिक सौसें लुटाय
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ
हे सुनय जाऊ,
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ...
तखन देखथु नन्दो सुनारिया
तखन देखथु नन्दो सुनारिया
बढ़िया सं नैना टिकाऊ
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ
हे सुनय जाऊ,
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ...
तखन देखथू पास पड़ोसिन
तखन देखथू पास पड़ोसिन
शुभ घड़ी परीछ कर लाऊ
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ...
हे सुनय जाऊ,
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ...
हे सुनय जाऊ,
शुभ खड़ी मुहमा देखाऊ...
स्वर: सवर्ण लता झा
गीतकार: सवर्ण लता झा, चन्दमणि झा
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Maithili Lokgeet
भैया भौजी सं करियो विचार
रुपया हम नैहिए लेबै
कागजक रुपया तऽ उठि पुठि जेतै
कंगना तऽ रहतै निसान
रुपया हम नैहिए लेबै
भैया भौजी सं करियो विचार
रुपया हम नैहिए लेबै
नहीं लेब रुपया बहिन साड़ी तऽ लिअ -2
भईया के राखु अहाँ मान
साड़ी अहाँ लए लिअ
इ साड़ी अहाँ लए लिअ -3
सूतक साड़ी भैया फाटि ताटि जेतै
हार मोरा रहतै निसान
इ साड़ी हम नहिए लेबै-3
नीक घर बर देख ब्याह करायब -2
जिनगी भैर लैत रहब नाम
बहिन अहाँ राखुनि मान -3
एहन ओहन घर भैया हम नै बियाह करब
डॉक्टर इंजीनियर गुलाम
तऽ कहु भैया किछ नै लेबै -2
भैया भौजी सं करियो विचार
रुपया हम नैहिए लेबै
भैया भौजी सं करियो विचार
रुपया हम नैहिए लेबै
स्वर: स्वर्ण लता झा, हरि नाथ झा
गीतकार: सवर्ण लता झा, चन्दमणि झा
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Maithili Lokgeet
सखी बहिनपा किछ नही कहिअऊ,
समैध डुप्लीकेट हे
बाप सनक मुंह बर के नहीं छनि,
बिल्कुल फेटम फेट हे
भाटा भटवर संग खुअबियौन,
खूब चहटगर तरुआ हे
गोर लागै छी भेद ने खोलियौ
समैध हमर भरुआ हे
बेच कऽ बेटा पेट भरै मे,
कनियो ने लजाय हे
बिना दांत के माछक मूड़ा,
टुप टुप गिरने जाय हे
गदर फादर सन धोती छैन आ,
कुर्ता छैन ढक ढोल हे
इ सब अनकर मांगी पहिरला,
बड़का बड़का बोल हे
समधिन हमर फूल कुमारी,
बूढ़ा सं की आस हे
समैध जाउथ बंगोरा कोठी,
समधिन के खबास हे
शुभ शुभके सब धिया बियाहू,
आंगन करू जमाए हे
आगु जँ बुढ़बो बिढ़नी हेता
आर देबैन उसकाय हे
गीतकार : सवर्ण लता झा
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Maithili Lokgeet
गाइर ने हम दैछी दूल्हा,
दऽ रहलो आशीष यौ
सासुर मे जूनि छाती तनियो -2
राहु लबोने शीश यौ
गाइर ने हम दैछी दूल्हा
गर्दन में तौनी लगबै छी
गरदानि नै अनलौ
नाक धरै छी नाथब तैलै
हाठक बाछा बनलौ
अहाँ के जनमौलन तै लै
बाबू लेलैन फीस यौ
गाइर ने हम दैछी दूल्हा,
दऽ रहलो आशीष यौ
मौसा हरकल मौसी गुरकल
पीसा अहाँ के भरुआ
दूल्हा अहाँ मुदा जूनि रूसियौ
सासु के दुलरुआ
बहिन लै हम घघरी मंगा देब
बाबू लै कट पीस यौ
गाइर ने हम दैछी दूल्हा,
दऽ रहलो आशीष यौ
खेत बेच कऽ साइकिल देलैन
महिष बेच कऽ रेडियो
काका के फेर दोसर बेटी
जेतैन बियाहल कहियो
बरु हम पहिरब गुदरी दूल्हा
जीबु लाख बरीस यौ
सासुर मे जूनि छाती तनियो -2
राहु लबोने शीश यौ
गाइर ने हम दैछी दूल्हा
गीतकार: चन्द्रमनी झा और सवर्ण लता झा
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20 दिस॰ 2025
Maithili Lokgeet
पारम्परिक मैथिली टेमी गीत
प्रिय रघुवर नयना कसि कऽ धरू
प्रिय रघुवर नयना कसि कऽ धरू
थर थर गात कापनि सियाकेर,
थर थर गात कापनि सियाकेर,
आरत पात लय आँखि मुनू
प्रिय रघुवर नयना कसि कऽ धरू
एहि अवसर नहि लाज करक थिक,
एहि अवसर नहि लाज करक थिक,
एखन नहि हठ मान करू
प्रिय रघुवर नयना कसि कऽ धरू
शुभ शुभ टेमी पड़नि सिया के,
शुभ शुभ टेमी पड़नि सिया के,
श्रीखंड चानन घसिकऽ धरू
प्रिय रघुवर नयना कसि कऽ धरू
Maithili Lokgeet
परिछन गीत
आबु आबू आबू दुल्हा अंगना हमार हे
आबु आबू आबू दुल्हा अंगना हमार हे
अंगना में होयत दुल्हा विधि सब तोहार हे
अंगना में होयत दुल्हा विधि सब तोहार हेJ
एना कियै चलइ छी दुल्हा सासु जी के घर हे
एना कियै चलइ छी दुल्हा सासु जी के घर हे
सासु सब हँसि देती चालि देखि तोहार हे
सासु सब हँसि देती चालि देखि तोहार हे
अंगना में होयत दुल्हा विधि सब तोहार हे
नहु नहु चलु दुल्हा छोडू डेग नम्हर हे
नहु नहु चलु दुल्हा छोडू डेग नम्हर हे
सरहज दुलारी लेती नाक पकड़ि हे
सरहज दुलारी लेती नाक पकड़ि हे
अंगना में होयत दुल्हा विधि सब तोहार हे
सरहज दुलारी लेती नाक पकड़ि हे
सरहज दुलारी लेती नाक पकड़ि हे
रीझल कनक लता दुल्हा ऊपर हे
रीझल कनक लता दुल्हा ऊपर हे
अंगना में होयत दुल्हा विधि सब तोहार हे
19 दिस॰ 2025
Maithili Lokgeet
राम जी जहन शिव धनुष तोरलखिन ताहि अवसर के भजन
तुम उठो सिया सिंगार करो, शिव धनुष राम ने तोड़ा है,
शिव धनुष राम ने तोड़ा है, सीता से नाता जोड़ा है,
तुम उठो सिया सिंगार करो, शिव धनुष राम ने तोड़ा है...,
शीश सिया के चुनड सोहे, टिके की छवि न्यारी है,
न्यारी न्यारी क्या कहिये ,रघुवर को जानकी प्यारी है
तुम उठो सिया सिंगार करो, शिव धनुष राम ने तोड़ा है...,
हाथ सिया के चूड़ी सोहे, कंगन की छवि न्यारी है,
न्यारी न्यारी क्या कहिये, रघुवर को जानकी प्यारी है,
तुम उठो सिया सिंगार करो, शिव धनुष राम ने तोड़ा है...,
कमर सिया के तगड़ी सोहे, झुमके की छवि न्यारी है,
न्यारी न्यारी क्या कहिये ,रघुवर को जानकी प्यारी है,
तुम उठो सिया सिंगार करो, शिव धनुष राम ने तोड़ा है..,
पैर सिया के पायल सोहे, बिछिया की छवि न्यारी है,
न्यारी न्यारी क्या कहिये ,रघुवर को जानकी प्यारी है,
तुम उठो सिया सिंगार करो ,शिव धनुष राम ने तोड़ा है..।
18 दिस॰ 2025
Maithili Lokgeet
पहुना हमर चितचोर निरमोहिया,
पहुना हमर चितचोर
पहुना हमर चितचोर
निरमोहिया, पहुना हमर चितचोर
मुस्की मुस्की सखी जकरा निहारे
भरी भरी अंखियां के कोर
ताकी ताकी तीर मारे तिरछी नजरिया
चंदा देखी जहिना चकोर, निरमोहिया,
पहुना हमर चितचोर
मुख से ना बोले सखी, देहिया ना डोले
अंखियां से झहरत नोर
गसिमती हरि लेले मन्द मुसकनमा
पहुना के छतिया कठोर, निरमोहिया
पहुना हमर चितचोर निरमोहिया
पहुना हमर चितचोर निरमोहिया
पहुना हमर चितचोर
12 दिस॰ 2025
Maithili Lokgeet
घीढारि
सोहाग मथझप्पी
नहछू गीत
मधुपर्क गीत
घनबट्टी
कमला पूजन
मटकोर
जयमाला
मण्डप परिक्रमा
कन्यादान
परछावन
गाली गीत
खीर स गर्भ रहल जननी के अपने अहां जनै छी,श्रृंगीक बदला दशरथ के कोना क बाप कहे छी।हमरा बजैतो लाज लगैये यौ दुलरूआ कोना बाजु
ओठंगर
बिलोकु (छवि दर्शन)
कमर खोलाई एवं नव वस्त्र धारण
श्रीराम की शोभा
नूतन वसन
कन्या निरीक्षण
Maithili Lokgeet
नूतन वसन गीत
नूतन वसन पिताम्बर, कटि कस पावन हे।
पीत जनेऊ सुमंगल परम सुहावन हे।।
अलिगन कहि मृदु वचन करथि परतारन हे।
जकिकरू लाल मनावन उठिकरू धारन हे।।
विहँसि कहल एक नारी ललन करू लाजन हे।
छाडू कुलक निज रीति तखन करू चायन हे।।
लखि पुरहित असमंजस देल अनुशासन हे।
उठि उठि पहिरल वस्त्र हरष हिय लालन हे।।
स्नेहलता हँसि कहथिन कयल विचारन हे।
अहाँ मानल विप्रक बात अवश किछु कारण हे।।
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7 दिस॰ 2025
Maithili Lokgeet
स्वर्ण सिनूर दूल्हा धीरे सऽ उठाउ हे
दशरथ जी के बबुआ
धीरे धीरे लली के लगाउ हे
दशरथ जी के बबुआ
लाज ने करू दुलहा हृदय के सम्हारू
हे दशरथ जी के बबुआ
जल्दी सँ करू सिन्दूरदान हे
दशरथ जी के बबुआ
कँपैत कर के करू स्थिर हे
दशरथ जी के बबुआ
लली के हृदय लगाउ हे
दशरथ जी के बबुआ
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Maithili Lokgeet
कओने नगर के सिनुरा,
सिनूरा बेसाहि एलौं यौ
बाबा कओने नगर जुआ खेलि एलौं,
हमरो के हरि एलौं यौ
हाट बजार के सिन्दुरबा,
सिन्दुर बेसाहि एलौं गे बेटी
अवधनगर जुआ खेलि एलौं,
सीता बेटी हारि गेलौं हे
देसहिं देश हम पत्र देलौं,
सब व्यर्थ केलौं हे
बेटी अपने सऽ आयल दुइ बालक,
धनुषा के तोड़ि देलनि हे
हमर प्रतिज्ञा कठिन भारी,
सेहो आब पूरि गेल हे
बेटी पूरि गेल हमरो मनोरथ,
जुगलत जमाइ भेला हे
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Maithili Lokgeet
प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
एहि अवसर नहि लाज उचित थिक,
एहन ने किछु हठ मान करू,
प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
लियऽ सिन्दूर कर कमल मुदित चित सँ,
हमर कथा किछु कान धरू,
प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू,
लग्न मुहुर्त सुमंगल एखन
आब ने विलम्ब महान करू
प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
मधुर स्वर छेडू तान सखि हे
सभ मंगल गान करू
प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
दामोदर विधि आजु मुदित चित
वर कन्याक कल्याण करू
प्रिय पाहुन सिन्दूर दान करू
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Maithili Lokgeet
पाहुन सिन्दूर लियऽ हाथ
सोन सुपारी के साथ
सीता उधारि लियऽ माथ
सिन्दूर लेबऽ लए
बीति रहल अछि लग्न
अहाँ धनुष कयलौं भंग
सब छथि आनन्दमग्न
आशीष देबऽ लए
रघुवर शिर शोभनि मौर
सीता सब दिन पुजथि गौर
आजु पूजल हमर और नृपति होबऽ लए
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