Mangal Geet Lyrics
आज जनकपुर मंगल, चारु दिस मंगल हे
आज जनकपुर मंगल, चारु दिस मंगल हे
जानकी के होइत बियाह -2
जनकपुर मंगल हे
आज जनकपुर मंगल, चारु दिस मंगल हे
हरियर बांस कटायब की मड़वा गढ़ाएब हे
मोतियन झाल लगायब की चुनड़ी रँगायब हे
जगमग दीप जरायब की विदेह राज मंगल हे
गगन कुसुम बरसायत की तिहु लोक मंगल हे
अड़हुल माल बनायब, पाहुन पहिरायेब हे
आज जनकपुर मंगल, चारु दिस मंगल हे
जानकी के करियो सिंगार -2
जनकपुर मंगल हे
आयल बर रघुनंदन जानकी बियाहल हे
आयल बर रघुनंदन जानकी बियाहल हे
गायक: शिवानी भगत, देव अहिरराव
लिरिक्स: लव कर्ण, हुक लाइन: पारम्परिक
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