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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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22 अक्टू॰ 2020

राम रस बूँदिया झहरि बरसे, भींजे सब प्रेमीगनवाँ लिरिक्स - Ram Ras Bundiya Zhari Barse Lyrics

राम रस बूँदिया झहरि बरसे, भींजे सब प्रेमीगनवाँ।
संत सुजान एहि बूँदन भींजे।
कूर-कुटिल मन-मन तरसे, भींजे सब.॥1॥

प्रेम घन-घटा हृदय नभ उमड़े,
नाचि नाचि मन-मोर हरसे, भींजे सब.॥2॥

एहि रस बूँदन नेकहू भींजत।
सब विषयन-रस लागे जहर-सें, भींजे सब.॥3॥

ज्ञान विराग जोग जप तप सब।
तुलत न प्रेम रस एक लहर से, भींजे सब.॥4॥

नाम-नेह-चिकनाई भरल मन।
नाहीं ‘करील’ माया-जल परसे, भींजे सब.॥5॥


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