...

मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

🌺🌸
✨ मधुश्रावणी
मधुश्रावणी व्रत कथा संग्रह पूजा बिधि विधान सहित
📅 अगस्त 2026
और पढ़ें »
📢
​🎉 अहाँक लेल आबि गेल अछि 'संगी'! मिथिला धरोहरक नव स्मार्ट असिस्टेंट 'संगी' सँ भेंट करू। आब पंचांग, पावनि-तिहार, विवाह गीत वा गोनू झाक कथा खोजब भेल आओर सुगम। नीचाँ देल (दांया कात) चैट बटन पर क्लिक करू आ 'संगी' सँ तुरन्त गप्प करू!

10 दिस॰ 2025

बाँके बिहारी झा 'करील' जी की संक्षिप्त जीवनी - Banke Bihari Jha Kareel Jivan Parichay

Banke Bihari Jha Kareel Biography in Hindi

बाँके बिहारी झा उर्फ 'करील' जी बिहार के भागलपुर के भ्रमरपुर गाँव में जनवरी 1936 में पैदा हुए। बचपन से ही वे बहुत शांत, सरल और पढ़ने-लिखने वाले थे। उनका स्वभाव पूरी तरह सात्विक और भक्ति से भरा था।

बचपन और भक्ति
उनकी माँ बाल-गोपाल (कृष्ण) की बड़ी भक्त थीं। माना जाता था कि उनकी कृपा से ही करील जी का जन्म हुआ। वे बचपन से ही भजन, कविता और लेख लिखने लगे। 8वीं कक्षा से ही उनकी रचनाएँ लोगों के बीच प्रसिद्ध होने लगीं।

साहित्य और शिक्षा
उन्होंने हिंदी और संस्कृत दोनों विषयों में एम.ए. किया और Gold Medal भी मिला। इसके बाद वे बक्सर के M.V. College में प्रोफेसर बन गए।

वे कई भाषाओं - मैथिली, हिंदी, संस्कृत, अवधी, बंगला, बृज, अंगिका - में भजन और काव्य लिखते थे। उनकी प्रसिद्ध किताब “करील कादम्बिनी” (1970), अभिसारिका - आत्मा से अनंत तक”, हितोपदेश” आज भी लोगों द्वारा पढ़ी और गाई जाती है।

आध्यात्मिकता
कभी एक बार स्वप्नादेश के द्वारा एक समारोह में उन्हें राम की भूमिका निभाने को चुना गया। उनकी मृदुलता और शांति देखकर लोग उन्हें प्यार से “राम जी” कहने लगे।

उनके भजन इतने प्रभावशाली थे कि मंच पर गाते ही पूरा माहौल बदल जाता था। एक बार आंधी-तूफान में उन्होंने अंधेरे में “अंधियरवा में राम मोरा पूनम के चंदा” गाना शुरू किया, और पूरा पंडाल शांत हो गया।

परिवार और स्वभाव
वे स्वभाव से बहुत संकोची, सरल और सन्यासी प्रवृत्ति के थे। विवाह में रुचि नहीं थी, पर माता की इच्छा से उन्होंने कौशल्या देवी से विवाह किया, जो अत्यंत सहनशील और धर्मपरायण थीं।

उनका जीवन कई दुखों से भी भरा था। उनके बड़े बेटे का निधन हुआ, लेकिन उन्होंने कहा “जो भगवान का था, वो उनके पास चला गया।” और वे नाम-संकीर्तन में लग गए।

सम्मान
महादेवी वर्मा, डॉ. राधाकृष्णन जैसे बड़े साहित्यकार उनसे पत्राचार करते थे। उनकी लिखी रचनाएँ आज भी कई जगह भाव से गाई जाती हैं, जैसे :-

तेरी मर्जी का मैं हूँ गुलाम

अंतिम समय
माता के देहांत के बाद उन्हें ब्लड कैंसर हुआ। बीमारी बढ़ती गई, पर वे हमेशा भगवान के नाम में लगे रहे। 25 दिसंबर 1976 में, सिर्फ 40 साल की उम्र में, वे गोलोक धाम चले गए।

“करील” नाम क्यों?
वे कहा करते थे - “मैं वृंदावन की करील झाड़ी जैसा बनना चाहता हूँ, जो श्री बिहारी जी के चरणों में चुभने वाले काँटों को रोक ले।”

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !

🎵 मैथिली लिरिक्स और देखें »
🪔 पावनि-तिहार और देखें »
Ask संगी
संगी मिथिला धरोहर सहायक
चैट हिस्ट्री

अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।

हमारे बारे में
🏛️ हमरा बारे में
मिथिला धरोहर — मैथिली भाषा, संस्कृति, लोकगीत, पंचांग, भजन और साहित्य केँ समर्पित एकटा डिजिटल मंच अछि। हमर लक्ष्य अछि मिथिला केँ पुरान परंपरा आ ज्ञान केँ आधुनिक पीढ़ी तक पहुँचाएब। चैटबॉट संगी अहाँक हर सवालक जवाब देबाक लेल सदैव तत्पर अछि। संस्थापक: प्रभाकर मिश्रा
संपर्क करें
मिथिला धरोहर के "संगी" चैटबोट सं चैट कोना करब?
संगी सं सबाल करबाक दु टा तरीका अछि, पहिल टाइप (लिख) के आ दोसर बाजि के। बाजि क सबाल पूछबा लेल अहाँके दांया कात माइक बला बटन पर क्लिक करय पड़त। पहिल बेरा माइक बटन दबेला पर परमिशन मांगत, अनुमति देलाक उपरांत अहाँ बाजि क सबाल पूछी सकय छी।
🔍 शर्च में की लिखी

पंचांग/तिथि खोजी रहल छी त:
जेना, "मैथिली पंचाग 2027" खोजी रहल छी त अहाँ लिखू —
मैथिली पंचाग 2027

मंत्र खोजी रहल छी त:
कुनो पाबनि या विधि के नाम के संग "मंत्र" लिखू, जेना —
चौरचन पूजा मंत्र तर्पण मंत्र जनेऊ मंत्र

गीतक संग्रह खोजी रहल छी त:
भगवती गीत लिरिक्स नचारी गीत लिरिक्स विवाह गीत मधुश्रावणी गीत

कुनो विशेष गीत खोजी रहल छी त:
ओहि गीतक बोल के 5-6 शब्द लिखू, जेना —
जगदम्ब अहिं अबलम्ब हमर छोट छोट रोड़ी गरैया सिर के सिंदूर रे गवानवा सबहक सुधि अहाँ लै छी

कहानी खोजी रहल छी त:
गोनू झा के कहानी लेल लिखू —
गोनू झा कहानी

कथा खोजी रहल छी त:
मधुश्रावणी पूजा के सम्पूर्ण कथा लेल लिखू —
मधुश्रावणी पूजा कथा
कुनो विशेष दिन कथा लेल लिखू —
मधुश्रावणी पहिल दिन कथा मधुश्रावणी पांचम दिन कथा

मंदिर खोजी रहल छी त:
श्याम मंदिर दरभंगा उच्चैठ भगवती उग्रतारा मंदिर

नमस्कार! हमर नाम 'संगी' छी, हम अहाँक कोना मदद करब?
कोना search करू? ताहि लेल एतय क्लिक करू