अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
30 जुल॰ 2020
भाई के दरश लागी, बेकल भरत जी - समदाउन भरत बिलाप
भाई के दरश लागी, बेकल भरत जी
रने बने कधि बिलाप ।।
केनाक बिसरि गेल भइया निरमोहिया राम
भइया निरमोहिया
चलि गेला बन चुपचाप ।।
केहन कपूत हम भेली भइया केकयी राम० ।।
हमरे चढ़ल सिर पाप ।।
अवध अनाथ लागे, मइया भेली बिधवा राम
मइया भेली बिधवा
पड़िगेल अन्हरी के श्राप ।।
गोड़ लागू पैयाँ परू, माता सिया जानकी राम
माता सिया जानकी
मेटू आब बिरहक ताप ।।
'लतिका सनेह' एहो गाबे समदौनियाँ राम
गाबे समदौनियाँ
एहो थिक भरत बिलाप ।।
शेयर करू
नव पोस्ट
⏳
पुरान पोस्ट
⏳
https://mithiladharohar.blogspot.com/2024/11/sanjh-diya-yashomati-maiya-he-sanjh.html
https://mithiladharohar.blogspot.com/2024/09/kantak-majh-kusum-paragas.html
❤ अहाँक इहो पसंद आयत:
⏳
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !