जखन सुनयना डोली दिस ताकथि, सीता चली भेली कनैत अधीरभरलो आंगन जतेक नर-नारी, ककरहु हृदय नहि थीरचहुँदिस रोबथि सखी रे सहेलिया, आमा के झहरनि नयन मोती नीरकिए जे बेटी जानकी पोसल, उड़ि भेली देश परायभनहि विद्यापति सुनू हे सुनएना, इहो थिक नगर बेबहारइहो पढ़ब :-• बियाह सँ द्विरागमन धरिक मैथिली गीत• मैथिली सिंदूरदान गीत लिरिक्स• मैथिली समदाउन लोकगीत संग्रह
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