सिया हे वरण कएल, सब हे मुदित भेलछूटि गेल मिथिला धामकेये जनक बगियामे गौरी के पुजतैकसखि संगे तोड़त के गुलाबकेये धनुषा के सब दिन पुजतैकचलि भेलि मैथिली ललामसखि सभ हे मुदित भेली, विधि सभ लिखि देलकन्त भेला सुन्दर श्रीरामइहो पढ़ब :-• बियाह सँ द्विरागमन धरिक मैथिली गीत• मैथिली सिंदूरदान गीत लिरिक्स• मैथिली समदाउन लोकगीत संग्रह
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