कोना हम बिसरव बेटी के सुरतिया
कहुना न बिसरल जाय।
असरा लगाय हम दुलरी के पासली
छतिया के दूधवा पियाय
जनि कानू अनि खीजू धीर धरू जननी
मैया कर ममता बलाय
लतिका सनेह गावे सहो समदौनि
बेटी के शुभ दिन सहाय
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