अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
12 जुल॰ 2026
27 सित॰ 2023
1 जुल॰ 2023
20 जून 2023
18 जून 2023
23 मई 2023
11 मई 2023
11 मार्च 2023
6 जुल॰ 2022
● लोक देवता दीना भद्री के लोकगाथा - प्रथम भाग
14 अप्रैल 2022
गोनू झा के जन्म दरभंगा जिलाक अन्तर्गत 'भरवाड़ा' गाम मे आय सं लगभग आठ सौ वर्ष पूर्व (13 वीं शताब्दी) एकटा गरीब किसान परिवार मे एहन समय भेल छलनी जहन धर्मांधता आ रूढ़िवादिता के बोलबाला छल। बड़का जमींदार राजा कहाबैत छल। दरबारि के हाथ मे शासन सं प्रजा त्रस्त छल। चापलूस दरबारिक चंगुल सं प्रजा के बचेबा मे जतय गोनू झा के महत्त्वपूर्ण योगदान छलनी, ओतय ओ साधुक भेश मे ढोंगि सं सेहो लोहा लेलैथ। मिथिलांचल मे गोनू झा के रोचक कथा जन-जन के जीह पर ओहि प्रकार विद्यमान अछि, जाहि प्रकार कवि कोकिल विद्यापति जी के सुमधुर गीत सभक कंठहार बनल अछि। एतय गोनू झा के सभ तरहक कहानी के बड़का संग्रह अछि, एक बेरा जरूर पढ़ब।
गोनू झा के रोचक कथा - गोनू झाक कहानी
- 📖 गोनू झा सँ भगवती प्रसन्न
- 📖 गोनू झाक चतुराई
- 📖 गोनू झा के ढ़ाकि
- 📖 गोनू झा के सपना
- 📖 गोनू झा के कबुला
- 📖 गोनू झा के खेती-बाड़ी
- 📖 गोनू झा के खेत पटौनी
- 📖 फेर छकायल चोर
- 📖 सामान्य जांच परीक्षा
- 📖 गोनू झा आ चोरक मजदूरी
- 📖 बाप केँ एना ठकलनि गोनू झा
- 📖 गोनू झाक चार सौ बीस ठोप
- 📖 जाहिल के फेरा
- 📖 गोनू झा भोज केलखिन
- 📖 गोनू झा के कुश्ती
- 📖 गोनू झाक बिलाड़ि
- 📖 गोनू झाक स्वर्ग बजाहट
- 📖 गोनू झा के बड़द
- 📖 गोनू झा के शास्त्रार्थ
- 📖 गोनू झाक इनाम
- 📖 गोनू झा के नोकर
- 📖 ग्रह दोष निवारण
- 📖 गोनू झा आ लालची ढोलकदास
- 📖 उजालाक गाछ
- 📖 गुलाबक सुगन्ध
- 📖 प्रसाद के समान वितरण
- 📖 गोनू झा पिंड छोड़ेलनी
- 📖 सरपंच गोनू झा
👉 हरेक मास गोनू झाक एकटा कहानी नबका किस्सा आबैत अछि!
13 मार्च 2022
इहो पढ़ब :-
● पग-पग पोखरि माछ मखान... किछु विशिष्ट पोखरि के खिस्सा
गोनू झा बाजलैथ।
हम तऽ तैयार छी भगवन! गोनू झा मुस्कुरेला।
तऽ फेर हम प्रश्न करूं ?
विद्वान महोदय। गोनू झा बाजलैथ - अहाँ तऽ चाइर दिन सं प्रश्न कए रहल छी विद्वान केवल प्रश्न टा नै करैत ऐछ बल्कि उत्तर सेहो दइत अछि।
अहि बेरा तऽ शास्त्री औरो हरबरा गेलाह। मिथिला नरेश अनायासे थोपरि बजा उठलाह।
इहो पढ़ब :-
● मैथिली जोक्स : फेकन भाई पहिल बेरा मोबाइल लेला !
तोहर की अभिप्राय छौ ? शास्त्री पूछलैथ
महोदय, हम अहाँसं प्रश्न करबाक आज्ञा चाहैत छी। अय मे आज्ञा केहन! महाराज बीच मे कहलैथ - शास्त्रार्थ मे प्रश्न आ उत्तर टा तऽ होइत अछि।
आब शास्त्री जी शंकित भऽ उठलाह। एखन धरि ओ प्रश्नने टा केने छलैथ। आय पहिल बेरा हुनका सोंझा प्रश्नकर्ता आयल छल।
हं तऽ महोदय, हमर पहिल प्रश्न ऐछ जे बुद्धि के प्रकाट्य कतए छैक ? साधारण आ बचकाना प्रश्न छैक। मस्तिष्क सं बुद्धि प्रकट होइत ऐछ।
नै महाराज बुद्धि के प्रकाट्य ठोर सं होइत ऐछ। गोनू झा बजलाह- यदि ठोर नै खुजत तऽ बुद्धि के प्रकटन कोना हैत।
दरबार मे थोपरिक अबाज गूंइज उठल। शास्त्री जी के मुंह उतैर गेलैन।
महोदय, हमर दोसर प्रश्न ऐछ जे बुद्धि के आहार की छैक ?
शास्त्री जी चकरा गेला, बुद्धि कहिया सं खाय लागल। इ कोन बेतुका प्रश्न छैक। बुद्धि के पेटे कतए होइत छैक।
नै महोदय, तइयो भी बुद्धि समय के खाइत ऐछ। समये बुद्धि जे आहार होइत ऐछ। अहाँ चाइर दिन सं बुद्धिक प्रयोग कऽ रहल छी तऽ की बुद्धि चाइर दिनक समय नै खेलक। गोनू झा बजलैथ।
आब हमर अंतिम प्रश्न ऐछ जे हमर बुद्धिक मूल्य की ऐछ ?
शास्त्री जी चकरा कऽ अपन माथा नोचय लगला। एहि सं स्पष्ट छल जे अहि प्रश्नक सेहो कुनो उत्तर हुनका लग नै छल। बुद्धिक कियो मूल्य कोना आंइक सकैत ऐछ आ ओहो दोसरक बुद्धि कऽ।
इहो पढ़ब :-
● मिथिला चित्रकला के गोदना शैली के स्वर्णिम हस्ताक्षर शिवन पासवान
महाराज, आज्ञा होय तऽ हम अपन अहि प्रश्नक उत्तर दरबारक साधारण सन दरबारी सं दियाऊं ताकि शास्त्री जी के इ भ्रम नै रहैन जे मिथिला राज्य मे विद्वता के कुनो कमी छै।
अति उत्तम! राजा प्रसन्न भ उठलैथ - आज्ञा ऐछ। गोनू झा वैह प्रश्न एकटा साधारण दरबारी सं केलैथ।
महाराज, हिनकर बुद्धि के मूल्य त आय बच्चा-बच्चा जानैत ऐछ। दरबारी कहलक - इ अपन बुद्धि सं शास्त्री जी के इ भ्रम तोइड़ देलैथ जे हिनका सं बड़का विद्वान कियो नै ऐछ।
आब इ विजेता छैथ आ विजय कऽ मूल्य सबटा पुरस्कार कऽ दरबार मे विशिष्ट पद हिनका प्राप्त हैत।
ओमहर शास्त्री जी उइठ अपन पोथी-पत्रा समैट कऽ जेबाक लेल तैयार भेलैथ त गोनू झा हाथ जोइड़ कऽ मार्ग रोकलैथ।
शास्त्री जी, अहाँ परमविद्वान छी। हमरा इ स्वीकारबा मे कुनो संकोच नै जे हम ज्ञान सं नै, नहीं, तुक्क सं अहाँक पराजित केलौ। अतः अहाँ मोन मे ग्लानि नै राखब। अहाँ हमर पूज्य छी। शास्त्री जी के आँइख खुइज गेलैन। गोनू झा विद्वान सेहो छलैथ आ सज्जन हृदय सेहो।
गोनू झा मिथिला दरबार के सम्मानित पद पर आसीन भेलैथ। हुनका महाराज इहो सुविधा प्रदान केलैथ जे ओ जहन चाहें दरबार आबि सकैत छैथ।आ ढेर रास पुरस्कार लऽ कऽ गोनू झा आपस अपन गाँव आबि गेलैथ।
खिस्सा समाप्त भेल!









