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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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12 जुल॰ 2026

Gonu Jha Story

मैथिली कहानी - गोनू झा सँ भगवती प्रसन्न

मिथिला धरोहर
गोनू झा अपन ज्ञानसँ महाराजकेँ तँ प्रसन्न करिते छला। चोर-चुहारकेँ तँ छकबिते छला। सर-समाजक लोकक लग तँ अपना प्रत्युत्पन्नमतित्वसँ आदरणीय बनले छला, बेर पड़नि तँ देवी-देवताकेँ सेहो तेहन ठोका जवाब देथिन जे ओहो प्रसन्न भऽ उठथि। एक बेर भगवती कालीक समक्ष तेहन मनोरञ्जक प्रश्न रखलनि जे ओहो अपन भक्त गोनू झासँ प्रसन्न भऽ उठली आ हुनका वरदान देलनि जे बुद्धि-ज्ञानमे हुनका कहियो क्यौ ने पछाड़ि सकत।

भेलै जे गोनू झा नित्य भगवतीक पूजा करथि। एक दिन मनमे एलनि जे एते दिनसँ भगवतीक मनसँ विधि पूर्वक पूजा करै छी, मुदा ओ दर्शन नञि देलनि अछि। से आब पूजा तखने छोड़ब जखन ओ दर्शन देती। बस ई ठानि ओ पूजामे जुटि गेला। भरि-भरि दिन कालीक पूजा करऽ लगला। अहल भोरे पूजा शुरू करथि तँ सूर्य डूबि जेबाक बादे उठथि।

एक दिन पूजा-पाठक बाद ओछायनपर पड़ल छला कि हुनक पूजासँ प्रसन्न भऽ भगवती काली दर्शन देबा लेल पहुँचि गेलथिन। काली अपन विकराल स्वरूपमे आयल छली। हुनकर एक सय मुँह छलनि। हाथमे खप्पड़ आ खड्ग रखने छली। गोनू झा हलसि कऽ ओछायनपरसँ उठला आ हुनका प्रणाम केलनि। माताक दर्शनसँ अपनाकेँ कृत-कृत्य मानलनि। कनिञे कालमे गोनू झाक उत्साह बिला गेलनि आ ओ गम्भीर भऽ उठला। भगवती चौँकि उठली। एखने गोनू झा प्रसन्न छला तखन एकाएक चिन्तित किए भऽ गेला। भगवती कारण पुछलथिन तँ गोनू झा बजला- नञि कोनो खास बात नञि। हम ई सोचऽ लगलहुँ जे हमरा सभकेँ एक टा मुँह अछि आ दू टा हाथ अछि। तखन जँ कहियो सर्दी भऽ जाइत अछि तँ नाक पोछैत-पौछैत तबाह रहै छी। दू टा हाथसँ एक टा नाक नञि सम्हरैत अछि, तखन अहाँकेँ तँ एक सय मुँह आ दू टा हाथ अछि। जँ कहियो सर्दी भऽ जाइत होयत तँ दू हाथसँ एक सय नाक कोना सम्हरैत होयत, यैह सोचऽ लागल रही। गोनू झाक बात सुनि भगवती ठठा कऽ हँसि पड़ली आ हुनका आशीर्वाद देलथिन जे बुद्धि-ज्ञानमे दुनिञामे अहाँकेँ क्यौ ने पछारत। दोसर दिन गोनू झा दरबार गेला तँ महाराजकेँ सभटा बात कहलथिन तँ ओहो खूब हँसला आ हुनका एहि मनोरञ्जक बात लेल खूब बिदाइ देलनि। 

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27 सित॰ 2023

Gonu Jha Story

मैथिली खिस्सा सरपंच गोनू झा

मिथिला धरोहर
एक बेर पूरा गाम गोनू झा के गामक मुखिया चुनि लेलक। गाम मे बहुत रास समस्या छल। पीबय के पानि सबसँ पैघ समस्या छल। गामक एकमात्र इनारसँ पहिने पूरा गामकेँ पानि भेटैत छल, मुदा ओतय ततेक भीड़ रहैत छल जे झगड़ा भऽ जाइत छल।

गामक उचक्का सभ ओही समय इनार पर नहाइत छल जखन गामक स्त्रीगन सभ पानि भरय आबैत छल। एहि उचक्का मे मुला नामक एकटा छौरा सबसँ बेसी बदमाश छल। ओ अपन आठ-दस संगी सभक संग भरि दिन इनार पर रहैत छल। भांग आ गांजा के आदी मुला के टीम गामक लड़की आ महिला के जीनाय दुर्लभ कऽ देने छल। जँ कियो शिकायत वा विरोध करैत छल तऽ झगड़ा पर उतारू भऽ जाइत छल।

मुला के एहि हरकत सं सगरो गाम परेशान छल।  मुदा ओ गामक साहूकार अंजनी मांझीक एकलैता बेटा छल। अंजनी माझी ब्याज पर पूरा गाम मे पाइ लगेने छल।

"की भेलै! जबान चंचल छौरा छै। मजाके टा तऽ करैत छैक। ककरो सँ किछु छीन तऽ नै लैत छै। खबरदार जे कियो किछ कहलक।"

मुदा मुला के माय के अपन बेटाक ई करतूत नीक नै लागैत छल। ओ ओकरा लाख बुझबैत छलीह मुदा मुला हुनकर बात नहि सुनैत छल। आ हाइर के ओ एक दिन गोनू झाक शरण मे चलि गेली।

"पंडित जी, हमर बेटा तऽ हाथ सँ निकलल जा रहल अछि।" मुलाक माय कानैत बजलीह - "ओकरा बाप के कुनो चिंता नै छै। उल्टा ओकर खराब आदतिक समर्थन करैत छैक। मुदा हम ओकर माय छी आ नीक बेटाक कामना करैत छी। आब एकरा अहाँ टा मात्र ठीक कऽ सकैत छी।

'भौजी, यैह उम्र मे बच्चा सुधड़ैत आ बिगाड़ैत छै। अहाँ निश्चिंत रहू, हम ओकरा बुझेबाक पूरा प्रयास करब। काली माँ चाहथि तऽ एके बेरा में ओकर बुद्धि ठिकाना पर आबि जायत। हमरा मोन मे एकटा योजना अछि मुदा ताहि मे हमरा अहाँक मदद चाही।

'हम अपन बेटाकेँ नीक बनेबाक लेल जे किछु क' सकब से करब।'

"ठीक छै। हम कहब जे की करबाक चाही।"

गोनू झा हुनका अपन योजना बतौलनि। दोसर दिनक बात अछि।  मुला आ ओकर उधम मचाबय बला संगी सभ भोरेसँ इनार पर बैसल गांजा पीबैत आ उल्टा-सीधा गप्प कऽ छल।

अचानक गामक लड़की सभक एकटा समूह पानि भरय लेल आबैत देखायल। ओहि समूह में एकटा घूंघटधारी महिला सेहो छलीह। घूंघट वाली महिलाक गागर चानीक छलैक आ ओकर चाल सँ बुझाइत छल जे ओ सब दिन अबै मे सँ नहि छथि।  मुला आ ओकर संगी सभ उत्सुकता मे पड़ि गेल जे चानीक घैल अननिहार सुन्दरी के अछि। ओ सभ पूछताछ केलक मुदा कियो नहि कहि सकल।  तखन मुला निर्णय लेलक जे एम्हर-ओम्हर पूछबाक बदला नीक हएत जे घूंघट उठा क' देखू।  कियो ओकर सभकेँ की बिगाईर सकैत अछि।

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'चल रे पंगा।'। मुला अपन एकटा संगी केँ कहलकै, "जा कऽ घोग तऽ उठा एहि नबका पतुरिया कऽ जे चानिक घयला लऽ कऽ लचकैत-मटकैत आयल छैक। कल्पना कर, जँ ककरो हाथ एतेक सुन्दर छैक तऽ चेहरा कतेक सुन्दर हेतैक।"

गुरु, जँ बेसी सुन्दर भेल तऽ की करबै?" एकटा मित्र चुटकी लैत बाजल।

'तखन हमर विवाह कऽ लेबै!'

"मुदा ओकर विवाह भऽ गेलै छैक।"

'होय दियौक।'  नीक लागलै तऽ नीक लागलै।

"मुदा ओकर पति।"

''हमर की बिगाड़त। हमर पिताजी गामक सेठ छैक।  पाइ सं कीन लेतै।"

सब चिलमची ठहका लगा कऽ हँसै परल। पंगा नामक चिलमची नशा मे झुमैत आगू बढल आ घोग बाली महिलाक घूंघट उघाईर देलक।

आ जेना बिजली खसि पड़ल हो। मुलाक आँखि चौड़ा भ’ गेलै। घूंघटक पाछूक मुंह तऽ सुन्दर छल मुदा ओ ओकर माय छलीह। ओकर आँखि जमीन मे धसल जा रहल छलैक। माँ बहुत आगि सन आँखि सँ ओकरा दिस एकटक ताईक रहल छलीह।

कुलकलंक की भेलै !" माँ बजलीह - "तोरा हमर चेहरा नीक नहि लागलौ। आगू आबि अपन सब मनोकामना पूरा कर। ई छियै तोहर असली रूप!  यैह लेल हम तोरा पालन-पोषण केलहुँ जे एक दिन तो अपन मायक घूंघट उठेमे।"

मूला तऽ लाजसँ जमीनमे गड़ल जा रहल छल ।

हे, आइ तों तऽ लजा रहल छैं। की भेलै, ई तऽ तोहर रोजक खेल छियौ। एहि लाज किएक? हम तऽ तोहर माय छीयौ ताहिलेल। रे सरधुआ, आन महिला सेहो ककरो माय, बहिन आ बेटी छियै।"

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'मां', मुला कानि उठल - "हमरा क्षमा करू। हम बहुत खराब छी मां, मुदा आइ अहाँ जे पाठ देलहुँ से जीवन भरि मोन राखब। हमरा एकटा अंतिम मौका  दिअ मां।"

''तोरा आई ग्लानि भऽ रहल छौ। आब जँ तों सुधरय चाहैत छं तखन माफी हमरा सँ नहि एहि स्त्रीगण सब सँ मांग।  'त' एतहि सँ शुरू कर।'  अहाँ भाइ बनि हुनका सभक रक्षा कर।  

मुला सेहो एहने केलक। आ ओ अपन चिलमची संगी सभकेँ एतेक धमकी देलक जे सभकेँ ओतहिसँ भागब नीक बुझना गेल। आब गामक स्त्रीगण सब मुला के हृदय-परिवर्तन पर प्रसन्न छल।

ई हमर माँ के कृपा अछि जे आइ हमर आँखि खोललक।

'मां कऽ एहन कतऽ? ओ गोनू झा छथि जे कनि बुद्धि सँ हमर बिगड़ल बेटा केँ घर वापस अनलनि ।

"गोनू झा!" सब आश्चर्यचकित भऽ गेल।

पूरा गाम जय-जयकार करैत गोनू झाक दरबज्जा पर पहुँचि गेल।  गोनू झा जखन बाहर अयलाह तऽ मुला हुनकर पएर पर खसि पड़ल आ अपन अपराधक क्षमा मंगलक ।

"माफी नहि माँग। जँ तों किछु नीक काज करबें तऽ बुझबौ।"  गोनू झा बजलाह।

आ दोसरे दिनसँ मुला पितासँ बहुत रास पाइ लऽ कऽ गाममे दूटा आओर नवका इनार खोदब शुरू कऽ देलक। मुला के एहि बदलल रूप देखि पूरा गाम खुश छल। जखन कखनो लोक एहि लेल मुला कए धन्यवाद दैत छलाह तऽ ओ मात्र एकटा बात कहैत छला – “ई सबटा हमर नव मुखिया गोनू झाक् बुद्धि कऽ कमाल अछि।

1 जुल॰ 2023

Gonu Jha Story

गोनू झा पिंड छोड़ेलनी

मिथिला धरोहर
एक बेर गोनू झाक आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय भऽ गेल छलनि, तेँ हुनका एकटा सेठ सँ कर्ज लेबय पड़लनि। ब्याज दर बेसी हेबाक कारणे मूलधन आ ब्याज मिला कए दस गुना सं बेसी भऽ गेल।

सेठ रुपयाक तगेदा लेल बेर-बेर पहुँचय लागल। गोनू झा कोनो तरहेँ मूलधन आ किछु ब्याज चुकौलनि, मुदा बेसी ब्याज रहि गेल।

सेठ के अपना एतय लगातार दौड़ैत देखि गोनू झा अक्छ भऽ गेलाह आ आश्वासन देलखिन जे पूर्णिमा के दिन एक-एकटा पैसा चुका देब। ओहि दिन ओ अपन आँगन मे यज्ञ कुंड बना पूजा मे बैसि गेलाह। हवन के सबटा सामग्री तैयार छल।

यज्ञ एकदम नवीन छल। वेदी के सोंझा कागज के मूर्ति आ दहकैत अंगार राखी देल गेल। आगि पर सरसोंक तेल कड़कय लेल छोड़ि देल गेल छल। गोनू झा कुंड मे हविष्य दए जा रहल छलाह। ओहि यज्ञ मे प्रत्येक काज स्वयं करैत छलाह, तेँ बीच मे ककरो सँ गप्प करब सेहो वर्जित छल।

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गोनू झा के हवन करैत देखि सेठ चुपचाप बैस गेल।  भोर सँ साँझ भऽ गेल, एखनो धरि गोनू झाक ध्यान नहि टूटलनि, तखन सेठक धैर्य जबाब देबय लागल। सेठ गोनू झा के हिलाबैत ध्यान तोड़ि देलक।

ध्यान भंग होइते ओ क्रोधित भऽ गेलाह;  आँखि क्रोधसँ लाल। ओ आँखि मे नोर भरि बजलाह, ' सेठ, अहाँ हमर यज्ञ में विघ्न कऽ देलहुँ; एकर परिणाम भयावह होयत। फेरो बड़बड़ाइत बजलाह - पहिने अपन मंत्रक शक्तिक आजमाइश एहि पुतला पर कऽ के देख ली। 

गोनू झा हाथ मे जल लऽ कऽ 'ॐ, ह्रीं, क्लीं स्वाहा' मंत्रोचार के संग पुतला लगनारा लग कड़कैत तेल मे छिड़कि देलनि। पानि खसैते देरी तेल धधैक उठल आ पुतला फन-फना कऽ जरय लागल। फेर गोनू जल लऽ कऽ मंत्रोच्चार करैत सेठ दिस तकलनि। मंत्रसिक्त जल के संग घुमैत देखि सेठ घबरा गेल आ चादर, चप्पल आदि छोड़ि बदहवाश भागल। तकर बाद गोनू झाक घर लग जेबाक नाम तक नहि लेलनि आ तगेदा के तऽ बिसैर गेलाह।

20 जून 2023

Gonu Jha Story

गोनू झाक मैथिली कहानी नहला पर दहला

मिथिला धरोहर
तीन टा घनिष्ठ मित्र बहुत गप्पी छलाह। एकटा दीवानक बेटा, दोसर व्यापारीक बेटा आ तेसर राजकुमार छला।

एक दिन गप्प करैत-करैत तीनू मे अपना के सबसँ पैघ गप्पी साबित करबाक शर्त लागल आ निर्णय भेल जे जे बेसी झूठ बाजत ओकरा 100 रुपैया जुर्माना देबय पड़तैक।

सबसँ पहिने दीवानक बेटा कहलक जे हमर दादा एतय राजा छलाह आ वर्तमान राजाक पिता हुनकर नोकर छलाह।

ई सुनिते राजाक पुत्र कूदि उठल आ कहलक जे ई झूठ अछि;  एहि ठामक राजा हमर परदादा, दादा आ हमर पिता रहल छथि।  हमर दादा कहियो ककरो नोकरक काज नहि केलनि।

दीवानक बेटा चहकैत बाजल, जँ ई झूठ अछि तखन सौ रुपैया लाऊ। राजकुमारक शर्त के अनुसार पाइ देबय पड़लनि। आब व्यापारीक बेटाक बारी आयल। ओ गंभीरतापूर्वक बाजल, ताहि दिन मे एहि ठामक राजा सब बहुत गरीब छलाह। एक बेर ओ अपन पोताक संग हमर दादाजीक घर पर भीख मांगय लेल आयल छलाह।

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अतेक सुनिते राजकुमार झपटैत बजला - ईहो सरासर झूठे अछि। हमर दादा आ बाबूजीक संग कहियो एहन स्थिति नहि भेल।

बनियाक बेटा प्रसन्नता सं ओकरा शर्त मोन पाड़ैत कहलकै, "तखन अहाँ हारलहुँ आ हम जीतलहुँ, तेँ सौ रुपैया लाऊ।"

ओकरो पाइ देबय पड़ल। आब राजकुमारक बारी आयल। ओ अनिच्छापूर्वक बजला, 'हमरा आब घर जेबाक अछि;  काल्हि फेर एतय उपस्थित रहब।

राजकुमार सोचैत रहि गेलाह जे झूठक सेतु कोना बान्हल जाय जाहि सँ पाइ वापस भऽ सकय।  ओकरा किछु मोन नहि पड़ि रहल छलैक। अंततः ओ गोनू झा सँ संपर्क केलनि।  गोनू झा आश्वस्त करैत बजलाह - राजकुमार, ई बामा हाथक काज थिक;  बस अहाँ अपना जगह हमरा कहानी कहबाक लेल मना लेब। 

अहि पर दुनू मित्रक कोनो आपत्ति नहि भेल। गोनू झा साधारण भेश-भूषा मे पहुँचल छलाह। ओ गप्प कहै लगला, एक बेर भयंकर अकाल पड़ल। लोक अन्न लेल त्राहि -त्राहि करय लागल। राजा कागज बना बना कऽ अन्न देबऽ लगलाह। अहाँक दुनूक दादा सेहो आयल। राजा एक-एक क्विंटल गहूम दऽ रहल छलाह, मुदा कतेको बेर कहला पर दस-दस क्विंटल दऽ देलनि। आब ओ एहि संसार मे नहि छथि। ओकर बेटा आ ने पोता गहूम घुरेलक। एहन कृतघ्न आजुक लोक भऽ गेल छथि। खैर, राजाक कागज दुरुस्त अछि;  आइ नहि काल्हि साधये पड़त।

ई सुनि दीवान आ बनियाक बेटा कूदि उठल आ एक सुर मे कहलक जे ई बात एकदम असत्य अछि । हमर दादा वा बाबूजी कहियो एहि पर चर्चा नहि केलनि।

 गोनू झा हँसैत बजलाह, जँ झूठ अछि तखन सौ रुपैया लाऊ आ जँ सत्य अछि तखन गहूम चुकता करू। 

दुनू गोटे पाइ देब नीक बुझलक।

18 जून 2023

Gonu Jha Story

प्रसाद के समान वितरण

मिथिला धरोहर
दरबार मे पड़ोसी राज्यक पुरोहित पहुँचलाह। ओ अपन परिचय देलनि आ आबय के उद्देश्य बताबैत कहलखिन, 'महाराज, हम तीर्थ यात्रा सँ वापस आबि रहल छी। अहाँक यश दूर-दूर धरि पसरल अछि, तेँ सोचलहुँ जे अहाँक दरबारक दर्शन किएक नहि कऽ लूँ।

तखन झोरा मे हाथ राखि बताशा निकालैत बजलाह  'महाराज, ई चारि बताशा चारि धामक प्रसाद अछि।  एकरा अहाँ उपस्थित दरबारी मे समान रूप सँ बाँटि दियौक।

राजा चिंतित हो गया, किंतु उसने चार ईमानदार दरबारियों को बुलाकर प्रसाद वितरण का भार सौंपा। चार ही बताशे में समान रूप से वितरण दुष्कर था, इसलिए वे एक-दूसरे को देखने लगे।

तभी एक का ध्यान गोनू झा पर गया। उसने राहत की साँस लेते हुए कहा, 'महाराज, यह काम गोनू झा के हाथों अत्यंत शुभ होगा।

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राजा हर्षोल्लाससँ बजलाह - 'शुभस्य शीघ्रम।' आ गोनू झा के एकर जिम्मेदारी भेट गेलनि। स्थितिक गंभीरताक भांपैत गोनू झा सेहो हर्षोल्लासपूर्वक चुनौती स्वीकार कयलनि आ राजा सँ कहलखिन - महामहिम, सबसँ पहिने हमरा करीब पौन बाल्टी के करीब पवित्र जल, चारि लोटा चीनी, एक बोतल केवड़ा जल आ एकटा चम्मच चाही।  ता धरि चुक्कड़ के सेहो व्यवस्था करबा दियौ।

सब वस्तु तुरन्त उपलब्ध भऽ गेल। गोनू झा सुगन्धित शरबत बना ऊपर सँ चारू बताशा चुईर कऽ खसाबय लगला।

एकटा दरबारी आश्चर्यचकित भऽ कऽ बाजल, 'अरे, रे, रे! गोनू झा, अहाँ ई की कऽ रहल छी? आ तुरन्त महाराज दिस घुमि गोनू झा दिस इशारा करैत बजलाह - महाराज बताशा केँ सर्वनाश कऽ देलखिन। ।

गोनू झा फुर्सत सँ बजलाह - भजार, अहाँ घबराब नहि; हमरा अपन जिम्मेदारी बहुत नीक जकाँ मोन अछि। हम महाराज के इच्छानुसार काज कऽ रहल छी।

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पुरोहित सहमत भेलाह आ बजलाह - महाराज, प्रसादक एकटा धर्म प्रसन्नता प्रदान केनाय अछि। कम हो वा बेसी, ठोस हो वा तरल, अर्थात जतेक आ जाहि रूप रूप मे हो, एहि सँ कोनो फर्क नहि पड़ैत अछि। दोसर बात जे गोनू झा द्वारा अपनाओल गेल विधि सँ संतुष्टि सेहो भेटत। एतबे नै,  एकर असरि सेहो ठंढा रहत और सरलतापूर्वक समान रूप सँ वितरण के लेल एकरा सँ नीमन ढंग आओर की भऽ सकै छै। एकर अतिरिक्त अहाँक समता सेहो सिद्ध होयत। हमहूँ आइ अहाँक दरबारक लोहा स्वीकार लेलहुं।

गोनू झा सबके अपन-अपन चुककड़ लऽ कऽ कतार लगा देलखिन आ प्रसाद के समान रूप सँ बाँटि देलखिन।

23 मई 2023

Gonu Jha Story

गोनू झाक कहानी : गुलाबक सुगन्ध

मिथिला धरोहर
मिथिला के हर घर के आँगन में बेला, चमेली, कचनार, जूही, कनक, कटेली चंपा, रातरानी सन फूल के पौधा भेटे जायत।

एक दिन मिथिलाक राजा अपन पुष्पवाटिका मे टहैल रहल छलाह। हुनकर मंत्री लोकनि सेहो हुनका संग छल। कोनो कारणवश जखन गोनू झा महाराज सँ भेंट करय आयल छलाह तऽ महाराज हुनका पुष्पवाटिका मे ओतहि बजौलनि।

महाराज अपन मंत्री सं गप्प करैत रहलाह, किछु निर्देश दैत रहलाह। गोनू झा दुनू गोटेक संग टहलैत रहलाह। मंत्री मोने-मोन खुश भऽ रहल छलाह जे महाराज गोनू झा के महत्व नहि दऽ रहल छथिन्ह।

मंत्री के निर्देश देला के बाद महाराज अचानक मंत्री के कहलखिन - "मंत्री जी, हम जखन कखनो एहि फुलवाड़ी में अबैत छी तऽ हम मंत्रमुग्ध भऽ जाइत छी।" जे पौधा लग जाउ, ओहि पौधा सँ कोनो विशेष सुगन्धक अनुभूति मोन मे भरि जाइत अछि। 

मुदा एहि सभ फूल मे हमरा गुलाब बेसी नीक लगैत अछि। देखबा मे सेहो सुन्दर आ सुगंध एहन जे म्लीन मोन के सेहो प्रसन्न कऽ दैत अछि। की एहन कोनो उपाय अछि जे हम कोनो पौधा लग जाऊ, ओतय सं गुलाबक सुगंध टा भेटय?"

महाराजक बात सुनि मंत्री अवाक भऽ गेला। हुनका बुझा नै रहल छलनी जे महाराज केँ कोन जवाब देबाक चाही। भला कचनारसँ गुलाबक सुगन्ध कोना आबि सकैत अछि। कोनो फूल अपने सुगंध देत। महाराज के ई कि सूझेलनी? 

अचानक मंत्री जी के एहि विपत्ति के टालबाक एकटा विचार आबि गेलनि। ओ तुरन्त महाराज सँ बजल-" महाराज! गोनू झा के रहिते एहि प्रश्नक उत्तर हम दी, इ उचित नहि बुझाइत अछि !"

महाराज बुझि गेलाह जे मंत्री जी हुनका कोनो उपाय बतेबाक स्थिति मे नहि अछि, ताहि लेल ओ बात टाईल रहल अछि। ओ मोने-मोन मे मुस्कुरेलनि आ फेर गोनू झा दिस तकलनि ।

गोनू झा बिना एक क्षण गमेने बजलाह- "महाराज! साँझ अस्त भऽ रहल अछि।" अहाँकेँ ठंढा लागि सकैत अछि। हम तुरन्ते अहाँक दुशाला लऽके आबय छी," आ महाराजकऽ सहमति बिना घुमि कऽ महल दिस विदा भेलाह। महाराज मंत्रीक संग फूलबारी मे टहलैत रहलाह, जेना पहिने टहलैत छलाह।

थोड़ेक काल मे गोनू झा मंद-मंद मुस्कुराइत ओतय आबि गेलाह। महाराज लग रुकि कऽ आदरपूर्वक दुशाला हुनका कान्ह पर पसाईर के राखि देलनि ।

महाराज दुशालाके एक छोर के स्वयम छाती सं लपेटिते दोसर छोर के अपन कान्ह पर राखि लेलनि। ओहि समय महाराज गुलाबक बीचे छलाह। गुलाबक सुगंध मे सराबोर! महाराज किछु काल ओतय चलैत रहलाह आ फेर आन फूल दिस बढ़ैत गोनू झा सँ पुछलखिन - "पंडित जी! की कोनो उपाय अछि जे हम जाहि फूल लग जांऊ ओहिसं गुलाबक सुगंध टा आबय ?"

गोनू झा मुस्कुराइत बजलाह - "अहाँ केँ जवाब भेटत महाराज!" थोड़ेबे काल मे ओ सभ फुलवारीक एहन छोर पर पहुँचि गेलाह, जतय बेला-जूही-चमेली सन उज्जर फूलक छटा बिखरल छल, मुदा महाराज केँ ओतहु गुलाबक सुगंध भेटि रहल छलनि। मधुर-मधुर सुगंध !  महाराज मंत्री सँ पुछलखिन - "एहि फूल सँ केहन सुगन्ध आबि रहल अछि?"

मंत्री बजलाह -" बेला-जुहीक मिश्रित सुगंध!"

महाराज गोनू झा केँ सेहो इएह प्रश्न दोहरौलनि।

गोनू झा महाराजक प्रश्नक अर्थ बुझी गेलैथ। 

ओ बजलाह - "महाराज, फूल मे तऽ वैह सुगंध होइत छैक जे स्वाभाविक रूप सँ ओहि मे रहैत छैक, मुदा अहाँ जतय कतौ भी जायब ओतय अहाँके गुलाब मधुर सुगंध भेटत।"

अहाँ आदेश देने रही जे हम किछु एहन उपाय बताबी जे अहाँ एहि फुलवाड़ी मे जतय कतौ भी जाउ, अहाँके गुलाबक सुगंध भेटैय।

हम ओ उपाय कऽ देने छी ।"

एखन धरि मंत्री जी के उम्मीद छल जे एहि उपाय के मामला मे गोनू झा के मुँह लटकबैत देखब, मुदा गोनू झा के बात सुनला के बाद हुनकर चेहराक रंग उतैर गेलैन।

महाराज पुछलखिन - " की सत्ते अहाँ एहन किछु केलौ हन ? हम एखनो गुलाबक सुगन्धक अनुभव कऽ रहल छी।

गोनू झा मुस्कुराइत बजलाह - "हम किछु नहि केलहुँ।" बस, थोड़बे रास गुलाबक इत्र अहाँक दुशाला पर लगा देने छी।"

11 मई 2023

Gonu Jha Story

मैथिली कहानी : गोनू झा और उजालाक गाछ

मिथिला धरोहर
एक बेर ईरान सँ एकटा व्यापारी मिथिलाक दरबार मे आयल छल। ओ बहुत धनिक छल आ एखनो बहुत मुनाफा कमा कए अपन देश वापस लौट रहल छल। रस्ता मे कतहु सुनने छल जे मिथिला मे विद्वानक कोनो कमी नै अछि। व्यवसायी सेहो विद्वान लोकनिक बहुत सम्मान करैत छल। ओ विचार केलक जे मिथिला दरबारक कोनो विद्वान जँ ओकर पहेलीक उत्तर दऽ सकैत छथि तऽ हुनकर  सम्मान करैत, बहुत रास पुरस्कार दऽ के जायत।

ओ दरबार पहुँचल तऽ ओकरा लग एकटा लकड़ीक बक्सा छल। महाराज के प्रणाम कऽ अपन परिचय देलक।

"जहाँपनाह, हम ईरान'कऽ बनिया हबीबुल्लाह छी। जखन हम भारत सँ कारोबार कऽ के घुरैत रही तखन अहाँक दरबारक प्रशंसा सुनलहुँ। हमरा सुनबा मे आयल जे एतय एक सँ बैढ कऽ एक विद्वान आ बुद्धिमान व्यक्ति अछि, तेँ हम सोचलहुँ" कि हमहूँ एहि मामला के परखब। कतेक सच्चाई अछि।" बनिया बाजल।

'अहाँ हमर सभक पाहुन छी महोदय।' महाराज बजलाह - "अहाँक इच्छाक सम्मान करब हमर सभक कर्तव्य अछि।"

"धन्यवाद! जहाँपनाह, हमरा लग अहाँ जे लकड़ीक बक्सा देखैत छी ताहि मे एकटा विचित्र चीज अछि। जँ अहाँक दरबार मे कियो बुद्धिमान ई बात कहि सकैत अछि जे ओ चीज की अछि तऽ हम ओकरा बहुत रास हीरा आ गहना पुरस्कृत में देब।" बनिया दरबार दिस तकलक।

"महोदय, ओहि बात मे की विचित्रता छैक?"

"ओ एकटा अद्भुत छथि। ओकरा सँ हम बिना बीया, बिना पानि आ बिना माटि के गाछ उगा सकैत छी।"

सभ दरबारी आश्चर्यचकित भऽ गेलाह। महाराज स्वयं सेहो आश्चर्यचकित छलाह।

आश्चर्य! नै देखल आ नाइ सुनल। बिना बीया के गाछ कोना संभव अछि? आ ओहो जमीन आ पानि के बिना एहन बात के कल्पना नहि कयल जा सकैत अछि।

"मुदा महाराज, हमर दावा ओतबे सत्य अछि जतेक सत्य जे हम अहाँक सोझाँ ठाढ़ छी। बनिया बाजल - "आब हम देखए चाहैत छी जे अहाँक दरबार मे एहन इल्मगिर के अछि जे एहि बक्सा के खोलने बिना ओहिमें बंद ओहि चीज के पहचान कऽ सकै"।सभ दरबारी एक-दोसराक मुंह ताकय लागल।बनिया एकटा अजीब आ कठिन पहेली पुछने छल।  

गोनू झा सेहो दरबार मे छलाह आ बुझि गेलाह जे बनियाक पहेलीक अर्थ सरल नहि अछि। दरबारक सभ विद्वान सेहो असमंजस मे पड़ि गेलाह। तखन गोनू झा ओहि स्थिति केँ सम्हारलनि।

"महोदय, जेना महाराज कहने छथि जे अहाँ हमर सभक पाहुन छी।"  गोनू झा विनम्रतापूर्वक बजलाह- "तऽ आइ अहाँ हमरा सभ केँ सत्कार करबाक अवसर दिअ आ काल्हि अहाँक प्रश्नक उत्तर भेटत।"

"नीक बात अछि। मुदा हम ई बक्सा अपने संग राखब जाहि सँ कियो एकरा खोलय कऽ बुईझ नै लै जे एहि मे की अछि।"

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"महोदय, हम तऽ इहो चाहय छी जे आइ राति एहि बक्सा पर  अहाँक ताला'क अतिरिक्त एहि शाही ताला सेहो रहबाक चाही जाहि सँ अहाँ एकरा बदैल नै दि।"

मिथिला नरेश बुझि गेल जे गोनू झा कोनो युक्ति सोचने छथि। महाराजो सेहो ओकर बातक समर्थन केलनि। बनिया मानि गेल। राजसी ताला लगा कऽ ओकर चाभी स्वयं महाराज लग रखी देल गेल।।

"पंडित जी।'  महाराज अगिला आदेश देलनि - 'हम चाहैत छी जे अहाँ राजपाहुनक देखभाल करी, मोन राखू जे हुनका सभ केँ कोनो तरहेँ कष्ट नै होइन।

"आज्ञा शिरोधार्य अछि महाराज।"

फेर गोनू झा बनियाक संग अपन आवास पर आबि गेलाह। मिथिला में हुनका राज्य दिसन सं भवन भेटल छलनि। ओतय हर सुविधा छल आ आन सुविधा लेल बस सेवक के आदेश देबाक देरी होइत छल। गोनू झा व्यवसायी लेल भव्य भोजनक व्यवस्था केलनि। हुनकासँ गप्प करैत रहलाह।   व्यवसायी कियाकि देश-विदेश यात्रा करैत रहैत छल तऽ ओकरा सेहो गप्प करबाक बहुते सऽख छल, हुनका सेहो चीज-वस्तुक बहुत शौक छलनि।भोजनक बाद सुतबाक लेल गद्देदार बिछाओन छल।  सुतबासँ पहिने सेहो दुनू गोटे एक दोसरासँ बतियाइते छलाह ।

"महोदय, ईरान मे तेल के बेसी कारोबार अछि।"  गोनू झा पुछलखिन - "तऽ की अहाँ सेहो देश-विदेश मे तेल बेचैत छी."

"नै महोदय। हम तऽ मात्र ओहि गाछ केँ बेचैत छी जकर बीया नहि होइत छैक, जकरा रोपबाक लेल जमीन मे खोदबाक आवश्यकता नहि छैक।"

"तऽ की अहाँक ई गाछ राति मे सेहो उगैत अछि?"

"सच पूछू तऽ ई गाछ रातिये में ऊइग के सुन्दर लगैत अछि।"

"अच्छा! एकर आयु तऽ कमे होइत हैत। 

"हँ यौ। खैर, अहाँ हमरा कनि बेसी बुद्धिमान बुझाइत छी। अहाँक विचारे हमर प्रश्नक उत्तर के द' सकैत अछि?"

"महोदय, संसार मे कोनो प्रश्न नहि होइत छैक जकर जवाब नहि छैक। हम अहाँक प्रश्नक उत्तर बुझबाक प्रयास कऽ रहल छी।"

"कठिन अछि साथी। अच्छा, आब आराम करी।"

 "ठीक छै महोदय।"

ओहि राति गोनू झा शान्तिपूर्वक सुति गेलाह, कारण हुनका बुझल छलनि जे ओहि बक्सा मे की अछि।  ओ ओहि गाछ केँ चिन्ह गेलनि जे बिना बीया, जमीनक ऊपर आ बिना पानि के जन्म लैत अछि।

भोर भेला पर व्यवसायी आ गोनू झा अपन दिनचर्या सं निवृत्त भऽ जलखई कऽ दरबार चलि गेलाह।  बनिया अपन बक्सा अपने संग लऽ गेल।

"तऽ पंडित जी, अहाँ केँ कोनो अंदाजा अछि की?"  बनिया मुस्कुराइत पुछलकै।

"आब हम दरबार मे जेबाक बादे कहब। भऽ सकैत अछि जे हमर जवाब गलत हो। पहिने इ तऽ देख ली जे शायद कोनो आन विद्वान अहाँक प्रश्नक समाधान कऽ देने होथि।"

 "ओना, हम अहाँ केँ एकटा सुझाव दऽ सकैत छी। एहिमे हमरा दुनू गोटे'कऽ फायदा अछि।"

"अहाँ व्यापारी छी। मुनाफाक सोचब अहाँक काज अछि।"

"सैह तऽ। एना करय छी जे हम अहाँक अपन प्रश्नक उत्तर बता दैत छी। अहाँ दरबार मे बता देबय तऽ अहाँक धाक जमि जायत।"

"अहिसे अहाँ केँ कोना फायदा होयत?"

"ई होयत जे हम जे मुंहमांगल इनाम देब, ओ अहाँ  अहाँ बेसी नै माँगब। हमर धन सेहो बचि जायत।"

"महोदय, ई भारतक भूमि थिक। एतय बेईमानी नै चलैत अछि। एतय ज्ञानक मोल होइत छैक। अहाँक ई सुझाव हमरा किछु प्रतिष्ठा आ अहाँके किछु धन अवश्य देत, मुदा एहि सँ हम स्वयं अपने नजैर मे खसि पड़ब आ मिथिला अहाँक दृष्टि में ज्ञान हीन भऽ जायत। बेसी नीक यैह जे अहाँक प्रश्नक उत्तर बुद्धिपूर्वक देल जाय।

"वाह, अहाँ नीक लोक छी।" बनिया कहलक - "अहाँ मे बुद्धिक संग-संग अपन माटि सँ प्रेम सेहो अछि। हमरा आशा अछि जे मिथिला सँ घुरला पर हम अहाँ केँ सदिखन मोन पाड़ब।"

एहिना गप्प करैत-करैत दुनू गोटे दरबार पहुँचि गेलाह। दरबार सैज गेल छल। महाराज अपन सिंहासन पर विराजमान छलाह। व्यापारी जइते  प्रणाम कऽ अपन स्थान पर बैसि गेल। गोनू झा सेहो जखन महाराज के मुस्कुराइत अभिवादन केलनि तऽ महाराज के चेहरा खुशी सं खील गेलैन्ह। ओ बुझि गेलाह जे गोनू झा व्यापारीक प्रश्नक उत्तर चतुराई सँ ताकि लेने छथि ।

"जेना कि काल्हि दरबार मे ईरानक व्यापारी एकटा अचरज भरल सवाल पूछने छल। तखन की मिथिलाक कोनो विद्वान एकर जवाब जानि सकल छथि?"  महाराज सब दरबारी सँ पुछलखिन।

सभ दरबारी बामा-दहिना झांकय लगलाह।

"तऽ कियो नहि बता सकैत अछि जे हुनकर बक्सा मे की अछि जे बिना बीया, बिना पानि आ बिना जमीन मे रोपने बिना गाछ उगैत अछि।"

'अवश्य महाराज !' गोनू झा बजलाह- 'अहाँक कृपा सँ हम बुझि गेलहुँ जे हुनकर बक्सा मे की अछि, जँ अहाँ अनुमति हो तऽ उत्तर देल जाय।'

"अवश्य देल जाऊ।"

"ओहि सँ पहिने हम व्यापारी महोदय सँ एकटा प्रश्न पूछय चाहब। महोदय, अहाँ ओ विचित्र गाछ सबेदिन उगाबैत हैब। तऽ' की अहाँ अपन गाछक नाम बुझल छी। आब ई नहि सोचू जे हम अहाँ सँ नाम जान' चाहैत छी। हम तऽ अहाँक गाछक नामकरण स्वयं कऽ रहल छी। अहाँक गाछक नाम अछि 'उजाल'कऽ गाछ'। कहू हमर बात सत्य अछि।'

'मरहबा! आइ धरि हम स्वयं एहि गाछक एतेक नीक नाम नहि सोचि सकलहुँ ।

"महाराज, एकर बक्सा मे आतिशबाजीक समान छैक। जखन ओ ओहि सँ बनल विस्फोट करैत छैक तखन ओकर डारि आकाश मे गाछ जकाँ छिड़िया जाइत छैक आ रोशन भऽ जाइत छैक। आब बक्सा खोलि कऽ देखू जे हमर जवाब सही अछि वा गलत।"

"बिल्कुल ठीक!" बनिया बाजल- "अहाँ सत्ते बुधियार छी। हम मानैत छी जे मिथिलाक दरबार मे ज्ञानक कोनो कमी नहि अछि। अहाँ जे पुरस्कार चाहब से ल' सकैत छी। हमरा बहुते खुशी हैत।"

"हम इनाम मे मात्र एकटा आना मांगैत छी महोदय।"  गोनू झा बजलाह।

व्यापारी आश्चर्यचकित भऽ गेल। गोनू झा हुनका देखा देने छलाह जे मिथिलाक धरती पर लोभक कोनो काज नहि अछि। ओ एक आना तऽ देबे केलक मुदा अपन खुशी सँ गोनू झा केँ एतेक इनाम देलनि जे सब दरबारीक कलेजा पर साँप रेंगय लागल।

11 मार्च 2023

Gonu Jha Story

गोनू झा आ लालची ढोलकदास

मिथिला धरोहर
बात ओहि दिनक अछि जखन गोनू झा दरबार मे छलाह। मिथिला नरेश हुनका एक सप्ताह के लेल शाही अतिथि बना कऽ रोकने छलथि।

 गोनू झाक पत्नी आ भाई भोनू झा गाम मे छल।

घुरिया आ ओकर साथी सब हवालात में बंद छल। घुरियाक एकटा मित्र छल। ओकर नाम छल छुट्टन पासी। ओहो चोर छल। ओ बगलक गामक छलाह। जखन ओकरा अपन मित्र घुरियाक बारे मे पता चलल तऽ ओ तमसा गेल, ओ निर्णय लेलक जे ओ अपन मित्रक दुश्मन केँ निश्चित रूप सँ सबक सिखाओत। ई सोचि ओ अपन तीनू संगी केँ अपना संग जोड़ि लेलक।

आब पासी सभ राति भरौरा गाम जाइत छला आ गोनू झाक घर लग अवसर ताकैत छला। मुदा भरि राति ओकरा गोनू झाक पत्नीक आवाज सुनबा मे आबि रहल छल जे अपन देवर केँ नम्हर-नम्हर खिस्सा कहैत छलीह।

मुदा एक दिन पासी के अधहा राति के बाद मौका भेटल। ओ अपन संगी सभक संग घरक पछुआड़ मे आबि मैटिक देबाल मे छेद करय लागल।

ओमहर पंडिताइन सुतल नै छलीह। ओ तऽ आइयो जागल छलीह। रोज जकाँ भोनू जल्दी सुति गेल छल तखन ओ  कथा ककरा कहितथि। ओ जनैत छलीह जे गोनू झाक अनुपस्थिति मे दुश्मन एकरा अवसर मानि घात लगा सकैत छल, तेँ ओ बहुत सावधान छलीह।  आइयो ओ जाइग रहल छलीह, तेँ पछुआड़ मे किछु हलचल सुनबा मे आयल।

ओ ओहि कोठली मे पहुँचलीह जे घरक पाछूक देबाल सँ जुड़ल छल ।

पंडिताइन के बुझल छलैन जे चोर सभ पाछूक देबाल मे अपन रास्ता बना रहल अछि। कहल जाइत अछि जे संगतिके असर भऽ के रहैत अछि।  गोनू झाक पत्नी सेहो पतिक संगति मे रहि चतुर आ साहसी बनि गेल छलीह।

ओ तऽ हल्ला करितथि आ चोर नौ-एगारह भऽ जाइतै मुदा ओहि चोर सभ केँ अपन हाथ सँ पाठ सिखाबऽ चाहैत छलीह जे सोचैत छल जे गोनू झाक अभाव मे हुनकर घर मे चोरी कऽ सकैत अछि।

पंडिताइन आँगन मे आबि मोंगरा उठा उठेलथि।  मोंगरा बहुत भारी छल। ओ ओहि कोठली मे आबि सतर्क ठाढ़ भऽ गेलीह।

चोर सभ सुरंग बना देने छल। जखन एकटा भीतर आयल तऽ पंडिताइन ओकरा मोंगरा कऽ जोरदार प्रहार ओकर कनपटी पर केली। चोर बिना कोनो आवाज केने ओतहि जमीन पर गुरिक गेल। दोसर आयल तऽ ओकरो संग सेहो एहने हाल भेल। तेसर आ चारिमक संग सेहो यैह हाल भेल।

तखन पंडिताइन दीप जरा कऽ देखलनि। ओ अपन काज मे तऽ सफल रहली मुदा एकटा गरबर तइयो भऽ गेल छल। मोंगरे के घातक हमला में चारू चोर के मौत भऽ गेल छल। एक बेर पंडिताइन डरा गेलिह। हुनका हाथसँ हत्या भऽ गेल छलनी। जँ कियो जनितथि तँ पुलिस आबितै आ गोनू झाक प्रतिष्ठा पर चोट पहुँचि जैतनि ।

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पंडिताइन बहुत हिम्मत देखबैत चारू मृत शरीर के एकटा कोन मे राखि माटि गूंइथ कुमल के बंद कऽ देलखिन। यद्यपि भरि राति ओ नहि सुतलीह । मृत शरीरक विषय मे सोचि ओ चिंतित छलीह जे कोना ओकरा सँ पाछु छुटत। भरि दिन बीत गेल आ सांझके गोनू झा आबि गेलाह। पंडिताइन जखन हुनका पूरा वृतांत कहली तऽ ओ चकित भऽ गेलाह।

अहाँ... अहाँ चोरकेँ मारि देलियैक।

माइर तऽ ओ अपने गेल छल। हम तऽ किछु औरे सोचने छलियै। हम सोचलौं जे बेहोश भऽ जेतै तऽ हाथ-पैर बान्हि कऽ पूरा गाम जगा कऽ ओकरा धुनाई करायब। आ इहो सोचल जे अहाँक बहादुरी के चर्चा पूरा गाम मे होयत। लोक कहत जे गोनू झा टा नहि, पंडिताइन सेहो कम नै छथि।

सोचने तऽ यैह छलियै मुदा किछु औरे भऽ भेल।  धन्य रहू जे भयंकर जाड़ अछि, नै तऽ एखन धरि लाश सँ दुर्गन्ध उठि गेल रहितै। आब समस्या इ अछि जे लहाश के कोना निपटायल जाय। यैह तऽ हमरा किछु नहि बुझि रहल छी। हँ, हम सोचय छि किछु। गोनू झा सोचय लगलाह।

हुनका बहुत देर धरि सोचइयो नै पड़लनि। योजना मोन मे आबि गेलनी। पत्नी जखन सुनलीह तऽ बलिहारी भऽ गेलीह। तहन हम तऽ जाइत छी ढोलकदासकेँ निमंत्रण देबय। गोनू झा बजलाह।

ढोलकदास एकटा पाखंडी आ क्रोधि लोभी साधु छल जे गाम-गाम घुमैत छल आ भरौराक जंगल मे एकटा पुरान मंदिर मे रहैत छल। गोनू झा हुनका लग पहुँचलाह आ हुनका प्रणाम केलनि।

की अछि ?  ओ बड़बड़ाइत अछि।

महाराज, खीर, पुरी आ रायताके संग हलूआ के भोजक कार्यक्रम अछि। एकर संग-संग पेरा आ लड्डू सेहो अछि। आ सौ रुपैया दक्षिणा सेहो भेटत।

ई सबटा सामान कतय अछि? ढोलकदासक आँखि चमकि गेलनि।

हमर घर महाराज। काल्हि ब्रह्म मुहूर्त मे हम अपन घर पर ब्रह्मा के पूजा क रहल छी जाहि मे एतेक भोजन बनत। संसार मे मात्र एकेटा ब्राह्मण पर  श्रद्धा अछि, तैं सोचलहुँ जे अहाँटा सं पूछब।

एहि मे की पूछबाक अछि? हम तैयार छी। ढोलकदास जल्दी-जल्दी बजलाह।

 मुदा प्रभु, किछु नियमक पालन सेहो करय पड़त।

 केहन नियम ?

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान केलाक बाद गाम जागय सं पहिने एकैस बेर गायत्री मंत्र के पाठ करय पड़त। गुप्त पूजा छैक। जँ ककरोसँ चर्चा नहि करब तखन अहाँ भोजनक लेल हमर घर पधारु, नहि तँ हम ककरो आनसँ पूछू।

अरे हम छी ने! ककरो आन के की जरूरत छै। गायत्री मंत्र के स्पष्ट आ पाठ्य पाठ सब के नै बुझल छैक। हमर तऽ अभ्यासे यैह छैक।

ताहि लेल हम अहाँ लग आयल छी।

जय हो! हम समय पर पहुँच जायब।

गोनू झा घुरि आयल आ पत्नीक सहयोगसँ एकटा मृतककेँ देबालसँ सटा कऽ ठाढ़ देलक।  राति भऽ गेलै आ दुनू गोटे सुइत गेला।

राति मे तीने बजे ढोलकदास दरबज्जा खटखटौलक।

पंडिताइन तुरन्त चूल्हा मे आगि जरेबाक लेल बैसि गेलीह। गोनू झा दरबज्जा खोलि ढोलकदास केँ भीतर केलखिन।

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हम अहिंके प्रतीक्षा कऽ रहल छलहुँ। गोनू झा बजलाह - कियो अहाँक संग तऽ नहि आयल। अहाँक  चेला बहुत रास अछि।

कियो नहि आयल, सब सुतल रही गेल। चेला के की करबाक छैक?

गोनू झा हुनका कोठली मे बिछल आसन पर अनलनि।

यौ महराज, ई दोसर व्यक्ति के अछि ?

केकरा लऽ अनलहुँ अहाँ ?

कतय ? के ? ढोलकदास घबरायल।

ओ ठाढ़ कोन मे। हमर पूजा नष्ट भऽ जाइतेँ।

ढोलकदास अपन लाठी उठौलक आ तामससँ में, कोनमे ठाढ़ आदमी के मारि देलक। ओ आदमी खसि पड़ल। दुष्ट, एतेक सावधानी बरतलाक बादो पाछु आबि गेल।

महाराज, मरि गेल बुझाइत अछि। गोनू झा डरसँ बजलाह।

मर गेल ? ओह! ढोलकदास नब्ज टटोलक तँ ओ स्तब्ध रही गेलाह।

ई केहेन अनर्थ कऽ देलियै महाराज। गोनू झा कानय लगलाह - हमर पूजा मे गड़बड़ी तऽ भेवे कैल, अपना लेल फाँसीक व्यवस्था कऽ लेलौं।

फाँसी ? हमरा... हमरा बचाउ गोनू झा। ढोलकदास कानि उठलाह।

अखन गाम सुतल अछि। एकरा उठा कऽ नदी मे फेकि आबू।

अहाँ ककरो नहि कहब।

राम राम ! हम एहन व्यक्ति छी ?

अहाँ बड्ड नीक लोक छी। ढोलकदास मृत शरीर केँ कान्ह पर उठा कऽ चलि गेलाह। गोनू झा दोसर लाश के ठाढ़ कऽ देलखिन। ढोलकदास घुरि एला।

आब जल्दिये पूजा आ भोजनक कार्यक्रम शुरू करू।

मुदा अहाँक सभ शिष्य एतय आबि गेल बुझाइत अछि। तखन ओही कोन मे कियो ठाढ़ अछि।  महाराज, अहाँकेँ बजेनाइये व्यर्थ रहल।

ढोलकदास देखलक जे कोन मे कियो तऽ ठाढ़ अछि। क्रोधसँ भैर उठलाह। फेर मारि गिरेलक आ कान्ह पर लऽ कऽ चलैत बनल। आब ओकर बुद्धि स्थिर रहैत। दिन निकलैत-निकलैत चरों लहाश नदी मे फेक एला आ हांफैत-हांफैत बैस गेला। महाराज, पूजाक समय तऽ बीति गेल। आब तऽ कोनो आन दिन शुभ मुहूर्त देखब। भोजन तैयार अछि, खाऊ।  गोनू झा बजलाह।

दक्षिणा सेहो गेल हाथ सँ। ढोलकदास चिचिया उठल।

भोजन परोसल गेल। दाल, चाउर आ गुड़।

जँ पूजा-पाठ नहि भऽ रहल तखन पकवान कोना बनत। गोनू झा स्पष्ट केलनि।

ढोलकदास मरल मोन सँ भोजन खेलनी। जाइत काल गोनू झा हुनकर भव्य भोज छीनि लेने छलाह।  ओकरा तऽ खैर सजा भेटि गेल। धन्यवाद तऽ गोनू झा के जे हुनका निश्चित फाँसी सं बचा लेलैन। गोनू झा आ हुनक पत्नी राहतक साँस लेलनि।

एकटा पैघ संकट सं पीछा छूटी गेल छल। पति-पत्नी दुनू मुस्कुरा उठलाह।

6 जुल॰ 2022

Gonu Jha Story

गोनू झा के ग्रह-दोष निवारण - मैथिली खिस्सा

मिथिला धरोहर

गोनू झा राजदरबार मे नियुक्त भऽ गेल छलैथ, सबटा गाँव गोनू झा पर गर्व कऽ रहल छल। गोनू गामक नाम जे रोशन केने छलैथ। सब गोनू झा के शुभकामना देलक। तहन गोनू झा सेहो बिचार केलैथ जे गाँव बला के अहि ख़ुशी मे एकटा भोजक आयोजन कैल जाय। पुरस्कार मे ढेर रास धन जे भेटल छलैन। 

अगिले दिन माँ भगवती के जागरणक आयोजन कैल गेल आ लगपासक गांव सं सेहो लोकसब भोज मे आयल। गोनू झा सब गोटेक स्वागत कऽ रहल छलैथ। सांझ भऽ गेल। सगा सम्बन्धी कऽ विदा करैत-करैत राइत भऽ सेहो गेल।

तइयो किछ लोग अखनो जाय बला छल। ओमहर  घुरिया आ ओकर चोरमंडली गामक बाहर एकटा खंडहर मे बैसल विचार-विमर्श कऽ रहल छल।

देखलहि गोनू झा कऽ कोना दिमागक दम पर धनो कमा अनलकै आ राजदरबार मे सेहो नियुक्त भऽ गेलय। दिमागे कऽ दम पर ओ चतुर सुजान आदमी हमारा सब सं अपन खेत तमा लेने छल। ओ दिन कऽ याद कऽ हमर खून खौल उठैत ऐछ। 

हमर वश चलय तऽ ओकरा एहन सबक सिखायब जे सबटा चतुराई बिसैर जेतय। मुदा की करू। चोरी के आलावा तऽ हम किछ कओ नै सकय छी। त चोरीये करैत छी। आब तऽ ओकरा घर पर रुपया पैसो खूब छैक।

आय मौका सेहो छै। गोनू झा काइल सगरो राइतक जागल छै आ आय पूरा दिन सेहो भागदौड़ मे रहल छै। नीक जंका थाकल हेतै। जँ की घोड़ा बेच कऽ सुततै। कनबी सावधानी सं हम सब अपन काज कऽ सकैत छी। घुरिया कहलक। तऽ चल फेर।

आखिर सब ओतय सं चैल पड़ल। गाँव मे घुसल तऽ साबटा गाँव निसबद छल मुदा गोनू झाक घर लालटेन अखनो जैर रहल छल। चोर कहैत ऐछ 

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थोड़बे काल मऽ सूइत जेतै, ताबे चैल कऽ गोनू झाक फुलवारी मे नुका जाइत छी। ओतय सं ओकरा घरक अबाजो सुनाय दैत छै। सब ओहि फुलवारी मे नुका रहल।

खिछे देर बाद गोनू झा आ एकटा और व्यक्ति घर सं बाहर निकलल। ओय व्यक्ति कऽ घुरिया आ ओकर  साथी चिन्है छल। ओ बगलक गामक मास्टर गणेश झा गोनू झाक परममित्र छल।

गोनू झा किछ दूर धैर जा कऽ अपन मित्र कऽ विदा केलैथ आ घरक दिस लौटला। अचानक ओ ठिठैत गेलाह। हुनका फुलवारी मे हलचल बुझेलैन, फेर ओ दरबाजा पर पहुंचलैथ।

गोनू झा जोर सं बाजय छैथ, हे...यै सुनय छीयै। आब सब चैल गेल। पंडित जी कैह गेलैथ हन जे ग्रहदोष निवारण तहने करीहं जहन घर दुनु परानी टा रहिए। 

गोनू झाक कनियाँ अंदर सं नीपय बला मटीक ढेर सं बहुत रास ढेला खोइछा मे लऽ कऽ गोनू झा लग उझैल देलथि। गोनू झा ढेला उठा-उठा कऽ फुलवारी मे फेंकय लगला, संगे संग अपन मंत्र सेहो पैइढ़ रह छलैथ।

चाँद चांदनी चंद्र चकोर। बधा हरि लेऊ माखन चोर।

ओमहर घुरिया आ ओकर चोर मण्डली मुसीबत मे छल। बेचारा बिना हिलने-डोलने ढेलाक शिकार भऽ रहल छल। 

रहय दियौ, आब भ गेल! पंडिताइन जोर सं बजली। 

हे.. ? अखन त पचासो टा नै भेलय। जा कऽ ढेला लाऊ। 

हमरा बुते नै हैत। लागय यऽ चक्कर आबि जायत। हम जाय छी सुतय लऽ !

सुतय लऽ ! यै अहाँक दिमाग खराब ऐछ। घर पर ग्रहक वकवृष्टि छै आ अहाँक सुतय के पड़ल ऐछ। अहाँ ढेला आनय छि या नै।

हम नै आनब। हमहि बुझहै छि जे कोना ठाड़ छि।

देखु, हमर दिमाग खराब नै करू। हमरा तामस आयत तऽ हमर हाथ उइठ जायत आ ओ अहाँक सेहत लेल नीक नै हैत। 

फेर त गोनू झा आ पंडिताइन मे राइत ठैन गेलनी। दुनु गोटे जोर-जोर सं झगड़य लागलैथ। एतेक हल्ला भेल जे गाम भरिक लोक जाइग गेल। लोक सब  दौड़-दौड़ कऽ हुनका घर आयल। की भेल झा जी ? अतेक राइत कऽ किया लड़य छीयै ?

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गोनू झा कहै छैथ - ग्रहदोष के लेल पंडित जीक कहल अनुसार एक सौ आठ ढेला चन्द्रमा दिस फेक रहल छलौं। अखन पचासो टा ढेला नै अनलक आ  कहय ऐछ हमरा बसक नै ऐछ। आब कनि पुछियौ जे ओ मात्र एक सौ आठ ढेला आनबा मे थाइक गेलखिन आ हमर पियरगर भाईसब फुलवारी मे बैसल सबटा ढेला अपन पीठ पर खेबाक लेल बैसल छै। 

घुरिया आ ओकर संग्गी साथी सन्न रही गेल।

अगर हम झूठ बाजय छि तऽ फुलवारी मे बैसल ओय लोग सं पूछहि जे कतेक हिम्मत सं ढेलाक माइर सैह रहल छै।

घुरियाक मण्डली भागय लागल मुदा गाँव बला धैर दबोचलक आ एतेक माइर मरलाक जे नानी मोन पैर गेलय। अगले दिन ओकरा सब कऽ पुलिसक हवाला कऽ देल गेल।

तहन पंडिताइन बुझलीह जे हुनकर पति कुनो भी काज अकारण नै करैत छैथ।  पंडिताइन अपन व्यवहार लेल गोनू झा सं क्षमा मांगली त गोनू झा हँसैत रही गेला।

14 अप्रैल 2022

Gonu Jha Story

गोनू झाक मैथिली कहानी संग्रह | Gonu Jha Stories Maithili

मिथिला धरोहर

गोनू झा के जन्म दरभंगा जिलाक अन्तर्गत 'भरवाड़ा' गाम मे आय सं लगभग आठ सौ वर्ष पूर्व (13 वीं शताब्दी) एकटा गरीब किसान परिवार मे एहन समय भेल छलनी जहन धर्मांधता आ रूढ़िवादिता के बोलबाला छल। बड़का जमींदार राजा कहाबैत छल। दरबारि के हाथ मे शासन सं प्रजा त्रस्त छल। चापलूस दरबारिक चंगुल सं प्रजा के बचेबा मे जतय गोनू झा के महत्त्वपूर्ण योगदान छलनी, ओतय ओ साधुक भेश मे ढोंगि सं सेहो लोहा लेलैथ। मिथिलांचल मे गोनू झा के रोचक कथा जन-जन के जीह पर ओहि प्रकार विद्यमान अछि, जाहि प्रकार कवि कोकिल विद्यापति जी के सुमधुर गीत सभक कंठहार बनल अछि। एतय गोनू झा के सभ तरहक कहानी के बड़का संग्रह अछि, एक बेरा जरूर पढ़ब।

गोनू झा के रोचक कथा - गोनू झाक कहानी

👉 हरेक मास गोनू झाक एकटा कहानी नबका किस्सा आबैत अछि!

13 मार्च 2022

Gonu Jha Story

मैथिली खिस्सा : गोनू झा के शास्त्रार्थ

मिथिला धरोहर

मिथिलाक राजदरबार मे एक दिन कशी सं पढ़ल एकटा विद्वान आयल।

मिथिला नरेश ओकर समुचित स्वागत केलैथ आ ओकरा आसन देल गेल। विप्रश्रेष्ठ ! राजा कहलैथ - अहाँ एहन विद्वानन चरण हमरा राज्य मे पड़ल इ हमरा लेल बड़ सैभाग्यक बात छैक।

आब हम अहाँसं प्रार्थना करैत छी जे किछ दिन हमर आतिथ्य स्वीकार करू आ अपन ज्ञान सं हमरा आ हमर प्रजा के लाभान्वित करू!

राजन विद्वान ब्राह्मण बाजल- हम काशी के प्रसिद्ध गुरुकुल सं शिक्षा प्राप्त छी। समस्त वेद, शास्त्र आ पुराण हमरा कंठस्थ ऐछ। अहि समय हम एकटा विशेष प्रयोजन सं यात्रा पर छी।

हम काशी सं पूर्ण शिक्षित भऽ के निकललौ त हमरा मार्ग मे एकटा कथावाचक विद्वान, सभाक बीच रामचर्चा करैत भेटल। हम हुनका सं तीनटा प्रश्न कऽ देलौं। हुनका सं एको टाक जवाब नै देल गेलैन। ज्ञान तऽ हुनकर सीमित छलैने, तामस हुनकर असीमित छलैन।

मिथिला नरेश भरल सभा मे क्रोधित भऽ उठलाह - हे विद्वान, हम मानलौ जे अहाँ लग ज्ञानक प्रचुर भंडार ऐछ मुदा एकर अर्थ इ नै जे अहाँ सृष्टि के सर्वश्रेठ विद्वान छी। अहि पृथ्वी पर एक सं एक विद्वान छैक। जाहि दिन अहाँक स्वयं सं उत्तम भेटत ओहि दिन अहाँक ज्ञान चूल्हा फुकैत नजैर आयत। 

तऽ ठीक छै, राजन्, हम समस्त मिथिला राज्यक विद्वान के शास्त्रार्थ लेल ललकाइर रहल छी। अगर हम पराजित भऽ जायब त मिथिला नरेश के दास बैन रहब आ यदि हम विजयी रहब तऽ मिथिलाक सर्वोच्च सम्मान हमरा भेटत।

मिथिला नरेश के अपन राज्यक विद्वान पर विश्वास छलैन। चुनौती स्वीकार कऽ लेल गेल। 

शास्त्रार्थ शुरू भऽ गेल। दरबार मे उपस्थित विद्वान बारी-बारी सं शास्त्री सं भिड़ल। मुदा शास्त्री के ज्ञानक समक्ष कियो नै टिकल। आ दोसरो दिन सेहो शास्त्री के कियो पराजित नै कऽ सकल। फेर तऽ महाराज सगरो राज्य मे ढोलहा पिटबा देलैथ जे कियो ओहि शास्त्री के पराजित करत ओकरा भरपूर पुरस्कार सहित दरबार मे विशिष्ठ दर्जा प्राप्त हैत।

बात गोनू झाक गाँव मे सेहो पहुंच गेल।

यउ हमरा गामक विद्वान त गोनू झा छथिन। हिनका पर मां काली के विशेष कृपा छैन। इ ओहि शास्त्री के हरा कऽ मिथिलाक सम्मान बचा सकैत छैथ। एहन अवसर बेर-बेर नै आयत।

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फेर सबटा गाँव मिल कऽ गोनू झाक घर पहुंचल। आ गोनू सं शास्त्रार्थ करबाक लेल आग्रह केलक। गोनू झा माइन गेलैथ।

फेर ओ मिथिलाक राजधानी चैल पड़लाह। दु दिनक यात्राक उपरांत राजधानी जा पहुंचलाह। ओ पहरेदार के अपन पधारबाक प्रयोजन बतेलैथ। दरबार मे सूचना भेजल गेल। राजाक आज्ञा पर गोनू झा के अंदर भेजल गेलैन। अखने-अखने शास्त्री एकटा विद्वान के पराजित केने छल आ अपन जीत पर बड़े मोहक ढंग सं मुस्कुरा रहल छल।

गोनू झा एखने-एखने पहुंचल छलैथ।

महाराज के जय हो। हमर नाम गोनू झा ऐछ। हम अहाँक प्रजाक एकटा हिस्सा छी। अहाँक कृपा सं हमरा सेहो थोड़-बहुत ज्ञान ऐछ आ एहि ज्ञानक विश्वास पर हम एहि परमविद्वान ब्राह्मण सं शास्त्रार्थ करबाक आज्ञा चाहैत छी। 

राजा साधारण भेशभूषा बला देहाती के देखलैथ आ  धीरे सं स्वीकृति दऽ देलैथ। 

गोनू झा, शास्त्री के सोंझा बला आसन पर पलथा माइर बैस गेलैथ।

शास्त्री महाराज मुस्कुरायल। हुनक मुस्कान मे उपहासक भाव छल जेना कहि रहल होय जे - केहन केहन गेला तऽ मोछ बला एला।

तऽ शास्त्री जी अहाँ छीयै ओ प्रकांड विद्वान जे मिथिला के शस्त्र सं नै शास्त्र सं पराजित करबाक दुस्साहस कऽ रहल छीयै।

गोनू झा बाजलैथ।


शास्त्रार्थ के लेल तैयार भऽ जाउ जवान। शास्त्री तिलमिलायल।

हम तऽ तैयार छी भगवन! गोनू झा मुस्कुरेला।


तऽ फेर हम प्रश्न करूं ?


विद्वान महोदय। गोनू झा बाजलैथ - अहाँ तऽ चाइर दिन सं प्रश्न कए रहल छी विद्वान केवल प्रश्न टा नै करैत ऐछ बल्कि उत्तर सेहो दइत अछि। 


अहि बेरा तऽ शास्त्री औरो हरबरा गेलाह। मिथिला नरेश अनायासे थोपरि बजा उठलाह।


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तोहर की अभिप्राय छौ ? शास्त्री पूछलैथ


महोदय, हम अहाँसं प्रश्न करबाक आज्ञा चाहैत छी। अय मे आज्ञा केहन! महाराज बीच मे कहलैथ - शास्त्रार्थ मे प्रश्न आ उत्तर टा तऽ होइत अछि। 


आब शास्त्री जी शंकित भऽ उठलाह। एखन धरि ओ प्रश्नने टा केने छलैथ। आय पहिल बेरा हुनका सोंझा प्रश्नकर्ता आयल छल।


हं तऽ महोदय, हमर पहिल प्रश्न ऐछ जे बुद्धि के प्रकाट्य कतए छैक ? साधारण आ बचकाना प्रश्न छैक। मस्तिष्क सं बुद्धि प्रकट होइत ऐछ। 


नै महाराज बुद्धि के प्रकाट्य ठोर सं होइत ऐछ। गोनू झा बजलाह- यदि ठोर नै खुजत तऽ बुद्धि के प्रकटन कोना हैत।


दरबार मे थोपरिक अबाज गूंइज उठल। शास्त्री जी के मुंह उतैर गेलैन। 


महोदय, हमर दोसर प्रश्न ऐछ जे बुद्धि के आहार की छैक ?


शास्त्री जी चकरा गेला, बुद्धि कहिया सं खाय लागल। इ कोन बेतुका प्रश्न छैक। बुद्धि के पेटे कतए होइत छैक। 


नै महोदय, तइयो भी बुद्धि समय के खाइत ऐछ। समये बुद्धि जे आहार होइत ऐछ। अहाँ चाइर दिन सं बुद्धिक प्रयोग कऽ रहल छी तऽ की बुद्धि चाइर दिनक समय नै खेलक। गोनू झा बजलैथ।


आब हमर अंतिम प्रश्न ऐछ जे हमर बुद्धिक मूल्य की ऐछ ?


शास्त्री जी चकरा कऽ अपन माथा नोचय लगला। एहि सं स्पष्ट छल जे अहि प्रश्नक सेहो कुनो उत्तर हुनका लग नै छल। बुद्धिक कियो मूल्य कोना आंइक सकैत ऐछ आ ओहो दोसरक बुद्धि कऽ।


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महाराज, आज्ञा होय तऽ हम अपन अहि प्रश्नक उत्तर दरबारक साधारण सन दरबारी सं दियाऊं ताकि शास्त्री जी के इ भ्रम नै रहैन जे मिथिला राज्य मे विद्वता के कुनो कमी छै।


अति उत्तम! राजा प्रसन्न भ उठलैथ - आज्ञा ऐछ। गोनू झा वैह प्रश्न एकटा साधारण दरबारी सं केलैथ।


महाराज, हिनकर बुद्धि के मूल्य त आय बच्चा-बच्चा जानैत ऐछ। दरबारी कहलक - इ अपन बुद्धि सं शास्त्री जी के इ भ्रम तोइड़ देलैथ जे हिनका सं बड़का विद्वान कियो नै ऐछ।


आब इ विजेता छैथ आ विजय कऽ मूल्य सबटा पुरस्कार कऽ दरबार मे विशिष्ट पद हिनका प्राप्त हैत।


ओमहर शास्त्री जी उइठ अपन पोथी-पत्रा समैट कऽ जेबाक लेल तैयार भेलैथ त गोनू झा हाथ जोइड़ कऽ मार्ग रोकलैथ।


शास्त्री जी, अहाँ परमविद्वान छी। हमरा इ स्वीकारबा मे कुनो संकोच नै जे हम ज्ञान सं नै, नहीं, तुक्क सं अहाँक पराजित केलौ। अतः अहाँ मोन मे ग्लानि नै राखब। अहाँ हमर पूज्य छी। शास्त्री जी के आँइख खुइज गेलैन। गोनू झा विद्वान सेहो छलैथ आ सज्जन हृदय सेहो।


गोनू झा मिथिला दरबार के सम्मानित पद पर आसीन भेलैथ। हुनका महाराज इहो सुविधा प्रदान केलैथ जे ओ जहन चाहें दरबार आबि सकैत छैथ।आ ढेर रास पुरस्कार लऽ कऽ गोनू झा आपस अपन गाँव आबि गेलैथ।


खिस्सा समाप्त भेल!

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