बुधवार, 25 अगस्त 2021

बाप केँ एना ठकलनि गोनू झा : गोनू झा के रोचक बालकथा

गोनूक पिता एक दिन कहलखिन “रे गोनू! दुनियामे सबकेँ ठकलें, मुदा बाप तोहर बापे रहि गेलौक।”

गोनू हँसैत कहलखिन “बाप तऽ बाप होइते छैक, मुदा कला मे बेटा सेहो बापोक बाप बनि जाइत छैक।”

पिता पूछलखिन “कि मतलब?”

गोनू कहलखिन “रुकू! समय पर कहब।”

गोनूक दिमाग जोर-जोर सऽ योजना बनबय लागल आ किछुवे काल मे गोनू पिताक सोझाँ एला आ कहला जे कनेक सासूर सँ भेल अबैत छी, पिताक स्वस्तिवचन लैत गोनू सासूर दिस गेला आ बाटे मे नह केस कटा लेलनि। सासूर पहुँचिते ससूर पूछलखिन जे “कि बात एना केस कटौने आइ अचानक एतय पाहुन?”

गोनू हुनका कहलखिन जे “दु:खक समाचार! पिता नहि रहलाह। बस नह-केश करेला उपरान्त अपने लोकनिकेँ काल्हि सँ श्राद्ध-कर्मके भोजक आमन्त्रण लेल आयल छी। आब हम वापस चलब!” ससूर महाराज बड दु:ख प्रकट कयलाह आ ऐगला दिन आबय लेल मनलाह।


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एम्हर घंटो नहि बीतल छल कि गोनू केस-तेस कटौने पिताक सोझाँ ठाड्ह भेलाह… “हौ बाबु! ई कि भेलह?”

गोनू कहलखिन – “धू! सभटा गुर-गोबर भऽ गेल। माछो लऽ के गेल रही से बुझू जे फेकय पडि गेल। ससूर महाराज स्वर्गवास भऽ गेलाह। ओम्हर आइये नह-केश छलैक से ओतहि नहो-केश करबैत सीधे वापस आबि गेलहुँ। माछो चुपचाप नौए केर घर पठबा देलियैक। बुझू, पहिले कोनो नोतो-पता नहि। एबो केना करत? सार एसगरुआ आ आब कि गाम मे कियो अछि। सभटा तऽ दिल्ली-पैन्जाब धऽ लेलक अछि।”

पिताक एना समैध केर देहावसानक खबड़ि सुनि बड़ा तकलीफ भेलनि। शोक प्रकट करैत बेटाक मुँहें कौल्हका-परसूका काज मे भाग लेबाक लेल निमंत्रण सुनि ओहि काज मे भाग लेबाक लेल सोचय लगलाह।

काल्हि भने पिता गाम सँ ससूरक श्राद्धमे सहभागी बनबाक लेल आ ओम्हर सासूर दिस सऽ ससूर गोनूक पिताक श्राद्ध मे भाग लेबाक लेल चलि देलनि। गोनूक चक्र-चाइल न पिता भाँपि सकलाह आ नहिये हुनकर ससूर केँ एहेन कोनो तरहक भान भेलनि।


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बाट मे दुनू गोटा एक दोसराक स्मृति केँ सुमिरैत चलल जा रहल छलाह। आ कि एकटा चौबटिया पर दुनू गोटा केँ संयोगवश दूरे सँ एक दोसरा पर नजरि पड़ैत छन्हि। वृद्ध लोक, चश्मा ऊपर-निचाँ कय माथ पर जोर दैत चिन्हबाक प्रयत्न दुनू दिशि सँ बराबर भऽ रहल छल। कतबो आँखि मिरैत छथि जे ई कोना संभव छैक जे मरल लोक सोझाँ पडि रहल छथि… लेकिन वास्तविकता तऽ गोनूक खेल छल… एक दोसरकेँ देखैत “भूत-भूत” चिचियैत दुनू बेहाल छलाह, एहि सँ पूर्व कि बताह बनि हृदयाघात केर नौबत अबैत, गोनू सोझाँ प्रकट भेलाह आ पिता सँ कहलखिन जे “कलामे बेटा बापोक बाप बनि सकैत छैक। अहाँ दुनू गोटा जिन्दे छी आ ई हमर खेला छल।”

संकलन : प्रवीण नारायण चौधरी

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