शुक्रवार, 5 अप्रैल 2024

Jur Sital 2027 : मिथिलाक परंपरागत पावैन जूड़ शीतल, कोन कारण सँ मनायल जाइत अछि इ पर्व आ की छैक एकर महत्व!

Jur Sital Kab Hai 2027 Me, Jur Sital Festival Date
भारतीय पावैन - तिहार के वैज्ञानिक चिंतन के प्रत्यक्ष करै बला मिथिलाक लोकपर्व जूड़ शीतल 15 अप्रैल, (2027) रवि दिन ( सतुआइन 14 अप्रैल ) के मनायल जा रहल अछि। पावैन मनेनिहार परिवारक चूल्हा के आय लॉकडाउन रहैत अछि। पूरा मिथिलांचल के यैह हाल देखबाक लेल भेटत अछि। अहि पर्व के शुरुआत बड़- बुजुर्ग द्वारा अपन परिजन के माथ पर आय भोरे शीतल जल द ओकरा जुड़ेला सँ होइत अछि। गरमी बढ़ै के संगे - संग बेसी सँ बेसी जल सेवन दिस ध्यान खींचय बला  परंपराक संग कादो-माटि (कीचड़ -मिट्टी) खेलल जाइत अछि। लोग एक-दोसरक देह पर कादो-माटि लगाबैत अछि। ग्रीष्म-ऋतु में माटिक के लेप सँ कारगर रौद'क कारण बढ़य बला त्वचा रोग सँ बचाब लगेबाक संकेत भेटय अछि।

जुड़ शीतल 2027 तिथि - 15 अप्रैल 2027

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जूड़शीतल के दिन मिथिला मे चूल्हा नै जरायल जाइत अछि। त्योहार के एक दिन पूर्व यानी सतुआनी के राइत बनल बड़ी-भात के प्रसाद अपन ईश के भोग लगा लोग ग्रहण करैत छथि। संगेह बड़ी-भात कनि बेसी बनायल जाइत अछि, जहिसे अगिला दिन इ भोजन के लेल पर्याप्त होय। यैह कारण छैक जे एकरा बसिया पबिन सेहो कहल जाइत अछि। चूल्हा पर दही, समार, बसिया बड़ी आ भात चढेबाक परंपरा अछि।

Jur Sital Date 2027 - 15 April 2027

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जलसंचित करबाक भेटय अछि संकेत : पावैन सं एक दिन पहिले राइत मे प्राय: सब बरतन मे पाइन भैर लेल जाइत अछि। इ गरमी मे पाइनीक किल्लत के देखाबैत जल संचित रखबाक दिस संकेत दइत अछि। दोसर दिस बाढ़िक बाद मिथिला क्षेत्र मे सर्वाधिक तबाही अगलगी सं होइत अछि। अहिसे बचाबाक लेल पाइन भैर के राखय आ दिन मे चूल्हा नै जरेला सं सेहो लोग जोइर के देखैय अछि। 
बाट पर छिटल जाइत पाइन :
बहिन सब बाट पर पाइन पटा भाइक आगमन के बाट शीतल करैत छथिन। इ अहि मौसम मे गरदा (धूल) सं बचबाक माध्यम बनैत अछि। बहुते ठाम आइयो जूड़ शीतल सं प्रारंभ  बाट पर पाइन छिटबाक क्रम पूरा महीना धरि चलैत अछि। 
गाछ-वृक्ष मे पाइन देबाक परंपरा : जूड़ शीतल मे छोट गाछ सं ल के बड़का वृक्ष धरि मे पाइन देनाय, अहर्निश प्राण-वायु (ऑक्सीजन) प्रदान करय बला तुलसी के गाछ पर पनिसल्ला देबाक चलन अछि। इ बदलैत मौसम मे वनस्पति संरक्षण के दिस सेहो ध्यान खींचैत अछि। 

5 टिप्‍पणियां:

  1. बड्ड निक लागल पेढके।

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  2. परंपरा को बचाने की जरुरत है, फोटो ???

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  3. बहुत बढ़िया लागल इ पाबेन हमरोमन होइया जे गौं रहते ता ऐ पाबेन के आनंद लितो ! जय मिथला जय मैथिल

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  4. अति सुन्दर लेखन

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