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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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20 मई 2022

आब दुख सहलो ने जाय लिरिक्स - Aab Dhukh Sahlo Ne Jaay Lyrics

आब कतेक दुख सहबै यौ बाबा, सहबै यौ बाबा
आब दुःख सहलो ने जाय
कहब कतेक हम अपन बिपतिया, अपन बिपतिया,
आब दुःख सहलो ने जाय - 2

दुःख में जन्म भेल, 
दुःख ही निभाओल - 2
शुख के दरस नही भेल
शुख के दरस नही भेल
खोलू नयन कनि ताकू महादेव, ताकू महादेव
आँखि के नोर नै सुखाय
आब दुःख सहलो ने जाय

आहे, नाथ नाथक कहबै छी अहाँ, कहबै छी अहाँ
हमरो पर दियौ ने धियान
हमरो पर दियौ ने धियान
चरण पकैर हम बैसल छि दानी, बैसल छि दानी
लियौ ने कोर लगाय
आब दुःख सहलो ने जाय

सबहक शुधि अहाँ लय छि यौ बाबा, 
लय छि यौ बाबा 
हमरा बनेने छी आन, हमरा बनेने छी आन
आहाँ के अछैते कतेक हम कानी, कतेक हम कानी
दियौ शिव दरश दिखाय
आब दुःख सहलो ने जाय

आहे, कानी बिपैत हम आहाँ सं कहै छी,
आहाँ सं कहै छी,
हम छी शरण मे ठार
हम छी शरण मे ठार
हमरा पर बाबा आबो बिचारु, आबो बिचारु
लियौ शरण मे लगाय
आब दुःख सहलो ने जाय
आब दुःख कहलो ने जाय
आँखि के नोर नै सुखाय
लियौ शरण मे लगाय
दियौ शिव दरश दिखाय

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