अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
20 मई 2021
चन्दा जनि उग आजुक राति | विद्यापति
चन्दा जनि उग आजुक राति,
पिया के लिखिअ पठाओब पांति।
साओन सएँ हम करब पिरीति,
जत अभिमत अभि सारक रिति।
अथवा राहु बुझाओब हंसी,
पिबि जनु उगिलह सीतल ससी।
कोटि रतन जलधर तोहें लेह,
आजुक रमनि धन तम कय देह।
भनइ विद्यापति सुभ अभिसार,
भल जल करथइ परक उपकार।
रचनाकार : विद्यापति
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