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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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4 जून 2017

हम साँझक लघुदीप प्रिय - मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

मधुमय प्रकृतिक स्वर्णिम आंगन, हम साँझक लघु दीप रे,
टेमी बिना सिनेहक जडइछ कोना सुनायब गीत रे।

अछि निस्सीम गगन आगाँ मे 
पाछाँ क्षितिजक कोरे,
बीचे बाट बटोही थाकए देखए ओर न छोरे। 
तृषित बेकल जल ताकय रहि रहि पाबए भोरक शीत रे।

जीवन गति बढले जाइत अछि, 
अनुभव रहल अधूरे।
नित दिन नव नव पथिक अपरिचित,
भेटि रहल समतूरे। 
शान्त लखए सब अपने मग मे, हमर होयत के मीत रे।

आगां ज्योति बढल जाइत अछि, 
पाछाँ रहय अन्हारे। 
टेमी आध, बाट अछि पलगर, 
सरिता कथा पहाड़े।
श्रम सुविवेक सुकाज बिना नहि भेटए मोतिम सीप रे।

स्नेह सुधा हम ताकल सदिखन, 
किन्तु न पाओल पारे। 
जँ-जँ डेग थाह दिस बढइछ,
भेटि रहल मंझधारे।
अम्ब अहाँक अशेष अमिय बल अनुखन बरय "प्रदीप रे"।

रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

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