कृष्ण कृष्ण कऽ द्रोपदी करथि रोदनाकृष्ण अहाँ बिना लाज बांचत कोनासभा बिच द्रोपदी करथि रोदनाकृष्ण कनिएक चीर बढ़ाउ अहाँदुष्ट कौरव के क्यो नहि देलक मनापांचो पाँडव सहित चलू वन रहनाकर्म विधान लिखथि विधनापांचो पाँडव सँ शकुनि केलथि वंचना
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