अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
27 जन॰ 2017
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चहु दिस जय जयकार गूजल धरती गगन बिच लिरिक्स - सीता जन्म सोहर
चहु दिस जय जयकार गूजल धरती गगन बिच लिरिक्स - सीता जन्म सोहर
Chahu Dis Jai Jaikaar Gujal Dharti Gagan Lyrics
चहु दिस जय जयकार गूजल धरती गगन बिच
लेल शक्ति अवतार बाजन बजाय विविध विधि
गाबथि मंगल गीत नगरनारि, सुरवृन्दवधू
उत्सव परम पुनीत करथि निछावर वसन मणि
उमड़थि जनसमुदाय रहि-रहि दर्शन हेतु सभ
रानी लेथि नुकाय, नजरि न लागय दाइके ।।
बचिया के कोरा लेने नाचे गाबे रनिया
आइ सखि पूर भेल शिवक वचनिया ।।0।।
छल न भेरास जिया धिया एहो भेटती
स्कल निराशा दुःख शोक मोरा मेटती
विधना सहाय भेल पुरल लगनिया ।।
जनक निहारय मुँह गद्गद् छतिया
झहरय नोर मुँह आबय नहि बतिया
रामजी जमाय हेता धिया हेती कनिया ।।0।।
केओ नहि जानय जग विधिक विधान की
अवधमे राम भेला मिथिलामे जानकी
मिथिला अवध यश गाबय सारी दुनिया ।।।।
बेटी ओ जमाय देखि रहब मगनमा
के के नहि अओता आब हमरा अंगनमा
लतिका सनेह में सनेह के सुमनिया ।।।।
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