Janak Sunyana Sakal Sudhi Bisaral Lyrics
जनक सुनयना सकल सुधि बिसरल,
आनन्द मगन विभोर माइ हे।
पुलकित तन सभ अंग शिथिल भेल,
अँखियास झहरय नोर माइ हे।
देखि दशा विधि-हरि-हर नाचथि,
जनु शशि पाबि चकोर माइ हे।
बाग वसन्तक जनु जनमंडल,
ताहि बिच जन-मन मोर माइ है।
बरसि सुमन सुर सेन सजाओल,
जय जय धुनि चहु और माइ है।
लतिकासनेह रानी लपकि उठाओल,
पुनि-पुनि चुमि चुमि ठोर माइ हे।
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