शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

जनक सुनयना सकल सुधि बिसरल - सीता जन्म सोहर लिरिक्स Janak Sunyana Sakal Sudhi Bisaral

Janak Sunyana Sakal Sudhi Bisaral Lyrics

जनक सुनयना सकल सुधि बिसरल, 
आनन्द मगन विभोर माइ हे। 

पुलकित तन सभ अंग शिथिल भेल, 
अँखियास झहरय नोर माइ हे। 

देखि दशा विधि-हरि-हर नाचथि, 
जनु शशि पाबि चकोर माइ हे।

बाग वसन्तक जनु जनमंडल, 
ताहि बिच जन-मन मोर माइ है। 

बरसि सुमन सुर सेन सजाओल, 
जय जय धुनि चहु और माइ है। 

लतिकासनेह रानी लपकि उठाओल, 
पुनि-पुनि चुमि चुमि ठोर माइ हे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

अपन रचनात्मक सुझाव निक या बेजाय जरुर लिखू !