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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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22 सित॰ 2018

आरती जनक नन्दिनी सीते लिरिक्स - श्री किशोरीजी आरती गीत

Aarti Janak Nandani Site Lyrics

आरती जनक नन्दिनी सीते, 
आरती जनक नन्दिनी सीते। 
कोटि यज्ञ तप भूमि सुता, 
मिथिलाक माटि बनि गेल पुनीते।
आरती .............. 

महालक्ष्मी श्री जगदम्बा, 
जन - जनहित अवतरलहुँ अम्बा,
धन्य कयल कण - कण अवनी के। 
आरती ............ 

राम वाम दिस कयल निवास, 
जीव सदा अपने घर आसे,
साधु संतजन हृदय समीपे। 
आरती ............ 

दया अहँक जकरा अछि भेटल, 
से सभ दुर्गुण अपन समेटल, 
सिद्धि सकल मिथिलाक महीके। 
आरती .............

अहिंक दया पाओल बजरंगी, 
राम भक्तिमय, भक्तक संगी, 
से सभ सद्गुण देल अहीं जे। 
आरती ............ 

सिया राममय सभ जग जानी, 
करी प्रणाम जोरि युग पाणी, 
पंक्ति पुनीत थिकनि तुलसी के। 
आरती .. ........

वाल्मीकि कवि कहल मैथिली, 
अवधवधू, मिथिलाक थिकहुँ घी,
पुत्र प्रदीपो चरण समीपे। 
आरती जनक नन्दिनी सीते! 
आरती जनक नन्दिनी सीते!
                                           
गीतकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)


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