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शुक्रवार, 19 दिसंबर 2025

प्रगटी सिया सुखदैया लिरिक्स, सीता माता भजन - Prakati Siya Sukhdaiya Lyrics

प्रगटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया, 
बाजे बधैया हो बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर में बाजे बधैया 

मखमली कर्षत औचक प्रगट भई, 
मख महि कर्षत औचक प्रगट भई, 
हरषे लोग लुगैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया

धन धन जनक जनकपुर धरनी, 
धन धन जनक जनकपुर धरनी, 
धन्य सुनैना मैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया 

धन्य धन्य भाभी सिद्धि प्यारी, 
धन्य धन्य भाभी सिद्धि प्यारी, 
धन लक्ष्मीनिधि भैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया

बाबा लुटावत हाथी यूं घोडा, 
बाबा लुटावत हाथी यूं घोडा, 
कनक वसन मणि गैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया

मैया लुटावे वसन आभूषण, 
मैया लुटावे वसन आभूषण, 
हिरा अशर्फी रुपैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया

अंगना में अलिगन नाचत गावत, 
अंगना में अलिगन नाचत गावत, 
नाचे ता थई ताता थैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया

स्वस्तिक पाठ पढ़त पण्डित जन
स्वस्तिक पाठ पढ़त पण्डित जन
द्वारे बजट शहनाईया
जनकपुर में बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर में बाजे बधैया 

निरखि निरखि पुरनारी ल्लीमुख
निरखि निरखि पुरनारी ल्लीमुख
पुनि पुनि लेत बलैया
जनकपुर मे बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया 

चिर जीबो श्री जनक लाडली
चिर जीबो श्री जनक लाडली
खेलो जनक अंगनईया
जनकपुर मे बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया 

वर अनुरूप मिले अविनाशी, 
वर अनुरूप मिले अविनाशी, 
रहे शिव शंकर सहैया, 
जनकपुर में बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर मे बाजे बधैया

अचल सुहाग भाग परिपूरण, 
अचल सुहाग भाग परिपूरण, 
अचल रहे प्रभु तैया, 
जनकपुर में बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर में बाजे बधैया 

तुम्हरी कृपा से नारायण की, 
तुम्हरी कृपा से नारायण की, 
पार लगेगी नैया, 
जनकपुर में बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर में बाजे बधैया 

प्रगटी सिया सुखदैया,
जनकपुर में बाजे बधैया, 
बाजे बधैया आज बाजे बधैया, 
प्रकटी सिया सुखदैया, 
जनकपुर ने बाजे बधैया 


बुधवार, 19 नवंबर 2025

श्री जानकी जन्म स्तुति - Shri Janaki Janm Stuti (Bhai Pragat Kumari)

भई प्रगट कुमारी भूमि-विदारी
जन हितकारी भयहारी ।
अतुलित छबि भारी मुनि-मनहारी
जनकदुलारी सुकुमारी ॥

सुन्दर सिंहासन तेहिं पर आसन
कोटि हुताशन द्युतिकारी ।
सिर छत्र बिराजै सखि संग भ्राजै
निज -निज कारज करधारी ॥

सुर सिद्ध सुजाना हनै निशाना
चढ़े बिमाना समुदाई ।
बरषहिं बहुफूला मंगल मूला
अनुकूला सिय गुन गाई ॥

देखहिं सब ठाढ़े लोचन गाढ़ें
सुख बाढ़े उर अधिकाई ।
अस्तुति मुनि करहीं आनन्द भरहीं
पायन्ह परहीं हरषाई ॥

ऋषि नारद आये नाम सुनाये
सुनि सुख पाये नृप ज्ञानी ।
सीता अस नामा पूरन कामा
सब सुखधामा गुन खानी ॥

सिय सन मुनिराई विनय सुनाई
सतय सुहाई मृदुबानी ।
लालनि तन लीजै चरित सुकीजै
यह सुख दीजै नृपरानी ॥

सुनि मुनिबर बानी सिय मुसकानी
लीला ठानी सुखदाई ।
सोवत जनु जागीं रोवन लागीं
नृप बड़भागी उर लाई ॥

दम्पति अनुरागेउ प्रेम सुपागेउ
यह सुख लायउँ मनलाई ।
अस्तुति सिय केरी प्रेमलतेरी
बरनि सुचेरी सिर नाई ॥

दोहा:
निज इच्छा मखभूमि ते प्रगट भईं सिय आय ।
चरित किये पावन परम बरधन मोद निकाय ॥

शुक्रवार, 9 फ़रवरी 2024

चारि पाँति सुनू रामकेर नाम सँ लिरिक्स - Chari Paanti Sunu Ram Ker Naam San Lyrics


चारि पाँति सुनू रामकेर नाम सँ 
पत्र लिखलनि जे सीता धरा-धाम सँ 
भेल जिनगीकेर गेंठ फुलवाड़ी केर भेंट 
नाम तहिये जोड़ाएल अहाँक नाम सँ।

प्रथमहि धरैत तीनि माताकेर ध्यान 
कहि राजाकेर जय हो! हे प्रियतम परिणाम 
अहाँ कोनाक हमरा बिसारिये गेलहुँ 
बाट तकिते छी एखनहुँ अपन गाम सँ ।

यदि हमरे सिनेहवश लंका गेलहुँ 
तँ पातालहुँ मे आउ किये पाथर भेलहुँ 
संग चूड़ी आ सेनुर एतहु अछि हमर 
अहाँ बारल नहि जाएब कोनहुँ सम्मान सँ।

पातालहुँ मे सागर कहबै अछि पिया 
चान कारी एतय आ सुरुज करिया 
समइतहुँ नहि धरती तँ जैतहुँ कतय 
कहु जीवितहुँ कोना हम घटल मान सँ।

हरण होयबाक बाद हम लंका मे जैब 
सेतु सागर पर साजि अहाँ विजयी कहबै 
अयोध्या मे आनि फेर जंगल पठायब 
अहाँ परिचित छलहुँ सब परिणाम सँ।

आबि अहाँ देखाएब झलक जहिया 
हम कोना खसाएब पलक तहिया 
हम ककरा सँ करबै कोनहुँ याचना 
अहाँ कम छी कहू कोन भगवान सँ।

कने बाजू हे प्राण अहाँ ई की केलहुँ 
कोना सोना के अहाँ मानि सीता लेलहुँ 
हम विदेहक धिया तें विदेही भेलहुँ 
तथ्य राखब नुकाय हमर सन्तान सँ।

नहि एखनहुँ अहाँ सँ इतर भेल छी 
आब रघुकुल केर हमहुँ पितर भेल छी 
धिया ससुरहि मे नीक, बाद स्वर्गहि मे नीक 
हम मानिनी कहाबी अपन मान सँ।

सोमवार, 12 जून 2023

मिथिला के धिया सिया जगत जननि भेली लिरिक्स - Mithila Ke Dhiya Siya Lyrics

Mithila Ke Dhiya Siya Song Lyrics by Maithili Putra Pradeep

मिथिला के धिया सिया जगत जननि भेली 
धरणि बनल सुरधाम हे 
मिथिला कें धिया सिया जगत जननि भेली 
धरणि बनल सुरधाम हे

धन्य मिथिक भूमि धर धर रिषि मुनि 
धन्य मिथिक भूमि धर धर रिषि मुनि 
दुल्हा जगतपति राम हे
मिथिला कें धिया सिया जगत जननि भेली 
धरणि बनल सुरधाम हे

कमला बहथि जतए जीवछ रहथि ततए 
कमला बहथि जतए जीवछ रहथि ततए 
कोशी गंगा गंडक के बथान हे
मिथिला कें धिया सिया जगत जननि भेली 
धरणि बनल सुरधाम हे

हिम-गिरि केर घर गौरीक नइहर 
हिम-गिरि केर घर गौरीक नइहर 
शिवजी भेलाह मेहमान हे
मिथिला कें धिया सिया जगत जननि भेली 
धरणि बनल सुरधाम हे

जज्ञ सं तपल एकर कण कण शुचि शुचि
जज्ञ सं तपल एकर कण कण शुचि शुचि
प्रदीपक जन्मस्थान हे
मिथिला कें धिया सिया जगत जननि भेली 
धरणि बनल सुरधाम हे
धरणि बनल सुरधाम हे
धरणि बनल सुरधाम हे

रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)

शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

छोटी सुकुमारी सिया, नामे-नामे केसिया - मैथिली पुत्र प्रदीप Chhoti sukumari siya name name kesiya

Chhoti Sukumari Siya Name-Name Kesiya
स्वयंवरक भाष मे गीत

छोटी सुकुमारी सिया, नामे-नामे केसिया,
केसिया मे लाखो मोतीहार हे। 
सुन्दरि सीता दाइ के झबड़ल केसिया,
केसिया मे हीरा-मोती हार हे।

रानी सुनयना के कोरा मे सिया बेटिया,
बेटिया के महिमा अपार हे। 
आयल बड़साख मास नवमी इजोरिया, 
चहुंदिसि समय सुखार है।।

राजा जनक के दुलारी सिया बेटिया, 
प्रदीपक नमन हजार है।।

रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)


शुक्रवार, 7 जून 2019

सुन्दर मास बैसाख इजोरिया, जानकी जन्म सोहर गीत लिरिक्स

सुन्दर मास बैसाख, इजोरिया नवम तिथि हे आहे।
सिया अवतरण सोहाओन, अति मन भाओन हे ।।

छलइ सगरो भूमि तबधल, माटीमे फाटल दरारि हे।
प्रकृतिकेर प्रकोप देखि कऽ लोक मानथि हार हे ।।

जनक-सुनयना पालो कान्ह, पुनरिक लेल लागन हे। 
ललना हे उमड़ल जन समुदाय, आयल शुभ अवसर हे ।।

बज्र पाॅंतर, चलल आँतर कृषिक यज्ञ महान हे।
गगनमे घन उमड़ि आयल, नभसँ झहरल बुन्द हे ।।

जनक- सुनयनाजीक पुण्य , पुण्डरिक तप एहिखन हे।
ललना हे प्रदीपित भेल सकल थल , हुलसित जन- जन हे ।।

छथि हलेश्वर शम्भु जेहिठाँ , पुण्डरिक तपभूमि  जे।
चलल हर हलेष्ठि यज्ञक एक मोड़ गेल घूमि से ।।

धसल जतय मणिफार , उदार भेल महिधर हे।
ललना हे निकलल स्वर्ण पेटार ओतय सभ देखल हे ।।

माटि केर सुगन्धि पसरल , पुनौरा केर धाममे।
प्रगटली मिथिलाक महिसँ  मैथिली जन प्राणमे ।।

ज्योतिम परम किशोरीक दर्शन पाओल हे।
ललना हे घर-घर आनन्द बधाइ सुखद दिन प्रगटल हे।।

गीतकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)


शनिवार, 22 सितंबर 2018

आरती जनक नन्दिनी सीते लिरिक्स - श्री किशोरीजी आरती गीत

Aarti Janak Nandani Site Lyrics

आरती जनक नन्दिनी सीते, 
आरती जनक नन्दिनी सीते। 
कोटि यज्ञ तप भूमि सुता, 
मिथिलाक माटि बनि गेल पुनीते।
आरती .............. 

महालक्ष्मी श्री जगदम्बा, 
जन - जनहित अवतरलहुँ अम्बा,
धन्य कयल कण - कण अवनी के। 
आरती ............ 

राम वाम दिस कयल निवास, 
जीव सदा अपने घर आसे,
साधु संतजन हृदय समीपे। 
आरती ............ 

दया अहँक जकरा अछि भेटल, 
से सभ दुर्गुण अपन समेटल, 
सिद्धि सकल मिथिलाक महीके। 
आरती .............

अहिंक दया पाओल बजरंगी, 
राम भक्तिमय, भक्तक संगी, 
से सभ सद्गुण देल अहीं जे। 
आरती ............ 

सिया राममय सभ जग जानी, 
करी प्रणाम जोरि युग पाणी, 
पंक्ति पुनीत थिकनि तुलसी के। 
आरती .. ........

वाल्मीकि कवि कहल मैथिली, 
अवधवधू, मिथिलाक थिकहुँ घी,
पुत्र प्रदीपो चरण समीपे। 
आरती जनक नन्दिनी सीते! 
आरती जनक नन्दिनी सीते!
                                           
गीतकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)


गुरुवार, 25 मई 2017

जगत जननि अहाँ मिथिलाक धिया सिया लिरिक्स - Jagat Janani Ahan Mithilak Dhiya Siya

सीता माता के मैथिली गीत लिरिक्स

जगत जननि अहाँ मिथिलाक धिया सिया, 
धन्य धन्य मिथिलाक धाम माता मैथिली।।

मिथिलेक भूमि मध्य हमरो जनम भेल, 
तन मन हमर महान माता मैथिली।।

मिथिलेक सुरुजक भेटए किरिण नित, 
देथि इजोत सेहो चान माता मैथिली॥

मिथिलेक गुज - गुज राति अन्हरिया, 
मिथिलेक भोर आर साँझ माता मैथिली॥

गगन पवन सब मिथिलेक सुन्दर, 
एकरे सुखद अभियान माता मैथिली॥

युग - युग केर ऋण माथ धरब नित, 
अहँक चरण सुख धाम माता मैथिली॥

अहिँक कृपादृग ज्योति प्रदीपित, 
रहब सदय सिया - राम , माता मैथिली॥

गीतकार: प्रभुनारायण झा (मैथिली पुत्र प्रदीप)

शुक्रवार, 12 मई 2017

प्रगटलहु मिथिला भू से धन्य धरती भेल ई - मैथिली स्तुति

प्रगटलहु मिथिला भू से धन्य धरती भेल ई,
भेल शीतल सकल धरती धन्य माता मैथिली।

बहुत तब धल जे घरा छल शस्य श्यामल भेल से, 
भूख सँ आकुल जते छल तुष्ट तखने भेल से।

देल मर्यादा अहाँ एहि माटि कैं हे मैथिली,
रहत जन युग युग ऋणी बनले अहाँ सँ मैथिली।

जन जनक जे जनक तनिका देल मर्यादा अहाँ,
छल लिलोह निठोर सबहक बनि गेल माता अहाँ।

स्वयं मर्यादाक पुरुषोतम कहावथि राम जे,
से स्वयं जेहिठाम ऐला धन्य धरती भेल से।

हमर वाणी छथि सुशोभित से अहीं सँ मैथिली,
धन्य ई मिथिलाक धरती धन्य माता मैथिली।

जे अपाटक नहि बुझथि महिमा अहाँक हे मैथिली,
क्षमा हुनको क' देवनि अज्ञान छथि हे मैथिली।

हम प्रदीपित भेल छी महिमा अहिक माँ मैथिली,
धृष्टता हमरो करब सब माफ माता मैथिली।

रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)