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12 जून 2023
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मिथिला के धिया सिया जगत जननि भेली लिरिक्स - Mithila Ke Dhiya Siya Lyrics
मिथिला के धिया सिया जगत जननि भेली लिरिक्स - Mithila Ke Dhiya Siya Lyrics
मिथिला के धिया सिया जगत जननि भेली
धरणि बनल सुरधाम हे
मिथिला कें धिया सिया जगत जननि भेली
धरणि बनल सुरधाम हे
धन्य मिथिक भूमि धर धर रिषि मुनि
धन्य मिथिक भूमि धर धर रिषि मुनि
दुल्हा जगतपति राम हे
मिथिला कें धिया सिया जगत जननि भेली
धरणि बनल सुरधाम हे
कमला बहथि जतए जीवछ रहथि ततए
कमला बहथि जतए जीवछ रहथि ततए
कोशी गंगा गंडक के बथान हे
मिथिला कें धिया सिया जगत जननि भेली
धरणि बनल सुरधाम हे
हिम-गिरि केर घर गौरीक नइहर
हिम-गिरि केर घर गौरीक नइहर
शिवजी भेलाह मेहमान हे
मिथिला कें धिया सिया जगत जननि भेली
धरणि बनल सुरधाम हे
जज्ञ सं तपल एकर कण कण शुचि शुचि
जज्ञ सं तपल एकर कण कण शुचि शुचि
प्रदीपक जन्मस्थान हे
मिथिला कें धिया सिया जगत जननि भेली
धरणि बनल सुरधाम हे
धरणि बनल सुरधाम हे
धरणि बनल सुरधाम हे
रचनाकार: मैथिली पुत्र प्रदीप (प्रभुनारायण झा)
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