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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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26 सित॰ 2024

जय जय गिरिश रमणि जगदम्बे लिरिक्स - Jai Jai Girish Ramani Jagdambe Lyrics

जय जय गिरिश रमणि जगदम्बे
गणपति जननी माई
असुर प्रताड़ित सुर नर सुमिरल
भेलहुँ काली भवदायी

भेलहुँ अवतरित चारि भुजा सं,
खड़कही दुष्ट संघारी
भेलहुँ अवतरित चारि भुजा सं,
खड़कही दुष्ट संघारी
रुद्रीपान करिइयो मन्डही सं,
मुंड माल रचाबी
जय जय गिरिश रमणि जगदम्बे
गणपति जननी माई

साधक जन सेवल तुअह निशि,
तहर दुखक माँ अंत करि
साधक जन सेवल तुअःह निशि,
तहर दुखक माँ अंत करि
उपवासित रहि सेवव अहाँ के,
तकरो कनी ध्यान करि
जय जय गिरिश रमणि जगदम्बे
गणपति जननी माई

परम् उपेक्षित सब सेवक गण,
अहीँक चरण में वास करत
परम् उपेक्षित सब सेवक गण
अहीँक चरण में वास करत,
पूरन करि सब काज साधक के,
शंकर अहिं केर ध्यान धरतही
जय जय गिरिश रमणि जगदम्बे
गणपति जननी माई
असुर प्रताड़ित सुर नर सुमिरल
भेलहुँ काली भवदायी

गीतकार: आचार्य शंकर झा

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