अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
11 अक्टू॰ 2024
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पातरि धनि सुकुमारी कि लिरिक्स - Patari Dhani Sukumari Ki Lyrics
पातरि धनि सुकुमारी कि लिरिक्स - Patari Dhani Sukumari Ki Lyrics
पारम्परिक मैथिली सोहर गीत
पातरि धनि सुकुमारी कि
पिया के दुलारी रे
ललना रे, अंग लगाए पिया पूछथि
कौने रंग बेदन रे
देह मोरा कांपए गहन जंका
केश भुइययां लोटू हे
आहे, धरती लागए असमान
नयन नहीं सूझत हे
कथि लये बाबा बियाहलनि
पिया घर देलनि रे
ललना रे, रहितौं मैं बारि कुमारी
बेदन नहीं जनितहुँ रे
जीरक बोरसी बनाइब
लौंगक पाइस रे
ललना रे, सब अभरन हम देब,
बेदन नहि बाँटब रे
जौं जनमल जदुनन्दन
खुजि गेल बंधन रे
ललना रे, खुजि गेल ब्रज केबार
कि नगर आंनद भेल रे
भल केलनि बाबा बियाहलनि
पिया घर देलनि रे
ललना रे, रहितौं मैं बारि कुमारी
होरिला कहाँ पाबितहूँ रे
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