अखन तक कोनो पुरान चैट सहेजल नहि अछि।
17 जून 2015
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सुन्दर कनियां राम रतनियां, सोने मूठी लागल केबार हे लिरिक्स | कोहबर लोकगीत
सुन्दर कनियां राम रतनियां, सोने मूठी लागल केबार हे लिरिक्स | कोहबर लोकगीत
Sundar Kaniya Ramratniya Sona Muthi
सुन्दर कनियां राम रतनियां, सोने मूठी लागल केबार हे
नव वर-नव कनियां
ताहि कोबर सुतला दुलहा से फल्लां दुलहा,
संग लागि सिया सुकुमारि हे
नव वर-नव कनियां
घुरि सुतू फिरि सुतू राजाजी के बेटिया,
अहीं घामे चादरि मलीन हे
नव वर-नव कनियां
एतबा वचन जब सुनलनि कनियां सुहबे,
सेज छोड़ि भूमिमे लोटथि हे
नव वर-नव कनियां
अंगना बहारैत तोहें सलगी गे चेरिया,
सरहोजि दही ने बजाई हे
नव वर-नव कनियां
आबथु सरहोजि बैसथु पलंग चढ़ि,
देखि लेथु ननदो चरित्र हे
नव वर-नव कनियां
अहाँ तऽ नन्दोसिया जी सांवर रे भमरवा,
मोरा ननदी कमलक फूल
नव वर-नव कनियां
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