गोखुल गमन सँ चलल नन्द-नन्दन,
गोकुले मे भय गेल साँझ
केओ नहि मोरा लेखे हित बसु सखिया,
रखितनि मोहन बिलमाय
कमलक पात तोड़ि कागज बनाओल,
नयनाक काजर बनल मोसि
कदमक डारि तोड़ि कमल बनाओल,
प्रेम सँ चिठिया लिखाएल
कहथि विद्यापति सुनू हे सखिया,
फेरो आयब एहिठाम
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