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मिथिला धरोहर | मैथिली पंचांग 2026-27, मैथिली लोकगीत लिरिक्स...

मिथिला धरोहर — मैथिली लोकगीत लिरिक्स, विवाह गीत, मैथिली भगवती गीत लिरिक्स, मैथिली शिव भजन लिरिक्स, भजन, छठ, होली, मधुश्रावणी गीत लिरिक्स। मैथिली पंचांग, विवाह, उपनयन मुहूर्त, मिथिला के मंदिर, लोकदेवता, साहित्यकार परिचय, कथा-कहानी, गोनू झा के कहानी एवं मिथिला संस्कृति से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

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25 दिस॰ 2025

असमंजस में ओझा हम तार देने छी लिरिक्स - Asmanjas Mein Ojha Hum Taar Dene Chhi Lyrics

असमंजस में ओझा हम तार देने छी
अहाँ आबू ने किया पहाड़ बनल छी
असमंजस में ओझा हम तार देने छी
अहाँ आबू ने किया पहाड़ बनल छी
असमंजस में, अहाँ आबू ने

जेना सीता कनैत छली बोन बोन में
बन्नेह छलौं आछि जे प्रेमक गिडह मोन मे
तीन बेर पत्र लिखल जबाबो ने एल
बुझना जाए ऐछ जे देशक सब भार लेने छी
असमंजस में ओझा हम तार देने छी
अहाँ आबू ने किया पहाड़ बनल छी
असमंजस में, अहाँ आबू ने

कोना बिसरल छी बारीक गेनहारी अनमोल
केना बिसरल छी साइरिक मधुर सन बोल
अहिं कहु मनोरथ कोना कऽ पूरत
अहाँ मोरंग में बैसल कपार धुनै छी
असमंजस में ओझा हम तार देने छी
अहाँ आबू ने किया पहाड़ बनल छी
असमंजस में, अहाँ आबू ने

कनक मंदिर में जेना दिया बाती नै
भरल यौवन मुदा हमर दिया बाती नै
जेना टिम टिम जरै बिना तेलक दिया
तहिना अहाँ बिना ओझा दिन राइत जरै छी

साइर दुलरीक मंदिर सजौ ओझहा
बहिन मीता के दुल्हिन बनाउ ओझहा
अहाँ बौंसल जमै बनी सासुर मे आउ
किया सोन सनक कनियाँ सं दूर भागय छी
असमंजस में ओझा हम तार देने छी
अहाँ आबू ने किया पहाड़ बनल छी
असमंजस में, अहाँ आबू ने

स्वर: हरि नाथ झा, गीतकार: नवल नन्द

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