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10 जन॰ 2025

बिलमि जो गुजरिया एहि मिथिलाक धाम गै लिरिक्स Bilaim Jo Gujariya Ehi Mithilak Dhaam Lyrics


बिलमि जो गुजरिया एहि मिथिलाक धाम गै 
तोहरा लै खाली गाछक मड़ैया
स्वागत तोहर कऽ रहलौ चिरैया
एतय अशोक, शोक हरइछ सबहक
डूबल सेनूर मे सुरुज भगवान गै।

अपना सिनेहक दियरा जरायब 
दूबिक नरम सेज तोहरा सुतायब 
सिरमा मे सीता बीयनि डोलौथुन 
सपनहुँ मे रहथुन दहिन भऽ राम गै।

कोइली आ भँवरा पराती सुनौतौ
शीतल पवन आबि तोहरा जगौतौ
कोशी नहाय गोरी, गंडक नहइहें
एतहि बहैत अछि कमला-बलान गे।

सस्ते मखान-पान हॅसि-हँसि क' खैहें
गंगाकेर जल पीबि युग-युग जुड़े हैं
हिमालय केर आँगन फुले पहरुआ 
शिवकेर सासुर आ गौरी केर गाम गै।

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