मंगलवार, 9 जनवरी 2024

माता सरस्वति हे, कहिया हरब अज्ञान लिरिक्स - सरस्वती वंदना

Mata Saraswati He Kahiya Harab Agyan Lyrics

माता सरस्वति हे, कहिया हरब अज्ञान 
हम सन्तान अहाँ छी माता, 
हमरा सभके बुद्धि विधाता 
अपने कला से खान

बड़-बड़ आस लगा कऽ अयलहुँ, 
भेलहुँ कृतारथ दर्शन पयलहुँ 
पुरल सकल अरमान 

विद्या बिना बड़ दुःख कटै छी, 
ताकू कने हम साँचे कहै छी 
ममताक नाता लिअऽ मान,

लतिका स्नेह पर अँखिया उठाबू, 
पूत कपूतो के नहि भटकाबू 
अपने कृपा के निधान 
माता सरस्वति हे, कहिया हरब अज्ञान 

रचना: स्नेहलता


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